Career Growth Tips: ऑफिस में सिर्फ मेहनत करना ही करियर में आगे बढ़ने की गारंटी नहीं है। सही समय पर अपनी उपलब्धियां दिखाना, नई जिम्मेदारियों के लिए आगे आना और सैलरी बातचीत में सही रणनीति अपनाना भी जरूरी है। भारतीय रिक्रूटर जुही भाटिया ने ऐसे ही 9 ‘थोड़े चालाक’ लेकिन व्यावहारिक तरीके बताए हैं, जो प्रोफेशनल ग्रोथ में मदद कर सकते हैं।
आज के प्रतिस्पर्धी माहौल में हर कर्मचारी चाहता है कि उसे समय पर प्रमोशन, बेहतर सैलरी और बड़ी जिम्मेदारी मिले। इसके लिए मेहनत और अच्छे प्रदर्शन की भूमिका तो अहम है ही, लेकिन सिर्फ चुपचाप काम करते रहना हमेशा पर्याप्त नहीं होता।
कई बार कर्मचारी अच्छा काम करते हैं, लेकिन अपनी उपलब्धियों के बारे में बात नहीं करते। वहीं कुछ लोग हर अतिरिक्त काम अपने ऊपर ले लेते हैं, जिससे उनकी अपनी प्राथमिकताएं पीछे छूट जाती हैं। ऐसे में करियर को आगे बढ़ाने के लिए काम के साथ-साथ स्मार्ट वर्कप्लेस स्ट्रैटेजी अपनाना भी जरूरी हो जाता है।
भारतीय रिक्रूटर जुही भाटिया ने सोशल मीडिया पर करियर से जुड़ी 9 ऐसी सलाह साझा की हैं, जिन्हें उन्होंने ‘थोड़ा चालाक’ बताया है। इनका उद्देश्य ऑफिस में किसी को मात देना नहीं, बल्कि अपने काम की सही वैल्यू समझना और बेहतर अवसरों के लिए खुद को तैयार करना है।
1. काम जल्दी खत्म हो जाए तो खुद को खाली न दिखाएं
अगर आपने अपनी जिम्मेदारी तय समय से पहले पूरी कर ली है, तो तुरंत यह बताना जरूरी नहीं कि आपके पास अब कोई काम नहीं है। अपने बचे हुए समय का इस्तेमाल पुराने काम को दोबारा जांचने, आने वाले टास्क की तैयारी करने या अपनी स्किल बेहतर करने में किया जा सकता है।
हर बार यह जताना कि आप खाली हैं, आपके ऊपर लगातार अतिरिक्त काम डालने की वजह भी बन सकता है। इसलिए अपनी क्षमता और समय का संतुलित इस्तेमाल करना बेहतर रणनीति है।
2. अपनी उपलब्धियों का क्रेडिट लेना सीखें
टीम के साथ काम करते समय सहयोग जरूरी है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि आप अपने योगदान को पूरी तरह नजरअंदाज कर दें।
अगर आपने किसी प्रोजेक्ट को संभाला, कोई महत्वपूर्ण समस्या हल की या कंपनी के लिए बेहतर परिणाम हासिल किए हैं, तो जरूरत पड़ने पर इसे सामने रखें। अपनी उपलब्धियों के बारे में बात करना हमेशा आत्मप्रचार नहीं होता। यह मैनेजमेंट को यह समझाने का तरीका भी है कि संगठन में आपका योगदान क्या है।
3. सिर्फ बॉस नहीं, कंपनी के दूसरे वरिष्ठ अधिकारियों तक भी पहुंच बनाएं
कई कर्मचारी मानते हैं कि उनके करियर के लिए सिर्फ उनके सीधे बॉस की राय मायने रखती है। हालांकि बड़ी कंपनियों में कई बार दूसरे वरिष्ठ अधिकारियों की नजर में आपकी पहचान भी महत्वपूर्ण हो सकती है।
मीटिंग में उपयोगी सवाल पूछना, अपनी राय स्पष्ट तरीके से रखना और महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट्स में योगदान देना आपकी प्रोफेशनल विजिबिलिटी बढ़ा सकता है।
इसका मतलब ऑफिस में बेवजह अपनी मौजूदगी दिखाना नहीं है। कोशिश यह होनी चाहिए कि आपका काम आपकी पहचान बनाए।
4. नौकरी बदलने का प्लान नहीं है, फिर भी कभी-कभी इंटरव्यू दें
जुही भाटिया की सलाह में यह पॉइंट काफी दिलचस्प है। उनका कहना है कि अगर आप फिलहाल नौकरी बदलने के बारे में नहीं सोच रहे हैं, तब भी समय-समय पर इंटरव्यू देने से आपको अपने मौजूदा मार्केट वैल्यू का अंदाजा हो सकता है।
इससे आपको पता चल सकता है कि आपके अनुभव और स्किल के लिए दूसरी कंपनियां किस स्तर की भूमिका और सैलरी ऑफर कर रही हैं।
हालांकि इंटरव्यू को केवल जानकारी जुटाने के लिए इस्तेमाल करने के बजाय इसे प्रोफेशनल तरीके से लेना जरूरी है और किसी कंपनी का समय अनावश्यक रूप से बर्बाद नहीं करना चाहिए।
5. हर अनचाही जिम्मेदारी अपने ऊपर लेने से बचें
ऑफिस में कुछ काम ऐसे होते हैं जिन्हें करने के लिए कोई आगे नहीं आना चाहता। मीटिंग के नोट्स बनाना, किसी इवेंट की तैयारी करना या टीम के छोटे-मोटे गैर-जरूरी काम संभालना इसका उदाहरण हो सकता है।
कभी-कभार सहयोग करना अच्छी बात है, लेकिन हर बार ऐसे काम के लिए आगे आने से आपकी अपनी मुख्य जिम्मेदारियां प्रभावित हो सकती हैं।
इसलिए यह समझना जरूरी है कि कौन-सा अतिरिक्त काम आपके अनुभव और करियर में वास्तविक मूल्य जोड़ रहा है और कौन-सा सिर्फ आपका समय ले रहा है।
6. हर योग्यता पूरी न होने पर भी बड़े अवसर के लिए आवेदन करें
कई कर्मचारी किसी प्रमोशन या बड़ी भूमिका के लिए इसलिए आवेदन नहीं करते क्योंकि उन्हें लगता है कि वे नौकरी की 100 फीसदी योग्यताएं पूरी नहीं करते।
अगर आपको लगता है कि आपके पास नई जिम्मेदारी संभालने की क्षमता है, तो केवल कुछ कमियों की वजह से खुद को मौका देने से पीछे न हटें। कई बार नौकरी के दौरान नई स्किल सीखना भी भूमिका का हिस्सा होता है।
इसलिए बेहतर पद, ज्यादा जिम्मेदारी या वेतन बढ़ोतरी की मांग करने में जरूरत से ज्यादा संकोच नहीं करना चाहिए।
7. अपने बॉस के लिए काम आसान बनाएं
ऑफिस में भरोसेमंद कर्मचारी बनने का एक अच्छा तरीका है कि आप केवल समस्या लेकर बॉस के पास न जाएं, बल्कि उसके संभावित समाधान पर भी विचार करें।
उदाहरण के लिए, किसी समस्या की जानकारी समय पर देना, जरूरी डेटा पहले से तैयार रखना या किसी मीटिंग से पहले महत्वपूर्ण जानकारी साझा कर देना आपके मैनेजर के लिए काम आसान कर सकता है।
इस तरह आप सिर्फ निर्देश लेने वाले कर्मचारी के बजाय ऐसे व्यक्ति के तौर पर अपनी पहचान बना सकते हैं, जिस पर महत्वपूर्ण काम के दौरान भरोसा किया जा सके।
8. किसी एक काम के अकेले विशेषज्ञ बनकर न रह जाएं
किसी खास काम को कंपनी में सिर्फ आपके द्वारा किया जाना शुरुआत में आपकी ताकत लग सकता है। लेकिन लंबे समय में यही चीज आपके करियर की रफ्तार रोक सकती है।
अगर हर बार वही काम करने के लिए आपकी जरूरत पड़ती है, तो संभव है कि आपको नई जिम्मेदारियां लेने का मौका कम मिले।
इसलिए जरूरी है कि आप अपने काम की जानकारी किसी भरोसेमंद सहयोगी के साथ साझा करें और उसे जरूरी प्रक्रिया समझाएं। इससे आप खुद को नई और बड़ी जिम्मेदारियों के लिए उपलब्ध कर पाएंगे।
9. सैलरी की बातचीत में चुप रहना भी एक रणनीति है
सैलरी या प्रमोशन की बातचीत के दौरान अपनी अपेक्षा बताने के बाद तुरंत बोलते रहना जरूरी नहीं है।
मसलन, अगर आपने अपनी सैलरी की अपेक्षा बता दी है, तो सामने वाले को जवाब देने का समय दें। कई कर्मचारी बातचीत में असहज चुप्पी से बचने के लिए खुद ही अपनी मांग कम कर देते हैं या अतिरिक्त सफाई देने लगते हैं।
ऐसे समय में थोड़ी खामोशी आपको अपनी बात पर कायम रहने में मदद कर सकती है। हालांकि सैलरी बातचीत में अपनी मांग हमेशा तर्क, अनुभव, जिम्मेदारी और बाजार के अनुरूप रखनी चाहिए।
क्या ऑफिस में ‘चालाकी’ करना जरूरी है?
इन 9 तरीकों को ऑफिस पॉलिटिक्स या दूसरों को पीछे छोड़ने की रणनीति के तौर पर नहीं देखना चाहिए। इनका मूल उद्देश्य यह समझना है कि मेहनत के साथ अपने काम की वैल्यू दिखाना भी जरूरी है।
अगर आप अच्छा काम करते हैं लेकिन उसके बारे में कभी बात नहीं करते, हर अतिरिक्त काम बिना सोचे स्वीकार कर लेते हैं या बेहतर अवसर मांगने से डरते हैं, तो आपकी क्षमता का पूरा फायदा आपको नहीं मिल पाएगा।
करियर ग्रोथ के लिए इसलिए तीन चीजों का संतुलन जरूरी है—अच्छा प्रदर्शन, सही समय पर अपनी उपलब्धियों को सामने रखना और रणनीतिक तरीके से नए अवसर तलाशना।
आखिरकार, ऑफिस में आगे बढ़ने का मतलब सिर्फ ज्यादा घंटे काम करना नहीं है। यह भी जरूरी है कि आप जानें कि कहां मेहनत करनी है, कहां अपनी बात रखनी है और कब अपने लिए बेहतर अवसर मांगना है।


