Washington, DC [US], April 12 : Donald Trump प्रशासन ने एक बड़ा कदम उठाते हुए अमेरिका में रह रहे उन ईरानी नागरिकों की स्थायी निवास (ग्रीन कार्ड) स्थिति रद्द कर दी है, जिनके पारिवारिक संबंध तेहरान के शीर्ष अधिकारियों से जुड़े हैं। इस कार्रवाई के तहत कई लोगों को हिरासत में लेकर उन्हें डिपोर्ट करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
यह फैसला ऐसे समय में आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम करने के लिए पाकिस्तान में कूटनीतिक बातचीत चल रही है। ऐसे में यह कदम वॉशिंगटन की सख्त नीति का संकेत माना जा रहा है।
किन लोगों पर हुई कार्रवाई?
अमेरिकी विदेश विभाग ने पुष्टि की है कि लॉस एंजेलिस में रहने वाले मनोविज्ञान शिक्षक Seyed Eissa Hashemi, उनकी पत्नी और बेटे के खिलाफ कार्रवाई शुरू की गई है। ये तीनों ईरान में जन्मे अमेरिकी स्थायी निवासी (LPR) थे।
अधिकारियों के मुताबिक, इन सभी को इमिग्रेशन अधिकारियों ने हिरासत में ले लिया है और उन्हें “डिपोर्टेशन के लिए सूचीबद्ध” किया गया है।
बताया गया है कि हाशेमी, ईरान की पूर्व उपराष्ट्रपति Masoumeh Ebtekar के बेटे हैं, जो 1979 में अमेरिकी दूतावास पर कब्जे की घटना से जुड़ी रही हैं।
पहले भी हो चुकी है ऐसी कार्रवाई
यह पहली बार नहीं है जब इस तरह की कार्रवाई की गई है। हाल ही में अमेरिका ने कुछ अन्य ईरानी मूल के लोगों पर भी सख्त कदम उठाए थे।
इनमें शामिल हैं:
- Hamideh Soleimani Afshar
- उनकी बेटी
दोनों को ग्रीन कार्ड रद्द होने के बाद हिरासत में लिया गया। अफशार, ईरान के पूर्व IRGC कमांडर Qasem Soleimani की भतीजी हैं।
अमेरिका के आरोप क्या हैं?
अमेरिकी विदेश मंत्री Marco Rubio ने इन कार्रवाइयों को सही ठहराते हुए कहा कि संबंधित लोगों पर ईरानी शासन का समर्थन करने और अमेरिकी हितों के खिलाफ प्रचार करने के आरोप हैं।
सरकारी बयान के अनुसार:
- अफशार पर ईरानी प्रोपेगेंडा फैलाने का आरोप
- अमेरिकी सैनिकों पर हमलों का समर्थन करने के आरोप
- IRGC जैसे संगठनों के समर्थन का आरोप
रुबियो ने साफ कहा कि अमेरिका ऐसे लोगों को अपने देश में रहने की अनुमति नहीं देगा जो “एंटी-अमेरिकन टेररिस्ट रेजीम” का समर्थन करते हैं।
और किन पर गिरी गाज?
इस कार्रवाई के तहत:
- Fatemeh Ardeshir-Larijani
- उनके पति Seyed Kalantar Motamedi
की कानूनी स्थिति भी खत्म कर दी गई है और उन्हें भविष्य में अमेरिका में प्रवेश से प्रतिबंधित कर दिया गया है।
ICE और DHS की भूमिका
इस पूरे ऑपरेशन में U.S. Immigration and Customs Enforcement (ICE) और Department of Homeland Security (DHS) ने मिलकर कार्रवाई की।
विदेश विभाग ने इन एजेंसियों की सराहना करते हुए कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा के मामलों में इस तरह की समन्वित कार्रवाई बेहद जरूरी है।
क्या है इस फैसले का बड़ा संदेश?
विशेषज्ञों के अनुसार, यह कदम सिर्फ इमिग्रेशन कार्रवाई नहीं बल्कि एक बड़ा राजनीतिक और रणनीतिक संदेश है।
इससे तीन अहम संकेत मिलते हैं:
- अमेरिका ईरान के खिलाफ सख्त रुख बनाए हुए है
- राष्ट्रीय सुरक्षा के मामलों में कोई नरमी नहीं होगी
- कूटनीतिक बातचीत के साथ-साथ दबाव की रणनीति जारी रहेगी
US-Iran रिश्तों पर क्या असर?
यह कार्रवाई ऐसे समय पर हुई है जब इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत जारी है। ऐसे में यह सवाल उठता है कि क्या इससे बातचीत पर असर पड़ेगा।
एक ओर जहां यह कदम दबाव बढ़ाने की रणनीति हो सकता है, वहीं दूसरी ओर इससे रिश्तों में और तनाव भी बढ़ सकता है।
निष्कर्ष
ट्रम्प प्रशासन का यह फैसला अमेरिका की सख्त विदेश नीति और राष्ट्रीय सुरक्षा प्राथमिकताओं को दर्शाता है। ईरानी अधिकारियों से जुड़े लोगों के खिलाफ कार्रवाई यह साफ करती है कि वॉशिंगटन किसी भी तरह के संभावित खतरे को लेकर सतर्क है।
हालांकि, इस कदम का असर सिर्फ प्रभावित परिवारों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह अमेरिका-ईरान संबंधों और चल रही कूटनीतिक बातचीत पर भी पड़ सकता है। आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि यह सख्ती समझौते की दिशा में दबाव बनाती है या फिर तनाव को और बढ़ाती है।
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