V2V Communication System: भारत में सड़क हादसों को कम करने के लिए सरकार नई तकनीक लागू करने की तैयारी कर रही है। अक्टूबर 2028 से बनने वाली सभी नई गाड़ियों में व्हीकल-टू-व्हीकल (V2V) कम्युनिकेशन सिस्टम अनिवार्य किया जा सकता है। इस तकनीक से वाहन आपस में रियल-टाइम डेटा शेयर कर सकेंगे और संभावित दुर्घटनाओं को पहले ही रोका जा सकेगा।
Highlights
- सड़क हादसों को कम करने के लिए सरकार ला रही है V2V कम्युनिकेशन तकनीक
- 1 अक्टूबर 2028 से नए वाहनों में सिस्टम अनिवार्य करने का प्रस्ताव
- कार, बाइक, बस और ट्रक समेत सभी कैटेगरी के वाहनों में होगा इस्तेमाल
- वाहन स्पीड, दिशा और लोकेशन जैसी जानकारी आपस में साझा करेंगे
- V2V सिस्टम के लिए 5.875 GHz से 5.925 GHz फ्रीक्वेंसी बैंड तय किया गया है
सड़क सुरक्षा के लिए सरकार का बड़ा कदम
भारत में हर साल बड़ी संख्या में सड़क दुर्घटनाएं होती हैं और इनमें हजारों लोगों की जान चली जाती है। सड़क हादसों को कम करने के लिए सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) ने एक नई तकनीक को अनिवार्य करने का प्रस्ताव रखा है।
मंत्रालय द्वारा जारी ड्राफ्ट नोटिफिकेशन के अनुसार, 1 अक्टूबर 2028 से बनने वाले सभी नए वाहनों में व्हीकल-टू-व्हीकल (V2V) कम्युनिकेशन सिस्टम लगाना जरूरी हो सकता है। इसमें दोपहिया वाहन, तिपहिया वाहन, कार, बस और ट्रक शामिल होंगे।
इस तकनीक का उद्देश्य वाहनों को एक-दूसरे से जोड़ना है, ताकि सड़क पर मौजूद गाड़ियां आपस में जरूरी जानकारी साझा कर सकें और दुर्घटना की संभावना को कम किया जा सके।
क्या है V2V कम्युनिकेशन सिस्टम?
V2V यानी Vehicle-to-Vehicle Communication System एक ऐसी तकनीक है जिसमें सड़क पर चलने वाली गाड़ियां बिना किसी मोबाइल नेटवर्क के सीधे एक-दूसरे से डेटा साझा कर सकती हैं।
इस सिस्टम में वाहन लगातार छोटे रेडियो सिग्नल के जरिए अपनी जानकारी भेजते रहेंगे। इसमें मुख्य रूप से:
- वाहन की लोकेशन
- स्पीड
- चलने की दिशा
- ब्रेक लगाने की जानकारी
- अचानक रुकने की स्थिति
जैसी जानकारियां शामिल होंगी।
अगर आसपास चल रही किसी गाड़ी से टक्कर का खतरा होगा, तो सिस्टम ड्राइवर को पहले ही अलर्ट कर देगा।
बिना इंटरनेट के कैसे काम करेगा यह सिस्टम?
V2V सिस्टम की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसे काम करने के लिए मोबाइल नेटवर्क या इंटरनेट की जरूरत नहीं होगी।
हर वाहन में लगा डिवाइस आसपास मौजूद दूसरे वाहनों के साथ सीधे कम्युनिकेशन करेगा। उदाहरण के लिए, अगर आगे चल रही कार अचानक ब्रेक लगाती है और पीछे वाली कार का ड्राइवर समय पर प्रतिक्रिया नहीं दे पाता, तो V2V सिस्टम तुरंत अलर्ट जारी कर सकता है।
इससे ड्राइवर को खतरे का अंदाजा पहले ही लग जाएगा और दुर्घटना टाली जा सकेगी।
किन हादसों को रोकने में मिलेगी मदद?
सरकार का मानना है कि V2V तकनीक कई तरह की दुर्घटनाओं को कम करने में मददगार साबित हो सकती है।
1. अचानक ब्रेक लगाने पर अलर्ट
अगर आगे चल रही गाड़ी अचानक ब्रेक लगाती है, तो पीछे आने वाली गाड़ी को तुरंत इसकी जानकारी मिल जाएगी।
2. ब्लाइंड स्पॉट और मोड़ पर सुरक्षा
कई बार खतरनाक मोड़ या ब्लाइंड कर्व पर सामने से आने वाली गाड़ी दिखाई नहीं देती। V2V सिस्टम ऐसी स्थिति में पहले ही चेतावनी दे सकता है।
3. गलत दिशा से आने वाले वाहन
अगर कोई वाहन गलत दिशा में आ रहा है, तो आसपास की गाड़ियों को इसका अलर्ट मिल सकता है।
4. लेन बदलने में मदद
तेज रफ्तार सड़कों पर अचानक लेन बदलने से होने वाली दुर्घटनाओं को भी कम किया जा सकेगा।
5. इमरजेंसी वाहनों को रास्ता
भविष्य में यह तकनीक एंबुलेंस और अन्य इमरजेंसी वाहनों की मौजूदगी की जानकारी भी दे सकती है, जिससे रास्ता साफ करने में मदद मिलेगी।
मौजूदा सुरक्षा सिस्टम से कितनी अलग है यह तकनीक?
अभी वाहनों में मिलने वाले कई सेफ्टी फीचर्स जैसे कैमरा, रडार और सेंसर मुख्य रूप से वाहन के आसपास की चीजों को पहचानते हैं।
लेकिन V2V सिस्टम की खासियत यह है कि यह लाइन ऑफ साइट से आगे की जानकारी भी दे सकता है।
यानी अगर कोई वाहन किसी मोड़ के पीछे है और दिखाई नहीं दे रहा, तब भी उसका सिग्नल मिलने से खतरे का पता लगाया जा सकता है।
मंत्रालय के मुताबिक, यह तकनीक एडवांस्ड ड्राइवर असिस्टेंस सिस्टम (ADAS) को भी ज्यादा प्रभावी बनाने में मदद करेगी।
AIS-230 स्टैंडर्ड के तहत होगा लागू
ड्राफ्ट नोटिफिकेशन के अनुसार, V2V सिस्टम को लागू करने के लिए नए ऑटोमोटिव स्टैंडर्ड AIS-230 का पालन करना होगा।
प्रस्ताव के मुताबिक इसे चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा, ताकि वाहन निर्माता कंपनियों और अन्य संबंधित पक्षों को तैयारी के लिए पर्याप्त समय मिल सके।
पहले से V2V डिवाइस वाले वाहनों को भी नए नियमों के अनुसार मानकों का पालन करना होगा।
V2I सिस्टम भी लाने की तैयारी
सरकार सिर्फ वाहनों के बीच कम्युनिकेशन तक सीमित नहीं रहना चाहती। आने वाले समय में Vehicle-to-Infrastructure (V2I) सिस्टम भी लागू करने की योजना है।
इसमें सड़क से जुड़े इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे:
- ट्रैफिक सिग्नल
- बिजली के खंभे
- पुल
- फ्लाईओवर
- बैरिकेड वाले क्षेत्र
में सेंसर लगाए जाएंगे।
ये सेंसर सड़क की स्थिति और संभावित खतरे की जानकारी सीधे वाहनों तक पहुंचाएंगे।
V2V सिस्टम के लिए तय हुआ फ्रीक्वेंसी बैंड
टेलीकम्युनिकेशन विभाग ने V2V और अन्य इंटेलिजेंट ट्रांसपोर्टेशन सिस्टम (ITS) एप्लिकेशन के लिए 5.875 GHz से 5.925 GHz फ्रीक्वेंसी बैंड आवंटित किया है।
इस फ्रीक्वेंसी का इस्तेमाल वाहन और सड़क सुरक्षा से जुड़े कम्युनिकेशन सिस्टम के लिए किया जाएगा।
भारत में बदल सकती है सड़क सुरक्षा की तस्वीर
V2V कम्युनिकेशन सिस्टम आने के बाद सड़क सुरक्षा में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। यह तकनीक ड्राइवर की गलती, कम विजिबिलिटी और अचानक पैदा होने वाली खतरनाक परिस्थितियों में मददगार साबित हो सकती है।
हालांकि, इस सिस्टम की सफलता के लिए जरूरी होगा कि वाहन निर्माता कंपनियां इसे सही तरीके से लागू करें और देशभर में इसके लिए जरूरी तकनीकी इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किया जाए।
अगर यह योजना सफल होती है, तो आने वाले वर्षों में भारत की सड़कों पर दुर्घटनाओं को कम करने में V2V तकनीक अहम भूमिका निभा सकती है।


