PoK Protests: पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में चुनावों और सरकार विरोधी प्रदर्शनों के बीच पाकिस्तान ने विदेशी पत्रकारों और अंतरराष्ट्रीय मीडिया संस्थानों के लिए नए और सख्त मीडिया नियम लागू कर दिए हैं। सरकार का कहना है कि इन दिशानिर्देशों का उद्देश्य विदेशी मीडिया के पंजीकरण और रिपोर्टिंग प्रक्रिया को व्यवस्थित करना है, लेकिन इसकी टाइमिंग को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। भारत पहले ही PoK में कराए जा रहे चुनावों को “ढोंग” बता चुका है, जबकि अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों ने प्रेस की आजादी और मानवाधिकारों पर बढ़ती पाबंदियों को लेकर चिंता जताई है।
PoK में विरोध और चुनावों के बीच बदले मीडिया नियम
Pakistan issued new guidelines for Foriegn media for reporting
Foreign media journalists now need No Objection certificate (NOC) to travel Outside Islamabad for reporting
After committing crimes against its own people now Pakistan is trying to suppress Global media @OsintTV pic.twitter.com/W8boZdjxri
— OSINT Digest (@Indowatchosint) August 4, 2026 पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में चुनावों के दौरान हिंसा, विरोध प्रदर्शनों और सुरक्षा बलों की कार्रवाई को लेकर कई अंतरराष्ट्रीय मीडिया संस्थानों ने रिपोर्ट प्रकाशित की हैं। इन्हीं घटनाओं के बीच पाकिस्तान के सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (MOIB) ने Foreign Media Facilitation Guidelines 2026 जारी की हैं।
इन नए नियमों के तहत पाकिस्तान में काम करने वाले विदेशी पत्रकारों, मीडिया संस्थानों, फ्रीलांसरों, फिक्सरों, मीडिया मालिकों और विदेशी मीडिया के लिए काम करने वाले स्थानीय सहयोगियों का पंजीकरण और सरकारी मान्यता अनिवार्य कर दी गई है।
विदेशी पत्रकारों के लिए क्या बदला?
नई गाइडलाइंस के अनुसार अब विदेशी पत्रकारों पर कई अतिरिक्त शर्तें लागू होंगी।
- इस्लामाबाद, लाहौर और कराची के अलावा किसी भी शहर या क्षेत्र में रिपोर्टिंग से पहले सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय से नो-ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (NOC) लेना होगा।
- एबटाबाद, मरी या अन्य इलाकों में निजी यात्रा या पर्यटन के लिए भी सरकारी NOC जरूरी होगा।
- किसी भी डॉक्यूमेंट्री, न्यूज रिपोर्ट, वीडियो या सोशल मीडिया कंटेंट की शूटिंग से पहले सरकारी अनुमति लेनी होगी।
- विदेशों में रहकर विदेशी मीडिया के लिए काम करने वाले पाकिस्तानी नागरिकों को भी निकटतम पाकिस्तानी दूतावास या उच्चायोग में पंजीकरण कराना होगा।
- लंबे समय तक काम करने वाले पत्रकारों को वार्षिक मान्यता और अल्पकालिक असाइनमेंट वाले पत्रकारों को तीन महीने की अस्थायी मान्यता दी जाएगी।
- सरकार को किसी भी आवेदन को मंजूर, खारिज करने या अतिरिक्त जानकारी मांगने का अधिकार होगा।
- यदि किसी पत्रकार की गतिविधि पाकिस्तान की “विचारधारा, संप्रभुता, सुरक्षा या सार्वजनिक व्यवस्था” के खिलाफ मानी गई तो उसकी मान्यता रद्द की जा सकती है। हालांकि इन शब्दों की स्पष्ट कानूनी परिभाषा गाइडलाइंस में नहीं दी गई है।
अल जजीरा की कवरेज के बाद बढ़ी चर्चा
इन नियमों की घोषणा ऐसे समय हुई है जब पाकिस्तान ने हाल ही में अल जजीरा की PoK चुनावों से जुड़ी रिपोर्टिंग पर आपत्ति जताते हुए उसके डिजिटल और प्रसारण एक्सेस पर कार्रवाई की थी। पाकिस्तान सरकार का आरोप था कि चैनल ने चुनाव प्रक्रिया की “चयनात्मक और भ्रामक” तस्वीर पेश की।
इसके अलावा BBC समेत अन्य अंतरराष्ट्रीय मीडिया संस्थानों ने भी PoK में हिंसा, सुरक्षा बलों की कार्रवाई और अस्पतालों में घायलों के इलाज से जुड़ी रिपोर्ट प्रकाशित की थीं। विभिन्न मीडिया रिपोर्टों के अनुसार चुनाव विरोधी प्रदर्शनों के दौरान हुई झड़पों में कई लोगों की मौत हुई है, जबकि पाकिस्तान सरकार ने नागरिकों की मौत के दावों से इनकार करते हुए प्रदर्शनकारियों में प्रतिबंधित संगठनों के सदस्यों की मौजूदगी का आरोप लगाया है।
भारत पहले ही जता चुका है विरोध
भारत लगातार पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में कराए जा रहे चुनावों पर आपत्ति जताता रहा है। भारत का कहना है कि पूरा जम्मू-कश्मीर और लद्दाख उसका अभिन्न हिस्सा है तथा पाकिस्तान द्वारा PoK में कराई जाने वाली कोई भी राजनीतिक या प्रशासनिक प्रक्रिया उसकी स्थिति को बदल नहीं सकती।
मानवाधिकार संगठनों ने जताई चिंता
PoK में हिंसा और मीडिया पर बढ़ती पाबंदियों को लेकर कई वैश्विक मानवाधिकार संगठनों ने चिंता व्यक्त की है।
एमनेस्टी इंटरनेशनल ने कहा कि प्रदर्शनकारियों के खिलाफ बल प्रयोग के आरोपों की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। संस्था ने इंटरनेट और मोबाइल सेवाओं पर लगाए गए प्रतिबंधों को हटाने तथा स्वतंत्र मीडिया और पर्यवेक्षकों को क्षेत्र में पहुंच की अनुमति देने की भी मांग की।
वहीं Committee to Protect Journalists (CPJ) ने भी हिंसा की निष्पक्ष जांच और पत्रकारों के सुरक्षित कार्य वातावरण की आवश्यकता पर जोर दिया।
RSF ने प्रेस स्वतंत्रता को लेकर क्या कहा?
रिपोर्टर्स विदाउट बॉर्डर्स (RSF) के अनुसार पाकिस्तान उन देशों में शामिल है जहां स्वतंत्र पत्रकारिता को गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। संस्था का कहना है कि संवेदनशील विषयों, विशेषकर सुरक्षा और चुनावों से जुड़ी रिपोर्टिंग करने वाले पत्रकारों पर निगरानी, दबाव और कानूनी कार्रवाई का खतरा बना रहता है।
क्या नए नियमों से बढ़ेगी पारदर्शिता या और गहराएंगे सवाल?
पाकिस्तान सरकार का कहना है कि नए दिशा-निर्देश विदेशी मीडिया की कार्यप्रणाली को व्यवस्थित करने के लिए बनाए गए हैं। वहीं आलोचकों और मानवाधिकार संगठनों का तर्क है कि रिपोर्टिंग के लिए पूर्व अनुमति, यात्रा पर नियंत्रण और मान्यता रद्द करने जैसी शर्तें स्वतंत्र पत्रकारिता को प्रभावित कर सकती हैं, खासकर ऐसे समय में जब PoK की स्थिति अंतरराष्ट्रीय चर्चा का विषय बनी हुई है।
आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि इन नियमों का जमीनी रिपोर्टिंग, प्रेस की स्वतंत्रता और पाकिस्तान की अंतरराष्ट्रीय छवि पर क्या असर पड़ता है।


