16 अप्रैल से संसद का बजट सत्र शुरू होगा। लोकसभा सीटें 543 से 816 करने और महिला आरक्षण कानून लागू करने को लेकर सरकार-विपक्ष आमने-सामने।
नई दिल्ली: संसद का बजट सत्र 16 अप्रैल से फिर शुरू होने जा रहा है और इस बार यह सत्र काफी अहम और विवादास्पद माना जा रहा है। सरकार की योजना है कि इस दौरान ऐसे विधेयक (Bills) पेश किए जाएं, जिनके जरिए लोकसभा सीटों की संख्या 543 से बढ़ाकर 816 की जा सके, ताकि महिलाओं के लिए आरक्षण कानून को जल्द लागू किया जा सके।
इस मुद्दे पर पहले से ही सरकार और विपक्ष के बीच तीखी बयानबाजी शुरू हो चुकी है, जिससे संकेत मिलते हैं कि आगामी सत्र में जोरदार राजनीतिक टकराव देखने को मिल सकता है।
लोकसभा सीट बढ़ाने की तैयारी क्यों
सरकार का मानना है कि महिलाओं को संसद में पर्याप्त प्रतिनिधित्व देने के लिए सीटों की संख्या बढ़ाना जरूरी है।
यह कदम Nari Shakti Vandan Adhiniyam 2023 के प्रभावी क्रियान्वयन से जुड़ा हुआ है, जिसके तहत लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33% आरक्षण का प्रावधान किया गया है।
हालांकि, इस कानून को लागू करने के लिए पहले जनगणना (Census) और परिसीमन (Delimitation) की प्रक्रिया को जरूरी बताया गया था, लेकिन अब सरकार इस प्रक्रिया को तेज करने के विकल्प तलाश रही है।
तीन दिन का हो सकता है विशेष सत्र
सूत्रों के अनुसार, संसद के दोनों सदन 16 अप्रैल से तीन दिनों के लिए बैठ सकते हैं, जिसमें मुख्य रूप से इन महत्वपूर्ण विधेयकों पर चर्चा और पारित करने की कोशिश की जाएगी।
संभावना है कि संबंधित विधेयक पहले लोकसभा में पेश किए जाएंगे और उसके बाद राज्यसभा में लाए जाएंगे।
इस बीच, संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju ने भी संकेत दिया है कि आने वाले हफ्तों में एक “बहुत महत्वपूर्ण विधेयक” लाया जाएगा।
विपक्ष का आरोप: चुनावी फायदा उठाने की कोशिश
विपक्षी दलों ने सरकार पर आरोप लगाया है कि वह इस विधेयक को जल्दबाजी में लाकर आगामी विधानसभा चुनावों में राजनीतिक लाभ लेना चाहती है।
राज्यसभा में कांग्रेस नेता Jairam Ramesh ने कहा कि सरकार मॉडल कोड ऑफ कंडक्ट (आचार संहिता) के दौरान इस मुद्दे को आगे बढ़ाकर राजनीतिक फायदा उठाना चाहती है।
उन्होंने मांग की कि इस विषय पर सभी दलों की बैठक (All-party meeting) चुनाव खत्म होने के बाद बुलाई जानी चाहिए।
खड़गे का बयान: “हम समर्थन करते हैं, लेकिन समय पर सवाल”
राज्यसभा में विपक्ष के नेता Mallikarjun Kharge ने स्पष्ट किया कि कांग्रेस महिलाओं के आरक्षण का समर्थन करती है, लेकिन विधेयक लाने के समय और तरीके पर सवाल उठाए।
उन्होंने कहा:
“हम सभी महिलाओं के आरक्षण के पक्ष में हैं, लेकिन सरकार को इस मुद्दे पर राजनीति नहीं करनी चाहिए।”
सरकार का जवाब: वादा निभाना जरूरी
सरकार ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि यह कदम महिलाओं से किए गए वादे को पूरा करने के लिए उठाया जा रहा है।
Kiren Rijiju ने कहा कि संसद ने महिलाओं को आरक्षण देने का जो संकल्प लिया है, उसे पूरा करना सरकार की जिम्मेदारी है।
उन्होंने यह भी कहा कि इस मुद्दे को चुनाव से जोड़ना सही नहीं है और इसे राजनीति से ऊपर उठकर देखा जाना चाहिए।
जेपी नड्डा बनाम विपक्ष
राज्यसभा में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच इस मुद्दे पर तीखी बहस देखने को मिली।
J. P. Nadda ने कहा कि यह सरकार का अधिकार है कि वह तय करे कि कौन सा विधेयक कब लाया जाए।
वहीं विपक्ष ने सरकार पर “बुलडोज़र तरीके” से विधेयक पास कराने का आरोप लगाया।
सीट बढ़ाने के प्रस्ताव पर नई बहस
लोकसभा सीटों को 543 से बढ़ाकर 816 करने का प्रस्ताव भी विवाद का बड़ा कारण बन गया है।
कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों का कहना है कि इससे दक्षिण भारत, पूर्वोत्तर और पश्चिमी राज्यों को नुकसान हो सकता है, क्योंकि सीटों का बंटवारा जनसंख्या के आधार पर होगा।
इससे क्षेत्रीय असंतुलन बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
महिला आरक्षण के अंदर आरक्षण की मांग
बहस के दौरान कुछ सांसदों ने यह भी सवाल उठाया कि क्या महिलाओं के लिए आरक्षित सीटों में SC, ST और OBC वर्गों के लिए अलग से कोटा होगा।
RJD नेता मनोज झा और अन्य सांसदों ने इस मुद्दे पर सरकार से स्पष्ट रुख मांगा।
यह सवाल भविष्य में इस कानून के लागू होने की प्रक्रिया को और जटिल बना सकता है।
राजनीतिक माहौल और चुनावी संदर्भ
यह पूरा मुद्दा ऐसे समय में सामने आया है, जब कई राज्यों में विधानसभा चुनाव हो रहे हैं।
पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, असम और केरल जैसे राज्यों में चुनावी माहौल गर्म है, जिससे इस विधेयक को लेकर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप और तेज हो गए हैं।
विश्लेषकों का मानना है कि यह मुद्दा चुनावी राजनीति में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
निष्कर्ष
16 अप्रैल से शुरू होने वाला संसद का बजट सत्र कई मायनों में ऐतिहासिक और विवादास्पद हो सकता है।
एक तरफ सरकार महिलाओं के लिए आरक्षण कानून को लागू करने की दिशा में तेजी से कदम बढ़ा रही है, वहीं दूसरी तरफ विपक्ष इसके समय और प्रक्रिया पर सवाल उठा रहा है।
Nari Shakti Vandan Adhiniyam 2023 का क्रियान्वयन भारतीय राजनीति में बड़ा बदलाव ला सकता है, लेकिन इसके साथ जुड़े राजनीतिक और संवैधानिक सवाल आने वाले दिनों में बहस का केंद्र बने रहेंगे।
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