पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का असर अब भारत के किसानों की जेब पर भी दिखाई देने लगा है। कच्चे माल की वैश्विक कीमतों में भारी उछाल के बाद देश की प्रमुख उर्वरक कंपनी Fertilisers and Chemicals Travancore Limited (FACT) ने अपने कई उर्वरक उत्पादों की कीमतों में बढ़ोतरी कर दी है। इसका सबसे बड़ा असर “फैक्टमफोस” उर्वरक पर पड़ा है, जिसकी कीमत में सीधे ₹350 प्रति बैग की बढ़ोतरी कर दी गई है।
विशेषज्ञ मान रहे हैं कि अगर पश्चिम एशिया में तनाव लंबे समय तक बना रहता है, तो आने वाले महीनों में किसानों की खेती लागत और बढ़ सकती है। खासकर खरीफ सीजन के दौरान खाद की मांग बढ़ने से बाजार में दबाव और ज्यादा दिखाई दे सकता है।
FACT ने कितनी बढ़ाई खाद की कीमत?
नई दरों के अनुसार FACT के लोकप्रिय उर्वरक Factamfos 20:20:0:13 (NP 20:20:0:13) की कीमत अब ₹1,750 प्रति बैग से बढ़ाकर ₹2,100 प्रति बैग कर दी गई है। यानी किसानों को अब एक बैग पर ₹350 ज्यादा खर्च करना पड़ेगा।
हालांकि कंपनी ने यह भी साफ किया है कि गोदामों में मौजूद पुराने स्टॉक को पुरानी कीमत यानी ₹1,750 प्रति बैग पर ही बेचा जाएगा। लेकिन जैसे-जैसे नया स्टॉक बाजार में आएगा, किसानों को बढ़ी हुई कीमत चुकानी पड़ेगी।
यह फैसला ऐसे समय में आया है जब देश के कई हिस्सों में खरीफ फसलों की तैयारी शुरू हो चुकी है और किसानों को बड़े पैमाने पर उर्वरकों की जरूरत पड़ने वाली है।
आखिर क्यों बढ़ीं खाद की कीमतें?
FACT के मुताबिक, उर्वरक बनाने में इस्तेमाल होने वाले प्रमुख कच्चे माल की अंतरराष्ट्रीय कीमतों में पिछले दो महीनों में भारी उछाल आया है। पश्चिम एशिया में जारी युद्ध और सप्लाई चेन बाधाओं के कारण कई देशों से आयात महंगा हो गया है।
कंपनी के आंकड़ों के अनुसार:
| कच्चा माल | मार्च शुरुआती कीमत | मई तीसरे सप्ताह कीमत |
|---|---|---|
| अमोनिया | 490-560 डॉलर/टन | 870-930 डॉलर/टन |
| सल्फर | 513-515 डॉलर/टन | 990-1000 डॉलर/टन |
| सल्फ्यूरिक एसिड | 178-185 डॉलर/टन | 375-385 डॉलर/टन |
इन आंकड़ों से साफ है कि कई जरूरी रॉ मैटेरियल की कीमतें लगभग दोगुनी हो चुकी हैं। उर्वरक कंपनियों के लिए इतनी बढ़ी लागत के बावजूद पुरानी कीमत पर उत्पाद बेचना मुश्किल हो गया है।
किसानों पर क्या पड़ेगा असर?
खाद की कीमतें बढ़ने का सीधा असर खेती की लागत पर पड़ेगा। पहले से ही डीजल, सीएनजी, ट्रांसपोर्ट और बिजली महंगी होने से किसान दबाव में हैं। अब उर्वरकों की कीमत बढ़ने से प्रति एकड़ लागत और बढ़ सकती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि:
- धान, मक्का और सोयाबीन जैसी खरीफ फसलों की लागत बढ़ सकती है।
- छोटे किसानों पर ज्यादा दबाव पड़ेगा।
- ट्रांसपोर्ट महंगा होने से ग्रामीण बाजारों में खाद और महंगी बिक सकती है।
- अगर वैश्विक तनाव जारी रहा तो आने वाले महीनों में दूसरी उर्वरक कंपनियां भी कीमतें बढ़ा सकती हैं।
कृषि क्षेत्र के जानकारों का कहना है कि भारत अपनी उर्वरक जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर आयात पर निर्भर है। ऐसे में वैश्विक बाजार में किसी भी तरह का संकट सीधे भारतीय किसानों तक पहुंच जाता है।
सरकार पर भी बढ़ सकता है दबाव
उर्वरकों की कीमतें बढ़ने के बाद सरकार पर सब्सिडी बढ़ाने का दबाव भी बढ़ सकता है। भारत पहले ही हर साल लाखों करोड़ रुपये की उर्वरक सब्सिडी देता है ताकि किसानों को सस्ती खाद मिल सके।
अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें लंबे समय तक ऊंची बनी रहती हैं, तो सरकार को अतिरिक्त सब्सिडी देनी पड़ सकती है, आयात बढ़ाना पड़ सकता है, घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देना पड़ सकता है.
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर समय रहते कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले सीजन में खाद की उपलब्धता भी चुनौती बन सकती है।
FACT ने किसानों को क्या भरोसा दिया?
कंपनी ने कहा है कि बढ़ती लागत के बावजूद किसानों को पर्याप्त मात्रा में खाद उपलब्ध कराने की कोशिश जारी रहेगी। FACT फिलहाल कई ग्लोबल सप्लायर्स से कच्चे माल की खरीद कर रही है ताकि उत्पादन प्रभावित न हो।
इसके अलावा कंपनी तैयार उर्वरकों का आयात कर रही है अतिरिक्त DAP मंगाने की प्रक्रिया में है अमोनियम सल्फेट आयात कर किसानों को सस्ता विकल्प देने की कोशिश कर रही है कंपनी का कहना है कि उसका लक्ष्य किसानों को सप्लाई संकट से बचाना है, भले ही वैश्विक बाजार में दबाव बना हुआ हो।
DAP कितने में मिल रहा है?
FACT ने बताया कि उसका DAP (डाई-अमोनियम फॉस्फेट) फिलहाल ₹1,350 प्रति बोरी की दर से बाजार में उपलब्ध है। यह उर्वरक किसानों के बीच सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाले खादों में शामिल है क्योंकि इसमें 18% नाइट्रोजन, 46% फॉस्फोरस मौजूद होता है, जो फसल वृद्धि के लिए बेहद जरूरी पोषक तत्व माने जाते हैं।
क्या आगे और महंगी हो सकती है खाद?
अगर पश्चिम एशिया संकट और गहराता है, तो आने वाले समय में उर्वरक आयात और महंगा हो सकता है कच्चे तेल और गैस की कीमतें बढ़ सकती हैं शिपिंग कॉस्ट बढ़ सकती है दूसरी खाद कंपनियां भी कीमतें बढ़ा सकती हैं
यानी फिलहाल किसानों को राहत मिलने के आसार कम दिखाई दे रहे हैं। आने वाले कुछ हफ्ते तय करेंगे कि यह सिर्फ अस्थायी बढ़ोतरी है या खेती की लागत में एक नया महंगाई दौर शुरू होने वाला है।
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