भवनागर पुलिस ने बहु-राज्यीय साइबर फ्रॉड रैकेट का भंडाफोड़ किया है, जिसकी वित्तीय हानि ₹21.37 करोड़ से अधिक बताई जा रही है। इस कार्रवाई में 10 आरोपी गिरफ्तार किए गए हैं, जिसमें रैकेट का प्रमुख भी शामिल है। पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई सख्त प्रावधानों के तहत शुरू कर दी है।
रैकेट का संचालन
पुलिस के अनुसार, यह गिरोह एक कुशल और संगठित नेटवर्क के माध्यम से संचालित हो रहा था। गिरोह के मास्टरमाइंड ने अलग-अलग राज्यों में संचालन के लिए मैनेजर नियुक्त किए थे। इन मैनेजरों का काम था कि रैकेट की गतिविधियों को सुचारू रूप से चलाया जाए और प्रत्यक्ष संचालन की निगरानी की जा सके।
रैकेट ने असावधान लोगों को निशाना बनाया, उन्हें अपने नाम पर बैंक खाते खोलने के लिए उकसाया। इन खातों का उपयोग धोखाधड़ी से प्राप्त धन को चैनल करने के लिए किया गया।
धोखाधड़ी की प्रक्रिया
अधिकारियों के अनुसार, आरोपी खाताधारकों से पासबुक, चेकबुक, एटीएम कार्ड और सिम कार्ड जैसे आवश्यक बैंकिंग उपकरण इकट्ठा करते थे। इसके बाद धोखाधड़ी से प्राप्त धन इन खातों में जमा किया जाता और चेक और एटीएम के माध्यम से नकद निकासी की जाती थी।
रैकेट ने इस काम को सुविधाजनक बनाने के लिए सैलरी और कमीशन पर लोगों को भी नियुक्त किया था। इससे यह सुनिश्चित किया जाता था कि प्रत्येक ट्रांजैक्शन प्रभावी और समय पर पूरा हो।
नकदी का मार्ग और अंतरराष्ट्रीय आयाम
जांच में यह भी पता चला कि नकद को परंपरागत अंगड़िया नेटवर्क के माध्यम से विभिन्न स्थानों तक पहुंचाया गया। इसके बाद धन को क्रिप्टोकरेंसी में परिवर्तित, विशेषकर USDT में बदला गया और विदेश में ट्रांसफर किया गया। यह स्पष्ट रूप से इस रैकेट के अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सक्रिय होने का संकेत देता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, इस तरह के रैकेट अब केवल स्थानीय या राष्ट्रीय स्तर तक सीमित नहीं हैं। डिजिटल लेन-देन और क्रिप्टोकरेंसी के माध्यम से यह अंतरराष्ट्रीय फ्रॉड नेटवर्क का हिस्सा बन गए हैं।
पुलिस की कार्रवाई और आगे की रणनीति
भवनागर पुलिस ने कहा कि गिरफ्तारी और रैकेट के भंडाफोड़ के बाद अतिरिक्त जांच जारी है। पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि कितने और खाते शामिल थे, कौन-कौन से राज्य प्रभावित हुए और धन की अंतरराष्ट्रीय ट्रांजैक्शन चैनलिंग कहाँ-कहाँ हुई।
पुलिस प्रवक्ता ने बताया कि:
“हमारा उद्देश्य है कि पूरी श्रृंखला का पता लगाकर सभी आरोपियों को न्याय के कटघरे में लाया जाए। ऐसे साइबर फ्रॉड रैकेट का सफाया करने के लिए राज्य और केंद्र सरकार के सहयोग की आवश्यकता है।”
साइबर फ्रॉड से बचाव के उपाय
विशेषज्ञों ने नागरिकों को सतर्क रहने की सलाह दी है। उन्होंने बताया कि:
- किसी अनजान व्यक्ति को अपने बैंक खाते के विवरण या एटीएम कार्ड न दें।
- पासबुक, चेकबुक और सिम कार्ड की सुरक्षा सुनिश्चित करें।
- किसी भी असामान्य लेन-देन की सूचना तुरंत बैंक और पुलिस को दें।
- क्रिप्टोकरेंसी और ऑनलाइन बैंकिंग में सतर्कता और पहचान सत्यापन को प्राथमिकता दें।
साइबर फ्रॉड के बढ़ते मामलों ने यह साबित किया है कि केवल डिजिटल जागरूकता ही नागरिकों की सुरक्षा में मदद कर सकती है।
एसईओ की दृष्टि से महत्व
यह रैकेट केवल आर्थिक नुकसान ही नहीं करता बल्कि नागरिकों का भरोसा और बैंकिंग प्रणाली में विश्वास भी कमजोर करता है। इस भंडाफोड़ से पुलिस ने यह संदेश दिया कि संगठित साइबर अपराधों के खिलाफ कड़ा रवैया अपनाया जाएगा, और डिजिटल अपराधियों को कोई संरक्षण नहीं मिलेगा।
विशेषज्ञों का कहना है कि राज्य और केंद्र सरकार को नियमित साइबर सुरक्षा जागरूकता कार्यक्रम, तकनीकी निगरानी और अंतरराष्ट्रीय सहयोग बढ़ाने की आवश्यकता है।
Also Read:


