Stock Market Gain: कृष्ण जन्माष्टमी के मौके पर 4 सितंबर को भारतीय शेयर बाजार में शानदार तेजी देखने को मिली। सेंसेक्स शुरुआती कारोबार में 730 अंक तक चढ़ गया, जबकि निफ्टी ने एक बार फिर 24,000 का स्तर पार कर लिया। लगातार चार कारोबारी सत्रों की गिरावट के बाद बाजार में आई इस तेजी से निवेशकों के बीच सकारात्मक माहौल बना है। बाजार की इस तेजी के पीछे वैल्यू बाइंग से लेकर एशियाई बाजारों की मजबूती और रुपये में सुधार तक कई अहम वजहें हैं।
भारतीय शेयर बाजार में शुक्रवार, 4 सितंबर को कारोबार की शुरुआत मजबूती के साथ हुई। बीएसई सेंसेक्स हरे निशान में खुलने के बाद एक समय पिछली क्लोजिंग से करीब 730 अंक चढ़कर 76,883.14 के स्तर तक पहुंच गया। वहीं एनएसई निफ्टी भी तेजी के साथ कारोबार करता नजर आया और करीब 132 अंकों की बढ़त के साथ 24,005.75 के हाई पर पहुंच गया।
इस तेजी ने निवेशकों को राहत दी है, क्योंकि इससे पहले लगातार चार कारोबारी सत्रों में घरेलू शेयर बाजार गिरावट के साथ बंद हुआ था।
पिछले सत्र में बाजार का क्या रहा हाल?
इससे पहले 3 सितंबर को बाजार में शुरुआत में तेजी देखने को मिली थी, लेकिन कारोबार बढ़ने के साथ बिकवाली हावी हो गई। कारोबार के अंत में सेंसेक्स 417.49 अंक गिरकर 76,152.86 पर बंद हुआ। निफ्टी भी करीब 41 अंक फिसलकर 23,873.45 के स्तर पर बंद हुआ।
हालांकि, दिन के दौरान सेंसेक्स एक समय पिछली क्लोजिंग से 354.13 अंक ऊपर जाकर 76,924.48 के हाई तक पहुंचा था। निफ्टी भी करीब 111 अंक चढ़कर 24,025.40 के स्तर तक पहुंचा था।
ऐसे में 4 सितंबर की तेजी को बाजार में निचले स्तरों पर खरीदारी और वैश्विक संकेतों से मिले सपोर्ट के तौर पर देखा जा रहा है।
बाजार में तेजी की 6 बड़ी वजहें
1. निचले स्तरों पर वैल्यू बाइंग
लगातार चार सत्रों की गिरावट के बाद निवेशकों ने चुनिंदा शेयरों में निचले स्तरों पर खरीदारी शुरू की। इसे वैल्यू बाइंग कहा जाता है।
जब किसी शेयर या इंडेक्स में लगातार गिरावट आती है और निवेशकों को मौजूदा कीमतें आकर्षक लगती हैं, तो वे खरीदारी का मौका तलाशते हैं। 4 सितंबर की तेजी में इस तरह की खरीदारी का भी योगदान माना जा रहा है।
2. एशियाई बाजारों से मिले मजबूत संकेत
भारतीय बाजार को एशियाई शेयर बाजारों की तेजी से भी सपोर्ट मिला। शुक्रवार को प्रमुख एशियाई बाजारों में मजबूत कारोबार देखने को मिला।
हांगकांग का हैंग सेंग करीब 2 फीसदी ऊपर कारोबार कर रहा था। दक्षिण कोरिया का KOSPI करीब 1.3 फीसदी, जापान का Nikkei 225 करीब 1.11 फीसदी और चीन का SSE Composite करीब 0.35 फीसदी की बढ़त में था।
इसके अलावा अमेरिकी बाजार भी पिछले सत्र में मजबूत रहे थे। रातभर के कारोबार में अमेरिकी प्रमुख इंडेक्स 1 फीसदी से ज्यादा की बढ़त के साथ बंद हुए। वैश्विक बाजारों के इस सकारात्मक रुख का असर भारतीय इक्विटी मार्केट पर भी दिखाई दिया।
3. फेड की ब्याज दरों को लेकर चिंता कम
अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दर नीति को लेकर बाजार की चिंता कुछ कम हुई है। फेड गवर्नर क्रिस्टोफर वालर के बयान से भी निवेशकों का सेंटीमेंट बेहतर हुआ।
उन्होंने संकेत दिया कि अगर आने वाले आर्थिक आंकड़े महंगाई के दबाव में कमी की पुष्टि करते हैं, तो वह अगली पॉलिसी मीटिंग में ब्याज दरों में बदलाव नहीं करने के पक्ष में रहेंगे।
ब्याज दरों को लेकर नरम रुख की उम्मीद से वैश्विक बाजारों में जोखिम लेने की क्षमता बढ़ सकती है। इसका सकारात्मक असर भारतीय बाजारों पर भी देखने को मिला।
4. India VIX में करीब 4 फीसदी की गिरावट
शेयर बाजार में तेजी के दौरान India VIX में भी गिरावट दर्ज की गई। बाजार की अस्थिरता को मापने वाला यह इंडेक्स करीब 4 फीसदी गिरकर 10.85 के स्तर पर आ गया।
VIX में गिरावट आमतौर पर इस बात का संकेत देती है कि बाजार में निकट अवधि की अनिश्चितता अपेक्षाकृत कम हुई है। कम वोलैटिलिटी के माहौल में निवेशकों का भरोसा बढ़ सकता है और खरीदारी को सपोर्ट मिल सकता है।
5. रुपये में भी सुधार
भारतीय मुद्रा में मजबूती ने भी बाजार के सेंटीमेंट को सपोर्ट किया। शुरुआती कारोबार में रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 5 पैसे मजबूत होकर 94.46 रुपये प्रति डॉलर पर पहुंच गया।
इससे पहले 3 सितंबर को रुपया डॉलर के मुकाबले 22 पैसे मजबूत होकर 94.51 रुपये पर बंद हुआ था।
देश में विदेशी मुद्रा जमा के बेहतर आंकड़ों से भी रुपये को सपोर्ट मिला। भारतीय रिजर्व बैंक के अनुसार, 31 अगस्त तक FCNR(B) जमा के रूप में 127.226 अरब डॉलर की राशि आई थी। विदेशी मुद्रा की उपलब्धता में सुधार से रुपये की स्थिति को मजबूती मिल सकती है।
6. कैपिटल मार्केट शेयरों में जोरदार खरीदारी
सेटलमेंट प्राइस मैकेनिज्म को लेकर सेबी की ओर से दिए गए संकेतों के बाद कैपिटल मार्केट से जुड़े शेयरों में भी खरीदारी देखने को मिली।
BSE करीब 4.5 फीसदी, एंजेल वन करीब 5.4 फीसदी और ग्रो करीब 2.5 फीसदी ऊपर कारोबार करते नजर आए। इसके अलावा नुवामा वेल्थ और मोतीलाल ओसवाल जैसे शेयरों में भी तेजी रही।
दरअसल, सेबी ने डेरिवेटिव्स के सेटलमेंट प्राइस मैकेनिज्म में संभावित बदलाव को लेकर कंसल्टेशन पेपर जारी करने की बात कही है। इससे कैपिटल मार्केट से जुड़ी कंपनियों के शेयरों में निवेशकों की दिलचस्पी बढ़ी।
चार दिन की गिरावट के बाद बाजार को मिली राहत
4 सितंबर की तेजी इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे पहले बाजार लगातार चार कारोबारी सत्रों में गिरावट के साथ बंद हुआ था। ऐसे में शुक्रवार की बढ़त को निवेशकों के लिए राहत के तौर पर देखा जा रहा है।
हालांकि, बाजार में आगे भी उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। वैश्विक बाजारों का रुख, अमेरिकी फेड की नीतियां, रुपये की चाल, विदेशी निवेश और घरेलू आर्थिक आंकड़े बाजार की दिशा को प्रभावित कर सकते हैं।
इसलिए निवेशकों को केवल एक दिन की तेजी देखकर जल्दबाजी में कोई निवेश निर्णय लेने से बचना चाहिए और अपने जोखिम के अनुसार ही रणनीति बनानी चाहिए।
Disclaimer
यह लेख केवल जानकारी के उद्देश्य से है। शेयर बाजार में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। किसी भी शेयर या अन्य वित्तीय साधन में निवेश करने से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से सलाह लें। NewsJagran.in किसी भी निवेश में पैसा लगाने की सलाह नहीं देता है।


