MCX Gold-Silver Price: मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर हफ्ते के आखिरी कारोबारी दिन यानी 4 सितंबर को सोने और चांदी के वायदा भाव में कमजोरी देखने को मिली। अमेरिकी रोजगार आंकड़ों से पहले निवेशकों में सतर्कता और रुपये की मजबूती का असर बुलियन मार्केट पर नजर आया। वहीं, अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी गोल्ड और सिल्वर कमजोर रहे।
कमोडिटी मार्केट में शुक्रवार को सोने और चांदी की कीमतों पर दबाव देखने को मिला। शाम 4:15 बजे के आसपास MCX पर गोल्ड फ्यूचर्स 0.34 फीसदी यानी 531 रुपये की गिरावट के साथ 1,55,244 रुपये प्रति 10 ग्राम पर कारोबार कर रहा था। इसी तरह सिल्वर फ्यूचर्स 0.31 फीसदी यानी 734 रुपये टूटकर 2,35,320 रुपये प्रति किलोग्राम पर पहुंच गया।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी सोना-चांदी कमजोर
घरेलू बाजार के साथ-साथ विदेशी बाजार में भी बुलियन की कीमतों में हल्की गिरावट दर्ज की गई। अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना करीब 0.02 फीसदी गिरकर 4,472.12 डॉलर प्रति औंस पर था। वहीं, चांदी की कीमत 0.22 फीसदी की कमजोरी के साथ 66.80 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार कर रही थी।
बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक, अमेरिका के नॉन-फॉर्म पेरोल्स (NFP) आंकड़ों से पहले निवेशक किसी बड़े दांव से बच रहे हैं। अमेरिकी रोजगार बाजार से जुड़े ये आंकड़े आगे डॉलर, बॉन्ड यील्ड और फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति को लेकर बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।
रुपये में मजबूती का भी पड़ा असर
MCX पर गोल्ड और सिल्वर की कीमतों पर रुपये की चाल का भी सीधा असर पड़ा है। डॉलर के मुकाबले रुपये में मजबूती आने से घरेलू बाजार में आयातित कमोडिटी की कीमतों पर दबाव बनता है।
3 सितंबर को भारतीय रुपया करीब 0.5 फीसदी मजबूत होकर 94.48 प्रति डॉलर के स्तर पर बंद हुआ था। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतों में ज्यादा बदलाव नहीं होने के बावजूद घरेलू वायदा कीमतों पर कमजोरी देखने को मिली।
इस हफ्ते सोने में रहा जोरदार उतार-चढ़ाव
आनंद राठी शेयर एंड स्टॉक ब्रोकर्स की रिसर्च एनालिस्ट वेदिका नार्वेकर के मुताबिक, उतार-चढ़ाव से भरे इस सप्ताह में सोना करीब 4,480 डॉलर प्रति औंस के आसपास बना रहा। बाजार में अमेरिकी फेडरल रिजर्व के रुख और डॉलर की चाल को लेकर लगातार हलचल रही।
डॉलर में कमजोरी ने सोने को कुछ हद तक सपोर्ट दिया है। इसके अलावा ग्लोबल मनी मैनेजर्स की ओर से पिछले कुछ हफ्तों में गोल्ड में पोजीशन बनाने और गोल्ड ETF में बनी दिलचस्पी ने भी कीमतों को सपोर्ट किया है।
NFP डेटा से तय होगी बाजार की अगली दिशा
लेमन में रिसर्च हेड गौरव गर्ग के अनुसार, अमेरिका की नॉन-फॉर्म पेरोल्स रिपोर्ट बाजार के लिए काफी महत्वपूर्ण रहेगी। रोजगार आंकड़ों में किसी बड़े बदलाव का असर सबसे पहले डॉलर और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड पर दिखाई दे सकता है। इसके बाद इसका प्रभाव सोने और चांदी की कीमतों पर भी पड़ सकता है।
अगर अमेरिकी रोजगार बाजार मजबूत रहता है तो फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों को लेकर बाजार की उम्मीदें बदल सकती हैं। दूसरी ओर, कमजोर रोजगार आंकड़े ब्याज दरों में कटौती की संभावना को बढ़ा सकते हैं, जो आमतौर पर सोने के लिए सकारात्मक माना जाता है।
क्रूड की महंगाई ने भी बढ़ाई चिंता
सोने और चांदी के लिए एक और चुनौती कच्चे तेल की ऊंची कीमतें हैं। ब्रेंट क्रूड 95 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर, जबकि WTI क्रूड 90 डॉलर प्रति बैरल के पार बना हुआ है। इस सप्ताह कच्चे तेल की कीमतों में करीब 10 फीसदी की तेजी देखने को मिली है।
क्रूड की कीमतें लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर रहने से महंगाई बढ़ने का खतरा पैदा हो सकता है। ऐसे में अमेरिकी फेडरल रिजर्व के लिए ब्याज दरों में नरमी करना मुश्किल हो सकता है। ऊंची ब्याज दरें आमतौर पर ऐसे एसेट्स पर दबाव डालती हैं, जिनसे नियमित ब्याज आय नहीं मिलती, और इसका असर सोने की कीमतों पर भी पड़ सकता है।
16 सितंबर की फेड बैठक पर नजर
अब निवेशकों की नजर अमेरिकी फेडरल रिजर्व की अगली पॉलिसी बैठक पर है। फेड 16 सितंबर को ब्याज दरों पर अपना फैसला जारी करेगा। इससे पहले अमेरिका में महंगाई से जुड़े महत्वपूर्ण आंकड़े भी सामने आएंगे।
अगर महंगाई में पर्याप्त कमी नहीं आती है और रोजगार बाजार भी मजबूत बना रहता है, तो ब्याज दरों को लेकर फेड का रुख सख्त रह सकता है। वहीं, महंगाई और रोजगार के आंकड़े कमजोर पड़ते हैं तो बाजार ब्याज दरों में राहत की उम्मीद कर सकता है।
इसलिए आने वाले दिनों में डॉलर, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड, NFP डेटा, महंगाई के आंकड़े और फेड की पॉलिसी सोने-चांदी की कीमतों के लिए सबसे बड़े ट्रिगर साबित हो सकते हैं।


