भारत में डिजिटल पेमेंट का इस्तेमाल लगातार बढ़ रहा है। छोटे दुकानदारों से लेकर बड़े कारोबारियों और आम ग्राहकों तक, भुगतान के लिए यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस यानी UPI का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है। चालू वित्त वर्ष 2026-27 की पहली छमाही में UPI के जरिए हुए लेनदेन ने एक बार फिर डिजिटल पेमेंट की बढ़ती लोकप्रियता को दिखाया है। अप्रैल से सितंबर 2026 के बीच UPI लेनदेन की संख्या करीब 145 अरब तक पहुंच गई।
नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) के आंकड़ों के मुताबिक, पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में UPI के जरिए करीब 114 अरब लेनदेन हुए थे। इस तरह इस साल अप्रैल-सितंबर की अवधि में लेनदेन की संख्या में लगभग 27 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। वहीं, इस अवधि में UPI के जरिए होने वाले लेनदेन का कुल मूल्य भी बढ़ा है।
पहली छमाही में ₹177 लाख करोड़ का UPI ट्रांजैक्शन
चालू वित्त वर्ष की पहली छमाही यानी अप्रैल से सितंबर 2026 के दौरान UPI के माध्यम से कुल करीब ₹177 लाख करोड़ के लेनदेन हुए। पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में यह आंकड़ा करीब ₹148 लाख करोड़ था।
इस आधार पर देखा जाए तो एक साल में UPI लेनदेन के कुल मूल्य में लगभग 20 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। लेनदेन की संख्या में 27 प्रतिशत और कुल मूल्य में 20 प्रतिशत की बढ़ोतरी यह बताती है कि डिजिटल भुगतान अब भारतीय अर्थव्यवस्था में रोजमर्रा के लेनदेन का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है।
UPI के जरिए भुगतान की सुविधा ने खास तौर पर छोटे मूल्य के लेनदेन को आसान बनाया है। किराना दुकान, रेस्टोरेंट, मेडिकल स्टोर, पेट्रोल पंप, ऑनलाइन खरीदारी और अन्य सेवाओं में QR कोड स्कैन करके भुगतान करना आम हो गया है।
सितंबर में UPI ट्रांजैक्शन में मामूली गिरावट
हालांकि पहली छमाही में UPI लेनदेन में मजबूत वृद्धि दर्ज की गई, लेकिन सितंबर 2026 के आंकड़ों में अगस्त की तुलना में मामूली गिरावट देखने को मिली।
सितंबर में UPI लेनदेन की संख्या करीब 24.07 अरब रही, जबकि अगस्त में यह आंकड़ा लगभग 24.5 अरब था। यानी एक महीने में लेनदेन की संख्या में करीब 1.7 प्रतिशत की कमी आई।
इसी तरह सितंबर में UPI के जरिए हुए लेनदेन का कुल मूल्य लगभग ₹29.37 लाख करोड़ रहा। अगस्त में यह आंकड़ा करीब ₹29.82 लाख करोड़ था। इस तरह कुल लेनदेन मूल्य में भी लगभग 1.5 प्रतिशत की मासिक गिरावट दर्ज की गई।
हालांकि, केवल एक महीने की मामूली गिरावट को UPI के इस्तेमाल में बड़ी कमजोरी के तौर पर नहीं देखा जा सकता। छह महीने के आंकड़ों में डिजिटल भुगतान की वृद्धि अभी भी मजबूत बनी हुई है।
15 अक्टूबर से ₹2,000 से ज्यादा के मर्चेंट पेमेंट पर MDR
UPI से जुड़े आंकड़े ऐसे समय सामने आए हैं, जब 15 अक्टूबर से ₹2,000 से अधिक के मर्चेंट भुगतान पर 0.4 प्रतिशत MDR (Merchant Discount Rate) लागू होने की बात कही गई है।
MDR वह शुल्क है जो डिजिटल भुगतान स्वीकार करने वाले मर्चेंट से संबंधित भुगतान प्रणाली में लिया जाता है। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत यह शुल्क ग्राहकों से सीधे नहीं लिया जाएगा, बल्कि इसका भार मर्चेंट यानी दुकानदार पर होगा।
इसका मतलब है कि यदि कोई ग्राहक किसी दुकानदार को ₹2,000 से अधिक का UPI भुगतान करता है, तो संबंधित लेनदेन पर निर्धारित MDR लागू होगा। ग्राहक से अलग से कोई MDR शुल्क वसूलने की बात नहीं है।
यह बदलाव खास तौर पर बड़े मूल्य वाले मर्चेंट UPI ट्रांजैक्शन को प्रभावित कर सकता है, जबकि रोजमर्रा के छोटे डिजिटल भुगतान पर इसका सीधा असर सीमित रहेगा।
व्यक्ति से व्यक्ति UPI भुगतान पर शुल्क नहीं
UPI की एक महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि व्यक्ति से व्यक्ति यानी P2P (Person-to-Person) भुगतान के लिए किसी शुल्क की व्यवस्था नहीं है। ऐसे में दो व्यक्तियों के बीच UPI के जरिए पैसे भेजने पर भुगतान की राशि कितनी भी हो, इस तरह के लेनदेन पर MDR लागू नहीं होगा।
MDR का संबंध मर्चेंट भुगतान से है। इसलिए दुकानदारों, व्यापारियों और अन्य व्यवसायों के लिए UPI भुगतान स्वीकार करने की लागत को लेकर यह बदलाव अधिक महत्वपूर्ण है।
MDR की राशि का कैसे होगा बंटवारा?
₹2,000 से अधिक के पात्र मर्चेंट UPI भुगतान पर मिलने वाली MDR राशि को अलग-अलग हिस्सों में बांटने की व्यवस्था बताई गई है।
उपलब्ध जानकारी के मुताबिक MDR से मिलने वाली राशि में:
- 40 प्रतिशत ग्राहक के बैंक को मिलेगा।
- 30 प्रतिशत पेमेंट गेटवे को मिलेगा।
- 20 प्रतिशत UPI ऐप को मिलेगा।
- 10 प्रतिशत UPI ऐप के प्रायोजक बैंक को मिलेगा।
इस व्यवस्था का उद्देश्य डिजिटल भुगतान से जुड़े अलग-अलग भागीदारों के बीच शुल्क का वितरण करना है। UPI के पीछे बैंक, ऐप, पेमेंट गेटवे और अन्य तकनीकी संस्थाएं मिलकर काम करती हैं।
भारत में क्यों बढ़ रहा है UPI का इस्तेमाल?
UPI की सबसे बड़ी खासियत इसकी आसान और तेज भुगतान प्रक्रिया है। ग्राहक को बैंक खाता नंबर और IFSC जैसी जानकारी बार-बार दर्ज करने की जरूरत नहीं पड़ती। मोबाइल नंबर, UPI ID या QR कोड के माध्यम से कुछ ही सेकंड में भुगतान किया जा सकता है।
इसके अलावा स्मार्टफोन और इंटरनेट की बढ़ती पहुंच ने भी डिजिटल भुगतान को बढ़ावा दिया है। छोटे कारोबारियों के लिए QR कोड आधारित भुगतान स्वीकार करना भी आसान हो गया है। इससे कैश पर निर्भरता कम करने में मदद मिली है।
ऑनलाइन शॉपिंग, फूड डिलीवरी, कैब बुकिंग, बिल भुगतान और सरकारी सेवाओं समेत कई क्षेत्रों में UPI का इस्तेमाल बढ़ा है। यही वजह है कि हर महीने अरबों की संख्या में UPI ट्रांजैक्शन दर्ज किए जा रहे हैं।
विदेशों में भी बढ़ रहा UPI का विस्तार
भारत का UPI सिस्टम अब केवल घरेलू भुगतान तक सीमित नहीं है। UPI को कई देशों में भुगतान के लिए स्वीकार किया जा रहा है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार UPI की पहुंच 11 देशों तक हो चुकी है।
इन देशों में सिंगापुर, संयुक्त अरब अमीरात (UAE), फ्रांस, मॉरीशस, नेपाल, भूटान, कतर, श्रीलंका, कंबोडिया, ग्रीस और उज्बेकिस्तान शामिल हैं।
विदेशों में UPI की स्वीकार्यता बढ़ने से भारतीय यात्रियों को भी भुगतान में सुविधा मिल सकती है। खास तौर पर उन देशों में जहां भारतीय पर्यटक बड़ी संख्या में जाते हैं, वहां UPI आधारित भुगतान की उपलब्धता कैश या कार्ड पर निर्भरता कम कर सकती है।
UPI की बढ़ती हिस्सेदारी से डिजिटल इकोनॉमी को बढ़ावा
अप्रैल से सितंबर 2026 के बीच करीब 145 अरब UPI लेनदेन और ₹177 लाख करोड़ का कुल ट्रांजैक्शन मूल्य भारत में डिजिटल भुगतान के बड़े पैमाने को दर्शाता है।
एक तरफ लेनदेन की संख्या बढ़ रही है, वहीं दूसरी ओर QR कोड और मोबाइल आधारित भुगतान छोटे कारोबार तक पहुंच रहे हैं। इससे डिजिटल पेमेंट का इस्तेमाल केवल बड़े शहरों या ऑनलाइन कारोबार तक सीमित नहीं रह गया है।
हालांकि सितंबर में मासिक आधार पर लेनदेन में मामूली गिरावट जरूर दर्ज हुई है, लेकिन पहली छमाही के आंकड़े सालाना आधार पर मजबूत वृद्धि दिखाते हैं। आने वाले महीनों में ₹2,000 से अधिक के मर्चेंट भुगतान पर MDR लागू होने के बाद इस सेगमेंट में भुगतान व्यवहार और लागत पर क्या प्रभाव पड़ता है, यह भी महत्वपूर्ण होगा।
Source: NPCI के आंकड़ों और उपलब्ध रिपोर्ट के आधार पर।
डिस्क्लेमर: UPI, MDR और डिजिटल भुगतान से जुड़े नियमों में समय-समय पर बदलाव हो सकते हैं। किसी भी भुगतान या कारोबारी निर्णय से पहले संबंधित बैंक, NPCI या आधिकारिक स्रोत से नवीनतम जानकारी की पुष्टि करें।


