Train Liquor Rule: ट्रेन से सफर करते समय अगर आप अपने साथ शराब की बोतल ले जाने की सोच रहे हैं, तो पहले नियम जान लेना बेहद जरूरी है। बिहार के समस्तीपुर में हाल ही में एक युवती को ट्रेन के फर्स्ट एसी कोच में शराब की कई बोतलों के साथ पकड़े जाने के बाद यह सवाल फिर चर्चा में है कि क्या ट्रेन में शराब ले जाना कानूनी है? क्या यात्री अपने सामान में शराब की बोतल रखकर सफर कर सकते हैं और अगर कर सकते हैं तो कितनी मात्रा में?
दरअसल, इस मामले में सिर्फ रेलवे के नियम ही नहीं, बल्कि उस राज्य के एक्साइज यानी आबकारी कानून भी महत्वपूर्ण हो जाते हैं, जहां से आप गुजर रहे हैं या जहां आपकी ट्रेन पहुंच रही है।
ट्रेन में शराब ले जाने पर क्या कहता है रेलवे का नियम?
ट्रेन में शराब ले जाने को लेकर कोई एक ऐसा नियम नहीं है जिसे हर राज्य में समान रूप से लागू किया जा सके। रेलवे यात्रियों को ऐसी चीजें ले जाने या इस्तेमाल करने से रोकता है, जिससे दूसरे यात्रियों को परेशानी या असुविधा हो।
शराब के मामले में सबसे अहम बात यह है कि रेलवे के स्तर पर सीलबंद शराब की बोतल को लेकर कोई सामान्य मात्रा निर्धारित नहीं है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि आप किसी भी राज्य में मनमानी मात्रा में शराब लेकर जा सकते हैं।
आपको उस राज्य के आबकारी कानून का भी पालन करना होता है, जहां आप जा रहे हैं। खासकर उन राज्यों में नियम बेहद सख्त हैं जहां शराबबंदी लागू है।
बिहार और गुजरात में क्यों हो सकती है परेशानी?
मान लीजिए कोई यात्री नई दिल्ली से वाराणसी जा रहा है। यदि वह उत्तर प्रदेश के लागू आबकारी नियमों के तहत अनुमत मात्रा में सीलबंद शराब की बोतल लेकर यात्रा करता है, तो स्थिति अलग होगी।
लेकिन अगर कोई यात्री शराब लेकर बिहार जा रहा है, तो मामला पूरी तरह बदल जाता है। बिहार में शराबबंदी लागू है और इसलिए वहां शराब लेकर जाना गंभीर कानूनी परेशानी पैदा कर सकता है।
इसी तरह गुजरात में भी शराब को लेकर बेहद सख्त नियम हैं। ऐसे राज्यों में ट्रेन के भीतर शराब ले जाने की कोशिश करने पर यात्री के खिलाफ राज्य के आबकारी कानून के तहत कार्रवाई हो सकती है।
इसलिए ट्रेन में शराब लेकर यात्रा करने से पहले केवल रेलवे के नियम देखना पर्याप्त नहीं है। गंतव्य राज्य के एक्साइज नियम की जानकारी भी जरूरी है।
ट्रेन में कितनी शराब की बोतल ले जा सकते हैं?
यह सबसे आम सवाल है, लेकिन इसका जवाब हर जगह एक जैसा नहीं है।
रेलवे के स्तर पर ट्रेन में शराब ले जाने के लिए कोई स्पष्ट सार्वभौमिक बोतल लिमिट निर्धारित नहीं बताई गई है। वहीं, अलग-अलग राज्यों के आबकारी कानून शराब की मात्रा को लेकर अलग-अलग सीमाएं तय कर सकते हैं।
कई जगह व्यक्तिगत इस्तेमाल के लिए शराब की मात्रा सीमित होती है। इसलिए सिर्फ यह मान लेना कि ट्रेन में सीलबंद बोतल ले जाना हमेशा कानूनी है, सही नहीं होगा।
यात्रा से पहले इन बातों की जांच करें:
- जिस राज्य से यात्रा शुरू कर रहे हैं, वहां के नियम क्या हैं।
- जिस राज्य में जा रहे हैं, वहां शराबबंदी लागू है या नहीं।
- राज्य में व्यक्तिगत इस्तेमाल के लिए शराब की कितनी मात्रा अनुमत है।
- बोतल सीलबंद है या नहीं।
- शराब का इस्तेमाल ट्रेन में तो नहीं किया जा रहा है।
अगर आप एक राज्य से दूसरे राज्य में शराब लेकर जा रहे हैं, तो दोनों राज्यों के लागू नियमों को ध्यान में रखना जरूरी है।
क्या ट्रेन में शराब पी सकते हैं?
नहीं। ट्रेन में शराब पीकर हंगामा करना या दूसरे यात्रियों को परेशान करना कार्रवाई का कारण बन सकता है।
भारतीय रेलवे यात्रियों को ऐसा व्यवहार करने से रोकता है जिससे अन्य यात्रियों को परेशानी हो। शराब के नशे में अभद्रता, हंगामा या अनुशासन भंग करने पर रेलवे नियमों के तहत कार्रवाई हो सकती है।
रेलवे एक्ट की धारा 145 के तहत नशे की हालत में उपद्रव करने या रेलवे परिसर में अनुशासन भंग करने पर जुर्माने और जेल का प्रावधान है। इसमें परिस्थितियों के अनुसार 500 रुपये तक का जुर्माना, छह महीने तक की जेल या दोनों हो सकते हैं।
इसलिए ट्रेन में शराब लेकर जाना और ट्रेन के अंदर शराब का सेवन करना—दोनों को एक ही चीज नहीं समझना चाहिए। शराब की बोतल रखने की वैधता अलग मुद्दा है, जबकि ट्रेन में उसका सेवन करके उपद्रव करना अलग कानूनी मामला है।
अगर शराब की बोतल की सील टूटी हो तो क्या होगा?
ट्रेन में शराब की बोतल ले जाते समय सीलबंद बोतल रखना सबसे सुरक्षित विकल्प माना जाता है।
अगर बोतल की सील टूटी हुई है, तो संदेह की स्थिति पैदा हो सकती है कि यात्री उसका सेवन कर रहा है या नहीं। रेलवे के नियमों के तहत ट्रेन में शराब पीकर दूसरे यात्रियों को परेशान करना स्वीकार्य नहीं है।
इसलिए ट्रेन यात्रा के दौरान शराब लेकर जाना हो तो:
- बोतल सीलबंद रखें।
- उसे सामान में सुरक्षित तरीके से रखें।
- ट्रेन में उसका सेवन न करें।
- दूसरे यात्रियों के सामने शराब का प्रदर्शन या इस्तेमाल न करें।
- जिस राज्य में जा रहे हैं, वहां शराबबंदी या मात्रा संबंधी नियम जरूर जांच लें।
बिहार में शराब लेकर जाना क्यों पड़ सकता है भारी?
बिहार में शराबबंदी लागू होने की वजह से वहां शराब के साथ पकड़े जाने पर मामला सिर्फ रेलवे के नियमों तक सीमित नहीं रहता। राज्य के आबकारी कानून के तहत भी कार्रवाई हो सकती है।
यही वजह है कि दूसरे राज्यों में शराब की बोतल लेकर ट्रेन से यात्रा करने वाला व्यक्ति बिहार पहुंचने के बाद मुश्किल में पड़ सकता है।
यानी ट्रेन में शराब को लेकर सबसे जरूरी नियम यही है कि रेलवे के साथ-साथ संबंधित राज्य के कानून को भी ध्यान में रखें।
यात्रियों को क्या सावधानी बरतनी चाहिए?
अगर आप ट्रेन से दूसरे राज्य की यात्रा कर रहे हैं और साथ में शराब ले जाने की योजना है, तो टिकट बुक करने से पहले ही संबंधित राज्य के आबकारी नियमों की जानकारी ले लें।
खास तौर पर बिहार, गुजरात जैसे शराबबंदी वाले राज्यों में शराब लेकर यात्रा करने से बचना चाहिए। वहीं दूसरे राज्यों में भी अनुमत मात्रा, बोतल की स्थिति और व्यक्तिगत उपयोग से जुड़े नियमों का पालन करना जरूरी है।
निष्कर्ष
ट्रेन में शराब ले जाने का सवाल सिर्फ रेलवे के नियम से तय नहीं होता। राज्य के आबकारी कानून भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं। कुछ परिस्थितियों में सीलबंद शराब की बोतल लेकर यात्रा की जा सकती है, लेकिन शराबबंदी वाले राज्यों में यही काम कानूनी मुसीबत खड़ी कर सकता है।
इसलिए ट्रेन में शराब लेकर निकलने से पहले रेलवे नियमों के साथ-साथ गंतव्य और संबंधित राज्यों के एक्साइज नियम जरूर जांचें। सबसे महत्वपूर्ण बात—ट्रेन के अंदर शराब का सेवन कर हंगामा करना या दूसरे यात्रियों को परेशान करना कार्रवाई का कारण बन सकता है।


