नासिक, 17 अप्रैल: देश की सबसे बड़ी आईटी कंपनियों में से एक Tata Consultancy Services ने अपने नासिक BPO यूनिट के कर्मचारियों को अस्थायी रूप से वर्क फ्रॉम होम (WFH) करने का निर्देश दिया है। यह फैसला ऐसे समय लिया गया है जब कंपनी एक गंभीर यौन उत्पीड़न और कार्यस्थल उत्पीड़न मामले से जूझ रही है, जिसने अब बहु-स्तरीय जांच का रूप ले लिया है।
कंपनी का कहना है कि यह निर्णय ऑपरेशनल वजहों से नहीं, बल्कि कर्मचारियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए लिया गया है।
क्यों लिया गया WFH का फैसला?
रिपोर्ट्स के अनुसार, हाल ही में नासिक स्थित ऑफिस के बाहर कुछ स्थानीय राजनीतिक समूहों द्वारा तोड़फोड़ की कोशिश की गई थी। इस घटना के बाद कंपनी ने तुरंत स्थिति का आकलन करते हुए कर्मचारियों को घर से काम करने की अनुमति दे दी।
सूत्रों के मुताबिक:
- ऑफिस को सील नहीं किया गया है
- पुलिस ने परिसर के बाहर सुरक्षा तैनात कर दी है
- यह फैसला अस्थायी है और स्थिति सामान्य होने तक लागू रहेगा
छोटा ऑफिस, बड़ा संकट

नासिक का यह BPO सेंटर भले ही आकार में छोटा है—करीब 5,000 स्क्वायर फीट—लेकिन यहां करीब 170 कर्मचारी दो शिफ्ट्स में काम करते हैं।
अब पूरा ऑपरेशन रिमोट मोड में शिफ्ट कर दिया गया है, जो यह दिखाता है कि मामला सिर्फ HR लेवल का नहीं, बल्कि कंपनी के लिए एक गंभीर प्रतिष्ठा और सुरक्षा संकट बन चुका है।
एक शिकायत से शुरू हुआ, अब कई FIR
इस पूरे मामले की शुरुआत मार्च में हुई, जब एक महिला कर्मचारी ने अपने सहकर्मी पर शादी का झांसा देकर शारीरिक संबंध बनाने का आरोप लगाया।
लेकिन इसके बाद मामला तेजी से बढ़ा:
- 8 नई FIR दर्ज हुईं
- आरोप 2022 से 2026 तक के बताए गए
- यौन और मानसिक उत्पीड़न दोनों शामिल
- HR विभाग पर कार्रवाई न करने के आरोप
इससे यह संकेत मिलता है कि मामला isolated incident नहीं, बल्कि संभवतः एक पैटर्न हो सकता है।
पुलिस की जांच: अंडरकवर ऑपरेशन तक
जांच एजेंसियों ने इस केस को गंभीरता से लेते हुए असामान्य कदम भी उठाए।
रिपोर्ट्स के मुताबिक:
- फरवरी-मार्च 2025 के बीच पुलिस ने अंडरकवर कर्मचारियों को तैनात किया
- उन्होंने ऑफिस के अंदर से जानकारी जुटाई
- इससे संकेत मिलता है कि पुलिस को संगठित गतिविधि का शक था
इस केस की जांच एक SIT कर रही है, जिसका नेतृत्व ACP Sandeep Mitke कर रहे हैं।
अब तक की कार्रवाई: गिरफ्तारियां और पूछताछ
इस मामले में कई आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जिनमें शामिल हैं:
- आसिफ अंसारी
- शफी शेख
- शाह रुख कुरैशी
- रजा मेमन
- तौसीफ अत्तर
- दानिश शेख
- अश्विनी चैनानी
इनमें से कुछ आरोपी न्यायिक हिरासत में हैं, जबकि अन्य की कोर्ट में सुनवाई जारी है।
टाटा ग्रुप स्तर पर जांच
मामले की गंभीरता को देखते हुए N Chandrasekaran ने खुद हस्तक्षेप किया है और एक व्यापक जांच के आदेश दिए हैं।
उन्होंने इस मामले को “गंभीर और चिंताजनक” बताते हुए कहा:
- कंपनी की zero tolerance policy लागू होगी
- दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी
इसके साथ ही TCS की COO Aarthi Subramanian को आंतरिक जांच की जिम्मेदारी दी गई है।
HR सिस्टम पर उठे सवाल
इस पूरे विवाद में सबसे बड़ा सवाल कंपनी के HR सिस्टम पर उठ रहा है।
क्योंकि:
- कई FIR में HR की निष्क्रियता का आरोप
- शिकायतों पर समय पर कार्रवाई नहीं
- POSH (Prevention of Sexual Harassment) नीति के पालन पर सवाल
यह मामला अब सिर्फ अपराध जांच नहीं, बल्कि कॉर्पोरेट गवर्नेंस और वर्कप्लेस सिस्टम की विश्वसनीयता का मुद्दा बन गया है।
कंपनी के सामने दोहरी चुनौती
Tata Consultancy Services के सामने फिलहाल दो बड़ी चुनौतियां हैं:
1. ऑपरेशनल मैनेजमेंट
- कर्मचारियों की सुरक्षा
- बिजनेस कंटिन्यूटी बनाए रखना
2. प्रतिष्ठा और भरोसा
- कर्मचारियों का विश्वास बनाए रखना
- पब्लिक इमेज को संभालना
- जांच में पारदर्शिता दिखाना
आगे क्या?
आने वाले समय में इस केस की दिशा तीन चीजों पर निर्भर करेगी:
- पुलिस जांच के निष्कर्ष
- आंतरिक जांच की रिपोर्ट
- कोर्ट की कार्यवाही
अगर आरोप साबित होते हैं, तो यह केस भारत के IT सेक्टर में वर्कप्लेस सेफ्टी का बड़ा उदाहरण बन सकता है।
निष्कर्ष: एक कंपनी नहीं, पूरे सिस्टम के लिए चेतावनी
नासिक TCS केस अब सिर्फ एक कंपनी का मामला नहीं रह गया है। यह पूरे कॉर्पोरेट सेक्टर के लिए एक संकेत है कि:
- वर्कप्लेस सेफ्टी को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता
- HR सिस्टम मजबूत होना जरूरी है
- शिकायतों पर तुरंत और पारदर्शी कार्रवाई जरूरी है
Tata Consultancy Services फिलहाल संकट प्रबंधन के दौर से गुजर रही है, लेकिन इस केस का असली असर आने वाले समय में पूरे इंडस्ट्री पर देखने को मिल सकता है।
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