बच्चों का बार-बार “बोर हो रहा हूं” कहना हमेशा इस बात का संकेत नहीं होता कि उनके पास करने के लिए कुछ नहीं है। कई बार इसके पीछे थकान, भूख, नींद, स्क्रीन की आदत या माता-पिता के साथ समय बिताने की इच्छा हो सकती है। ऐसे में बच्चे को हर बार मोबाइल, टीवी या नया खिलौना देने के बजाय उसकी बात समझना और उसे खुद समाधान खोजने का मौका देना ज्यादा बेहतर होता है।
बच्चों की जिंदगी में बोरियत एक सामान्य अनुभव है। लेकिन आज के समय में जब टीवी, मोबाइल, वीडियो गेम और दूसरी डिजिटल एक्टिविटीज आसानी से उपलब्ध हैं, बच्चों के लिए खाली समय बिताना थोड़ा मुश्किल हो सकता है। यही वजह है कि कई बच्चे कुछ मिनट खाली बैठते ही पैरेंट्स से कहते हैं- “मैं बोर हो रहा हूं।”
हालांकि, हर बार बच्चे की इस बात का मतलब यह नहीं होता कि उसे कोई नया खिलौना या मनोरंजन चाहिए। छोटे बच्चे कई अलग-अलग भावनाओं को व्यक्त करने के लिए एक ही शब्द का इस्तेमाल कर सकते हैं। वह थका हुआ, भूखा, बेचैन या अकेला महसूस कर रहा हो सकता है और इसे “बोरियत” कह सकता है।
इसलिए समझदार पैरेंट्स के लिए जरूरी है कि वे बच्चे को तुरंत व्यस्त करने के बजाय पहले यह समझने की कोशिश करें कि आखिर वह ऐसा क्यों महसूस कर रहा है।

बच्चे के बार-बार बोर होने की क्या वजह हो सकती है?
1. बच्चे को ध्यान और साथ की जरूरत हो सकती है
कई बार बच्चा सिर्फ इसलिए बोर होने की बात करता है क्योंकि वह माता-पिता के साथ समय बिताना चाहता है। खासकर जब पैरेंट्स काम में व्यस्त हों, तो बच्चा किसी एक्टिविटी की मांग करने के बजाय “बोर हो रहा हूं” कहकर आपका ध्यान आकर्षित कर सकता है।
ऐसे समय में तुरंत मोबाइल या टीवी देने के बजाय कुछ मिनट उसके साथ बैठकर बात करना ज्यादा उपयोगी हो सकता है। उससे पूछें कि वह कैसा महसूस कर रहा है और अभी उसके मन में क्या चल रहा है।
2. भूख, थकान या नींद की कमी भी वजह हो सकती है
छोटे बच्चे हमेशा अपनी भावनाओं को सही तरीके से पहचान नहीं पाते। भूख लगने, नींद पूरी न होने या ज्यादा थकान होने पर भी वे चिड़चिड़े होकर कह सकते हैं कि उन्हें बोरियत हो रही है।
अगर बच्चा अचानक किसी काम में रुचि नहीं ले रहा है, तो यह देखना जरूरी है कि उसने समय पर खाना खाया है या नहीं और उसे आराम की जरूरत तो नहीं है।
3. रोज के रूटीन से बदलाव की जरूरत
एक ही तरह के खेल, पढ़ाई और रूटीन से बच्चे का मन ऊब सकता है। उसे कुछ नया सीखने, देखने या करने की इच्छा हो सकती है।
ऐसे में बोरियत को समस्या मानने के बजाय इसे बच्चे की जिज्ञासा बढ़ाने के अवसर के रूप में देखा जा सकता है। नई कहानी पढ़ना, ड्रॉइंग करना, घर में कोई छोटा प्रयोग करना या आउटडोर गेम खेलना ऐसे विकल्प हो सकते हैं।
4. हर समय मनोरंजन की आदत
अगर बच्चे को हर खाली समय में मोबाइल, टीवी, वीडियो गेम या कोई दूसरी एक्टिविटी मिलती रहती है, तो धीरे-धीरे उसे बिना मनोरंजन के समय बिताना मुश्किल लग सकता है।
ऐसे बच्चे जब अकेले होते हैं तो खुद कोई खेल या काम ढूंढने के बजाय जल्दी कह सकते हैं कि वे बोर हो रहे हैं। इसलिए बच्चों को धीरे-धीरे self-directed play, यानी खुद से खेल या एक्टिविटी चुनने की आदत डालना भी जरूरी है।
बच्चा बोर हो तो पैरेंट्स करें ये 3 काम
1. पहले बच्चे की फीलिंग को समझें
बच्चा जब कहे कि वह बोर हो रहा है, तो तुरंत यह न कहें कि “जाओ, खुद कुछ करो।” पहले उसकी बात सुनें और उसकी भावना को स्वीकार करें।
आप उससे प्यार से पूछ सकते हैं- “तुम्हें किस तरह की चीज करने का मन है?” या “क्या तुम थके हुए हो या कुछ मजेदार करना चाहते हो?”
इस तरह की बातचीत बच्चे को अपनी भावनाओं को पहचानने और उन्हें शब्दों में व्यक्त करने में मदद कर सकती है।
2. हर बार समाधान खुद न बताएं
बच्चे के बोर होते ही मोबाइल, टीवी या नया खिलौना देना आसान समाधान लग सकता है, लेकिन हर बार ऐसा करने से बच्चा अपनी समस्या का समाधान खुद खोजने की कोशिश कम कर सकता है।
इसके बजाय उससे खुले सवाल पूछें, जैसे:
- “पिछली बार बोर होने पर तुमने क्या किया था?”
- “अभी तुम्हारे पास कौन-कौन से विकल्प हैं?”
- “क्या तुम कुछ बनाना या ड्रॉ करना चाहोगे?”
- “क्या तुम मेरे साथ कोई छोटा काम करना चाहोगे?”
इससे बच्चा धीरे-धीरे अपने लिए एक्टिविटी चुनना सीख सकता है और उसकी निर्णय लेने की क्षमता भी विकसित हो सकती है।
3. फ्री टाइम को क्रिएटिव टाइम बनाना सिखाएं
बोरियत को हमेशा नकारात्मक चीज की तरह देखने की जरूरत नहीं है। खाली समय बच्चों को अपनी कल्पना और क्रिएटिविटी का इस्तेमाल करने का मौका दे सकता है।
पैरेंट्स बच्चे को कई छोटे और आसान विकल्प दे सकते हैं, जैसे:
- ड्रॉइंग या कलरिंग करना
- अपनी कहानी बनाना
- किताब पढ़ना
- ब्लॉक्स से कुछ बनाना
- पौधों में पानी देना
- खिलौने व्यवस्थित करना
- घर के किसी आसान काम में मदद करना
- आउटडोर गेम खेलना
- पेपर या क्राफ्ट से कुछ बनाना
ध्यान रखें कि हर एक्टिविटी पैरेंट्स को तय करने की जरूरत नहीं है। कुछ समय बच्चे को खुद सोचने और अपने तरीके से खेलने के लिए भी दें।
बोरियत बच्चों के लिए हमेशा बुरी नहीं होती
बच्चे का कभी-कभी बोर होना बिल्कुल सामान्य हो सकता है। हर खाली मिनट को किसी स्क्रीन या एक्टिविटी से भर देना जरूरी नहीं है। कुछ समय बिना किसी तय मनोरंजन के बिताने पर बच्चा अपनी कल्पना का इस्तेमाल करके खुद खेलने, सोचने और कुछ नया करने के तरीके खोज सकता है।
पैरेंट्स का काम हर बार बच्चे की बोरियत खत्म करना नहीं, बल्कि उसे बोरियत को संभालना और उसका रचनात्मक इस्तेमाल करना सिखाना है।
हालांकि, अगर बच्चा लगातार उदास, बहुत चिड़चिड़ा, किसी भी गतिविधि में रुचि न लेने वाला या रोजमर्रा के कामों से अलग-थलग नजर आता है, तो इसे सिर्फ बोरियत मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ऐसी स्थिति में बच्चे के व्यवहार में आए दूसरे बदलावों पर भी ध्यान देना जरूरी है और जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञ की सलाह ली जा सकती है।
निष्कर्ष: अगली बार जब आपका बच्चा “बोर हो रहा हूं” कहे, तो तुरंत उसके हाथ में मोबाइल देने के बजाय कुछ पल उसके साथ बात करें। उसकी जरूरत समझें, उसे विकल्पों के बारे में सोचने दें और फिर उसे खुद कोई एक्टिविटी चुनने का मौका दें। यही छोटी-सी आदत आगे चलकर बच्चे में आत्मनिर्भरता, रचनात्मक सोच और समस्या सुलझाने की क्षमता विकसित करने में मदद कर सकती है।


