Gold Price Outlook 2026: सोने और चांदी की कीमतों में इस समय लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। एक तरफ ऊंचे स्तर पर पहुंचने के बाद सोने की कीमतों में कुछ दबाव दिखाई दे रहा है, वहीं दूसरी ओर वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक तनाव, केंद्रीय बैंकों की खरीदारी और अमेरिकी फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति को लेकर अनिश्चितता ने गोल्ड के आउटलुक को मजबूत बनाए रखा है।
ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या अभी सोना खरीदना चाहिए या कीमतों में और गिरावट का इंतजार करना बेहतर होगा? बाजार के कई जानकारों का मानना है कि लंबी अवधि में सोने की तेजी की कहानी अभी खत्म नहीं हुई है। Goldman Sachs से लेकर दिग्गज निवेशक रॉबर्ट कियोसाकी और भारतीय बाजार के विशेषज्ञों ने भी सोने को लेकर सकारात्मक रुख जाहिर किया है।
Goldman Sachs को अभी भी सोने में तेजी की उम्मीद
Goldman Sachs के मेटल्स ट्रेडिंग के ग्लोबल हेड टोनी किम के मुताबिक, इस साल की शुरुआत में सोने में जबरदस्त तेजी देखने को मिली थी और कीमतों ने नए रिकॉर्ड स्तर बनाए थे। हालांकि, इसके बाद बाजार में उतार-चढ़ाव बढ़ा है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि सोने का तेजी वाला दौर पूरी तरह खत्म हो गया है।
अमेरिकी ब्याज दरों को लेकर उम्मीदों में बदलाव और वैश्विक स्तर पर बढ़ते तनाव के कारण सोने की कीमतों पर समय-समय पर दबाव आ सकता है। इसके बावजूद Goldman Sachs का मानना है कि सोने के लिए दीर्घकालिक बुनियादी कारक मजबूत बने हुए हैं।
यानी छोटी अवधि में गिरावट संभव है, लेकिन लंबी अवधि के नजरिए से सोने में निवेश की संभावनाएं अभी भी बनी हुई हैं।
रॉबर्ट कियोसाकी भी सोने और चांदी पर बुलिश
‘Rich Dad Poor Dad’ के लेखक और निवेशक रॉबर्ट कियोसाकी लंबे समय से सोने और चांदी को लेकर सकारात्मक रुख रखते हैं। वह कई मौकों पर कह चुके हैं कि आने वाले समय में इन कीमती धातुओं की कीमतों में बड़ी तेजी देखने को मिल सकती है।
कियोसाकी का निवेश नजरिया मुख्य रूप से महंगाई, करेंसी की वैल्यू में गिरावट और आर्थिक अनिश्चितता के बीच सोने-चांदी जैसी संपत्तियों को सुरक्षित विकल्प मानने पर आधारित रहा है।
हालांकि, निवेशकों को यह ध्यान रखना चाहिए कि किसी भी विशेषज्ञ का अनुमान निश्चित भविष्यवाणी नहीं होता। सोने की कीमतें वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों और बाजार की धारणा के आधार पर तेजी से बदल सकती हैं।
दिवाली तक ₹1.60 लाख के पार जा सकता है सोना?
भारतीय बाजार में भी कुछ एक्सपर्ट्स सोने को लेकर सकारात्मक नजरिया बनाए हुए हैं। इंडसइंड सिक्योरिटीज के सीनियर रिसर्च एनालिस्ट जिगर त्रिवेदी के मुताबिक, दिवाली तक घरेलू बाजार में सोने की कीमत ₹1.60 लाख से ₹1.62 लाख प्रति 10 ग्राम के स्तर तक पहुंच सकती है।
उन्होंने अंतरराष्ट्रीय बाजार में कॉमेक्स गोल्ड के करीब 4,400 डॉलर प्रति औंस तक पहुंचने की संभावना भी जताई है।
अगर यह अनुमान सही साबित होता है तो घरेलू बाजार में मौजूदा स्तरों से सोने में आगे भी तेजी की गुंजाइश बन सकती है। हालांकि, यह एक बाजार अनुमान है और वास्तविक कीमत इससे अलग हो सकती है।
सोना खरीदने वालों के लिए क्या है एक्सपर्ट्स की रणनीति?
अगर आपका उद्देश्य शादी, त्योहार या किसी निश्चित समय पर सोना खरीदना है तो केवल छोटी अवधि की गिरावट का इंतजार करना हमेशा सही रणनीति नहीं हो सकती। खासकर तब, जब खरीदारी की जरूरत पहले से तय हो।
ऐसे मामलों में एक साथ पूरी खरीदारी करने के बजाय किस्तों में खरीदारी यानी staggered buying का तरीका अपनाया जा सकता है। इससे अगर कीमत आगे गिरती है तो निचले स्तर पर भी खरीदारी का मौका मिल सकता है।
वहीं, अगर उद्देश्य सिर्फ निवेश है और तत्काल खरीदारी की जरूरत नहीं है तो मौजूदा ऊंचे स्तरों पर पूरी रकम एक साथ लगाने के बजाय बाजार में आने वाली गिरावट और कीमतों के ट्रेंड पर नजर रखना ज्यादा उचित हो सकता है।
सोने की कीमतों में आगे तेजी क्यों आ सकती है?
सोने के लिए कई वैश्विक कारक अभी भी महत्वपूर्ण बने हुए हैं। इनमें सबसे प्रमुख हैं:
1. भू-राजनीतिक तनाव
मध्य पूर्व में तनाव, अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ती तनातनी और रूस-यूक्रेन युद्ध जैसी घटनाएं निवेशकों को सुरक्षित संपत्तियों की तरफ आकर्षित कर सकती हैं। ऐसे माहौल में सोने की मांग बढ़ने की संभावना रहती है।
2. केंद्रीय बैंकों की खरीदारी
दुनिया के कई केंद्रीय बैंक अपने विदेशी मुद्रा भंडार में सोने की हिस्सेदारी बढ़ा रहे हैं। केंद्रीय बैंकों की लगातार खरीदारी सोने की कीमतों के लिए लंबी अवधि में सपोर्ट का काम कर सकती है।
3. अमेरिकी फेड का ब्याज दर फैसला
सोने की कीमतों पर अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दर नीति का भी बड़ा असर पड़ता है। ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद बढ़ने पर आमतौर पर सोने को समर्थन मिल सकता है, जबकि ऊंची ब्याज दरें सोने पर दबाव डाल सकती हैं।
4. महंगाई और आर्थिक अनिश्चितता
महंगाई, कमजोर आर्थिक विकास और वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता के दौरान निवेशक अक्सर सोने को पोर्टफोलियो में सुरक्षा देने वाली संपत्ति के तौर पर देखते हैं। यही वजह है कि आर्थिक जोखिम बढ़ने पर सोने की मांग मजबूत हो सकती है।
तो क्या अभी सोना खरीदना चाहिए?
इसका जवाब पूरी तरह आपके निवेश के उद्देश्य और समय अवधि पर निर्भर करता है।
अगर आपको निकट भविष्य में शादी या किसी अन्य जरूरी काम के लिए सोना खरीदना है, तो सिर्फ कीमतों में बड़ी गिरावट की उम्मीद में खरीदारी को टालना जोखिम भरा हो सकता है। ऐसे में चरणबद्ध तरीके से खरीदारी की जा सकती है।
अगर आप निवेश के नजरिए से सोना खरीदना चाहते हैं और आपकी समय अवधि लंबी है, तो पूरी रकम एक साथ लगाने के बजाय धीरे-धीरे निवेश करना बेहतर रणनीति हो सकती है। इससे कीमतों में उतार-चढ़ाव का असर कुछ हद तक कम किया जा सकता है।
दूसरी ओर, अगर आप सिर्फ छोटी अवधि में मुनाफा कमाने के लिए सोना खरीदना चाहते हैं तो सावधानी जरूरी है। रिकॉर्ड ऊंचे स्तरों के बाद कीमतों में तेज करेक्शन भी देखने को मिल सकता है।
निष्कर्ष
सोने की कीमतों में फिलहाल उतार-चढ़ाव जरूर है, लेकिन Goldman Sachs समेत कई बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि लंबी अवधि में सोने के लिए सकारात्मक आधार अभी कायम है। भू-राजनीतिक तनाव, केंद्रीय बैंकों की खरीदारी और अमेरिकी मौद्रिक नीति से जुड़े संकेत आने वाले महीनों में सोने की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे।
इसलिए सवाल सिर्फ यह नहीं है कि ‘अभी सोना खरीदें या नहीं?’, बल्कि यह भी है कि आप सोना किस उद्देश्य, कितनी अवधि और कितनी रकम के लिए खरीद रहे हैं। निवेशकों को अपनी जोखिम क्षमता के अनुसार फैसला लेना चाहिए और केवल किसी एक विशेषज्ञ के अनुमान के आधार पर पूरी रकम निवेश करने से बचना चाहिए।
डिस्क्लेमर: यह लेख बाजार विशेषज्ञों के विचार और उपलब्ध बाजार अनुमानों पर आधारित है। इसे निवेश की व्यक्तिगत सलाह न माना जाए। सोने की कीमतों में उतार-चढ़ाव हो सकता है। निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से सलाह लें।


