12 साल तक Accenture Strategy & Consulting में काम करने के बाद गुरजोत अहलूवालिया ने अपनी कॉरपोरेट नौकरी छोड़ने का फैसला किया है। सीनियर मैनेजर के पद तक पहुंच चुके गुरजोत ने यह कदम किसी मजबूरी में नहीं, बल्कि आर्थिक स्वतंत्रता हासिल करने के बाद अपने पुराने जुनून को पूरा समय देने के लिए उठाया है। अब वह शेयर बाजार में अपना पूरा फोकस लगाएंगे।
कॉरपोरेट दुनिया में अच्छी सैलरी, बोनस, प्रमोशन और नौकरी की सुरक्षा को छोड़ना आसान फैसला नहीं होता। खासकर तब, जब कोई व्यक्ति एक बड़ी कंपनी में सीनियर मैनेजर जैसे पद पर हो। लेकिन गुरजोत अहलूवालिया ने 12 साल की कॉरपोरेट यात्रा के बाद कुछ ऐसा ही फैसला लिया है।
गुरजोत ने सोशल मीडिया पर अपनी नौकरी छोड़ने की जानकारी साझा करते हुए बताया कि उन्होंने 40 साल की उम्र से पहले Financial Independence हासिल कर ली है। आर्थिक आजादी मिलने के बाद अब उनके पास यह तय करने की स्वतंत्रता है कि वह अपना समय किस काम में लगाना चाहते हैं।
उनका अगला लक्ष्य शेयर बाजार में अपनी लंबे समय से चली आ रही दिलचस्पी को फुल-टाइम करियर के रूप में आगे बढ़ाना है।
40 की उम्र से पहले हासिल की Financial Independence
गुरजोत के फैसले की सबसे खास बात यह है कि उन्होंने नौकरी किसी अचानक आई परेशानी या मजबूरी के कारण नहीं छोड़ी। इसके पीछे उनकी Financial Independence की स्थिति अहम है।
उनके लिए आर्थिक स्वतंत्रता का मतलब केवल बैंक खाते में पर्याप्त पैसा होना नहीं है। इसका एक बड़ा हिस्सा यह भी है कि व्यक्ति अपने समय और भविष्य से जुड़े फैसले बिना लगातार वेतन पर निर्भर हुए ले सके।
इसी आर्थिक स्वतंत्रता के बाद गुरजोत ने कॉरपोरेट करियर की दौड़ से बाहर निकलने का फैसला किया। उन्होंने संकेत दिया कि 40 साल की उम्र से पहले यह मुकाम हासिल करना उनके लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि रही।
12 साल तक Accenture में किया काम
गुरजोत अहलूवालिया ने करीब 12 साल तक Accenture Strategy & Consulting में काम किया। इस दौरान वह सीनियर मैनेजर के पद तक पहुंचे।
बड़ी कॉरपोरेट कंपनी में इतने लंबे समय तक काम करने के बाद उनका नौकरी छोड़ना इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि यह फैसला उस समय आया है जब उनके पास एक मजबूत प्रोफेशनल करियर मौजूद था।
लेकिन लंबे समय तक कॉरपोरेट अनुभव लेने के बाद अब वह अपने उस काम को ज्यादा समय देना चाहते हैं, जिसमें उनकी व्यक्तिगत दिलचस्पी रही है—शेयर बाजार और निवेश।
सैलरी और बोनस की निश्चितता जरूर याद आएगी
नौकरी छोड़ने का फैसला लेने के बावजूद गुरजोत इस बात को लेकर पूरी तरह बेपरवाह नहीं हैं कि कॉरपोरेट नौकरी छोड़ने के बाद क्या बदलेगा।
उन्होंने माना कि नियमित सैलरी और अच्छे बोनस की निश्चितता उन्हें जरूर याद आएगी। नौकरी में हर महीने आने वाली तय आय व्यक्ति को वित्तीय स्थिरता देती है, जबकि अपने जुनून को करियर बनाने में आय का स्वरूप अलग हो सकता है।
इसके बावजूद गुरजोत ने अपने लिए समय की आजादी को ज्यादा महत्वपूर्ण माना है।
रोजाना 3 घंटे का कम्यूट भी खत्म
गुरजोत ने अपनी कॉरपोरेट जिंदगी से जुड़ी कुछ ऐसी परेशानियों का भी जिक्र किया, जिनसे अब उन्हें राहत मिलेगी।
उनके मुताबिक लंबे काम के घंटे, करीब 3 घंटे का रोजाना कम्यूट, किसी अचानक आए ईमेल की वजह से पूरे सप्ताह का तनावपूर्ण हो जाना और Performance Appraisal की चिंता जैसी चीजें कॉरपोरेट जीवन का हिस्सा थीं।
अब नौकरी छोड़ने के बाद उन्हें इन चीजों से राहत मिलने की उम्मीद है। उनके लिए यह केवल एक नौकरी छोड़ने का फैसला नहीं, बल्कि अपने समय और दिनचर्या पर दोबारा नियंत्रण हासिल करने जैसा भी है।
Accenture को भी दिया धन्यवाद
नौकरी छोड़ते समय गुरजोत ने अपने पुराने संस्थान के योगदान को भी स्वीकार किया। उन्होंने Accenture को अपने करियर और आर्थिक लक्ष्यों को हासिल करने में महत्वपूर्ण भूमिका देने के लिए धन्यवाद दिया।
12 साल का कॉरपोरेट अनुभव उनके लिए केवल नौकरी तक सीमित नहीं रहा। इस दौरान हासिल की गई प्रोफेशनल और वित्तीय समझ ने उन्हें उस स्थिति तक पहुंचने में मदद की, जहां वह अपने लिए अलग रास्ता चुन सकें।
अब शेयर बाजार में लगाएंगे पूरा समय
गुरजोत का अगला पड़ाव शेयर बाजार है। शेयर बाजार में उनकी लंबे समय से रुचि रही है और अब वह इसे ज्यादा समय देने की योजना बना रहे हैं।
हालांकि, नौकरी छोड़कर शेयर बाजार को फुल-टाइम करना अपने आप में कोई आसान या निश्चित कमाई वाला रास्ता नहीं है। बाजार में जोखिम मौजूद रहता है और नियमित सैलरी जैसी आय की गारंटी नहीं होती।
यही वजह है कि गुरजोत का मामला सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गया है। लोगों की दिलचस्पी इस बात में है कि उन्होंने आर्थिक स्वतंत्रता हासिल करने के लिए किस तरह की वित्तीय योजना अपनाई और उनका FIRE लक्ष्य कितना था।
सोशल मीडिया पर लोगों ने दी बधाई
गुरजोत के फैसले के बाद सोशल मीडिया पर कई लोगों ने उन्हें नई शुरुआत के लिए शुभकामनाएं दीं। कुछ यूजर्स ने Financial Independence को केवल पर्याप्त पैसा जमा करने से कहीं ज्यादा बड़ा लक्ष्य बताया।
लोगों के मुताबिक असली आर्थिक स्वतंत्रता वह स्थिति है, जब व्यक्ति के पास यह चुनने का विकल्प हो कि उसे काम करना है, कितना काम करना है और किस तरह का काम करना है।
गुरजोत की कहानी इसी विचार को सामने रखती है।
FIRE क्या है और क्यों बढ़ रही है इसकी चर्चा?
गुरजोत के फैसले को FIRE यानी Financial Independence, Retire Early की अवधारणा से भी जोड़कर देखा जा रहा है।
FIRE का सामान्य विचार यह है कि व्यक्ति अपनी कमाई का एक हिस्सा लगातार बचाए और निवेश करे, ताकि भविष्य में उसकी निवेश से होने वाली आय और संपत्ति उसे नौकरी पर पूरी तरह निर्भर रहने से मुक्त कर सके।
हालांकि FIRE का मतलब हमेशा पारंपरिक अर्थों में पूरी तरह काम छोड़ देना नहीं होता। कई लोग आर्थिक स्वतंत्रता हासिल करने के बाद नौकरी छोड़कर अपना बिजनेस, निवेश, फ्रीलांसिंग या कोई पसंदीदा काम शुरू करते हैं।
गुरजोत का मामला भी इसी दिशा में दिखाई देता है, जहां उन्होंने कॉरपोरेट करियर छोड़कर शेयर बाजार को ज्यादा समय देने का फैसला किया है।
कितनी संपत्ति जमा की? लोगों की दिलचस्पी बढ़ी
गुरजोत के फैसले के बाद सोशल मीडिया पर एक स्वाभाविक सवाल भी सामने आया—आखिर नौकरी छोड़ने से पहले उन्होंने कितनी संपत्ति जमा की होगी?
एक यूजर ने उनसे उनके FIRE नंबर और उस स्तर तक पहुंचने की वित्तीय स्थिति को लेकर सवाल भी पूछा।
हालांकि, उपलब्ध जानकारी में गुरजोत ने अपनी कुल संपत्ति या सटीक FIRE नंबर सार्वजनिक रूप से साझा नहीं किया है। इसलिए इस बारे में किसी निश्चित रकम का दावा करना सही नहीं होगा।
गुरजोत की कहानी से क्या सीख मिलती है?
गुरजोत अहलूवालिया की कहानी का सबसे बड़ा पहलू यह है कि आर्थिक स्वतंत्रता केवल ज्यादा पैसा कमाने का लक्ष्य नहीं हो सकती। यह व्यक्ति को अपने समय और करियर से जुड़े फैसले खुद लेने का विकल्प भी दे सकती है।
12 साल की कॉरपोरेट नौकरी के बाद सीनियर मैनेजर पद छोड़ना निश्चित रूप से बड़ा फैसला है। लेकिन गुरजोत ने इसे अपने लंबे समय से चले आ रहे जुनून को समय देने के अवसर के तौर पर चुना है।
उनकी कहानी उन लोगों के लिए भी दिलचस्प है जो अच्छी सैलरी वाली नौकरी के साथ-साथ निवेश और Financial Independence की दिशा में काम कर रहे हैं। हालांकि, नौकरी छोड़ने से पहले पर्याप्त बचत, निवेश, खर्चों की योजना और जोखिम सहने की क्षमता को समझना बेहद जरूरी है।
गुरजोत का फैसला यह सवाल जरूर छोड़ता है कि अगर आर्थिक स्वतंत्रता हासिल हो जाए, तो क्या हम भी अपनी पसंद के काम को अपना अगला करियर बना पाएंगे?


