Modi Flour Mills History: उत्तर प्रदेश का मोदीनगर देशभर में अपनी औद्योगिक पहचान के लिए जाना जाता है। इस शहर का नाम उद्योगपति गूजरमल मोदी के नाम से जुड़ा है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि दिल्ली में भी मोदी परिवार की एक ऐसी मिल रही है, जिसने दशकों तक राजधानी की खाद्य जरूरतों को पूरा करने में बड़ी भूमिका निभाई? दक्षिण दिल्ली के ओखला इलाके में स्थित मोदी फ्लोर मिल्स कभी आटा, मैदा और सूजी की सप्लाई के लिए जानी जाती थी।
आज भले ही दिल्ली की सड़कों पर ‘मोदी मिल फ्लाईओवर’ और ‘मोदी मिल’ नाम ज्यादा सुनाई देता हो, लेकिन इसके पीछे का इतिहास काफी पुराना है। इस मिल की शुरुआत 1930 के दशक में हुई थी और लंबे समय तक यह दिल्ली की प्रमुख फ्लोर मिल्स में शामिल रही।
1936 में रखी गई थी मोदी फ्लोर मिल्स की नींव
मोदी फ्लोर मिल्स का इतिहास 1936 से जुड़ा है। इसकी स्थापना उद्योगपति राय बहादुर गूजरमल मोदी ने की थी। उस दौर में दिल्ली तेजी से फैल रही थी और शहर की बढ़ती आबादी के लिए खाद्यान्न की जरूरत भी लगातार बढ़ रही थी।
ऐसे समय में फ्लोर मिल्स का कारोबार बेहद महत्वपूर्ण था। गेहूं को बड़े पैमाने पर मिल में लाया जाता, उसकी सफाई और पिसाई के बाद उससे आटा, मैदा और सूजी जैसे उत्पाद तैयार किए जाते थे।
मोदी फ्लोर मिल्स भी इसी व्यवस्था का एक अहम हिस्सा बनी और धीरे-धीरे दिल्ली में इसकी पहचान मजबूत होती गई।
ओखला में कहां स्थित है मोदी मिल्स?
मोदी फ्लोर मिल्स दक्षिण दिल्ली के ओखला इंडस्ट्रियल एरिया में स्थित है। समय के साथ यह जगह इतनी चर्चित हुई कि आसपास के इलाके की पहचान में भी ‘मोदी मिल’ नाम शामिल हो गया।
दिल्ली में मोदी मिल फ्लाईओवर और इससे जुड़े लैंडमार्क आज भी इस नाम को लोगों के बीच बनाए हुए हैं। यही वजह है कि दिल्ली के पुराने निवासियों के लिए ‘मोदी मिल’ सिर्फ एक औद्योगिक इकाई का नाम नहीं, बल्कि शहर के एक पुराने लैंडमार्क की पहचान भी है।
कभी दिल्ली में बड़े पैमाने पर होती थी आटे की सप्लाई
जिस दौर में पैकेज्ड आटा और आधुनिक रिटेल नेटवर्क आज की तरह आम नहीं थे, उस समय बड़ी फ्लोर मिल्स की भूमिका काफी अहम थी।
मोदी फ्लोर मिल्स में गेहूं की प्रोसेसिंग के बाद आटा, मैदा और सूजी तैयार की जाती थी। इन उत्पादों की सप्लाई दिल्ली और आसपास के बाजारों तक होती थी।
आटे का इस्तेमाल घरों में, जबकि मैदा और सूजी का इस्तेमाल बेकरी, हलवाई और दूसरे खाद्य कारोबारों में किया जाता था। इस लिहाज से यह मिल दिल्ली की रोजमर्रा की खाद्य जरूरतों से भी जुड़ी हुई थी।
मिल में गेहूं से कैसे तैयार होते थे उत्पाद?
फ्लोर मिल का काम सिर्फ गेहूं पीसने तक सीमित नहीं होता। गेहूं के मिल में पहुंचने के बाद उसे पहले साफ किया जाता है। इसके बाद अलग-अलग प्रक्रियाओं के जरिए उसकी पिसाई की जाती है।
पिसाई के दौरान गेहूं से अलग-अलग उत्पाद तैयार किए जाते हैं, जिनमें आटा, मैदा और सूजी प्रमुख हैं। इसके अलावा गेहूं की प्रोसेसिंग से निकलने वाले चोकर का इस्तेमाल भी पशु आहार समेत अन्य कामों में किया जाता है।
यही प्रक्रिया बड़े पैमाने पर संचालित होने के कारण फ्लोर मिल्स शहर के खाद्य सप्लाई सिस्टम का महत्वपूर्ण हिस्सा हुआ करती थीं।
मोदी मिल्स का मालिक कौन है?
मोदी फ्लोर मिल्स का नाम मोदी परिवार के कारोबारी इतिहास से जुड़ा है। हालांकि यहां एक बात समझना जरूरी है कि ‘मोदी ग्रुप’ नाम से जुड़े कारोबार समय के साथ अलग-अलग पारिवारिक समूहों और कंपनियों में बंट चुके हैं।
मोदी परिवार के कारोबारी साम्राज्य में हुए विभाजन के बाद अलग-अलग कारोबार परिवार की अलग-अलग शाखाओं के नियंत्रण में गए। मोदी फ्लोर मिल्स भी बाद में उमेश मोदी समूह से जुड़ी रही।
इसलिए इसे सीधे आज के किसी एक ‘मोदी ग्रुप’ की कंपनी मान लेना सही नहीं होगा। मोदी परिवार की अलग-अलग कारोबारी इकाइयों की अपनी अलग कॉरपोरेट पहचान रही है।
1989 में हुआ था मोदी परिवार के कारोबार का बंटवारा
मोदी परिवार के कारोबारी साम्राज्य में 1989 का पारिवारिक समझौता एक महत्वपूर्ण पड़ाव माना जाता है। इसके बाद परिवार के अलग-अलग सदस्यों और शाखाओं के बीच कारोबार का बंटवारा हुआ।
इस विभाजन के बाद मोदी परिवार के कारोबार कई अलग-अलग समूहों में नजर आने लगे। इसी वजह से आज ‘मोदी ग्रुप’ नाम सुनने पर यह समझना जरूरी है कि बात किस कारोबारी समूह या परिवार की शाखा की हो रही है।
दिल्ली की मोदी फ्लोर मिल्स का संबंध उमेश मोदी समूह से जोड़ा जाता है।
कौन थे गूजरमल मोदी?
गूजरमल मोदी का जन्म 9 अगस्त 1902 को हुआ था। उन्हें भारत के शुरुआती औद्योगिक उद्यमियों में गिना जाता है। उन्होंने अपने परिवार के साथ कारोबार को आगे बढ़ाया और बाद में एक बड़े औद्योगिक साम्राज्य की नींव रखी।
उनका सबसे चर्चित योगदान मोदीनगर की स्थापना से जुड़ा है। उस समय इस इलाके को बेगमाबाद के नाम से जाना जाता था।
गूजरमल मोदी ने यहां औद्योगिक गतिविधियां शुरू कीं और चीनी मिल समेत कई कारोबार खड़े किए। समय के साथ मोदी परिवार का कारोबार चीनी, टेक्सटाइल, इंजीनियरिंग, कंज्यूमर प्रोडक्ट्स और दूसरे क्षेत्रों तक फैल गया।
मोदीनगर और मोदी मिल्स का क्या कनेक्शन है?
मोदीनगर और दिल्ली की मोदी फ्लोर मिल्स का संबंध एक ही कारोबारी परिवार के इतिहास से जुड़ता है, लेकिन दोनों की अपनी अलग कहानी है।
मोदीनगर गूजरमल मोदी की औद्योगिक गतिविधियों से विकसित हुआ शहर है, जबकि मोदी फ्लोर मिल्स दिल्ली में खाद्य प्रसंस्करण और फ्लोर मिल कारोबार से जुड़ी एक पुरानी औद्योगिक इकाई रही है।
यही कारण है कि दिल्ली में ‘मोदी मिल’ नाम सुनते ही बहुत से लोगों को मोदीनगर और मोदी परिवार का इतिहास याद आ जाता है।
क्यों खास है मोदी मिल का नाम?
आज दिल्ली एक आधुनिक महानगर है और खाने-पीने की चीजों की सप्लाई के तरीके भी पूरी तरह बदल चुके हैं। सुपरमार्केट, ऑनलाइन ग्रॉसरी और बड़े पैकेज्ड फूड ब्रांड्स ने बाजार का स्वरूप बदल दिया है।
लेकिन एक समय में बड़ी फ्लोर मिल्स शहर की खाद्य अर्थव्यवस्था की रीढ़ हुआ करती थीं। मोदी फ्लोर मिल्स भी इसी दौर की औद्योगिक विरासत का हिस्सा है।
इसकी सबसे बड़ी पहचान सिर्फ एक मिल के रूप में नहीं, बल्कि दिल्ली के पुराने औद्योगिक इतिहास और शहर के एक चर्चित लैंडमार्क के तौर पर भी बनी हुई है।
निष्कर्ष
ओखला की मोदी फ्लोर मिल्स का इतिहास करीब नौ दशक पुराना है। 1936 में गूजरमल मोदी द्वारा शुरू की गई यह मिल लंबे समय तक दिल्ली में आटा, मैदा और सूजी की सप्लाई से जुड़ी रही।
समय के साथ मोदी परिवार के कारोबार में बदलाव और बंटवारे हुए, जिसके बाद अलग-अलग कारोबारी समूह अस्तित्व में आए। दिल्ली की मोदी फ्लोर मिल्स का संबंध उमेश मोदी समूह से जोड़ा जाता है।
इस तरह दिल्ली का ‘मोदी मिल’ सिर्फ एक फ्लाईओवर या बस स्टॉप का नाम नहीं है, बल्कि इसके पीछे देश के पुराने औद्योगिक इतिहास की एक दिलचस्प कहानी भी छिपी हुई है।


