CIC ने नाता प्रथा पर सरकार से Action Taken Report जारी करने को कहा। NHRC ने इसे मानव तस्करी जैसा अपराध बताया। जानिए पूरा मामला।
कल्पना कीजिए, राजस्थान के किसी दूरदराज गांव में रहने वाली एक छोटी बच्ची की। एक दिन उसका पिता एक स्टाम्प पेपर पर दस्तखत करता है, गांव के सामने किसी अजनबी से हाथ मिलाता है और पैसे लेकर अपनी ही बेटी को सौंप देता है। न कोई शादी, न कोई कानूनी सुरक्षा—सिर्फ एक तथाकथित ‘नाता’ रिश्ता, जो लड़की को एक वस्तु की तरह देखता है।
यह कोई कहानी नहीं, बल्कि भारत के कुछ हिस्सों में आज भी जिंदा एक कड़वी सच्चाई है—नाता प्रथा।
क्या है नाता प्रथा और कहां प्रचलित है
नाता प्रथा एक पुरानी सामाजिक परंपरा है, जो राजस्थान, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और गुजरात के कुछ ग्रामीण और आदिवासी इलाकों में अब भी देखने को मिलती है।
खासतौर पर Bhil community जैसे समुदायों में यह प्रथा ज्यादा प्रचलित रही है।
इस प्रथा के तहत:
- लड़की या महिला को पैसे के बदले किसी पुरुष के साथ रहने के लिए “दे दिया” जाता है
- यह शादी नहीं होती, बल्कि एक अनौपचारिक समझौता होता है
- इसमें महिला के अधिकारों की कोई कानूनी सुरक्षा नहीं होती
गरीबी, पितृसत्ता और सामाजिक चुप्पी का नतीजा
नाता प्रथा केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि कई सामाजिक समस्याओं का मिला-जुला परिणाम है।
गरीबी से जूझ रहे परिवारों के लिए बेटियां “आर्थिक संसाधन” बन जाती हैं। पितृसत्तात्मक सोच में महिलाओं को बराबरी का दर्जा नहीं मिलता, जिससे उन्हें आसानी से खरीदा-बेचा जा सकता है।
इसके अलावा, समाज में इस मुद्दे पर खुलकर बात न होने के कारण यह प्रथा लंबे समय से बिना किसी रोक-टोक के चलती रही है।
दिल दहला देने वाला मामला
इस प्रथा की भयावहता एक मामले से समझी जा सकती है, जिसमें एक पिता ने अपनी नाबालिग बेटी को 2.5 लाख रुपये में बेच दिया।
11 जुलाई 2019 को गांव के सामने स्टाम्प पेपर पर सौदा हुआ। खरीदार ने 60,000 रुपये एडवांस दिए और बाकी बाद में देने का वादा किया।
जब भुगतान समय पर नहीं हुआ, तो पिता ने अपनी बेटी को वापस ले लिया और उसे केवल 32,000 रुपये में दूसरे व्यक्ति को देने की कोशिश की।
लड़की ने इसका विरोध किया और पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। उसने बताया कि उसका शराबी पिता उसे बार-बार बेचने की कोशिश कर रहा है और जान से मारने की धमकी भी दे रहा है।
दुखद रूप से, जून 2020 में उस लड़की ने आत्महत्या कर ली।
NHRC की सख्त टिप्पणी
इस मामले के बाद National Human Rights Commission ने 6 जून 2024 को स्वत: संज्ञान लिया।
NHRC ने नाता प्रथा को:
- सामाजिक बुराई (Social Evil)
- अनैतिक और अमानवीय प्रथा
बताया।
आयोग ने इसे आधुनिक मानव तस्करी (Human Trafficking) के समान बताया और कहा कि इसमें शामिल लोगों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए।
सरकार और कानून की भूमिका
NHRC ने महिला एवं बाल विकास मंत्रालय और संबंधित राज्यों को नोटिस जारी कर आठ सप्ताह के भीतर रिपोर्ट मांगी।
इसमें यह भी सुझाव दिया गया कि इस प्रथा को खत्म करने के लिए एक विशेष कानून बनाया जाना चाहिए।
हालांकि, मौजूदा कानून जैसे:
- POCSO Act
- बाल विवाह निषेध कानून
- मानव तस्करी से जुड़े कानून
पहले से मौजूद हैं, लेकिन इनका सही तरीके से पालन नहीं हो पा रहा है।
CIC का ऐतिहासिक आदेश
2 अप्रैल 2026 को Central Information Commission ने एक महत्वपूर्ण आदेश जारी किया।
सूचना आयुक्त P R Ramesh ने महिला एवं बाल विकास मंत्रालय को निर्देश दिया कि वह NHRC को दी गई अपनी Action Taken Report (ATR) को सार्वजनिक करे।
हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि:
- पीड़ितों की निजी जानकारी को हटाया जाए
- RTI कानून की धारा 8(1)(j) के तहत संवेदनशील जानकारी सुरक्षित रखी जाए
RTI और पारदर्शिता की जीत
यह मामला RTI कार्यकर्ता तिलकेश भडाला द्वारा दायर आवेदन से सामने आया था।
CIC ने यह स्पष्ट किया कि यह केवल व्यक्तिगत जानकारी का मामला नहीं है, बल्कि जनहित (Public Interest) का विषय है।
इस फैसले से यह सुनिश्चित होगा कि:
- सरकार की कार्रवाई पर जनता की नजर रहे
- जवाबदेही तय हो
- मीडिया और समाज इस मुद्दे पर ध्यान दे
क्यों खत्म नहीं हो पा रही यह प्रथा
नाता प्रथा के जारी रहने के पीछे कई कारण हैं:
- ग्रामीण क्षेत्रों में सामाजिक स्वीकृति
- कानूनों का कमजोर क्रियान्वयन
- पीड़ितों का डर और चुप्पी
- प्रशासन की सीमित पहुंच
जब तक इन सभी पहलुओं पर एक साथ काम नहीं किया जाएगा, तब तक इस प्रथा को खत्म करना मुश्किल होगा।
आगे का रास्ता क्या है
विशेषज्ञों का मानना है कि इस समस्या का समाधान केवल कानून से नहीं होगा, बल्कि सामाजिक बदलाव भी जरूरी है।
इसके लिए:
- जागरूकता अभियान चलाने होंगे
- शिक्षा और आर्थिक सहायता बढ़ानी होगी
- महिलाओं को सशक्त बनाना होगा
- सख्त कानून और उनका प्रभावी क्रियान्वयन जरूरी होगा
निष्कर्ष
Central Information Commission का यह आदेश एक छोटी लेकिन महत्वपूर्ण जीत है।
यह केवल एक रिपोर्ट को सार्वजनिक करने का मामला नहीं है, बल्कि यह उस अंधेरे को उजागर करने की कोशिश है, जहां आज भी लड़कियों को वस्तु की तरह खरीदा-बेचा जाता है।
नाता प्रथा जैसी अमानवीय परंपराओं को खत्म करने के लिए सरकार, समाज और कानून—तीनों को मिलकर काम करना होगा।
आज एक RTI और एक मजबूत फैसले ने इस मुद्दे पर रोशनी डाली है, लेकिन असली बदलाव तभी आएगा जब यह रोशनी पूरे समाज तक पहुंचेगी।
Also Read:


