Delhi PG Collapse: दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में रविवार को पांच मंजिला इमारत ढहने की घटना ने एक बार फिर सुरक्षा व्यवस्था और अवैध निर्माण को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। दिल्ली विश्वविद्यालय के साउथ कैंपस के पास स्थित इस इलाके में 6 सितंबर 2026 को दोपहर करीब 1:30 बजे एक PG बिल्डिंग अचानक भरभराकर गिर गई। हादसे के समय इमारत में मरम्मत का काम चल रहा था।
इस दर्दनाक हादसे में अब तक 7 लोगों की मौत हो चुकी है। मलबे से 12 लोगों को बाहर निकाला गया है। दिल्ली पुलिस, दिल्ली फायर सर्विस, NDRF और DDMA की टीमें रातभर रेस्क्यू ऑपरेशन में जुटी रहीं। पुलिस अब इमारत के मालिक की तलाश कर रही है।
इस हादसे ने सत्य निकेतन में करीब चार साल पहले हुई एक ऐसी ही घटना की याद भी ताजा कर दी है, जब निर्माण और रेनोवेशन के दौरान एक तीन मंजिला मकान ढह गया था और दो मजदूरों की जान चली गई थी।
6 सितंबर को कैसे हुआ हादसा?
रविवार दोपहर सत्य निकेतन की एक संकरी गली में पांच मंजिला इमारत अचानक ढह गई। बताया गया कि इस बिल्डिंग का इस्तेमाल लड़कों के पेइंग गेस्ट यानी PG के तौर पर किया जा रहा था।
हादसे के वक्त इमारत में मरम्मत का काम चल रहा था। बिल्डिंग गिरने के बाद आसपास अफरा-तफरी मच गई और मलबे में कई लोगों के फंसे होने की आशंका जताई गई। इसके बाद पुलिस और दमकल की टीमों के साथ अन्य बचाव एजेंसियों ने मौके पर पहुंचकर रेस्क्यू अभियान शुरू किया।
सोमवार तक मलबे से 12 लोगों को निकाला जा चुका था। इनमें से सात लोगों की मौत हो गई। अधिकारियों के मुताबिक, बचाव अभियान के दौरान मलबे से निकाले गए एक व्यक्ति को अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
संकरी गलियों के कारण रेस्क्यू में आई मुश्किल
सत्य निकेतन की संकरी और घनी आबादी वाली गलियां बचाव अभियान के लिए बड़ी चुनौती बनीं। भारी मशीनरी और दमकल वाहनों को घटनास्थल तक पहुंचाने में परेशानी का सामना करना पड़ा।
दिल्ली पुलिस, दिल्ली फायर सर्विस, NDRF और DDMA की टीमें लगातार मलबा हटाने और उसमें फंसे लोगों की तलाश में जुटी रहीं। बचावकर्मियों ने सावधानी से मलबे को हटाया ताकि अंदर मौजूद लोगों को नुकसान न पहुंचे।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता भी सोमवार को लगातार दूसरे दिन घटनास्थल पर पहुंचीं और राहत एवं बचाव अभियान का जायजा लिया।
चार साल पहले भी हुआ था ऐसा ही हादसा
सत्य निकेतन में मौजूदा हादसे की सबसे चिंताजनक बात यह है कि करीब चार साल पहले भी इसी इलाके में निर्माण कार्य के दौरान एक मकान गिर गया था।
25 अप्रैल 2022 को सत्य निकेतन में एक तीन मंजिला मकान में रेनोवेशन और निर्माण से जुड़े बदलाव का काम चल रहा था। दोपहर करीब 1:15 बजे मकान का एक हिस्सा अचानक ढह गया। उस समय वहां काम कर रहे मजदूर मलबे में दब गए थे।
उस हादसे में दो मजदूरों की मौत हुई थी, जबकि चार अन्य लोग घायल हुए थे।
2022 में भी संकरी गलियां बनी थीं चुनौती
2022 के हादसे में भी बचाव दल को सत्य निकेतन की संकरी गलियों के कारण काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा था। फायर टेंडर घटनास्थल तक आसानी से नहीं पहुंच पा रहे थे।
उस समय दिल्ली फायर सर्विस ने करीब आठ फायर टेंडर और लगभग 50 कर्मचारियों को राहत अभियान में लगाया था। मलबे में दबे मजदूरों तक पहुंचने के लिए दमकलकर्मियों को काफी सावधानी से कंक्रीट की स्लैब काटनी पड़ी थी।
बचावकर्मियों ने मलबे में छोटे-छोटे छेद बनाकर अंदर फंसे लोगों तक पानी पहुंचाने और उनसे संपर्क बनाए रखने की कोशिश की थी।
2022 में पहले ही जारी हो चुका था नोटिस
2022 के हादसे के बाद सामने आई जानकारी के मुताबिक, जिस मकान में दुर्घटना हुई थी, वह स्थानीय निकाय की निगरानी में पहले से था।
तत्कालीन साउथ दिल्ली म्युनिसिपल कॉरपोरेशन यानी SDMC के अनुसार, संपत्ति में कथित तौर पर बिना अनुमति निर्माण और बदलाव किए जाने को लेकर मालिक को 31 मार्च 2022 को नोटिस दिया गया था। इसके बाद 11 अप्रैल 2022 को पुलिस से निर्माण कार्य रुकवाने का अनुरोध भी किया गया था।
MCD के अनुसार, वह मकान करीब 25 साल पुराना था और कथित अवैध निर्माण को लेकर उसके खिलाफ कार्रवाई शुरू की गई थी। हादसे के बाद ठेकेदार और मकान मालिक के खिलाफ FIR भी दर्ज की गई थी।
2026 के हादसे की वजह अभी साफ नहीं
इस बार पांच मंजिला PG बिल्डिंग के गिरने की वास्तविक वजह अभी सामने नहीं आई है। अधिकारियों के अनुसार, हादसे के समय बेसमेंट में मरम्मत का काम चल रहा था।
स्थानीय लोगों ने दावा किया है कि इलाके में हुई भारी बारिश के बाद बेसमेंट में पानी जमा हो गया था। हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि बिल्डिंग गिरने में पानी या मरम्मत कार्य की क्या भूमिका रही। हादसे की असली वजह जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
पुलिस कर रही है मकान मालिक की तलाश
हादसे के बाद दिल्ली पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। पुलिस अब बिल्डिंग के मालिक और हादसे से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की जांच कर रही है।
जांच में यह देखा जाएगा कि इमारत में किस तरह का निर्माण या मरम्मत कार्य चल रहा था, क्या इसके लिए जरूरी अनुमति ली गई थी और क्या बिल्डिंग की संरचनात्मक सुरक्षा से जुड़े नियमों का पालन किया गया था।
चार साल बाद फिर वही सवाल
सत्य निकेतन में 2022 के हादसे के चार साल बाद दोबारा बिल्डिंग गिरने की घटना ने इलाके में रहने वाले छात्रों, PG संचालकों और स्थानीय लोगों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
खास तौर पर पुराने मकानों में चल रहे PG और मरम्मत कार्यों की निगरानी कितनी प्रभावी है, यह सवाल अब फिर चर्चा में है। फिलहाल प्रशासन का फोकस राहत और बचाव अभियान के बाद हादसे की वजह का पता लगाने और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई पर है।


