Gold Demand India: भारत में सोने की खरीदारी को कम करने की कोशिशों के बावजूद इसकी मांग में जबरदस्त तेजी देखने को मिल रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में लोगों से जरूरत न होने पर सोना खरीदने से बचने की अपील की थी। सरकार ने भी गोल्ड इंपोर्ट को हतोत्साहित करने के लिए आयात शुल्क बढ़ाया, लेकिन इसके बावजूद भारतीयों का सोने के प्रति आकर्षण कम होता नजर नहीं आ रहा है।
वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल (WGC) के आंकड़ों के मुताबिक, जून तिमाही में भारत में गोल्ड ज्वैलरी की बिक्री सालाना आधार पर करीब एक-तिहाई बढ़कर 21 अरब डॉलर यानी लगभग 1.75 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गई। इस आंकड़े से अंदाजा लगाया जा सकता है कि महंगे सोने के बावजूद भारतीय बाजार में इसकी मांग कितनी मजबूत बनी हुई है।
सरकार की कोशिशों के बावजूद क्यों बढ़ रही Gold Demand?
भारत अपनी सोने की जरूरत का एक बड़ा हिस्सा आयात के जरिए पूरा करता है। ऐसे में जब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आती है या भू-राजनीतिक तनाव बढ़ता है, तो देश के आयात बिल पर दबाव बढ़ जाता है।
रुपये को स्थिर रखने और विदेशी मुद्रा पर दबाव कम करने के उद्देश्य से सरकार ने सोने के आयात पर शुल्क बढ़ाने का कदम उठाया था। इसके साथ ही लोगों से भी अपील की गई कि अगर सोना खरीदना जरूरी नहीं है तो इसकी खरीद को कुछ समय के लिए टाला जाए।
हालांकि, ज्वैलरी की मजबूत मांग ने इन कोशिशों के असर को सीमित कर दिया।
Titan के नतीजों ने भी दिखाया सोने के प्रति क्रेज
भारत के बड़े ज्वैलरी रिटेलर्स में शामिल टाइटन के हालिया प्रदर्शन से भी सोने की मजबूत मांग का संकेत मिलता है। कंपनी के ज्वैलरी कारोबार में ग्राहकों की आवाजाही में तेजी देखने को मिली है और कंपनी के मुनाफे में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई।
कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर अजय चावला के मुताबिक, भारतीय ग्राहकों का सोने और ज्वैलरी के प्रति लगाव लंबे समय तक बना रहने वाला है। इसकी एक बड़ी वजह यह है कि लोग सोने को सिर्फ पहनने की चीज नहीं मानते, बल्कि इसे सुरक्षित संपत्ति और निवेश के विकल्प के तौर पर भी देखते हैं।
जून तिमाही में 21 अरब डॉलर की ज्वैलरी बिक्री
वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के आंकड़े इस पूरे ट्रेंड को और स्पष्ट करते हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, जून तिमाही में भारत में गोल्ड ज्वैलरी की बिक्री करीब 21 अरब डॉलर रही।
यह पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले लगभग एक-तिहाई अधिक है। सोने की कीमतों में तेजी के बावजूद बिक्री में इतनी बड़ी वृद्धि यह बताती है कि भारतीय उपभोक्ताओं के लिए सोना अभी भी बेहद महत्वपूर्ण खरीद बना हुआ है।
खासकर शादी-ब्याह और पारंपरिक आयोजनों में सोने की मांग काफी मजबूत रहती है। भारत में कई परिवारों के लिए ज्वैलरी सिर्फ फैशन या आभूषण नहीं, बल्कि सामाजिक और पारिवारिक परंपरा का हिस्सा भी है।
शेयर बाजार और म्यूचुअल फंड के निवेशक भी खरीद रहे हैं Gold
सोने की बढ़ती मांग की एक दिलचस्प वजह यह भी है कि अब केवल पारंपरिक खरीदार ही गोल्ड में निवेश नहीं कर रहे हैं। शेयर बाजार और म्यूचुअल फंड में निवेश करने वाले लोग भी अपने पोर्टफोलियो में सोने को जगह दे रहे हैं।
टाइटन के CFO अशोक सोंथालिया के अनुसार, भारतीय मध्यम वर्ग के बीच वित्तीय निवेश के विकल्पों को लेकर जागरूकता बढ़ी है। लोग शेयर, म्यूचुअल फंड और दूसरे एसेट क्लास में पैसा लगा रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद गोल्ड की भूमिका खत्म नहीं हुई है।
इसकी वजह पोर्टफोलियो डायवर्सिफिकेशन भी है। कई निवेशक बाजार में उतार-चढ़ाव के दौरान सोने को अपेक्षाकृत सुरक्षित एसेट के तौर पर देखते हैं।
महंगा होने के बावजूद सोने की खरीदारी क्यों नहीं रुक रही?
सोने की कीमतों में पिछले कुछ समय में जबरदस्त तेजी देखने को मिली है। इसके बावजूद मांग बनी हुई है। इसके पीछे कई वजहें हैं।
1. शादी-ब्याह की परंपरा
भारत में शादियों के दौरान सोना खरीदने की पुरानी परंपरा है। कई परिवार कीमत बढ़ने के बावजूद शादी के लिए ज्वैलरी खरीदते हैं।
2. सुरक्षित निवेश की धारणा
आर्थिक अनिश्चितता और बाजार में उतार-चढ़ाव के समय सोने को सुरक्षित निवेश के तौर पर देखा जाता है। यही वजह है कि कई निवेशक अपने पोर्टफोलियो में कुछ हिस्सा गोल्ड को देते हैं।
3. महंगाई से बचाव
सोने को लंबे समय में महंगाई से बचाव के एक विकल्प के तौर पर भी देखा जाता है। जब महंगाई और आर्थिक अनिश्चितता बढ़ती है, तो गोल्ड की मांग को सपोर्ट मिल सकता है।
4. त्योहारों का सीजन
भारत में अक्षय तृतीया, धनतेरस और दिवाली जैसे मौकों पर सोना खरीदना शुभ माना जाता है। ऐसे समय में ज्वैलरी और गोल्ड की मांग बढ़ जाती है।
5. निवेश के नए विकल्प
अब लोग केवल फिजिकल गोल्ड ही नहीं खरीदते। गोल्ड ETF, गोल्ड फंड और डिजिटल गोल्ड जैसे विकल्पों ने भी सोने को निवेश के तौर पर लोकप्रिय बनाए रखा है।
Titan के शेयरों में भी दिखा मजबूत प्रदर्शन
सोने की मजबूत मांग का असर ज्वैलरी कंपनियों के शेयरों पर भी देखने को मिला है। रिपोर्ट में बताया गया है कि निफ्टी 50 में कमजोरी के बावजूद इस साल टाइटन के शेयर में करीब 25% की तेजी देखी गई।
हालांकि, किसी कंपनी के शेयर की तेजी को केवल सोने की कीमत या ज्वैलरी की मांग से जोड़ना सही नहीं होगा। कंपनी की बिक्री, मार्जिन, नए स्टोर, ब्रांड की स्थिति और बाजार की धारणा जैसे कई अन्य कारक भी शेयर की कीमत को प्रभावित करते हैं।
आगे भी बनी रह सकती है Gold की मांग
भारत में सोने की मांग को केवल निवेश के नजरिए से देखना पर्याप्त नहीं है। यहां गोल्ड का संबंध परंपरा, शादी-ब्याह, त्योहार और परिवार की बचत से भी जुड़ा हुआ है।
यही कारण है कि कीमतों में तेजी और सरकार की तरफ से खरीदारी कम करने की अपील के बावजूद गोल्ड की मांग में बड़ी गिरावट नहीं आई है।
हालांकि, सोने की कीमतों में लगातार तेजी आगे चलकर कुछ खरीदारों को खरीदारी टालने के लिए मजबूर कर सकती है। दूसरी तरफ, अगर आर्थिक अनिश्चितता बनी रहती है और निवेशक सुरक्षित एसेट की तलाश करते हैं, तो गोल्ड की निवेश मांग मजबूत रह सकती है।
डिस्क्लेमर: सोने की कीमत और निवेश से जुड़े फैसले बाजार की स्थितियों पर निर्भर करते हैं। निवेश करने से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से सलाह जरूर लें।


