Mushroom Farming Success Story: अगर आपके पास बिजनेस शुरू करने के लिए बड़ी पूंजी नहीं है, तब भी सफलता हासिल की जा सकती है। कर्नाटक के महेश हनुमंत कोलूर ने इसका बेहतरीन उदाहरण पेश किया है। उन्होंने महज 500 रुपये से मशरूम की खेती शुरू की और आज उनका कारोबार हर महीने करीब 3 लाख रुपये का टर्नओवर कर रहा है। अब वे सिर्फ ताजे मशरूम ही नहीं, बल्कि वैल्यू-एडेड प्रोडक्ट्स बनाकर भी अच्छी कमाई कर रहे हैं।
500 रुपये से शुरू हुआ सफल कारोबार
आज के समय में अधिकांश लोग अपना बिजनेस शुरू करना चाहते हैं, लेकिन शुरुआती निवेश की कमी उनके सपनों के बीच सबसे बड़ी बाधा बन जाती है। हालांकि कुछ ऐसे बिजनेस भी हैं जिन्हें बेहद कम लागत में शुरू किया जा सकता है। मशरूम की खेती उनमें से एक है।
कर्नाटक के रहने वाले महेश हनुमंत कोलूर ने कृषि में डिप्लोमा करने के बाद वर्ष 2021 में अपने घर के केवल 10×10 फीट के एक छोटे कमरे से मशरूम की खेती शुरू की। शुरुआत में उन्होंने केवल 65 रुपये में एक किलो ऑयस्टर मशरूम स्पॉन खरीदा और गेहूं के भूसे तथा पॉलीबैग की मदद से करीब 30 मशरूम बैग तैयार किए। इस पूरी प्रक्रिया में उनका कुल खर्च 500 रुपये से भी कम आया।
पहली फसल से मिला आत्मविश्वास
शुरुआती दौर आसान नहीं था। अनुभव की कमी के कारण 30 में से 10 बैग खराब हो गए। हालांकि बाकी बैगों से उन्हें लगभग 10 किलो मशरूम की पैदावार मिली।
महेश ने इस मशरूम को स्थानीय बाजार में 180 से 220 रुपये प्रति किलो की कीमत पर बेचा, जिससे करीब दो महीने में उन्हें लगभग 2,000 रुपये की कमाई हुई। यही पहली कमाई उनके लिए आगे बढ़ने की प्रेरणा बनी।
मुनाफे को दोबारा कारोबार में लगाया
पहली कमाई खर्च करने के बजाय महेश ने पूरा पैसा दोबारा अपने बिजनेस में निवेश किया। उन्होंने इस बार 200 मशरूम बैग तैयार किए और साफ-सफाई, नमी तथा तापमान नियंत्रण पर विशेष ध्यान दिया।
करीब तीन महीने बाद उनकी मेहनत रंग लाई और उन्हें लगभग 250 किलो मशरूम की पैदावार मिली। इसे उन्होंने औसतन 300 रुपये प्रति किलो की कीमत पर बेचकर अच्छा मुनाफा कमाया।
महेश बताते हैं कि उन्होंने मशरूम की खेती किसी बड़े संस्थान से नहीं सीखी, बल्कि ट्रायल एंड एरर के जरिए लगातार प्रयोग करते हुए अनुभव हासिल किया।
ऑयस्टर के साथ शुरू की मिल्की मशरूम की खेती
लगातार बढ़ते अनुभव के साथ वर्ष 2022 में महेश ने अपने कारोबार का विस्तार किया। उन्होंने ऑयस्टर मशरूम के साथ-साथ मिल्की मशरूम की खेती भी शुरू की।
उन्होंने ऐसी किस्मों का चयन किया जो स्थानीय मौसम में आसानी से उगाई जा सकें और जिनकी बाजार में अच्छी मांग हो। महेश के अनुसार, ऑयस्टर और मिल्की मशरूम की मांग बटन मशरूम की तुलना में अधिक रहती है, जिससे किसानों को बेहतर कीमत मिलने की संभावना रहती है।
नुकसान से बचने के लिए बनाए वैल्यू-एडेड प्रोडक्ट्स
ताजे मशरूम जल्दी खराब हो जाते हैं। इस चुनौती से बचने के लिए महेश ने मशरूम से बने प्रोसेस्ड और वैल्यू-एडेड उत्पाद तैयार करना शुरू किया।
उन्होंने सबसे पहले ऑर्गेनिक ऑयस्टर मशरूम, रागी और गुड़ से बनी हेल्दी मशरूम कुकीज तैयार कीं। शुरुआत में उन्होंने इन्हें दोस्तों और परिवार के लोगों को चखाया। सकारात्मक प्रतिक्रिया मिलने के बाद लैब टेस्ट कराया, जिसमें इनका लो ग्लाइसेमिक इंडेक्स सामने आया। यही वजह है कि ये हेल्थ कॉन्शियस लोगों और डायबिटीज के मरीजों के लिए भी बेहतर विकल्प मानी जा रही हैं।
1,000 बैग क्षमता वाली नई यूनिट शुरू की
बढ़ती मांग को देखते हुए वर्ष 2023 में महेश ने 30×20 फीट की नई मशरूम उत्पादन यूनिट स्थापित की।
इस यूनिट में एक समय में लगभग 1,000 मशरूम बैग तैयार किए जा सकते हैं। वर्तमान में यहां से प्रतिदिन लगभग 50 किलो ऑयस्टर और मिल्की मशरूम का उत्पादन हो रहा है।
महेश का कहना है कि उनका उद्देश्य केवल मशरूम बेचना नहीं बल्कि लोगों तक हेल्दी और ऑर्गेनिक फूड प्रोडक्ट्स पहुंचाने वाला मजबूत ब्रांड तैयार करना है।
मशरूम पाउडर, अचार और कुकीज से बढ़ी कमाई
आज उनकी यूनिट में प्रतिदिन लगभग 45 किलो मशरूम से अलग-अलग उत्पाद तैयार किए जाते हैं, जिनमें शामिल हैं—
- मशरूम कुकीज
- मशरूम चकली
- मशरूम अचार
- मशरूम पाउडर
- सूखे मशरूम
सूखे मशरूम की बिरयानी और सूप बनाने में अच्छी मांग है, जबकि मशरूम पाउडर हेल्थ कॉन्शियस ग्राहकों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रहा है।
कीमत की बात करें तो—
- ताजा मशरूम: करीब 400 रुपये प्रति किलो
- 200 ग्राम मशरूम अचार: 150 रुपये
- 200 ग्राम मशरूम पाउडर: 500 रुपये
महेश के अनुसार प्रोसेस्ड प्रोडक्ट्स बेचने से उनकी आय में कई गुना बढ़ोतरी हुई है।
हर महीने 3 लाख रुपये का टर्नओवर
आज महेश का मशरूम कारोबार हर महीने लगभग 3 लाख रुपये का टर्नओवर कर रहा है। उनके उत्पाद किसान बाजारों, स्थानीय किराना दुकानों, चाय की दुकानों और होटलों तक पहुंच रहे हैं।
इसके अलावा वे मशरूम की खेती सीखने वाले युवाओं को प्रशिक्षण भी देते हैं और कम लागत में सफल मशरूम बिजनेस शुरू करने के व्यावहारिक तरीके सिखाते हैं।
कम निवेश वालों के लिए प्रेरणा
महेश हनुमंत कोलूर की सफलता इस बात का प्रमाण है कि यदि सही योजना, लगातार सीखने की इच्छा और मेहनत हो तो बेहद कम निवेश से भी बड़ा कारोबार खड़ा किया जा सकता है। मशरूम की खेती आज ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों के युवाओं के लिए कम लागत वाला, तेजी से बढ़ता और लाभदायक कृषि व्यवसाय बनकर उभर रहा है।


