Trading Plan: भारतीय शेयर बाजार में पिछले कुछ सत्रों से उतार-चढ़ाव जारी है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव तथा कच्चे तेल की कीमतों में तेजी ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। हालांकि, बाजार में आई रिकवरी के बावजूद निफ्टी अभी भी पिछले बुधवार को बने बेयरिश गैप के नीचे कारोबार कर रहा है। ऐसे में आगे की दिशा के लिए 24,000 और 24,400 के स्तर बेहद अहम रहने वाले हैं।
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक निफ्टी इस बेयरिश गैप को भरकर उसके ऊपर टिकाऊ मजबूती नहीं दिखाता, तब तक बाजार में रेंज-बाउंड ट्रेडिंग जारी रह सकती है। निफ्टी के लिए 24,000 का स्तर तत्काल सपोर्ट है, जबकि इसके नीचे 23,800-23,650 का जोन अगला महत्वपूर्ण सपोर्ट बन सकता है।
निफ्टी में कंसोलिडेशन जारी रहने की संभावना
पिछले दो कारोबारी सत्रों में निफ्टी ने अच्छी रिकवरी दिखाई है, लेकिन इसके बावजूद इंडेक्स अभी भी लंबी बेयरिश कैंडलस्टिक के दायरे में बना हुआ है। इसके अलावा पिछले बुधवार को बना गैप भी अभी तक पूरी तरह भर नहीं पाया है।
तकनीकी विश्लेषकों के अनुसार, निफ्टी को आगे बढ़ने के लिए पहले 24,400-24,500 के जोन को पार करना होगा। इसके बाद इंडेक्स 24,600 और फिर 24,750 के स्तर की ओर बढ़ सकता है।
अगर निफ्टी 24,000 के नीचे फिसलता है तो बाजार में बिकवाली का दबाव बढ़ सकता है और इंडेक्स 23,817-23,650 के बुलिश गैप जोन को दोबारा टेस्ट कर सकता है।
US-ईरान तनाव और क्रूड ऑयल पर बाजार की नजर
शेयर बाजार की अगली चाल काफी हद तक वैश्विक घटनाक्रमों पर निर्भर करेगी। अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी देखने को मिली है।
ब्रेंट क्रूड के करीब 80 डॉलर प्रति बैरल के स्तर तक पहुंचने से भारत जैसे तेल आयातक देश की अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ने की आशंका रहती है। महंगा कच्चा तेल महंगाई, कंपनियों की लागत और विदेशी निवेशकों के सेंटिमेंट को प्रभावित कर सकता है।
जब तक भू-राजनीतिक तनाव कम नहीं होता और तेल की कीमतों में नरमी नहीं आती, तब तक बाजार में तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।
निफ्टी आउटलुक: राजेश पालविया की रणनीति
Axis Securities के रिसर्च हेड Rajesh Palviya के अनुसार, पिछले सप्ताह निफ्टी में काफी उतार-चढ़ाव देखने को मिला। अमेरिका-ईरान तनाव और ब्रेंट क्रूड में तेजी के कारण बाजार दबाव में रहा।
वीकली चार्ट पर निफ्टी ने एक छोटी बेयरिश कैंडल बनाई, जिसके दोनों तरफ लंबी शैडो थीं। यह पैटर्न बाजार में अनिश्चितता और दोनों तरफ से खरीद-बिक्री के दबाव को दर्शाता है।
तकनीकी नजरिए से:
- 24,521 के ऊपर निर्णायक ब्रेकआउट आने पर खरीदारी का मोमेंटम मजबूत हो सकता है।
- इसके बाद निफ्टी 24,750 की ओर बढ़ सकता है।
- 24,846 का स्तर 200-डे SMA के कारण महत्वपूर्ण रहेगा।
- नीचे की ओर 24,000 मजबूत सपोर्ट बना हुआ है।
वीकली RSI अभी भी अपनी रेफरेंस लाइन के ऊपर बना हुआ है, जो बाजार के बड़े ट्रेंड के सकारात्मक बने रहने का संकेत देता है।
निफ्टी के अहम स्तर
रेजिस्टेंस:
- 24,250
- 24,400
- 24,521
सपोर्ट:
- 24,100
- 24,000
- 23,800
निफ्टी ट्रेडिंग स्ट्रेटेजी
ट्रेडर्स के लिए विशेषज्ञों की रणनीति:
- निफ्टी फ्यूचर्स खरीदारी स्तर: 24,080 के आसपास
- स्टॉप लॉस: 23,950
- टारगेट: 24,250-24,350 का जोन
हालांकि, वैश्विक बाजारों में कमजोरी और क्रूड ऑयल की चाल को ध्यान में रखते हुए ट्रेडर्स को सतर्क रहने की सलाह दी गई है।
बैंक निफ्टी आउटलुक: 57,300 का सपोर्ट कितना मजबूत?
बैंक निफ्टी में भी फिलहाल कंसोलिडेशन देखने को मिल रहा है। वीकली चार्ट पर बैंक निफ्टी ने दोनों तरफ शैडो वाली छोटी बुलिश कैंडल बनाई है, जो बाजार में अनिश्चितता को दर्शाती है।
बैंक निफ्टी फिलहाल 57,500-58,500 के दायरे में कारोबार कर रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, इंडेक्स को अपनी अगली बड़ी चाल के लिए किसी मजबूत ट्रिगर का इंतजार है।
अगर बैंक निफ्टी 58,500-58,700 के ऊपर टिकाऊ क्लोजिंग देता है तो खरीदारी बढ़ सकती है और इंडेक्स 60,000 के स्तर की ओर बढ़ सकता है।
वहीं, अगर इंडेक्स 57,500 के नीचे टूटता है तो मुनाफावसूली बढ़ सकती है और बैंक निफ्टी 57,000-56,500 के सपोर्ट जोन तक जा सकता है।
बैंक निफ्टी के अहम स्तर
रेजिस्टेंस:
- 58,350
- 58,550
- 58,700
सपोर्ट:
- 57,800
- 57,500
- 57,000
बैंक निफ्टी ट्रेडिंग स्ट्रेटेजी
- बैंक निफ्टी फ्यूचर्स खरीदारी स्तर: 57,850 के आसपास
- स्टॉप लॉस: 57,600
- टारगेट: 58,200-58,400 का जोन
निवेशकों के लिए क्या है रणनीति?
मौजूदा बाजार में ट्रेडर्स को जल्दबाजी में बड़े दांव लगाने से बचना चाहिए। निफ्टी और बैंक निफ्टी दोनों ही महत्वपूर्ण सपोर्ट और रेजिस्टेंस के बीच फंसे हुए हैं।
अगर वैश्विक तनाव कम होता है और कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट आती है तो बाजार में तेजी का नया दौर शुरू हो सकता है। वहीं, तनाव बढ़ने पर अस्थिरता और दबाव दोनों बढ़ सकते हैं।
इसलिए निवेशकों को तकनीकी स्तरों के आधार पर ट्रेडिंग रणनीति बनानी चाहिए और जोखिम प्रबंधन पर विशेष ध्यान देना चाहिए।
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