Venezuela Oil Reserves: वेनेजुएला के विशाल तेल भंडार को लेकर एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा कंपनियों की सक्रियता बढ़ गई है। भारत की सरकारी तेल एवं गैस कंपनी ONGC समेत पांच बड़ी कंपनियां वेनेजुएला में अपने ऊर्जा प्रोजेक्ट्स को लेकर अंतिम समझौते की दिशा में आगे बढ़ रही हैं। इनमें अमेरिका की Chevron और GE Vernova, इटली की Eni तथा कोलंबिया की GeoPark शामिल हैं।
रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, कई महीनों तक चली बातचीत के बाद ये कंपनियां वेनेजुएला में अपने ऊर्जा प्रोजेक्ट्स को औपचारिक रूप से आगे बढ़ाने के लिए अंतिम समझौते करने की तैयारी में हैं। सूत्रों के हवाले से रिपोर्ट में कहा गया है कि इन समझौतों पर इसी सप्ताह हस्ताक्षर हो सकते हैं।
वेनेजुएला में क्यों बढ़ी गतिविधियां?
वेनेजुएला दुनिया के सबसे बड़े प्रमाणित कच्चे तेल भंडार वाले देशों में शामिल है। लंबे समय से अमेरिकी प्रतिबंधों और राजनीतिक परिस्थितियों के कारण देश का तेल उद्योग कई चुनौतियों से जूझता रहा है। अब प्रतिबंधों में ढील और अमेरिका-वेनेजुएला के बीच नए समझौतों के बाद अंतरराष्ट्रीय कंपनियों के लिए वहां दोबारा निवेश और परिचालन का रास्ता खुलता दिखाई दे रहा है।
नई गतिविधियां ऐसे समय में बढ़ी हैं जब वैश्विक ऊर्जा बाजार में कच्चे तेल की सप्लाई, कीमतों और भू-राजनीतिक जोखिमों को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। ऐसे में वेनेजुएला के विशाल तेल संसाधन दुनिया की बड़ी ऊर्जा कंपनियों के लिए फिर से आकर्षण का केंद्र बन गए हैं।
ONGC के लिए क्यों अहम है यह घटनाक्रम?
वेनेजुएला में भारतीय कंपनी ONGC की मौजूदगी पहले से रही है। कंपनी की विदेश इकाई ONGC Videsh के वेनेजुएला में ऊर्जा परिसंपत्तियों से जुड़े हित हैं। लंबे समय से जारी परिस्थितियों के कारण कंपनी का निवेश और उससे मिलने वाले भुगतान प्रभावित रहे हैं।
अगर नए समझौतों के बाद वेनेजुएला में ऊर्जा परियोजनाओं का संचालन बेहतर होता है, तो ONGC के लिए वहां फंसे निवेश और डिविडेंड से जुड़े मामलों को आगे बढ़ाने का अवसर बन सकता है।
भारत के लिए इसका महत्व सिर्फ ONGC तक सीमित नहीं है। भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात के जरिए पूरा करता है। ऐसे में तेल उत्पादक देशों के साथ मजबूत संबंध और अलग-अलग स्रोतों से कच्चे तेल की उपलब्धता देश की ऊर्जा सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है।
अमेरिका की Chevron और GE Vernova भी शामिल
वेनेजुएला में फाइनल एग्रीमेंट की दौड़ में अमेरिका की दो बड़ी कंपनियां Chevron और GE Vernova भी शामिल हैं।
Chevron पहले से वेनेजुएला के तेल उद्योग में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती रही है। अमेरिकी प्रतिबंधों में बदलाव के बाद कंपनी की गतिविधियों को लेकर भी काफी ध्यान रहा है।
वहीं, GE Vernova ऊर्जा क्षेत्र की प्रमुख वैश्विक कंपनी है। वेनेजुएला के ऊर्जा ढांचे और बिजली से जुड़े प्रोजेक्ट्स में उसकी संभावित भूमिका देश के व्यापक एनर्जी सेक्टर के लिए महत्वपूर्ण हो सकती है।
इटली की Eni ने भी जताई सक्रियता
इटली की ऊर्जा कंपनी Eni ने संकेत दिया है कि वह वेनेजुएला में ऊर्जा क्षेत्र को मजबूत करने के प्रयासों में सहयोग कर रही है। कंपनी ने कहा है कि वह वेनेजुएला में अपनी सहयोगी कंपनियों और अन्य संबंधित अधिकारियों के साथ मिलकर देश के ऊर्जा क्षेत्र को फिर से मजबूत करने के लिए काम कर रही है।
इससे संकेत मिलता है कि यूरोपीय कंपनियां भी वेनेजुएला के ऊर्जा क्षेत्र में बदलते माहौल को लेकर सक्रिय हैं।
कोलंबिया की GeoPark भी रेस में
दक्षिण अमेरिकी क्षेत्र की कंपनी GeoPark भी उन कंपनियों में शामिल है जो वेनेजुएला में अंतिम समझौते की दिशा में आगे बढ़ रही हैं।
GeoPark की संभावित भागीदारी इस लिहाज से महत्वपूर्ण है कि वेनेजुएला दक्षिण अमेरिका के ऊर्जा बाजार में बेहद अहम स्थान रखता है। क्षेत्रीय कंपनियों के लिए वहां दोबारा अवसर पैदा होना पूरे लैटिन अमेरिकी ऊर्जा बाजार को प्रभावित कर सकता है।
17 ऑयलफील्ड्स वाला समझौता अलग
रिपोर्ट के मुताबिक, इन कंपनियों द्वारा किए जाने वाले संभावित समझौते पिछले सप्ताह काराकस और वॉशिंगटन के बीच हुए बड़े समझौते से अलग हैं।
उस समझौते के तहत अमेरिका को वेनेजुएला के 17 ऑयलफील्ड्स में हिस्सेदारी मिलने की बात सामने आई है। इन तेल क्षेत्रों में करीब 64 अरब बैरल प्रमाणित तेल भंडार होने का अनुमान बताया गया है। यह वेनेजुएला के कुल प्रमाणित कच्चे तेल भंडार का लगभग पांचवां हिस्सा है।
इसलिए वेनेजुएला में हालिया घटनाक्रम को केवल किसी एक कंपनी के निवेश के तौर पर नहीं देखा जा रहा है। इसका असर देश के तेल उत्पादन, विदेशी निवेश और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर भी पड़ सकता है।
भारत के लिए क्या बदल सकता है?
वेनेजुएला में ऊर्जा परियोजनाओं के दोबारा सक्रिय होने से भारत को कई स्तरों पर फायदा हो सकता है।
पहला, ONGC के पुराने निवेश और डिविडेंड से जुड़े मामलों को आगे बढ़ाने का रास्ता खुल सकता है।
दूसरा, भारत को कच्चे तेल की खरीद के लिए एक अतिरिक्त स्रोत मिल सकता है। इससे किसी एक क्षेत्र या कुछ चुनिंदा देशों पर अत्यधिक निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है।
तीसरा, अगर वेनेजुएला का तेल उत्पादन बढ़ता है तो वैश्विक बाजार में उपलब्ध कच्चे तेल की मात्रा पर भी इसका असर पड़ सकता है। हालांकि तेल की कीमतों पर वास्तविक प्रभाव उत्पादन में बढ़ोतरी की मात्रा और वैश्विक मांग समेत कई कारकों पर निर्भर करेगा।
आगे क्या होगा?
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यह है कि ONGC समेत इन पांच कंपनियों के साथ अंतिम समझौते कब और किन शर्तों पर होते हैं। अगर इसी सप्ताह समझौते पर हस्ताक्षर होते हैं, तो यह वेनेजुएला के ऊर्जा क्षेत्र में विदेशी कंपनियों की वापसी और गतिविधियों के विस्तार की दिशा में एक अहम कदम माना जा सकता है।
वेनेजुएला के पास दुनिया के सबसे बड़े तेल भंडारों में से एक है। ऐसे में वहां राजनीतिक और आर्थिक परिस्थितियों में बदलाव का असर केवल स्थानीय तेल उद्योग पर नहीं, बल्कि अमेरिका, भारत और यूरोप समेत वैश्विक ऊर्जा बाजार पर भी पड़ सकता है।


