नई दिल्ली। केंद्र सरकार के 1.1 करोड़ से अधिक कर्मचारियों और पेंशनर्स की नजर इस समय आठवें वेतन आयोग (8th Pay Commission) की सिफारिशों पर टिकी हुई है। आयोग के सदस्य विभिन्न कर्मचारी संगठनों, राज्यों और अन्य हितधारकों से लगातार चर्चा कर रहे हैं। इसी बीच कर्मचारियों की ओर से एक ऐसी मांग सामने आई है, जिसे स्वीकार कर लिया गया तो न्यूनतम बेसिक वेतन में ऐतिहासिक बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।
कर्मचारी संगठनों का दावा है कि मौजूदा आर्थिक परिस्थितियों को देखते हुए न्यूनतम वेतन तय करने का पुराना तरीका अब वास्तविक खर्चों को नहीं दर्शाता। इसी वजह से परिवार की इकाई (Family Unit) की गणना बदलने की मांग की जा रही है।
क्या है फैमिली यूनिट फॉर्मूला?
भारत में वेतन आयोग न्यूनतम वेतन तय करने के लिए लंबे समय से Aykroyd Formula और परिवार आधारित खर्च के सिद्धांत का उपयोग करता रहा है। इस मॉडल में यह आकलन किया जाता है कि एक कर्मचारी और उसके आश्रित परिवार के लिए सम्मानजनक जीवनयापन हेतु न्यूनतम कितना खर्च आवश्यक है। सातवें वेतन आयोग तक एक परिवार को औसतन 3 यूनिट माना गया था। इसमें कर्मचारी, जीवनसाथी और बच्चों की जरूरतों को एक निश्चित अनुपात में शामिल किया जाता था। लेकिन कर्मचारी संगठनों का कहना है कि आज के समय में शिक्षा, स्वास्थ्य, किराया, परिवहन और दैनिक उपभोग की वस्तुओं की लागत कई गुना बढ़ चुकी है। इसलिए पुराना फॉर्मूला वास्तविकता से मेल नहीं खाता।
3 यूनिट से 5 यूनिट करने की मांग क्यों?
नेशनल काउंसिल ऑफ जॉइंट कंसल्टेटिव मशीनरी (NC-JCM) ने आठवें वेतन आयोग के समक्ष परिवार की गणना बदलने का प्रस्ताव रखा है।
प्रस्ताव के अनुसार:
- कर्मचारी = 1 यूनिट
- जीवनसाथी = 1 यूनिट
- पहला बच्चा = 0.8 यूनिट
- दूसरा बच्चा = 0.8 यूनिट
- माता-पिता = 0.8 यूनिट
इस प्रकार कुल 5.2 यूनिट बनती हैं, जिसे व्यवहारिक रूप से 5 यूनिट माना जा सकता है। कर्मचारी संगठनों का तर्क है कि आज अधिकांश कर्मचारियों पर माता-पिता की जिम्मेदारी भी होती है। ऐसे में केवल पति-पत्नी और बच्चों को आधार बनाकर न्यूनतम वेतन तय करना उचित नहीं है।
₹18,000 से ₹69,000 तक कैसे पहुंचेगी सैलरी?
सातवें वेतन आयोग में न्यूनतम बेसिक सैलरी ₹18,000 निर्धारित की गई थी। कर्मचारी संगठनों का दावा है कि यदि 5 यूनिट फैमिली मॉडल स्वीकार किया जाता है तो न्यूनतम वेतन की गणना पूरी तरह बदल जाएगी। उन्होंने लगभग 3.833 के फिटमेंट फैक्टर का प्रस्ताव दिया है। कैलकुलेशन इस प्रकार समझी जा सकती है: ₹18,000 × 3.833 = ₹68,994
यानी न्यूनतम बेसिक वेतन लगभग ₹69,000 तक पहुंच सकता है। हालांकि यह केवल कर्मचारी संगठनों की मांग है। अंतिम फैसला आठवें वेतन आयोग की रिपोर्ट और केंद्र सरकार की मंजूरी के बाद ही होगा।
फिटमेंट फैक्टर क्या होता है?
फिटमेंट फैक्टर वह गुणक (Multiplier) होता है जिसके आधार पर मौजूदा बेसिक वेतन को नए वेतनमान में बदला जाता है। सातवें वेतन आयोग में 2.57 का फिटमेंट फैक्टर लागू किया गया था। इसी वजह से छठे वेतन आयोग के समय की ₹7,000 की न्यूनतम बेसिक सैलरी बढ़कर ₹18,000 हो गई थी। अब कर्मचारी संगठन 3.68 से 3.83 के बीच फिटमेंट फैक्टर की मांग कर रहे हैं।
महंगाई और जीवनयापन लागत क्यों बनी बड़ी वजह?
पिछले कुछ वर्षों में कई जरूरी खर्च तेजी से बढ़े हैं: निजी शिक्षा का खर्च, स्वास्थ्य सेवाओं की लागत, मकान किराया, खाद्य वस्तुओं की कीमतें, परिवहन और ईंधन खर्च. विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आयोग महंगाई और वास्तविक जीवनयापन लागत को प्राथमिकता देता है तो न्यूनतम वेतन में उल्लेखनीय बढ़ोतरी की संभावना बन सकती है।
कर्मचारियों और पेंशनर्स पर क्या होगा असर?
आठवें वेतन आयोग की सिफारिशों का सीधा असर केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनर्स पर पड़ेगा। यदि न्यूनतम बेसिक वेतन में बड़ी बढ़ोतरी होती है तो:
- महंगाई भत्ते की गणना भी बढ़ेगी।
- मकान किराया भत्ता (HRA) बढ़ सकता है।
- यात्रा भत्ता (TA) में संशोधन संभव है।
- पेंशनर्स की बेसिक पेंशन में भी बढ़ोतरी हो सकती है।
- सरकारी कर्मचारियों की क्रय शक्ति मजबूत होगी।
कब लागू हो सकती हैं सिफारिशें?
आठवें वेतन आयोग का गठन 3 नवंबर 2025 को किया गया था। आयोग विभिन्न पक्षों से सुझाव प्राप्त कर रहा है और अपनी रिपोर्ट तैयार करने की प्रक्रिया में है। कर्मचारी संगठनों को उम्मीद है कि आयोग की सिफारिशें 1 जनवरी 2026 से प्रभावी मानी जा सकती हैं। हालांकि अंतिम निर्णय केंद्र सरकार द्वारा रिपोर्ट स्वीकार करने के बाद ही लिया जाएगा।
निष्कर्ष
₹18,000 से ₹69,000 न्यूनतम बेसिक सैलरी की चर्चा फिलहाल कर्मचारी संगठनों के प्रस्ताव पर आधारित है। यदि आठवां वेतन आयोग 5 यूनिट फैमिली मॉडल और 3.833 फिटमेंट फैक्टर को स्वीकार करता है तो यह सरकारी कर्मचारियों के लिए अब तक की सबसे बड़ी वेतन वृद्धि साबित हो सकती है। फिलहाल सभी की नजर आयोग की अंतिम रिपोर्ट और केंद्र सरकार के फैसले पर टिकी हुई है।
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