भारत में क्रिप्टोकरेंसी और वर्चुअल डिजिटल एसेट्स (VDA) के लिए रेगुलेटरी फ्रेमवर्क तैयार करने की दिशा में सरकार एक और बड़ा कदम उठाने जा रही है। 2 जुलाई को दिल्ली में संसदीय वित्त संबंधी स्थायी समिति (Parliamentary Standing Committee on Finance) और भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के वरिष्ठ अधिकारियों के बीच महत्वपूर्ण बैठक होने वाली है। इस बैठक में वर्चुअल डिजिटल एसेट्स (VDAs) के रेगुलेशन, निवेशकों की सुरक्षा, टैक्स व्यवस्था और भविष्य की नीति पर विस्तार से चर्चा होगी।
Highlights
- 2 जुलाई को संसदीय वित्त समिति और RBI के बीच अहम बैठक।
- वर्चुअल डिजिटल एसेट्स (VDAs) के रेगुलेशन पर होगी चर्चा।
- निवेशक सुरक्षा, टैक्स और P2P ट्रांजैक्शन भी एजेंडे में शामिल।
- RBI का क्रिप्टोकरेंसी को लेकर अब भी सतर्क रुख बरकरार।
नई दिल्ली। भारत में क्रिप्टोकरेंसी को लेकर नीति निर्माण की प्रक्रिया तेज होती दिखाई दे रही है। संसद की वित्त संबंधी स्थायी समिति 2 जुलाई को भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के प्रतिनिधियों के साथ बैठक करेगी। इस बैठक का मुख्य विषय “वर्चुअल डिजिटल एसेट्स (VDAs) पर अध्ययन और आगे की राह” रहेगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह बैठक भारत में क्रिप्टो सेक्टर के लिए भविष्य की नियामकीय दिशा तय करने की दिशा में अहम साबित हो सकती है। सरकार का उद्देश्य निवेशकों की सुरक्षा सुनिश्चित करते हुए नवाचार और डिजिटल अर्थव्यवस्था के बीच संतुलन बनाना है।
बैठक में किन मुद्दों पर होगी चर्चा?
सूत्रों के अनुसार बैठक में कई महत्वपूर्ण विषयों पर विचार किया जाएगा, जिनमें शामिल हैं—
- वर्चुअल डिजिटल एसेट्स (VDAs) के लिए व्यापक रेगुलेटरी फ्रेमवर्क।
- निवेशकों के हितों की सुरक्षा।
- क्रिप्टो एक्सचेंजों के संचालन से जुड़े नियम।
- टैक्स व्यवस्था और GST से संबंधित चुनौतियां।
- पीयर-टू-पीयर (P2P) ट्रांजैक्शन की निगरानी।
- विदेशी और भारतीय क्रिप्टो एक्सचेंजों के लिए समान नियामकीय ढांचा।
- अंतरराष्ट्रीय भुगतान और रेमिटेंस से जुड़े जोखिम।
क्रिप्टो पर RBI का रुख अब भी सतर्क
भारतीय रिजर्व बैंक लंबे समय से क्रिप्टोकरेंसी को लेकर सावधानी बरतने की बात करता रहा है। RBI का मानना है कि अनियमित डिजिटल एसेट्स वित्तीय स्थिरता और बैंकिंग सिस्टम के लिए जोखिम पैदा कर सकते हैं।
नवंबर 2025 में RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा था कि स्टेबलकॉइन्स और क्रिप्टोकरेंसी में काफी जोखिम मौजूद हैं, इसलिए इनके मामले में बेहद सतर्क रहने की जरूरत है। हालांकि, RBI ने हमेशा डिजिटल भुगतान व्यवस्था, UPI, CBDC (डिजिटल रुपया) और डिजिटल लेंडिंग जैसे सुरक्षित डिजिटल इकोसिस्टम का समर्थन किया है।
लगातार इंडस्ट्री से फीडबैक ले रही है समिति
यह पहली बार नहीं है जब संसदीय समिति क्रिप्टो सेक्टर के प्रतिनिधियों से चर्चा कर रही है। इससे पहले भी समिति कई घरेलू और अंतरराष्ट्रीय एक्सचेंजों के साथ बैठक कर चुकी है।
20 मई को दिल्ली में समिति ने Binance, WazirX और ZebPay के प्रतिनिधियों से मुलाकात की थी। इस दौरान रेगुलेशन, टैक्सेशन, VDA उद्योग के भविष्य और निवेशकों से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई थी।
वहीं दिसंबर 2025 में CoinDCX, CoinSwitch और Coinbase के अधिकारियों के साथ बैठक आयोजित की गई थी। उस बैठक में P2P ट्रांजैक्शन, अंतरराष्ट्रीय भुगतान, विदेशी एक्सचेंजों के संचालन, GST से जुड़ी दिक्कतों और एक समान कानूनी ढांचे की आवश्यकता पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया था।
क्या जल्द आ सकता है नया रेगुलेटरी फ्रेमवर्क?
भारत में फिलहाल क्रिप्टोकरेंसी पर पूरी तरह प्रतिबंध नहीं है, लेकिन इसे कानूनी मुद्रा का दर्जा भी प्राप्त नहीं है। सरकार पहले ही VDA ट्रांजैक्शन पर टैक्स व्यवस्था लागू कर चुकी है। अब विशेषज्ञों का मानना है कि अगला चरण व्यापक नियामकीय ढांचा तैयार करने का हो सकता है, जिससे निवेशकों, एक्सचेंजों और सरकार—तीनों के लिए स्पष्ट नियम तय किए जा सकें।
हालांकि, 2 जुलाई की बैठक के बाद किसी तत्काल नीति या नियम की घोषणा की संभावना नहीं मानी जा रही है। लेकिन यह बैठक भविष्य की क्रिप्टो नीति का आधार तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
निवेशकों के लिए इसका क्या मतलब है?
यदि सरकार और RBI के बीच व्यापक सहमति बनती है तो आने वाले समय में भारत में क्रिप्टो उद्योग के लिए अधिक स्पष्ट और पारदर्शी नियम सामने आ सकते हैं। इससे एक ओर निवेशकों का भरोसा बढ़ेगा, वहीं दूसरी ओर एक्सचेंजों और डिजिटल एसेट कंपनियों को भी नियामकीय स्पष्टता मिलेगी। हालांकि, निवेशकों को तब तक किसी भी निवेश निर्णय से पहले जोखिम, टैक्स नियमों और सरकारी दिशानिर्देशों को ध्यान में रखना चाहिए।


