Zerodha Merchant Banker: देश की दिग्गज ब्रोकरेज कंपनी Zerodha अब सिर्फ शेयर खरीदने-बेचने और निवेश से जुड़ी सेवाओं तक सीमित नहीं रहना चाहती। कंपनी ने मर्चेंट बैंकिंग के कारोबार में उतरने की तैयारी कर ली है। बाजार नियामक SEBI ने मर्चेंट बैंकिंग लाइसेंस के लिए Zerodha के आवेदन को मंजूरी दे दी है। हालांकि, कंपनी का औपचारिक रजिस्ट्रेशन अभी पूरा होना बाकी है। मर्चेंट बैंकिंग में एंट्री के बाद Zerodha के कारोबार का दायरा ब्रोकिंग से आगे बढ़कर इन्वेस्टमेंट बैंकिंग तक पहुंच सकता है।
Zerodha को SEBI से मिली बड़ी मंजूरी
बाजार नियामक Securities and Exchange Board of India यानी SEBI ने मर्चेंट बैंकिंग लाइसेंस के लिए Zerodha के आवेदन को मंजूरी दी है। यह जानकारी Moneycontrol ने सूत्रों के हवाले से दी है। हालांकि, SEBI के साथ अंतिम रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया अभी पूरी होनी बाकी है।
Zerodha की इकाई Zerodha Corporate Advisors ने मर्चेंट बैंकिंग लाइसेंस के लिए आवेदन 27 अप्रैल 2026 को दाखिल किया था। आवेदन को ऐसे समय में मंजूरी मिली है, जब भारत का प्राइमरी कैपिटल मार्केट लगातार विस्तार कर रहा है और फिनटेक व फाइनेंशियल सर्विसेज कंपनियां IPO समेत दूसरे कैपिटल मार्केट कारोबार में अवसर तलाश रही हैं।
मर्चेंट बैंकर बनने के बाद क्या कर पाएगी Zerodha?
मर्चेंट बैंकिंग लाइसेंस मिलने के बाद Zerodha अपने मौजूदा ब्रोकिंग कारोबार से आगे बढ़कर कंपनियों को कैपिटल मार्केट से जुड़ी सेवाएं दे सकेगी।
इसमें खास तौर पर शामिल हैं:
- कंपनियों के IPO को मैनेज करना
- FPO यानी Follow-on Public Offer की प्रक्रिया संभालना
- Rights Issue में कंपनियों को सलाह और सेवाएं देना
- कैपिटल मार्केट से जुड़े दूसरे ट्रांजैक्शंस में काम करना
- कंपनियों को फंड जुटाने और सार्वजनिक बाजार में आने से जुड़ी सलाह देना
इस तरह Zerodha की भूमिका सिर्फ निवेशकों के लिए ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं रहेगी। कंपनी भविष्य में उन कारोबारों के साथ भी काम कर सकती है जो शेयर बाजार के जरिए पूंजी जुटाने की तैयारी कर रहे हैं।
ब्रोकिंग से आगे लगातार बढ़ रहा है Zerodha का कारोबार
Zerodha पिछले कुछ वर्षों में अपने पारंपरिक ब्रोकिंग मॉडल से आगे बढ़कर कई नए फाइनेंशियल सर्विसेज बिजनेस में उतर चुकी है।
कंपनी ने एसेट मैनेजमेंट के क्षेत्र में भी कदम बढ़ाया है। इसके अलावा Zerodha Capital के जरिए लेंडिंग और अपने प्रोप्राइटरी फंड के जरिए निवेश से जुड़ी गतिविधियों का भी विस्तार हुआ है।
कंपनी को गुजरात के GIFT City में ब्रोकर-डीलर के तौर पर काम करने के लिए International Financial Services Centres Authority (IFSCA) से रजिस्ट्रेशन भी मिल चुका है। इसके जरिए भारतीय निवेशकों के लिए विदेशी निवेश से जुड़ी सेवाओं का रास्ता खुलता है।
अब मर्चेंट बैंकिंग में एंट्री Zerodha के लिए फाइनेंशियल सर्विसेज के एक और बड़े सेगमेंट में विस्तार का संकेत है।
भारत में बढ़ रहा है मर्चेंट बैंकिंग का बाजार
Zerodha की एंट्री ऐसे समय में हो रही है जब भारत में IPO और दूसरे प्राइमरी मार्केट ट्रांजैक्शंस की गतिविधियां काफी बढ़ी हुई हैं। कंपनियां शेयर बाजार में लिस्टिंग के जरिए पूंजी जुटाने की कोशिश कर रही हैं और इस पूरी प्रक्रिया में मर्चेंट बैंकर की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।
31 अगस्त 2026 तक SEBI के पास कुल 248 रजिस्टर्ड मर्चेंट बैंकर थे। वहीं, SEBI के एप्लीकेशन स्टेटस डेटा के मुताबिक 10 मर्चेंट बैंकिंग रजिस्ट्रेशन एप्लीकेशन पर अभी प्रक्रिया चल रही थी।
इससे संकेत मिलता है कि फाइनेंशियल सर्विसेज कंपनियों के बीच इस कारोबार को लेकर दिलचस्पी बनी हुई है।
SEBI ने मर्चेंट बैंकर्स के नियम भी किए सख्त
Zerodha की एंट्री इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि SEBI ने हाल ही में मर्चेंट बैंकर्स के लिए वित्तीय जरूरतों से जुड़े नियम कड़े किए हैं।
नए नियमों के तहत Category I Merchant Bankers के लिए न्यूनतम नेटवर्थ की जरूरत को बढ़ाकर ₹50 करोड़ कर दिया गया है। पहले यह सीमा ₹5 करोड़ थी।
वहीं, Category II Merchant Bankers के लिए न्यूनतम नेटवर्थ ₹10 करोड़ तय की गई है।
Category I मर्चेंट बैंकर ही मेनबोर्ड सेगमेंट के IPO को मैनेज कर सकते हैं। इसलिए अगर Zerodha मेनबोर्ड IPO के कारोबार में उतरना चाहती है, तो उसे Category I से जुड़ी वित्तीय और नियामकीय जरूरतों को पूरा करना होगा।
अंडरराइटिंग पर भी लगाई गई सीमा
SEBI के नए नियमों में सिर्फ नेटवर्थ ही नहीं, बल्कि लिक्विड नेटवर्थ से जुड़ी शर्तें भी शामिल हैं।
मर्चेंट बैंकर्स की कुल अंडरराइटिंग ऑब्लिगेशंस को उनकी लिक्विड नेटवर्थ के 20 गुना तक सीमित किया गया है। इसका उद्देश्य मर्चेंट बैंकर्स की वित्तीय क्षमता को मजबूत बनाए रखना और बड़े कैपिटल मार्केट ट्रांजैक्शंस में जोखिम को नियंत्रित करना है।
मौजूदा मर्चेंट बैंकर्स के लिए बढ़ी हुई वित्तीय जरूरतों को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जा रहा है। लेकिन Zerodha जैसी नई कंपनियों को मर्चेंट बैंकिंग कारोबार शुरू करते समय ही लागू नियमों के मुताबिक अपनी वित्तीय क्षमता तैयार करनी होगी।
Zerodha के लिए क्यों अहम है यह कदम?
Zerodha की पहचान भारत के प्रमुख डिस्काउंट ब्रोकर्स में रही है। अब मर्चेंट बैंकिंग में उतरने से कंपनी को फाइनेंशियल मार्केट की दूसरी तरफ भी अपनी मौजूदगी बढ़ाने का मौका मिलेगा।
एक तरफ कंपनी खुदरा निवेशकों को ट्रेडिंग और निवेश की सुविधा देती है, वहीं मर्चेंट बैंकिंग के जरिए वह कंपनियों के IPO और दूसरे फंड-रेजिंग ट्रांजैक्शंस में सलाहकार और मैनेजर की भूमिका निभा सकती है।
अगर SEBI के साथ औपचारिक रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया पूरी हो जाती है, तो Zerodha का यह विस्तार भारतीय कैपिटल मार्केट में उसके बिजनेस मॉडल को और व्यापक बना सकता है।


