Consumer Court Verdict: मंदिर परिसर में पैकेज्ड पानी की बोतल MRP से ज्यादा कीमत पर बेचना एक दुकानदार को भारी पड़ गया। आंध्र प्रदेश के अन्नावरम स्थित श्री वीरा वेंकट सत्यनारायण स्वामी मंदिर में एक श्रद्धालु से 18 रुपये MRP वाली पानी की बोतल के लिए 25 रुपये वसूले गए। मामले की शिकायत उपभोक्ता आयोग में पहुंचने के बाद दुकानदार पर 7 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है।
नई दिल्ली: मंदिर और धार्मिक स्थलों पर श्रद्धालु अक्सर पानी और दूसरी जरूरी चीजें परिसर के अंदर मौजूद दुकानों से खरीदते हैं। ऐसे में अगर किसी पैकेज्ड प्रोडक्ट के लिए MRP से अधिक कीमत वसूली जाती है, तो उपभोक्ता इसके खिलाफ शिकायत कर सकता है। आंध्र प्रदेश के अन्नावरम मंदिर से जुड़ा ऐसा ही एक मामला सामने आया है, जिसमें एक श्रद्धालु को पानी की बोतल के लिए MRP से 7 रुपये अधिक चुकाने पड़े।
काकीनाडा जिला उपभोक्ता आयोग ने मामले की सुनवाई करते हुए संबंधित दुकान के लाइसेंसी पर 7 लाख रुपये का दंड लगाया। आयोग ने इस रकम को कंज्यूमर वेलफेयर फंड में जमा कराने का आदेश दिया है। इसके अलावा शिकायतकर्ता को अतिरिक्त वसूली की रकम लौटाने, मुआवजा देने और मुकदमे का खर्च भी चुकाने का निर्देश दिया गया है।
श्रद्धालु से पानी की बोतल के लिए लिए गए 25 रुपये
मामला 22 फरवरी 2026 का है। डी. वेंकटेश्वर राव अन्नावरम स्थित श्री वीरा वेंकट सत्यनारायण स्वामी मंदिर पहुंचे थे। उन्होंने मंदिर परिसर में लाइसेंसी द्वारा संचालित दुकान से एक लीटर पैकेज्ड ड्रिंकिंग वॉटर की बोतल खरीदी।
बोतल पर MRP 18 रुपये दर्ज थी, लेकिन दुकान पर इसके लिए उनसे UPI के माध्यम से 25 रुपये लिए गए। इस तरह पानी की बोतल पर 7 रुपये अतिरिक्त वसूले गए। राव ने दुकानदार से MRP से अधिक पैसे लेने को लेकर सवाल किया। शिकायतकर्ता के मुताबिक, दुकानदार ने कथित तौर पर कहा कि उसे MRP से अधिक कीमत पर बोतल बेचने की अनुमति है।
इसके बाद राव ने मंदिर प्रशासन को WhatsApp के जरिए शिकायत की। शिकायतकर्ता का आरोप था कि इस मामले में प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद उन्होंने उपभोक्ता आयोग का रुख किया।
दुकानदार ने क्या सफाई दी?
मामला उपभोक्ता आयोग पहुंचने के बाद दुकानदार ने अतिरिक्त रकम वसूलने से इनकार किया। उसकी ओर से अलग दलील पेश की गई। दुकानदार के मुताबिक, श्रद्धालु ने केवल पानी की बोतल नहीं खरीदी थी।
दुकानदार ने दावा किया कि ग्राहक ने 20 रुपये का एक कोल्ड ड्रिंक और 5 रुपये का बिस्किट भी लिया था। उसके अनुसार, 25 रुपये का UPI भुगतान इन सामानों के लिए था, न कि केवल पानी की बोतल के लिए।
हालांकि, उपभोक्ता आयोग ने दुकानदार की इस दलील को स्वीकार नहीं किया। आयोग ने मामले में उपलब्ध UPI भुगतान रिकॉर्ड और पानी की बोतल की तस्वीर समेत अन्य सबूतों पर विचार किया। आयोग के अनुसार, उपलब्ध साक्ष्य शिकायतकर्ता के दावे का समर्थन करते थे। वहीं दुकानदार अपने दावे के समर्थन में पर्याप्त विश्वसनीय दस्तावेज पेश नहीं कर सका।
मंदिर प्रशासन को क्यों नहीं बनाया गया जिम्मेदार?
इस मामले में मंदिर प्रशासन को भी पक्ष बनाया गया था। प्रशासन ने आयोग के सामने कहा कि संबंधित दुकान स्वतंत्र लाइसेंसी द्वारा संचालित की जा रही थी। प्रशासन ने यह भी बताया कि पहले भी अधिक कीमत वसूलने से जुड़ी शिकायतें सामने आई थीं और लाइसेंसी के खिलाफ कार्रवाई की गई थी।
आयोग को ऐसा कोई सबूत नहीं मिला जिससे यह साबित हो कि मंदिर प्रशासन ने दुकान संचालक को पैकेज्ड सामान MRP से अधिक कीमत पर बेचने की अनुमति या निर्देश दिया था। इसलिए आयोग ने मंदिर प्रशासन के खिलाफ शिकायत खारिज कर दी और उसे भुगतान की जिम्मेदारी से मुक्त रखा।
हालांकि, आयोग ने मंदिर प्रशासन को कुछ जरूरी कदम उठाने का निर्देश दिया। मंदिर परिसर की सभी लाइसेंसी दुकानों में पैकेज्ड सामान की MRP स्पष्ट रूप से प्रदर्शित करने को कहा गया। इसके साथ ही श्रद्धालुओं को केवल MRP का भुगतान करने की जानकारी देने के लिए हर घंटे घोषणा कराने और शिकायतों के समाधान के लिए प्रभावी व्यवस्था बनाने का निर्देश भी दिया गया।
आयोग ने माना अनुचित व्यापार व्यवहार
उपभोक्ता आयोग ने पैकेज्ड प्रोडक्ट पर दर्ज MRP से अधिक कीमत वसूलने को गंभीरता से लिया। आयोग के अनुसार, दुकानदार की कार्रवाई अनुचित व्यापार व्यवहार और सेवा में कमी के दायरे में आती है।
आयोग ने इस बात को भी ध्यान में रखा कि यह घटना एक प्रमुख धार्मिक स्थल पर हुई, जहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। ऐसे स्थानों पर पानी जैसी जरूरी वस्तु खरीदने वाले उपभोक्ताओं के पास हमेशा दूसरे विकल्प उपलब्ध नहीं होते। ऐसी स्थिति में दुकानदार द्वारा तय की गई कीमत पर सामान खरीदने की मजबूरी हो सकती है।
दुकानदार को देने होंगे 7 लाख रुपये
काकीनाडा जिला उपभोक्ता आयोग ने 28 अगस्त 2026 को अपना आदेश पारित किया। आदेश के तहत लाइसेंसी को शिकायतकर्ता को कई तरह के भुगतान करने होंगे।
- पानी की बोतल पर अतिरिक्त वसूले गए 7 रुपये वापस करने होंगे।
- शिकायतकर्ता को 10,000 रुपये मुआवजा देना होगा।
- मुकदमे की लागत के रूप में 5,000 रुपये देने होंगे।
- इसके अलावा 7 लाख रुपये कंज्यूमर वेलफेयर फंड में जमा कराने होंगे।
आयोग ने आदेश का पालन करने के लिए 45 दिन की समयसीमा तय की है। यदि निर्धारित अवधि में भुगतान नहीं किया जाता है, तो बकाया राशि पर डिफॉल्ट की तारीख से भुगतान होने तक 9 फीसदी सालाना ब्याज भी देना होगा।
MRP से ज्यादा कीमत वसूलने पर क्या करें?
अगर किसी दुकान पर पैकेज्ड पानी, सॉफ्ट ड्रिंक या किसी अन्य पैकेज्ड प्रोडक्ट की कीमत उसके पैकेट पर लिखी MRP से अधिक मांगी जाती है, तो ग्राहक भुगतान का रिकॉर्ड संभालकर रख सकता है। बिल, UPI ट्रांजैक्शन, प्रोडक्ट की तस्वीर और दुकान की जानकारी जैसे दस्तावेज शिकायत में उपयोगी हो सकते हैं।
इस मामले में भी UPI भुगतान रिकॉर्ड और पानी की बोतल की तस्वीर आयोग के सामने महत्वपूर्ण साक्ष्य रहे। इसलिए उपभोक्ताओं के लिए किसी विवाद की स्थिति में भुगतान और उत्पाद से जुड़े प्रमाण सुरक्षित रखना उपयोगी हो सकता है।
Source: उपलब्ध रिपोर्ट के आधार पर।


