देश में बिजली की मांग ऊंचे स्तर पर बने रहने के बीच कोयला मंत्रालय ने ताप बिजली संयंत्रों को कोयला आपूर्ति की निगरानी और तेज कर दी है। मंत्रालय की विशेष समिति पावर सेक्टर के लिए कोयले की उपलब्धता और रेलवे के जरिए होने वाली ढुलाई पर लगातार नजर रख रही है। जिन बिजली संयंत्रों के पास तय मानक से कम कोयला स्टॉक मौजूद है, उन्हें क्रिटिकल प्लांट की श्रेणी में रखकर प्राथमिकता के आधार पर आपूर्ति बढ़ाने की कोशिश की जा रही है।
सरकार की यह कवायद इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि वर्ष 2022 में मानसून के दौरान कोयला उत्पादन और आपूर्ति प्रभावित होने के बाद देश के कई हिस्सों में बिजली संकट गहरा गया था। इस बार सरकार पहले से तैयारी कर यह सुनिश्चित करना चाहती है कि ऐसी स्थिति दोबारा पैदा न हो।
रेलवे से कोयला ढुलाई में लगातार इजाफा
कोयला मंत्रालय के मुताबिक, पिछले कुछ दिनों में पावर सेक्टर के लिए रेलवे रेक की लोडिंग में लगातार बढ़ोतरी हुई है। 3 सितंबर को जहां बिजली संयंत्रों के लिए करीब 370 रेक लोड किए गए थे, वहीं 6 सितंबर को यह संख्या बढ़कर 444 रेक हो गई।
यानी चार दिनों में कोयला ढुलाई के लिए रेक लोडिंग में करीब 20 फीसदी की वृद्धि हुई है। सिर्फ एक दिन में ही 31 रेक की बढ़ोतरी दर्ज की गई। कोयला उत्पादन और सप्लाई से जुड़ी कंपनियों और संस्थानों ने भी लोडिंग बढ़ाई है।
MCL, BCCL, NCL, कैप्टिव कोल ब्लॉक और अन्य उत्पादकों की ओर से पावर सेक्टर के लिए कोयला लोडिंग बढ़ाई गई है। अकेले कोल इंडिया की लोडिंग करीब 305 रेक तक पहुंच गई है।
कोयला उत्पादन में भी सुधार
बारिश के कारण सितंबर की शुरुआत में कोयला उत्पादन प्रभावित हुआ था, लेकिन अब इसमें सुधार देखने को मिल रहा है। कोयला मंत्रालय के अनुसार सितंबर के शुरुआती तीन बारिश प्रभावित दिनों में औसत दैनिक उत्पादन करीब 13.6 लाख टन था।
6 सितंबर को यह बढ़कर लगभग 18.3 लाख टन प्रतिदिन हो गया। इस तरह कुछ ही दिनों में औसत दैनिक उत्पादन में करीब 35 फीसदी की वृद्धि हुई है।
उत्पादन बढ़ने का असर बिजली क्षेत्र को होने वाली आपूर्ति पर भी दिखाई दे रहा है। पावर सेक्टर को कोयले की दैनिक आपूर्ति करीब 13.7 लाख टन से बढ़कर 17 लाख टन हो गई है।
58 क्रिटिकल पावर प्लांटों पर विशेष नजर
कोयला मंत्रालय ने ऐसे बिजली संयंत्रों की अलग से निगरानी शुरू की है, जिनके पास निर्धारित मानक के मुकाबले कम कोयला स्टॉक है। मंत्रालय के अनुसार 5 सितंबर तक ऐसे क्रिटिकल प्लांटों की संख्या 58 थी।
इन संयंत्रों में कोयले की उपलब्धता सुधारने के लिए सुधारात्मक आपूर्ति व्यवस्था लागू की जा रही है। जरूरत पड़ने पर इन प्लांटों को प्राथमिकता के आधार पर कोयला उपलब्ध कराया जा रहा है, ताकि उनके स्टॉक में तेजी से सुधार हो सके।
इसके अलावा क्रिटिकल प्लांटों को मासिक निर्धारित मात्रा से अधिक कोयला सड़क मार्ग के जरिए उठाने की सुविधा भी दी जा रही है। इसका उद्देश्य रेलवे और अन्य माध्यमों के साथ-साथ सड़क परिवहन का इस्तेमाल करके ऐसे संयंत्रों तक जल्द से जल्द कोयला पहुंचाना है।
बिजली की मांग अभी भी ऊंचे स्तर पर
देश के कई हिस्सों में बारिश होने के बावजूद बिजली की मांग ऊंची बनी हुई है। मई 2026 में देश में बिजली की पीक डिमांड करीब 2.70 लाख मेगावाट के रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गई थी। इसके बाद भी मांग लगातार मजबूत बनी हुई है।
अगस्त में भी बिजली की अधिकतम मांग करीब 2.58 लाख मेगावाट तक पहुंची थी। पिछले कुछ समय में कई राज्यों से स्थानीय स्तर पर बिजली कटौती की खबरें सामने आई हैं। हालांकि अभी देशव्यापी स्तर पर बड़े पैमाने पर बिजली कटौती की स्थिति नहीं बनी है।
बिजली मंत्रालय के अधिकारियों के अनुसार कुछ राज्य अपनी औसत जरूरत के मुकाबले कम बिजली खरीद रहे हैं। ऐसे में कोयले की उपलब्धता के साथ-साथ राज्यों की बिजली खरीद और मांग की स्थिति पर भी नजर रखी जा रही है।
2022 जैसी बिजली किल्लत से बचने की कोशिश
सरकार की मौजूदा रणनीति के पीछे सबसे बड़ी वजह वर्ष 2022 का अनुभव है। उस समय मानसून के दौरान कोयला उत्पादन प्रभावित हुआ था और बिजली संयंत्रों तक पर्याप्त कोयला नहीं पहुंच पाने से सितंबर से दिसंबर के बीच बिजली संकट की स्थिति बनी थी।
इस बार सरकार मानसून के दौरान ही कोयला उत्पादन, रेलवे रेक लोडिंग और पावर प्लांटों के स्टॉक की निगरानी कर रही है। खास तौर पर कम स्टॉक वाले संयंत्रों को अलग से चिन्हित कर उनकी आपूर्ति बढ़ाई जा रही है।
कोयला उत्पादन में हालिया सुधार और रेलवे रेक की बढ़ी हुई लोडिंग से संकेत मिल रहा है कि सरकार सप्लाई चेन पर दबाव कम करने के लिए तेजी से कदम उठा रही है।
आगे क्या है सरकार की प्राथमिकता?
फिलहाल सरकार की प्राथमिकता तीन स्तरों पर है—कोयला उत्पादन बढ़ाना, बिजली संयंत्रों तक तेजी से सप्लाई पहुंचाना और कम स्टॉक वाले प्लांटों की लगातार निगरानी करना।
अगर कोयला उत्पादन और ढुलाई इसी तरह बढ़ती रही तो आने वाले दिनों में क्रिटिकल पावर प्लांटों के स्टॉक में सुधार हो सकता है। इससे बिजली उत्पादन पर पड़ने वाले दबाव को कम करने में मदद मिलेगी।
सरकार की कोशिश यही है कि बिजली की मौजूदा ऊंची मांग के बीच कोयले की कमी बिजली उत्पादन में बाधा न बने और देश को 2022 जैसी व्यापक बिजली किल्लत का सामना न करना पड़े।


