Tata Group: टाटा समूह में नेतृत्व परिवर्तन की प्रक्रिया अब अहम दौर में पहुंचती दिख रही है। टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा ने शनिवार को नई दिल्ली में प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) और केंद्रीय गृह मंत्रालय के अधिकारियों से मुलाकात की। रिपोर्ट के मुताबिक, इन बैठकों में टाटा समूह की मौजूदा स्थिति और Tata Sons के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन के उत्तराधिकारी को लेकर चल रही प्रक्रिया पर चर्चा हुई।
यह घटनाक्रम इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि कुछ दिन पहले ही एन. चंद्रशेखरन ने साफ कर दिया था कि वह 20 फरवरी 2027 के बाद Tata Sons के चेयरमैन के तौर पर नया कार्यकाल नहीं लेंगे। उनके इस फैसले के बाद समूह में अगले चेयरमैन की तलाश शुरू होने की उम्मीद है।
सरकार को नेतृत्व परिवर्तन की जानकारी दी
CNBC-TV18 के सूत्रों के हवाले से सामने आई जानकारी के मुताबिक, नोएल टाटा ने सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों को टाटा समूह में चल रही नेतृत्व परिवर्तन की प्रक्रिया से अवगत कराया। इन मुलाकातों को ऐसे समय में महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जब Tata Sons के स्तर पर नेतृत्व, गवर्नेंस और समूह की भविष्य की रणनीति को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं।
नोएल टाटा इससे पहले भी केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात कर चुके हैं। रिपोर्टों के मुताबिक, अक्टूबर 2025 और फरवरी 2026 में हुई इन मुलाकातों में एयर इंडिया समेत टाटा समूह से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर बातचीत हुई थी।
एन. चंद्रशेखरन के बाद कौन संभालेगा कमान?
एन. चंद्रशेखरन ने 12 अगस्त 2026 को Tata Sons के बोर्ड को सूचित किया था कि वह अपने मौजूदा कार्यकाल की समाप्ति के बाद दोबारा चेयरमैन पद के लिए नियुक्ति नहीं चाहते। उन्होंने उत्तराधिकारी चुनने की प्रक्रिया शुरू करने की जरूरत भी बताई थी।
चंद्रशेखरन करीब एक दशक से टाटा समूह के शीर्ष नेतृत्व में रहे हैं। उनके बाद चेयरमैन कौन होगा, यह फैसला Tata Trusts और Tata Sons के बीच शक्ति संतुलन के लिहाज से भी बेहद अहम माना जा रहा है।
नोएल टाटा की भूमिका इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि वह Tata Trusts के चेयरमैन हैं। Tata Trusts के पास Tata Sons में करीब 66 फीसदी हिस्सेदारी है, जिससे समूह के भविष्य के नेतृत्व को तय करने में ट्रस्ट की भूमिका बेहद अहम हो जाती है।
Tata Sons की AGM पर भी संकट
नेतृत्व परिवर्तन के साथ-साथ Tata Sons की 18 अगस्त 2026 को प्रस्तावित सालाना आम बैठक (AGM) भी चर्चा में है। बैठक में कोरम को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। इसकी वजह Sir Ratan Tata Trust पर लागू नियामकीय प्रतिबंध बताया जा रहा है।
रिपोर्ट के अनुसार, Sir Ratan Tata Trust फिलहाल कुछ गतिविधियों में हिस्सा नहीं ले सकता। इसके कारण Sir Dorabji Tata Trust और Sir Ratan Tata Trust की ओर से संयुक्त रूप से अधिकृत प्रतिनिधि के नामांकन में परेशानी आ रही है। अगर जरूरी कोरम पूरा नहीं हुआ तो AGM को आगे के लिए स्थगित करना पड़ सकता है।
AGM में चंद्रशेखरन की भूमिका पर भी फैसला
Tata Sons की AGM इसलिए भी अहम है क्योंकि इसमें कंपनी के वित्तीय वर्ष 2025-26 के खातों से जुड़े प्रस्तावों के साथ-साथ अन्य महत्वपूर्ण मुद्दों पर शेयरधारकों की मंजूरी ली जानी है।
इनमें एन. चंद्रशेखरन की निदेशक के तौर पर दोबारा नियुक्ति का प्रस्ताव भी शामिल है। उनका चेयरमैन पद का मौजूदा कार्यकाल फरवरी 2027 तक है, लेकिन निदेशक के तौर पर उनका बने रहना भी उनके वर्तमान कार्यकाल को पूरा करने के लिए जरूरी है।
इसके अलावा साधारण शेयरों पर डिविडेंड, वित्तीय खातों की मंजूरी और चेयरमैन के पारिश्रमिक से जुड़े प्रस्ताव भी AGM के एजेंडे का हिस्सा हैं।
टाटा समूह के लिए क्यों अहम है यह बदलाव?
Tata Group देश के सबसे बड़े कारोबारी समूहों में से एक है। ऐसे में Tata Sons के चेयरमैन में बदलाव का असर केवल एक पद पर नहीं, बल्कि समूह की भविष्य की रणनीति, निवेश और गवर्नेंस पर भी पड़ सकता है।
हाल के महीनों में Tata Sons की लिस्टिंग, Tata Trusts और Tata Sons के बीच रणनीतिक मतभेद और एयर इंडिया समेत कुछ बड़े कारोबारों के प्रदर्शन को लेकर भी चर्चा रही है। Reuters की रिपोर्ट के मुताबिक, नोएल टाटा अब समूह के उत्तराधिकार और Tata Sons की लिस्टिंग जैसे महत्वपूर्ण फैसलों में प्रभावशाली भूमिका निभा रहे हैं।
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि एन. चंद्रशेखरन के बाद Tata Sons की कमान किसके हाथ में जाएगी। नोएल टाटा की हालिया सरकारी अधिकारियों से मुलाकात ने इस सवाल को और महत्वपूर्ण बना दिया है। हालांकि, नए चेयरमैन के नाम को लेकर अभी कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।
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