नेपाल में भीषण बाढ़ और तबाही के बाद लापता लोगों की तलाश का अभियान लगातार जारी है। इसी बीच ऑस्ट्रेलिया ने अपने 36 लापता नागरिकों की तलाश और राहत-बचाव अभियान में मदद के लिए विशेषज्ञों की एक टीम नेपाल भेजी है। इस टीम में अत्याधुनिक ड्रोन संचालित करने वाले विशेषज्ञ भी शामिल हैं।
नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ के बाद राहत और बचाव कार्य तेजी से चल रहा है। मलबे और दुर्गम इलाकों में फंसे लोगों की तलाश के लिए नेपाल के साथ कई देश सहयोग कर रहे हैं। इसी कड़ी में ऑस्ट्रेलिया ने भी आपदा राहत विशेषज्ञों की एक विशेष टीम नेपाल भेजी है।
ऑस्ट्रेलियाई सरकार ने अपने 36 नागरिकों के अब तक लापता होने को लेकर गंभीर चिंता जताई है। सरकार के मुताबिक, रात भर में दो ऑस्ट्रेलियाई नागरिकों के सुरक्षित होने की पुष्टि हुई है, लेकिन अभी भी बड़ी संख्या में लोगों का पता नहीं चल पाया है।
मलबे और दुर्गम इलाकों में ड्रोन से होगी तलाश
ऑस्ट्रेलिया की ओर से भेजी गई 15 सदस्यीय ऑस्ट्रेलियाई आपदा सहायता प्रतिक्रिया टीम नेपाल सरकार के अनुरोध पर तैनात की गई है। टीम में बड़ी संख्या में राज्य की आपातकालीन सेवाओं से जुड़े ड्रोन पायलट शामिल हैं।
इन विशेषज्ञों की मदद से ऐसे इलाकों का हवाई सर्वे किया जाएगा, जहां राहतकर्मियों के लिए सीधे पहुंचना मुश्किल है। ड्रोन का इस्तेमाल मलबे, दुर्गम पहाड़ी क्षेत्रों और अन्य संभावित स्थानों पर जीवित लोगों के संकेत तलाशने के लिए किया जा सकता है।
न्यू साउथ वेल्स फायर एंड रेस्क्यू के कमिश्नर जेरेमी फ्यूट्रेल ने शुक्रवार को सिडनी एयरपोर्ट पर मीडिया से बातचीत में कहा कि अभी भी कुछ स्थानों पर लोगों के जीवित मिलने की उम्मीद है। उन्होंने बताया कि टीम में विशेष रूप से प्रशिक्षित ड्रोन पायलट शामिल हैं, जो अलग-अलग तरह के ड्रोन का संचालन कर सकते हैं।
उनके मुताबिक, कुछ ड्रोन बड़े इलाकों का हवाई सर्वे करने में सक्षम हैं, जबकि कुछ ऐसे स्थानों तक पहुंच सकते हैं जहां इंसानी बचाव दल के लिए पहुंचना बेहद मुश्किल हो सकता है।
ऑस्ट्रेलिया के 7 पुलिस विशेषज्ञ भी पहुंचेंगे नेपाल
ड्रोन टीम के अलावा ऑस्ट्रेलियन फेडरल पुलिस के 7 विशेषज्ञ भी नेपाल पहुंचेंगे। इन विशेषज्ञों की भूमिका आपदा में मारे गए या लापता लोगों की पहचान करने में मदद करना होगी।
ऑस्ट्रेलियाई अधिकारियों के मुताबिक, नेपाल को उसकी जरूरत के मुताबिक तकनीकी और विशेषज्ञ सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। राहत अभियान में ऑस्ट्रेलिया की कोशिश सिर्फ अपने नागरिकों की तलाश तक सीमित नहीं है, बल्कि नेपाल के व्यापक बचाव प्रयासों में भी सहयोग करना है।
पहले से नेपाल में मौजूद हैं 19 ऑस्ट्रेलियाई अधिकारी
ऑस्ट्रेलियाई सरकार ने गुरुवार को अतिरिक्त सहायता दल की तैनाती की घोषणा की थी। विदेश मंत्री पेनी वोंग के अनुसार, 19 ऑस्ट्रेलियाई अधिकारी पहले से ही नेपाल में मौजूद हैं।
इनमें कांसुलर अधिकारी, मानवीय सहायता से जुड़े पुलिसकर्मी और रक्षा तथा पुलिस विभाग के जवान शामिल हैं। ये अधिकारी स्थानीय प्रशासन के साथ समन्वय करके राहत एवं बचाव से जुड़े कार्यों में सहायता कर रहे हैं।
नेपाल के विदेश मंत्री ने भी इससे पहले अंतरराष्ट्रीय समुदाय से विशेष और तकनीकी सहायता की जरूरत बताई थी। ऐसे में ऑस्ट्रेलिया की ड्रोन और विशेषज्ञ टीम की तैनाती को बचाव अभियान में तकनीकी सहयोग के तौर पर देखा जा रहा है।
36 ऑस्ट्रेलियाई नागरिक अब भी लापता
ऑस्ट्रेलिया के ट्रेजरर जिम चाल्मर्स ने शुक्रवार को बताया कि 36 ऑस्ट्रेलियाई नागरिकों का अभी तक पता नहीं चल पाया है। उन्होंने कहा कि सरकार इन लोगों की सुरक्षा को लेकर बेहद चिंतित है।
चाल्मर्स ने ABC न्यूज ब्रेकफास्ट से बातचीत में कहा कि 36 ऑस्ट्रेलियाई नागरिकों के बारे में अभी भी गंभीर चिंता बनी हुई है। हालांकि, दो लोगों के सुरक्षित होने की पुष्टि से कुछ राहत जरूर मिली है।
ऑस्ट्रेलियाई मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, लापता नागरिकों के कुछ परिजन खुद भी नेपाल पहुंचकर अपने स्तर पर तलाश में जुट गए हैं।
नेपाल में अब भी जारी है बचाव अभियान
ग्लेशियर का एक हिस्सा टूटने के बाद 26 अगस्त को आई अचानक बाढ़ ने नेपाल के कई इलाकों में भारी तबाही मचाई। बड़ी संख्या में लोगों की मौत हुई है और हजारों लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं।
नेपाल सरकार के अनुसार, लापता लोगों में विदेशी नागरिक भी शामिल हैं। चीन की सीमा के नजदीक समेत कई दुर्गम क्षेत्रों में बचाव अभियान जारी है।
हालांकि समय बीतने के साथ मलबे में जीवित लोगों के मिलने की संभावना कम होती जा रही है, लेकिन राहत और बचाव दल अभी भी संभावित स्थानों पर लगातार खोज कर रहे हैं। ऐसे में ऑस्ट्रेलिया की हाईटेक ड्रोन टीम से उन इलाकों की निगरानी में मदद मिलने की उम्मीद है, जहां पारंपरिक बचाव दलों के लिए पहुंचना चुनौतीपूर्ण है।
तकनीक बनी उम्मीद की नई किरण
नेपाल की इस आपदा में ड्रोन जैसी तकनीक का इस्तेमाल राहत एवं बचाव अभियान को नई क्षमता दे सकता है। ऊंचे पहाड़ी इलाकों, मलबे और दुर्गम स्थानों की तेजी से निगरानी करके संभावित रूप से फंसे लोगों की पहचान करने में मदद मिल सकती है।
ऑस्ट्रेलिया की टीम का नेपाल पहुंचना ऐसे समय में हुआ है जब बचाव अभियान के लिए हर संभव तकनीकी और अंतरराष्ट्रीय सहायता की जरूरत है। अब नजर इस बात पर है कि ड्रोन और विशेषज्ञों की मदद से क्या मलबे और दुर्गम इलाकों से जिंदगी के नए संकेत मिल पाते हैं।


