Zepto Unlisted Share Price: क्विक कॉमर्स कंपनी जेप्टो (Zepto) के अनलिस्टेड शेयरों में बड़ी गिरावट देखने को मिल रही है। कंपनी द्वारा अपना आईपीओ फिलहाल टालने और प्री-आईपीओ फंडरेज का विकल्प चुनने के बाद ग्रे मार्केट में निवेशकों का उत्साह ठंडा पड़ गया है। पिछले 5 कारोबारी सत्रों में जेप्टो के अनलिस्टेड शेयर करीब 23% टूट गए, जबकि दिसंबर 2025 के रिकॉर्ड हाई से शेयर लगभग 60% नीचे आ चुका है। इसके साथ ही कंपनी की अनुमानित वैल्यूएशन भी तेज़ी से घटकर 3.5–3.6 अरब डॉलर के आसपास पहुंच गई है।
5 दिनों में 23% टूटा जेप्टो का अनलिस्टेड शेयर
ग्रे मार्केट के ट्रेडर्स के अनुसार, जेप्टो के अनलिस्टेड शेयरों की कीमत में लगातार गिरावट दर्ज की गई है।
- मौजूदा अनलिस्टेड शेयर भाव: ₹27 प्रति शेयर
- एक सप्ताह पहले: ₹35 प्रति शेयर
- एक महीने पहले: ₹38 प्रति शेयर
यानी सिर्फ पांच कारोबारी दिनों में शेयर करीब 23% टूट गया है। लगातार गिरावट से यह साफ संकेत मिल रहा है कि निवेशकों का भरोसा फिलहाल कमजोर हुआ है।
रिकॉर्ड हाई से 60% नीचे पहुंचा शेयर
दिसंबर 2025 में जेप्टो का अनलिस्टेड शेयर करीब ₹68 प्रति शेयर तक पहुंच गया था, जो अब घटकर ₹27 रह गया है।
इस तरह शेयर अपने ऑल-टाइम हाई से करीब 60% की गिरावट दर्ज कर चुका है। यह गिरावट केवल शेयर प्राइस तक सीमित नहीं है, बल्कि कंपनी की वैल्यूएशन पर भी इसका सीधा असर पड़ा है।
कंपनी की वैल्यूएशन में बड़ी गिरावट
जेप्टो के अपडेटेड DRHP के अनुसार, मौजूदा शेयर कीमत के आधार पर कंपनी का अनुमानित मार्केट कैप करीब ₹34,000 करोड़ यानी लगभग 3.6 अरब डॉलर रह गया है।
वैल्यूएशन का सफर कुछ इस प्रकार रहा है—
| समय | अनुमानित वैल्यूएशन |
|---|---|
| दिसंबर 2025 (पीक) | लगभग 9 अरब डॉलर |
| एक माह पहले | लगभग 5 अरब डॉलर |
| वर्तमान | लगभग 3.6 अरब डॉलर |
इससे साफ है कि कुछ ही महीनों में कंपनी की वैल्यूएशन में बड़ी गिरावट आई है।
सीरीज H निवेशकों से भी नीचे ट्रेड हो रहा शेयर
अक्टूबर-नवंबर 2025 में हुए Series H Funding Round के दौरान निवेशकों ने औसतन ₹37.74 प्रति शेयर के भाव पर निवेश किया था।
अब ग्रे मार्केट में शेयर ₹27 पर ट्रेड हो रहा है, यानी यह उस प्राइमरी निवेश कीमत से भी काफी नीचे आ चुका है। इससे शुरुआती निवेशकों की होल्डिंग की वैल्यू भी प्रभावित हुई है।
IPO टलने से क्यों बढ़ा दबाव?
जानकारी के मुताबिक, जेप्टो ने फिलहाल अपना प्रस्तावित आईपीओ टाल दिया है। इसके बजाय कंपनी करीब ₹1,000 करोड़ का प्री-आईपीओ प्लेसमेंट करने की तैयारी कर रही है।
बताया जा रहा है कि—
- कंपनी और मौजूदा निवेशक लगभग 4.5 अरब डॉलर की वैल्यूएशन चाहते थे।
- जबकि घरेलू संस्थागत निवेशक (DIIs) केवल 2.5–3 अरब डॉलर की वैल्यूएशन पर निवेश करने को तैयार थे।
इसी बड़े वैल्यूएशन गैप के कारण आईपीओ प्रक्रिया को फिलहाल आगे बढ़ाने की बजाय स्थगित करने का फैसला लिया गया।
कारोबार तेजी से बढ़ा, लेकिन घाटा भी बढ़ गया
वित्तीय प्रदर्शन की बात करें तो कंपनी का कारोबार मजबूत गति से बढ़ा है।
FY26 में प्रमुख आंकड़े
- ऑपरेटिंग रेवेन्यू: ₹22,623.58 करोड़
- FY25 रेवेन्यू: ₹11,109.95 करोड़
- नेट लॉस: ₹5,905.19 करोड़
- FY25 नेट लॉस: ₹4,699.71 करोड़
यानी कंपनी की आय लगभग दोगुनी हुई है, लेकिन घाटा भी पहले से बढ़ गया है।
हर ऑर्डर पर हो रहा नुकसान
ब्रोकरेज रिपोर्ट्स के मुताबिक, जेप्टो का कैश बर्न प्रतिस्पर्धियों की तुलना में अधिक बना हुआ है।
Jefferies के अनुमान के अनुसार—
- FY26 में कंपनी को प्रति ऑर्डर लगभग ₹79 का नुकसान हुआ।
- FY26 के अंत तक कंपनी के पास 1,139 डार्क स्टोर्स थे।
- कंपनी प्रतिदिन औसतन 17.5 लाख ऑर्डर प्रोसेस कर रही थी।
यानी ऑर्डर वॉल्यूम तेजी से बढ़ने के बावजूद कंपनी अभी भी मुनाफे तक नहीं पहुंच पाई है।
निवेशकों के लिए इसका क्या मतलब?
ग्रे मार्केट में गिरावट यह संकेत देती है कि निवेशक फिलहाल कंपनी की वैल्यूएशन और लाभप्रदता को लेकर सतर्क हैं। हालांकि जेप्टो का कारोबार तेज़ी से बढ़ रहा है, लेकिन बढ़ता घाटा, ऊंचा कैश बर्न और आईपीओ में देरी निवेशकों की चिंता का कारण बने हुए हैं। आने वाले महीनों में कंपनी यदि घाटा कम करने और लाभप्रदता की दिशा में प्रगति दिखाती है, तो निवेशकों का भरोसा दोबारा मजबूत हो सकता है।
डिस्क्लेमर: यह लेख केवल जानकारी के उद्देश्य से है। शेयर बाजार और अनलिस्टेड शेयरों में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन होता है। निवेश करने से पहले अपने वित्तीय सलाहकार या प्रमाणित निवेश विशेषज्ञ से सलाह अवश्य लें।


