Trump Tariffs: अमेरिका ने अपने 60 प्रमुख ट्रेडिंग पार्टनर्स पर नए आयात शुल्क (टैरिफ) लागू करने की घोषणा की है। नई व्यवस्था के तहत भारत से आयात होने वाले सामान पर 10% टैरिफ लागू रहेगा, जबकि चीन, जापान और दक्षिण कोरिया जैसे देशों पर 12.5% टैरिफ लगाया जाएगा। यह फैसला अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन की नई व्यापार नीति का हिस्सा है और इसका उद्देश्य जबरन मजदूरी (Forced Labour) से जुड़े आयात पर सख्ती बढ़ाना बताया गया है।
अमेरिका ने लागू किए नए टैरिफ
अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (USTR) जेमिसन ग्रीर ने नए टैरिफ की घोषणा करते हुए बताया कि ये शुल्क शुक्रवार रात 12:01 बजे (ईस्टर्न टाइम) से प्रभावी हो जाएंगे। नई व्यवस्था इस साल की शुरुआत में लागू की गई अस्थायी वैश्विक ड्यूटी की जगह लेगी, जिसकी अवधि अब समाप्त हो रही है।
USTR की फैक्ट शीट के मुताबिक नए टैरिफ 10% से 12.5% के बीच होंगे और अमेरिका के कुल आयात व्यापार का लगभग 99.4% हिस्सा इनके दायरे में आएगा।
भारत के लिए राहत, 10% ही रहेगा टैरिफ
नई नीति के तहत भारत सहित 17 देशों को अपेक्षाकृत राहत मिली है। जिन देशों ने जबरन मजदूरी से जुड़े आयात पर प्रतिबंध लागू किया है या ऐसा करने की प्रतिबद्धता जताई है, उनके लिए 10% की कम टैरिफ दर तय की गई है।
इन देशों में शामिल हैं:
- भारत
- कनाडा
- बांग्लादेश
- पाकिस्तान
- यूनाइटेड किंगडम
- अन्य 12 देश
भारत के लिए यह राहत इसलिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि अमेरिका उसका सबसे बड़ा निर्यात बाजार है।
भारत-अमेरिका व्यापार पर कितना असर पड़ेगा?
वाणिज्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2025 में भारत और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय व्यापार लगभग 141 अरब डॉलर रहा। इसमें भारत का अमेरिका को निर्यात 87.3 अरब डॉलर रहा।
अमेरिका भारत का:
- दूसरा सबसे बड़ा ट्रेडिंग पार्टनर है।
- भारतीय निर्यात का सबसे बड़ा गंतव्य है।
ऐसे में टैरिफ दर 10% पर बने रहने से भारतीय निर्यातकों को अपेक्षाकृत राहत मिल सकती है। हालांकि कुछ क्षेत्रों में लागत बढ़ने का असर देखने को मिल सकता है।
चीन, जापान और दक्षिण कोरिया पर ज्यादा टैरिफ
नई व्यवस्था के तहत चीन, जापान, दक्षिण कोरिया सहित कई अन्य देशों पर 12.5% टैरिफ लगाया जाएगा।
हालांकि यूरोपीय संघ (EU), ताइवान, जापान, दक्षिण कोरिया और स्विट्जरलैंड को पहले से मौजूद व्यापार समझौतों के कारण कुछ मामलों में राहत मिलने की संभावना जताई गई है।
फोर्स्ड लेबर पर अमेरिका का सख्त रुख
AFP की रिपोर्ट के अनुसार USTR प्रमुख जेमिसन ग्रीर ने कहा कि अमेरिका में लगभग एक सदी से जबरन मजदूरी से जुड़े आयात पर प्रतिबंध लागू है और अब समय आ गया है कि उसके व्यापारिक साझेदार भी इसी तरह के सख्त कदम उठाएं।
नई टैरिफ नीति का मुख्य उद्देश्य उन देशों पर दबाव बनाना है जो फोर्स्ड लेबर से जुड़े उत्पादों के आयात को रोकने के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठा रहे हैं।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद आया नया आदेश
इस साल फरवरी में अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप प्रशासन के कई टैरिफ आदेशों को रद्द कर दिया था। इसके बाद राष्ट्रपति ट्रंप ने वैकल्पिक कानूनी प्रावधानों के जरिए 150 दिनों के लिए 10% अस्थायी आयात शुल्क लागू किया था।
अब उस अस्थायी व्यवस्था की अवधि समाप्त होने के बाद नई टैरिफ नीति लागू की जा रही है, जो आने वाले समय में अमेरिका की व्यापार रणनीति का प्रमुख हिस्सा बनेगी।
किन उत्पादों पर नहीं पड़ेगा असर?
अमेरिका ने स्पष्ट किया है कि जिन उत्पादों पर पहले से सेक्टर-विशिष्ट टैरिफ लागू हैं, उन पर नई घोषणा का कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।
इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं:
- स्टील
- एल्युमीनियम
- अन्य पहले से टैरिफ वाले सेक्टर
भारत के लिए इसका क्या मतलब?
भारत पर 10% टैरिफ बनाए रखना इस बात का संकेत माना जा रहा है कि अमेरिका ने भारत को अपेक्षाकृत कम शुल्क वाले देशों की श्रेणी में रखा है। इससे भारतीय निर्यातकों को चीन जैसे प्रतिस्पर्धी देशों की तुलना में कुछ बढ़त मिल सकती है। हालांकि वैश्विक व्यापार माहौल में बढ़ती संरक्षणवादी नीतियों के कारण निर्यातकों को लागत, मांग और सप्लाई चेन से जुड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।


