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    # UP के सरकारी इंजीनियर ने खड़ा किया था खरबों का JP साम्राज्य, फिर कर्ज ने किया बर्बाद; अब अदाणी के हाथों में कंपनी की कमान **JP Associates Story:** उत्तर प्रदेश के एक सरकारी इंजीनियर ने अपनी नौकरी छोड़कर कारोबार की दुनिया में कदम रखा और देखते ही देखते हजारों करोड़ रुपये का कारोबारी साम्राज्य खड़ा कर दिया। यह कहानी है जयप्रकाश गौड़ और जयप्रकाश एसोसिएट्स (JP Associates) की। यमुना एक्सप्रेसवे, बड़े बांध, सीमेंट प्लांट, बिजली परियोजनाएं और रियल एस्टेट जैसे क्षेत्रों में अपनी पहचान बनाने वाला यह समूह कभी देश के प्रमुख इंफ्रास्ट्रक्चर कारोबारियों में गिना जाता था। लेकिन जरूरत से ज्यादा कर्ज, आर्थिक मंदी और कारोबार में आई मुश्किलों ने इस साम्राज्य की नींव हिला दी। आखिरकार कंपनी दिवालिया प्रक्रिया में पहुंच गई और अब इसका अधिग्रहण अदाणी समूह ने कर लिया है। **बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली।** कारोबार की दुनिया में कई ऐसी कहानियां हैं, जहां एक छोटे से सफर की शुरुआत करने वाला व्यक्ति बड़ा कारोबारी साम्राज्य खड़ा कर देता है। लेकिन कभी-कभी यही साम्राज्य समय के साथ कर्ज और आर्थिक चुनौतियों के कारण ढह भी जाता है। जयप्रकाश एसोसिएट्स की कहानी भी कुछ ऐसी ही है। एक समय उत्तर भारत में जेपी समूह का नाम बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के लिए जाना जाता था। कंपनी ने सड़क निर्माण से लेकर बिजली उत्पादन, सीमेंट, होटल और रियल एस्टेट तक कई क्षेत्रों में अपनी मौजूदगी बनाई। ग्रेटर नोएडा से आगरा को जोड़ने वाला यमुना एक्सप्रेसवे भी इसी समूह की बड़ी उपलब्धियों में शामिल रहा। जेपी समूह की पहचान केवल बड़े प्रोजेक्ट तक सीमित नहीं थी। लाखों निवेशकों और कर्मचारियों का भी इस कंपनी से जुड़ाव था। लेकिन लगातार बढ़ते कर्ज और कारोबार में आई गिरावट ने कंपनी को ऐसी स्थिति में पहुंचा दिया, जहां से वापसी मुश्किल हो गई। अब अदाणी समूह ने दिवालिया समाधान प्रक्रिया के जरिए जयप्रकाश एसोसिएट्स के अधिग्रहण का रास्ता साफ कर लिया है। आइए जानते हैं कि आखिर कैसे एक सरकारी इंजीनियर ने यह कारोबारी साम्राज्य खड़ा किया और फिर यह आर्थिक संकट में कैसे फंस गया। ## सरकारी इंजीनियर से कारोबारी बनने तक का सफर जयप्रकाश गौड़ का जन्म वर्ष 1931 में उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर जिले में हुआ था। उन्होंने सिविल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा हासिल किया और इसके बाद उत्तर प्रदेश सरकार के सिंचाई विभाग में जूनियर इंजीनियर के तौर पर नौकरी शुरू की। सरकारी सेवा के दौरान उन्हें निर्माण और इंजीनियरिंग से जुड़ी परियोजनाओं को समझने का मौका मिला। हालांकि, उनके मन में खुद का कारोबार शुरू करने की इच्छा थी। करीब सात साल तक सरकारी नौकरी करने के बाद उन्होंने नौकरी छोड़ दी और निर्माण कार्यों की ठेकेदारी शुरू कर दी। शुरुआत में उनके पास कारोबार के लिए बहुत ज्यादा पूंजी नहीं थी। उन्होंने अपनी करीब 10 हजार रुपये की बचत से छोटे-मोटे निर्माण और सड़क निर्माण के ठेके लेने शुरू किए। धीरे-धीरे अनुभव और काम के आधार पर उन्हें बड़ी परियोजनाएं मिलने लगीं। वर्ष 1979 में उन्होंने जयप्रकाश एसोसिएट्स की स्थापना की। शुरुआत में कंपनी का मुख्य कारोबार निर्माण और इंजीनियरिंग से जुड़ा था। समय के साथ कंपनी ने बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में अपनी जगह बनाई और जेपी समूह का विस्तार होता चला गया। ## बांध से लेकर बिजली और सीमेंट तक फैला कारोबार जेपी समूह ने निर्माण क्षेत्र में अपनी पहचान मजबूत करने के बाद जलविद्युत परियोजनाओं की तरफ कदम बढ़ाया। टिहरी बांध और विष्णुप्रयाग जलविद्युत परियोजना जैसे बड़े प्रोजेक्ट्स से कंपनी की पहचान राष्ट्रीय स्तर पर मजबूत हुई। इसके बाद समूह ने सीमेंट, बिजली उत्पादन, होटल और रियल एस्टेट जैसे क्षेत्रों में भी कारोबार शुरू किया। कंपनी का उद्देश्य केवल निर्माण ठेके लेने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के विकास और संचालन तक पहुंच गया। इस विस्तार ने जयप्रकाश एसोसिएट्स को देश के प्रमुख इंफ्रास्ट्रक्चर समूहों में शामिल कर दिया। कंपनी के पास अलग-अलग क्षेत्रों में कारोबार था और निवेशकों के बीच भी इसकी अच्छी पहचान बन गई थी। ## यमुना एक्सप्रेसवे ने दिलाई देशभर में पहचान जेपी समूह के इतिहास में यमुना एक्सप्रेसवे परियोजना को एक बड़ा पड़ाव माना जाता है। वर्ष 2003 में ग्रेटर नोएडा से आगरा के बीच एक्सप्रेसवे बनाने की परियोजना जेपी समूह को मिली। करीब 165 किलोमीटर लंबे इस एक्सप्रेसवे का निर्माण समूह की कंपनी जेपी इंफ्राटेक ने किया। इस परियोजना के तहत सड़क निर्माण के साथ-साथ एक्सप्रेसवे के आसपास रियल एस्टेट विकास के अधिकार भी मिले। इससे कंपनी को इंफ्रास्ट्रक्चर और प्रॉपर्टी कारोबार दोनों में विस्तार का अवसर मिला। वर्ष 2012 में यमुना एक्सप्रेसवे को आम लोगों के लिए खोल दिया गया। इसके बाद दिल्ली-एनसीआर और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के बीच सड़क संपर्क बेहतर हुआ। इस परियोजना ने जेपी समूह को देशभर में पहचान दिलाई। इसी दौरान कंपनी ने ग्रेटर नोएडा में बुद्ध इंटरनेशनल सर्किट का निर्माण भी किया। इस रेसिंग सर्किट पर वर्ष 2011 से 2013 तक फॉर्मूला-1 इंडियन ग्रां प्री का आयोजन हुआ। यह परियोजना भारत में मोटरस्पोर्ट्स के लिहाज से काफी चर्चित रही। ## 2008 की मंदी के बाद बिगड़ने लगे हालात तेजी से विस्तार कर रहे जेपी समूह के लिए वर्ष 2008 की वैश्विक आर्थिक मंदी बड़ा झटका साबित हुई। मंदी के बाद रियल एस्टेट बाजार में सुस्ती आने लगी। मकानों की बिक्री प्रभावित हुई और निर्माण परियोजनाओं से मिलने वाली रकम में देरी होने लगी। दूसरी तरफ बिजली और सीमेंट कारोबार में भी कंपनी को उम्मीद के मुताबिक कमाई नहीं हो रही थी। बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में भारी निवेश की जरूरत थी, जबकि कारोबार से पर्याप्त नकदी नहीं आ रही थी। बुद्ध इंटरनेशनल सर्किट जैसी बड़ी परियोजनाओं पर हुआ निवेश भी कंपनी के वित्तीय दबाव को बढ़ाने वाले कारकों में शामिल रहा। कंपनी ने अपने कारोबार को बढ़ाने के लिए बड़ी रकम उधार ली थी, लेकिन आमदनी और नकदी का प्रवाह कर्ज चुकाने की रफ्तार के अनुरूप नहीं रहा। कर्ज का बोझ बढ़ने के साथ कंपनी को अपनी कई संपत्तियां और कारोबारी हिस्सेदारियां बेचनी पड़ीं। इसके बावजूद वित्तीय स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ। धीरे-धीरे जेपी समूह का संकट गहराता चला गया। ## घर खरीदारों से लेकर बैंकों तक, हर कोई हुआ परेशान जेपी समूह का आर्थिक संकट केवल कंपनी और बैंकों तक सीमित नहीं रहा। इसका असर उन हजारों लोगों पर भी पड़ा, जिन्होंने कंपनी के रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स में अपने घर बुक किए थे। नोएडा और ग्रेटर नोएडा में जेपी विशटाउन जैसे बड़े प्रोजेक्ट्स में बड़ी संख्या में घर खरीदारों का पैसा फंस गया। कई लोगों ने अपनी जीवनभर की बचत लगाकर घर खरीदे थे, लेकिन उन्हें तय समय पर फ्लैट नहीं मिल पाए। इस स्थिति ने जेपी समूह की मुश्किलें और बढ़ा दीं। एक तरफ बैंक और वित्तीय संस्थान अपना कर्ज वापस मांग रहे थे, वहीं दूसरी तरफ घर खरीदार अपने घरों का इंतजार कर रहे थे। ## 2017 में शुरू हुई दिवालिया प्रक्रिया जेपी समूह की मुश्किलें सबसे पहले उसकी सहायक कंपनी जेपी इंफ्राटेक के मामले में सामने आईं। अगस्त 2017 में कंपनी के खिलाफ दिवालिया प्रक्रिया शुरू की गई। बाद में सुरक्षा समूह ने समाधान प्रक्रिया के तहत जेपी इंफ्राटेक के अधिग्रहण की जिम्मेदारी संभाली। हालांकि, इससे पूरे जेपी समूह की वित्तीय परेशानियां खत्म नहीं हुईं। समूह की प्रमुख कंपनी जयप्रकाश एसोसिएट्स लिमिटेड भी भारी कर्ज के कारण संकट में फंस गई। 3 जून 2024 को नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) की इलाहाबाद पीठ ने जयप्रकाश एसोसिएट्स के खिलाफ कॉरपोरेट दिवालिया समाधान प्रक्रिया शुरू करने का आदेश दिया। इस मामले में वित्तीय लेनदारों ने करीब 57,185 करोड़ रुपये के बकाये का दावा किया था। इसके बाद कंपनी के कारोबार और संपत्तियों के समाधान के लिए बोली प्रक्रिया शुरू हुई। कई बड़े कारोबारी समूहों ने कंपनी को खरीदने में दिलचस्पी दिखाई। ## वेदांता ने लगाई बड़ी बोली, लेकिन अदाणी ने मारी बाजी जयप्रकाश एसोसिएट्स के अधिग्रहण की प्रक्रिया में वेदांता समूह और अदाणी समूह समेत कई कंपनियों ने हिस्सा लिया। सितंबर 2025 में वेदांता समूह की 17,000 करोड़ रुपये से अधिक की बोली की खबर सामने आई थी। इससे माना जा रहा था कि कंपनी का नियंत्रण अनिल अग्रवाल के नेतृत्व वाले वेदांता समूह के पास जा सकता है। हालांकि, बाद में समाधान प्रक्रिया में स्थिति बदल गई। नवंबर 2025 में वित्तीय लेनदारों ने अदाणी एंटरप्राइजेज की 14,535 करोड़ रुपये की समाधान योजना को मंजूरी दे दी। इस प्रस्ताव को कर्जदाताओं के करीब 89 फीसदी वोट मिले। इसके बाद 17 मार्च 2026 को NCLT की इलाहाबाद पीठ ने अदाणी एंटरप्राइजेज की समाधान योजना को मंजूरी दे दी। इस फैसले के साथ जयप्रकाश एसोसिएट्स के अधिग्रहण का रास्ता साफ हो गया। हालांकि, वेदांता समूह ने इस फैसले को नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल (NCLAT) में चुनौती दी थी। मई 2026 में NCLAT ने वेदांता की अपील खारिज कर दी। इससे अदाणी समूह के अधिग्रहण की प्रक्रिया को आगे बढ़ने का रास्ता मिला। ## अब अदाणी समूह के नियंत्रण में जेपी की संपत्तियां जयप्रकाश एसोसिएट्स के समाधान के बाद समूह की कई संपत्तियां और कारोबार अदाणी समूह की रणनीति का हिस्सा बन गए हैं। अदाणी समूह की अलग-अलग कंपनियां जेपी समूह की विभिन्न कारोबारी इकाइयों और परिसंपत्तियों में हिस्सेदारी हासिल कर रही हैं। इसी क्रम में अदाणी पावर ने जेपी पावर से जुड़ी हिस्सेदारी का अधिग्रहण किया। वहीं, जेपी समूह के कुछ सीमेंट प्लांटों को अदाणी समूह ने डालमिया भारत को बेचने का फैसला किया। इस तरह जिस जेपी समूह ने कभी उत्तर भारत में बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के जरिए अपनी अलग पहचान बनाई थी, उसका कारोबारी स्वरूप अब पूरी तरह बदल चुका है। जयप्रकाश गौड़ की कहानी कारोबार की दुनिया में बड़े सपने, तेजी से विस्तार और वित्तीय अनुशासन के महत्व को समझाती है। महज 10 हजार रुपये की बचत से शुरू हुआ सफर देश के बड़े कारोबारी साम्राज्य तक पहुंचा, लेकिन भारी कर्ज और नकदी की कमी ने अंततः इस साम्राज्य को दिवालिया प्रक्रिया तक पहुंचा दिया। **Source:** उपलब्ध कारोबारी रिपोर्टों और दिवालिया समाधान प्रक्रिया से जुड़ी जानकारी पर आधारित। jp-associates-jayprakash-gaur-rise-fall-adani-takeover-story
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Reading: 8th Pay Commission: दिल्ली में कब लगेगा 8वें वेतन आयोग का दरबार? नोट कर लें ये 2 जरूरी तारीखें, वेतन बढ़ोतरी पर होगी सीधी चर्चा
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8th Pay Commission: दिल्ली में कब लगेगा 8वें वेतन आयोग का दरबार? नोट कर लें ये 2 जरूरी तारीखें, वेतन बढ़ोतरी पर होगी सीधी चर्चा

Namam Sharma
Last updated: 2026/07/26 at 10:13 अपराह्न
Namam Sharma - Senior Editor – Newsjagran
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5 Min Read
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नई दिल्ली: 8th Pay Commission को लेकर केंद्रीय कर्मचारियों के लिए एक अहम अपडेट सामने आया है। 8वें केंद्रीय वेतन आयोग ने दिल्ली में केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों के संगठनों, एसोसिएशनों, फेडरेशनों और यूनियनों के साथ बैठक की तारीखों का ऐलान कर दिया है। इन बैठकों में कर्मचारी संगठन वेतन, भत्तों, पेंशन और अन्य सेवा संबंधी मुद्दों पर अपनी मांगें सीधे आयोग के सामने रख सकेंगे।

Contents
7 और 10 अगस्त को होगी दिल्ली में अहम बैठक31 जुलाई तक करना होगा आवेदनकिन संगठनों को मिलेगा बैठक में शामिल होने का मौका?दिल्ली के बाहर भी होंगी बैठकेंकर्मचारियों के लिए क्यों महत्वपूर्ण हैं ये बैठकें?8th Pay Commission Delhi Meeting: महत्वपूर्ण तारीखेंनिष्कर्ष

यदि आपका संगठन भी इस प्रक्रिया का हिस्सा बनना चाहता है, तो 31 जुलाई 2026 की अंतिम तारीख से पहले आवेदन करना जरूरी होगा। आइए जानते हैं पूरी जानकारी।

7 और 10 अगस्त को होगी दिल्ली में अहम बैठक

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8वें केंद्रीय वेतन आयोग ने 23 जुलाई 2026 को जारी नोटिफिकेशन में बताया कि दिल्ली में कर्मचारी संगठनों के साथ 7 अगस्त और 10 अगस्त 2026 को बैठकें आयोजित की जाएंगी।

ये बैठकें आयोग की परामर्श प्रक्रिया (Consultation Process) का हिस्सा हैं, जिसके तहत विभिन्न कर्मचारी संगठनों से सुझाव और मांगें लेकर अंतिम सिफारिशें तैयार की जाएंगी।

इन बैठकों में मुख्य रूप से इन मुद्दों पर चर्चा होगी—

  • नए वेतन ढांचे (Pay Structure)
  • महंगाई भत्ता (DA) और अन्य भत्ते
  • पेंशन व्यवस्था
  • सेवा शर्तों में सुधार
  • कर्मचारियों की अन्य लंबित मांगें

आयोग का उद्देश्य कर्मचारियों की राय को शामिल करते हुए संतुलित और व्यावहारिक वेतन संरचना तैयार करना है।

31 जुलाई तक करना होगा आवेदन

दिल्ली में होने वाली इन बैठकों में भाग लेने के इच्छुक कर्मचारी संगठनों को 31 जुलाई 2026 तक ऑनलाइन आवेदन करना होगा।

आवेदन करते समय संगठन को अपना Unique Memo ID देना अनिवार्य होगा।

हालांकि सभी संगठनों को बैठक में शामिल होने की अनुमति नहीं मिलेगी।

किन संगठनों को मिलेगा बैठक में शामिल होने का मौका?

आयोग ने इसके लिए कुछ शर्तें भी तय की हैं।

बैठक में वही संगठन शामिल हो सकेंगे जिन्होंने—

  • आयोग को पहले ही अपना मेमोरेंडम (Memorandum) जमा कर दिया हो।
  • अभी तक आयोग के साथ दिल्ली या किसी अन्य राज्य/केंद्र शासित प्रदेश में बैठक नहीं की हो।
  • निर्धारित समय सीमा के भीतर आवेदन किया हो।

बैठक का समय और स्थान चयनित संगठनों को बाद में अलग से सूचित किया जाएगा।

दिल्ली के बाहर भी होंगी बैठकें

8वां वेतन आयोग केवल दिल्ली तक सीमित नहीं रहेगा। आयोग आने वाले महीनों में देश के विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में भी कर्मचारी संगठनों के साथ बैठक करेगा।

दिल्ली-एनसीआर से बाहर के संगठन अपने राज्य या केंद्र शासित प्रदेश में होने वाली बैठक के लिए आवेदन कर सकते हैं। आवश्यकता पड़ने पर आयोग निकटवर्ती शहर में भी बैठक आयोजित कर सकता है।

आगामी बैठकों का पूरा कार्यक्रम आयोग की आधिकारिक वेबसाइट पर जारी किया जाएगा।

कर्मचारियों के लिए क्यों महत्वपूर्ण हैं ये बैठकें?

8वें वेतन आयोग की सिफारिशें भविष्य में लाखों केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के वेतन एवं पेंशन पर असर डालेंगी। इसलिए कर्मचारी संगठनों द्वारा दिए जाने वाले सुझाव आयोग की अंतिम रिपोर्ट तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

यही वजह है कि कर्मचारी संगठन इन बैठकों को अपनी मांगों को सीधे सरकार तक पहुंचाने का सबसे बड़ा अवसर मान रहे हैं।

8th Pay Commission Delhi Meeting: महत्वपूर्ण तारीखें

विवरणतारीख
ऑनलाइन आवेदन की अंतिम तिथि31 जुलाई 2026
पहली बैठक7 अगस्त 2026
दूसरी बैठक10 अगस्त 2026

निष्कर्ष

8वें वेतन आयोग की दिल्ली में होने वाली बैठकें केंद्रीय कर्मचारियों के लिए बेहद अहम मानी जा रही हैं। 7 और 10 अगस्त को कर्मचारी संगठन वेतन, भत्तों, पेंशन और सेवा शर्तों से जुड़े अपने सुझाव आयोग के सामने रखेंगे। यदि कोई पात्र संगठन इन बैठकों में भाग लेना चाहता है, तो उसे 31 जुलाई 2026 तक आवेदन करना होगा। इन बैठकों से मिलने वाले सुझाव आगे चलकर 8वें वेतन आयोग की अंतिम सिफारिशों और संभावित वेतन बढ़ोतरी की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

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By Namam Sharma Senior Editor – Newsjagran
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नमम शर्मा, Newsjagran के सीनियर एडिटर हैं। बिज़नेस न्यूज़, कमोडिटी बाज़ार, सोना-चांदी भाव, पेट्रोल-डीजल रेट और फाइनेंस में 9 साल का अनुभव। हिंदी डिजिटल पत्रकारिता के जानकार।
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