नौकरी पाने के लिए उम्मीदवारों ने निकाला नया जुगाड़, AI स्क्रीनिंग सिस्टम को प्रभावित करने की कोशिश ने बढ़ाई HR की चिंता
नौकरी पाने की प्रतिस्पर्धा लगातार बढ़ रही है और इसके साथ ही उम्मीदवारों के रिज्यूमे भी तेजी से बदल रहे हैं। अब सिर्फ अपनी योग्यता, अनुभव और स्किल्स को बेहतर तरीके से पेश करना ही काफी नहीं माना जा रहा। कुछ जॉब सीकर्स AI आधारित भर्ती सिस्टम को प्रभावित करने के लिए रिज्यूमे में छिपे हुए AI प्रॉम्प्ट तक इस्तेमाल करने लगे हैं।
इन प्रॉम्प्ट्स को इस तरह से रिज्यूमे में शामिल किया जा रहा है कि सामान्य तौर पर उन्हें देखने वाला व्यक्ति शायद नोटिस भी न करे। लेकिन अगर यही रिज्यूमे किसी AI स्क्रीनिंग टूल के सामने जाता है, तो उसमें मौजूद निर्देश AI के जवाब या उम्मीदवार की रैंकिंग को प्रभावित करने की कोशिश कर सकते हैं। इस ट्रेंड ने कंपनियों और HR प्रोफेशनल्स के सामने भर्ती प्रक्रिया की निष्पक्षता और भरोसे से जुड़े नए सवाल खड़े कर दिए हैं।
सफेद टेक्स्ट में छिपा था करीब 1,500 कैरेक्टर का मैसेज
इस तरह के एक मामले ने खास तौर पर लोगों का ध्यान खींचा। कैलिफोर्निया की कैप्शनिंग टेक्नोलॉजी कंपनी InnoCaption के CEO पॉल ली ने एक जॉब एप्लीकेशन में ऐसा टेक्स्ट देखा, जो पहली नजर में दिखाई नहीं दे रहा था।
रिपोर्ट के मुताबिक, कानूनी और कंप्लायंस पद के लिए भेजे गए रिज्यूमे में लगभग 1,500 कैरेक्टर का टेक्स्ट सफेद रंग में लिखा गया था। चूंकि रिज्यूमे का बैकग्राउंड भी सफेद था, इसलिए सामान्य तौर पर इसे पढ़ना संभव नहीं था।
बताया गया कि इस छिपे हुए मैसेज में AI सिस्टम को अपने पुराने निर्देशों को नजरअंदाज करने और आवेदक को टॉप कैंडिडेट के तौर पर पेश करने का निर्देश दिया गया था। यानी उम्मीदवार ने रिज्यूमे को सिर्फ इंसानी रिक्रूटर के लिए नहीं, बल्कि AI स्क्रीनिंग सिस्टम को ध्यान में रखकर तैयार करने की कोशिश की थी।
CEO ने इसे बताया भरोसे का गंभीर मामला
InnoCaption के CEO पॉल ली के लिए यह घटना सिर्फ एक तकनीकी चाल नहीं थी। उन्होंने इसे भर्ती प्रक्रिया में दूसरे उम्मीदवारों को पीछे छोड़ने की कोशिश के तौर पर देखा।
खास बात यह थी कि आवेदन जिस पद के लिए किया गया था, उसमें ईमानदारी, नियमों की समझ और भरोसा बेहद महत्वपूर्ण माने जाते हैं। ऐसे में AI सिस्टम को गुप्त निर्देश देकर प्रभावित करने की कोशिश ने मामले को और गंभीर बना दिया।
एक उम्मीदवार अगर शुरुआत में ही चयन प्रक्रिया को प्रभावित करने के लिए इस तरह की रणनीति अपनाता है, तो कंपनी के लिए यह सवाल खड़ा हो सकता है कि नौकरी मिलने के बाद उसके फैसलों पर कितना भरोसा किया जा सकता है।
पहले ATS के लिए छिपाए जाते थे Keywords, अब AI Prompts की बारी
रिज्यूमे में टेक्स्ट छिपाकर भर्ती सिस्टम को प्रभावित करने की कोशिश पूरी तरह नई नहीं है। पहले भी कुछ उम्मीदवार Applicant Tracking System यानी ATS के लिए रिज्यूमे में जरूरी Keywords शामिल करते थे।
ATS का इस्तेमाल कंपनियां बड़ी संख्या में आए रिज्यूमे को छांटने के लिए करती हैं। ऐसे में उम्मीदवार अक्सर नौकरी की पोस्टिंग में दिए गए जरूरी शब्दों को अपने रिज्यूमे में शामिल करने की कोशिश करते हैं, ताकि उनका आवेदन शुरुआती स्क्रीनिंग में छंट न जाए।
लेकिन AI के बढ़ते इस्तेमाल ने इस रणनीति को एक नए स्तर पर पहुंचा दिया है। अब कुछ उम्मीदवार सिर्फ Keywords जोड़ने के बजाय ऐसे निर्देश डालने की कोशिश कर रहे हैं, जो AI मॉडल के व्यवहार को प्रभावित कर सकें।
भर्ती प्रक्रिया के ‘Black Box’ बनने का खतरा
AI आधारित भर्ती को लेकर पहले से ही पारदर्शिता के सवाल उठते रहे हैं। कई उम्मीदवारों को यह पता नहीं होता कि उनका रिज्यूमे आखिर किस वजह से शॉर्टलिस्ट हुआ या रिजेक्ट कर दिया गया।
HR प्लेटफॉर्म Lattice की CEO सारा फ्रैंकलिन के मुताबिक, भर्ती प्रक्रिया पहले से ही कई उम्मीदवारों के लिए एक तरह के ‘Black Box’ जैसी दिखाई देती है। अगर उम्मीदवार AI सिस्टम को प्रभावित करने के लिए छिपे हुए निर्देशों का इस्तेमाल करने लगते हैं, तो यह समस्या और जटिल हो सकती है।
इससे कंपनियों के सामने एक नई चुनौती भी आ सकती है—AI सिस्टम को ऐसे छिपे निर्देशों से कैसे बचाया जाए और यह सुनिश्चित कैसे किया जाए कि सभी उम्मीदवारों का मूल्यांकन समान आधार पर हो।
क्या रिज्यूमे में AI Prompt डालने से सच में इंटरव्यू मिलेगा?
यह जरूरी नहीं है कि इस तरह की चाल हर बार काम करे। HR एक्सपर्ट्स का मानना है कि कंपनियों की भर्ती प्रक्रिया सिर्फ एक AI स्क्रीनिंग रिजल्ट पर निर्भर नहीं होती। रिज्यूमे की समीक्षा के बाद इंटरव्यू, स्किल असेसमेंट और अन्य चरण भी हो सकते हैं।
Terra Vista की HR कॉर्पोरेट डायरेक्टर नथालिया अरयानी के मुताबिक, रिक्रूटर्स को अक्सर बड़ी संख्या में आवेदन देखने पड़ते हैं। जब पर्याप्त योग्य उम्मीदवार मिल जाते हैं, तो कंपनी आगे की प्रक्रिया के लिए उन्हीं पर ध्यान केंद्रित कर सकती है।
ऐसे में रिज्यूमे में छिपा हुआ AI Prompt उम्मीदवार को शुरुआती स्क्रीनिंग में फायदा पहुंचा भी दे, तो भी वह इंटरव्यू या अंतिम नौकरी की गारंटी नहीं देता।
AI बनाम उम्मीदवारों की शुरू हो गई नई रेस
AI कंपनियों के लिए भर्ती प्रक्रिया को तेज और ज्यादा व्यवस्थित बनाने का माध्यम बन रहा है। लेकिन दूसरी तरफ उम्मीदवार भी यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि AI किस तरह उनके रिज्यूमे का विश्लेषण करता है और उस प्रक्रिया को अपने पक्ष में कैसे प्रभावित किया जा सकता है।
रिज्यूमे में सफेद टेक्स्ट के जरिए AI Prompt छिपाने की घटनाएं इसी बदलती जॉब मार्केट की ओर इशारा करती हैं। आने वाले समय में कंपनियों को AI भर्ती सिस्टम को सिर्फ योग्य उम्मीदवार खोजने के लिए ही नहीं, बल्कि Prompt Injection और छिपे निर्देशों जैसी चालों से बचाने के लिए भी तैयार करना पड़ सकता है।
वहीं उम्मीदवारों के लिए भी सवाल यही है कि क्या इंटरव्यू पाने की कोशिश में AI को चकमा देना लंबे समय में फायदेमंद रणनीति साबित होगी, या इससे उनकी विश्वसनीयता पर ही सवाल खड़े हो जाएंगे।


