PM Jan Dhan Yojana: प्रधानमंत्री जनधन योजना (PMJDY) के तहत देशभर में करोड़ों बैंक खाते खोले गए हैं। इस योजना का उद्देश्य ऐसे लोगों को बैंकिंग व्यवस्था से जोड़ना था, जो अब तक इससे बाहर थे। हालांकि, अब एक RTI के जवाब में सामने आए आंकड़ों ने जनधन खातों के इस्तेमाल को लेकर नई तस्वीर सामने रखी है। जानकारी के मुताबिक, देश में 5.72 करोड़ से ज्यादा जनधन खातों में कोई बैलेंस नहीं है, जबकि 15.36 करोड़ से अधिक खाते इनऑपरेटिव यानी निष्क्रिय पाए गए हैं।
RTI में जनधन खातों को लेकर क्या खुलासा हुआ?
प्रधानमंत्री जनधन योजना की शुरुआत साल 2014 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने की थी। इसका मकसद देश के ज्यादा से ज्यादा लोगों को औपचारिक बैंकिंग सिस्टम से जोड़ना और उन्हें बैंक खाते, बीमा तथा अन्य वित्तीय सेवाओं तक पहुंच उपलब्ध कराना था।
अब वित्त मंत्रालय के अधीन आने वाले वित्तीय सेवा विभाग ने RTI कार्यकर्ता चंद्रशेखर गौर के आवेदन के जवाब में जनधन खातों से जुड़े आंकड़े उपलब्ध कराए हैं।
RTI के जवाब के मुताबिक, 12 अगस्त 2026 तक देश में कुल 59,03,74,907 जनधन खाते दर्ज थे। इन खातों में कुल मिलाकर करीब 3,15,179.90 करोड़ रुपये का बैलेंस मौजूद था।
इनमें लगभग 32.89 करोड़ खाते महिलाओं के नाम पर हैं, जिसमें ट्रांसजेंडर खाताधारकों को भी शामिल किया गया है। वहीं करीब 26.14 करोड़ खाते पुरुषों के नाम पर दर्ज हैं।
5.72 करोड़ जनधन खातों में एक भी रुपया नहीं
RTI से मिले आंकड़ों में सबसे महत्वपूर्ण जानकारी जीरो-बैलेंस खातों को लेकर सामने आई है।
आंकड़ों के अनुसार, 5,72,35,490 जनधन खातों में कोई बैलेंस नहीं था। यानी इन खातों में एक भी रुपया जमा नहीं था। कुल जनधन खातों की तुलना में यह संख्या काफी बड़ी है।
हालांकि, यहां यह समझना जरूरी है कि जीरो-बैलेंस खाता और इनऑपरेटिव खाता एक ही चीज नहीं होते। किसी खाते में पैसा नहीं होना और खाते का निष्क्रिय होना अलग-अलग स्थितियां हैं। इसलिए दोनों आंकड़ों को जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए।
15.36 करोड़ से ज्यादा जनधन खाते इनऑपरेटिव
RTI के जवाब में बताया गया कि देश में 15,36,77,009 जनधन खाते इनऑपरेटिव यानी निष्क्रिय श्रेणी में हैं।
इसका मतलब है कि जनधन योजना के तहत बड़ी संख्या में खाते खोले जाने के बावजूद सभी खातों का नियमित रूप से इस्तेमाल नहीं किया जा रहा है।
यह आंकड़ा इस बात की ओर भी ध्यान खींचता है कि बैंकिंग सेवाओं तक पहुंच बनाने के साथ-साथ खाताधारकों द्वारा खातों का लगातार इस्तेमाल सुनिश्चित करना भी एक बड़ी चुनौती है।
उत्तर प्रदेश में सबसे ज्यादा जीरो-बैलेंस जनधन खाते
राज्यों के आंकड़ों पर नजर डालें तो उत्तर प्रदेश में सबसे ज्यादा जीरो-बैलेंस जनधन खाते दर्ज किए गए हैं।
| राज्य | जीरो-बैलेंस खाते |
|---|---|
| उत्तर प्रदेश | 95.92 लाख |
| बिहार | 62.35 लाख |
| पश्चिम बंगाल | 37.20 लाख |
| असम | 36.30 लाख |
| महाराष्ट्र | 36.04 लाख |
उत्तर प्रदेश में करीब 95.92 लाख जनधन खातों में कोई बैलेंस नहीं था। इसके बाद बिहार का नंबर आता है, जहां करीब 62.35 लाख खाते जीरो-बैलेंस पाए गए।
पश्चिम बंगाल में करीब 37.20 लाख, असम में 36.30 लाख और महाराष्ट्र में लगभग 36.04 लाख जनधन खातों में कोई बैलेंस नहीं था।
इनऑपरेटिव खातों में भी यूपी सबसे आगे
निष्क्रिय यानी इनऑपरेटिव जनधन खातों के मामले में भी उत्तर प्रदेश सबसे ऊपर है।
| राज्य | इनऑपरेटिव जनधन खाते |
|---|---|
| उत्तर प्रदेश | 3.23 करोड़ |
| बिहार | 1.59 करोड़ |
| मध्य प्रदेश | 1.35 करोड़ |
| पश्चिम बंगाल | 1.02 करोड़ |
| महाराष्ट्र | 97.94 लाख |
उत्तर प्रदेश में करीब 3.23 करोड़ जनधन खाते इनऑपरेटिव पाए गए। वहीं बिहार में यह संख्या करीब 1.59 करोड़ और मध्य प्रदेश में लगभग 1.35 करोड़ रही।
पश्चिम बंगाल में करीब 1.02 करोड़ तथा महाराष्ट्र में लगभग 97.94 लाख जनधन खाते निष्क्रिय श्रेणी में दर्ज किए गए।
उत्तर प्रदेश में सबसे ज्यादा जनधन खाते
कुल PMJDY खातों की संख्या के मामले में भी उत्तर प्रदेश देश में सबसे आगे है। राज्य में करीब 10.51 करोड़ जनधन खाते दर्ज हैं।
इसके बाद बिहार में करीब 7.01 करोड़, पश्चिम बंगाल में 5.73 करोड़, राजस्थान में 3.87 करोड़ और महाराष्ट्र में करीब 3.85 करोड़ जनधन खाते हैं।
इससे स्पष्ट है कि जिन राज्यों में जनधन खातों की कुल संख्या ज्यादा है, वहां जीरो-बैलेंस और इनऑपरेटिव खातों की संख्या भी बड़ी दिखाई देती है।
केंद्र सरकार के पास किन आंकड़ों की अलग जानकारी नहीं?
RTI के जवाब में केंद्र सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि जनधन खातों के कुछ आंकड़े केंद्रीय स्तर पर अलग-अलग श्रेणियों में उपलब्ध नहीं हैं।
सरकार के मुताबिक, जनधन खातों के बैलेंस, जीरो-बैलेंस खातों और इनऑपरेटिव खातों का लिंग के आधार पर अलग-अलग केंद्रीय आंकड़ा नहीं रखा जाता है।
इसके अलावा केंद्र स्तर पर निम्नलिखित जानकारी भी अलग से उपलब्ध नहीं है:
- 100 रुपये से कम बैलेंस वाले जनधन खाते
- पिछले पांच साल में बंद किए गए जनधन खाते
- संदिग्ध लेनदेन के कारण ब्लॉक या फ्रीज किए गए खाते
- साइबर फ्रॉड के कारण ब्लॉक या फ्रीज किए गए खातों का अलग आंकड़ा
जनधन योजना का उद्देश्य क्या था?
प्रधानमंत्री जनधन योजना को देश में वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से शुरू किया गया था। इसके जरिए उन लोगों को बैंकिंग सिस्टम से जोड़ने पर जोर दिया गया, जिनके पास पहले बैंक खाता नहीं था।
जनधन खातों के जरिए लोगों को बैंकिंग सेवाओं से जोड़ने के साथ-साथ सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे बैंक खाते में पहुंचाने और वित्तीय सेवाओं की पहुंच बढ़ाने की कोशिश की गई।
अब RTI से सामने आए ये आंकड़े यह संकेत देते हैं कि करोड़ों लोगों को बैंकिंग सिस्टम से जोड़ने में योजना ने बड़ा विस्तार हासिल किया है, लेकिन बड़ी संख्या में खातों का निष्क्रिय रहना और जीरो बैलेंस होना इसके इस्तेमाल को लेकर एक महत्वपूर्ण सवाल भी खड़ा करता है।


