भारत का स्मार्टफोन निर्यात लगातार नई ऊंचाइयों को छू रहा है। जून 2026 तिमाही में देश से स्मार्टफोन एक्सपोर्ट में 23.4% की मजबूत बढ़ोतरी दर्ज की गई है। यह न केवल भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के लिए बड़ी उपलब्धि है, बल्कि यह भी दिखाता है कि वैश्विक कंपनियां, खासकर Apple, भारत को अपने प्रमुख प्रोडक्शन हब के रूप में तेजी से अपनाती जा रही हैं।
हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि यह तेजी पूरे वित्त वर्ष में बरकरार रखना आसान नहीं होगा। वैश्विक मांग में कमजोरी, कंपोनेंट्स की बढ़ती कीमतें और नई तकनीक वाले डिवाइसों का सीमित उत्पादन आने वाले महीनों में इस ग्रोथ की रफ्तार को प्रभावित कर सकता है।
Highlights
- जून तिमाही में स्मार्टफोन एक्सपोर्ट 23.4% बढ़कर 9.8 अरब डॉलर पहुंचा।
- इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात 24.6% बढ़कर 15.2 अरब डॉलर रहा।
- कुल इलेक्ट्रॉनिक्स एक्सपोर्ट में स्मार्टफोन की हिस्सेदारी करीब 65% रही।
- अमेरिका भारतीय स्मार्टफोन का सबसे बड़ा निर्यात बाजार बना।
- चालू वित्त वर्ष में स्मार्टफोन एक्सपोर्ट 35 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान।
जून तिमाही में बना नया रिकॉर्ड
अप्रैल-जून 2026 तिमाही के दौरान भारत से 9.8 अरब डॉलर के स्मार्टफोन विदेश भेजे गए, जो पिछले वर्ष की समान अवधि के 8 अरब डॉलर की तुलना में 23.4% अधिक है। यह पहली तिमाही में अब तक का सबसे बड़ा स्मार्टफोन एक्सपोर्ट रिकॉर्ड माना जा रहा है।
इसी अवधि में भारत का कुल इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात 15.2 अरब डॉलर रहा, जिसमें अकेले स्मार्टफोन की हिस्सेदारी लगभग 64.8% रही। इससे स्पष्ट है कि भारत का इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात अब काफी हद तक स्मार्टफोन उद्योग पर आधारित होता जा रहा है।
Apple की वजह से मिली बड़ी बढ़त
स्मार्टफोन एक्सपोर्ट में सबसे बड़ा योगदान Apple के iPhone उत्पादन का रहा। कंपनी लगातार अमेरिकी बाजार के लिए अपने उत्पादन का बड़ा हिस्सा भारत में तैयार कर रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि चीन पर निर्भरता कम करने की रणनीति के तहत Apple भारत में अपनी मैन्युफैक्चरिंग क्षमता बढ़ा रहा है। यही वजह है कि भारत अब Apple के लिए एक महत्वपूर्ण वैश्विक मैन्युफैक्चरिंग हब बन चुका है।
अमेरिका बना सबसे बड़ा एक्सपोर्ट मार्केट
अप्रैल और मई के दौरान भारत से होने वाले स्मार्टफोन निर्यात मूल्य में अमेरिका की हिस्सेदारी करीब 71% रही।
इसका सीधा मतलब है कि भारत में बनने वाले अधिकांश प्रीमियम स्मार्टफोन अमेरिकी बाजार में भेजे जा रहे हैं। इससे भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर को विदेशी मुद्रा कमाने में भी बड़ी मदद मिल रही है।
इस साल 35 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है एक्सपोर्ट
इंडस्ट्री के अनुमान के मुताबिक वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का स्मार्टफोन एक्सपोर्ट करीब 29 अरब डॉलर रहा था।
अब उम्मीद जताई जा रही है कि वित्त वर्ष 2026-27 में यह आंकड़ा बढ़कर लगभग 35 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है। यदि ऐसा होता है तो भारत दुनिया के प्रमुख स्मार्टफोन एक्सपोर्टिंग देशों में अपनी स्थिति और मजबूत करेगा।
लेकिन आगे क्यों मुश्किल हो सकती है राह?
हालांकि शुरुआती तिमाही के आंकड़े उत्साहजनक हैं, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि पूरे साल इतनी तेज ग्रोथ बनाए रखना चुनौतीपूर्ण रहेगा।
मुख्य कारण हैं—
1. वैश्विक मांग में कमजोरी
दुनियाभर में स्मार्टफोन की मांग पहले जैसी मजबूत नहीं रही है। उपभोक्ता लंबे समय तक अपने पुराने फोन का इस्तेमाल कर रहे हैं, जिससे नए स्मार्टफोन की बिक्री प्रभावित हो रही है।
2. कंपोनेंट्स की बढ़ती लागत
मेमोरी चिप और अन्य इलेक्ट्रॉनिक पार्ट्स की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं। इससे स्मार्टफोन बनाने की लागत बढ़ रही है और कंपनियों को कीमतें बढ़ानी पड़ रही हैं।
3. फोल्डेबल iPhone का उत्पादन भारत में नहीं
रिपोर्ट्स के अनुसार Apple का आगामी फोल्डेबल iPhone भारत में नहीं बनाया जाएगा। इससे हाई-वैल्यू एक्सपोर्ट का एक बड़ा अवसर फिलहाल भारत के हाथ से निकल सकता है।
ग्लोबल स्मार्टफोन बाजार में आई बड़ी गिरावट
साइबरमीडिया रिसर्च (CMR) के वाइस प्रेसिडेंट प्रभु राम के अनुसार भारत को Apple की मैन्युफैक्चरिंग शिफ्ट का लाभ जरूर मिल रहा है, लेकिन आगे की ग्रोथ पूरी तरह वैश्विक मांग पर निर्भर करेगी।
रिपोर्ट के मुताबिक जून तिमाही में दुनिया भर में स्मार्टफोन शिपमेंट 11% गिर गया, जो वर्ष 2013 के बाद सबसे निचला स्तर है।
इसके अलावा पूरे वर्ष 2026 में वैश्विक स्मार्टफोन शिपमेंट में करीब 13.9% की रिकॉर्ड गिरावट आने का अनुमान लगाया गया है।
मेमोरी चिप संकट बना रहेगा
विश्लेषकों का मानना है कि मेमोरी चिप की कमी की समस्या जल्द खत्म होने वाली नहीं है। कई रिपोर्टों के अनुसार यह संकट 2027 तक जारी रह सकता है।
यदि ऐसा होता है तो स्मार्टफोन उत्पादन की लागत ऊंची बनी रहेगी और इसका असर भारत के निर्यात पर भी पड़ सकता है।
भारत के लिए क्या है आगे का अवसर?
भारत के लिए यह समय इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग को और मजबूत करने का है। यदि देश सेमीकंडक्टर, डिस्प्ले, बैटरी और अन्य महत्वपूर्ण कंपोनेंट्स का घरेलू उत्पादन बढ़ाने में सफल रहता है, तो भविष्य में निर्यात की रफ्तार और तेज हो सकती है।
साथ ही, यदि Apple और अन्य वैश्विक कंपनियां भारत में अपने प्रीमियम और फोल्डेबल स्मार्टफोन का उत्पादन शुरू करती हैं, तो भारत का स्मार्टफोन एक्सपोर्ट आने वाले वर्षों में नए रिकॉर्ड बना सकता है।


