ITAT Bangalore Ruling: ऑनलाइन रमी और पोकर खेलने वाले बेंगलुरु के एक व्यक्ति को इनकम टैक्स के मामले में बड़ी राहत मिली है। इनकम टैक्स विभाग ने गेमिंग प्लेटफॉर्म से उसके खाते में आई करीब ₹2.33 करोड़ की ग्रॉस विनिंग्स को टैक्स योग्य आय मान लिया था। हालांकि, पूरे लेनदेन का हिसाब लगाने पर व्यक्ति को गेमिंग में करीब ₹28 लाख का नेट नुकसान हुआ था। मामले की सुनवाई के बाद इनकम टैक्स अपीलेट ट्रिब्यूनल (ITAT), बेंगलुरु ने ₹2.33 करोड़ की पूरी टैक्सेबल इनकम की एडिशन को हटाने का निर्देश दिया।
क्या है पूरा मामला?
यह मामला बेंगलुरु के एक करदाता चन्नप्पा से जुड़ा है, जो ऑनलाइन रमी और पोकर जैसे रियल-मनी गेम खेलते थे। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, उन्होंने गेमिंग प्लेटफॉर्म पर अलग-अलग ट्रांजैक्शन के जरिए कुल करीब ₹2.61 करोड़ लगाए।
गेम खेलने के दौरान उनके खाते में करीब ₹2.33 करोड़ की ग्रॉस विनिंग्स दिखाई गईं। इनकम टैक्स विभाग ने इसी रकम को गेमिंग से हुई आय मान लिया। लेकिन करदाता का कहना था कि केवल जीत की कुल रकम देखने से वास्तविक तस्वीर सामने नहीं आती।
पूरे साल के गेमिंग ट्रांजैक्शन को मिलाकर देखें तो उन्होंने जितनी रकम लगाई थी, उसकी तुलना में उन्हें वास्तव में करीब ₹27.99 लाख का नुकसान हुआ था।
यही इस मामले का सबसे महत्वपूर्ण पहलू बना।
ITR में कितनी आय घोषित की थी?
चन्नप्पा ने अपना इनकम टैक्स रिटर्न दाखिल करते समय करीब ₹4.32 लाख की कुल आय घोषित की थी। इसमें मकान से मिलने वाला किराया, बिजनेस से होने वाली आय और अन्य स्रोतों से प्राप्त रकम शामिल थी।
बाद में उनका ITR स्क्रूटिनी के लिए चुना गया। जांच के दौरान इनकम टैक्स विभाग को उनके ऑनलाइन गेमिंग से जुड़े लेनदेन की जानकारी मिली।
विभाग की जांच में सामने आया कि उन्होंने Gameskraft Technologies के ऑनलाइन गेमिंग प्लेटफॉर्म पर रियल-मनी गेम खेले थे। इन प्लेटफॉर्म्स पर रमी, पोकर, टूर्नामेंट और दूसरे गेम खेले जाते थे।
इनकम टैक्स विभाग ने ₹2.33 करोड़ को आय क्यों माना?
गेमिंग कंपनी से संबंधित जांच के दौरान आयकर विभाग को खिलाड़ियों के गेमिंग ट्रांजैक्शन का डेटा मिला था। इसी डेटा में चन्नप्पा के खाते में गेमिंग से करीब ₹2.33 करोड़ की ग्रॉस विनिंग्स दिखाई गईं।
आयकर अधिकारी ने इस रकम को ‘Income from Other Sources’ के तहत टैक्स योग्य आय माना।
इस आधार पर विभाग ने चन्नप्पा की आय में ₹2.33 करोड़ की अतिरिक्त रकम जोड़ दी। इससे उनके ऊपर बड़ी टैक्स देनदारी बन गई।
हालांकि, करदाता ने इस गणना को चुनौती दी।
चन्नप्पा ने क्या दलील दी?
चन्नप्पा की मुख्य दलील यह थी कि आयकर विभाग ने गेमिंग के दौरान सिर्फ उनके खाते में आई जीत की कुल रकम को देखा, जबकि गेम खेलने के लिए उनके द्वारा लगाई गई रकम को सही तरीके से समायोजित नहीं किया गया।
उन्होंने बताया कि:
- उन्होंने गेमिंग प्लेटफॉर्म पर कुल करीब ₹2.61 करोड़ लगाए थे।
- उनके खाते में करीब ₹2.33 करोड़ की ग्रॉस विनिंग्स आईं।
- दोनों के अंतर को देखें तो उन्हें करीब ₹27.99 लाख का वास्तविक नुकसान हुआ।
- इसलिए ₹2.33 करोड़ को उनकी वास्तविक आय मानना सही नहीं है।
- केवल खाते में दिखाई देने वाली कुल जीत को आधार बनाकर टैक्स लगाने से वास्तविक आर्थिक परिणाम सामने नहीं आता।
उनका कहना था कि बार-बार गेम खेलने के दौरान रकम प्लेटफॉर्म पर जमा और वापस आती रही। इसलिए हर विनिंग को अलग से आय मानने के बजाय पूरे गेमिंग लेनदेन का नेट परिणाम देखा जाना चाहिए।
पहले CIT(A) ने नहीं मानी दलील
चन्नप्पा ने आयकर विभाग की कार्रवाई के खिलाफ Commissioner of Income Tax (Appeals) यानी CIT(A) के सामने अपील की।
हालांकि, CIT(A) ने उनकी दलीलों को स्वीकार नहीं किया। उन्होंने आयकर अधिकारी की ओर से की गई करीब ₹2.33 करोड़ की आय की एडिशन को बरकरार रखा।
इसके बाद करदाता ने इस फैसले को ITAT बेंगलुरु के सामने चुनौती दी।
ITAT ने क्या फैसला दिया?
मामले की सुनवाई के बाद ITAT बेंगलुरु ने करदाता को राहत दी। ट्रिब्यूनल ने इस बात पर गौर किया कि गेमिंग गतिविधियों का आकलन सिर्फ ग्रॉस विनिंग्स के आधार पर नहीं किया जा सकता, जबकि पूरे लेनदेन में करदाता को कोई वास्तविक नेट लाभ नहीं हुआ था।
ट्रिब्यूनल के सामने मौजूद गणना के अनुसार, चन्नप्पा ने करीब ₹2.61 करोड़ लगाए थे, जबकि उनकी ग्रॉस विनिंग्स करीब ₹2.33 करोड़ थीं। यानी पूरे लेनदेन का परिणाम करीब ₹28 लाख का नुकसान था।
ऐसे में ₹2.33 करोड़ को अलग से उनकी टैक्सेबल इनकम मानना वास्तविक आर्थिक स्थिति को नहीं दर्शाता था।
ITAT ने इसके बाद ₹2.33 करोड़ की पूरी एडिशन हटाने का निर्देश दिया और चन्नप्पा की अपील स्वीकार कर ली।
ऑनलाइन गेमिंग से कमाई पर टैक्स का क्या मतलब है?
यह फैसला ऑनलाइन गेमिंग से जुड़े टैक्स मामलों में इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इसमें ग्रॉस विनिंग्स और वास्तविक नेट परिणाम के अंतर पर ध्यान दिया गया है।
हालांकि, इसका यह मतलब नहीं है कि ऑनलाइन गेमिंग से होने वाली हर कमाई टैक्स से बाहर हो गई है। ऑनलाइन गेमिंग की टैक्स व्यवस्था में गेम की प्रकृति, संबंधित टैक्स नियम और जिस अवधि में आय हुई है, जैसे कई पहलू महत्वपूर्ण हो सकते हैं।
इसलिए किसी भी गेमिंग ट्रांजैक्शन में सिर्फ बैंक खाते में आई रकम देखकर टैक्स देनदारी तय करना उचित नहीं माना जा सकता। पूरे लेनदेन और लागू कानून को ध्यान में रखना जरूरी है।
खिलाड़ियों के लिए क्यों अहम है यह फैसला?
ऑनलाइन रमी, पोकर और दूसरे रियल-मनी गेम खेलने वाले लोगों के लिए यह मामला इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि गेमिंग प्लेटफॉर्म पर बड़ी रकम का लेनदेन हो सकता है।
किसी खिलाड़ी के खाते में सालभर में करोड़ों रुपये की ग्रॉस विनिंग्स दिखाई दे सकती हैं, लेकिन इसका मतलब यह जरूरी नहीं कि खिलाड़ी ने उतनी रकम वास्तव में कमाई हो। लगातार गेम खेलने पर जमा की गई रकम, दोबारा लगाए गए पैसे और प्राप्त विनिंग्स को अलग-अलग समझना पड़ता है।
इस मामले में भी करदाता ने यही मुद्दा उठाया था और ITAT ने उसके पक्ष को स्वीकार करते हुए ₹2.33 करोड़ की आय की एडिशन हटा दी।
निष्कर्ष
बेंगलुरु ITAT का यह फैसला ऑनलाइन गेमिंग से जुड़े टैक्स विवाद में एक अहम उदाहरण है। मामले में करीब ₹2.61 करोड़ के गेमिंग ट्रांजैक्शन के मुकाबले ₹2.33 करोड़ की ग्रॉस विनिंग्स दिखाई गई थीं, लेकिन पूरे हिसाब में करीब ₹28 लाख का नेट नुकसान सामने आया। आयकर विभाग द्वारा ₹2.33 करोड़ को टैक्सेबल इनकम मानने की कार्रवाई को ITAT ने हटाने का निर्देश दिया।
हालांकि, ऑनलाइन गेमिंग से जुड़े मामलों में टैक्स नियमों की व्याख्या केस की परिस्थितियों और लागू कानून के आधार पर अलग हो सकती है। इसलिए ऐसे मामलों में किसी टैक्स विशेषज्ञ से सलाह लेना बेहतर है।


