भारत सरकार ने ‘स्वदेशी अभियान’ शुरू किया है। जानें कैसे यह भारतीय वस्त्र उद्योग को बढ़ावा देगा, रोजगार सृजन करेगा और 2030 तक $250 बिलियन बाजार तक पहुँचने में मदद करेगा।
2025 में भारत सरकार ने ‘स्वदेशी अभियान’ की शुरुआत की है, जिसका उद्देश्य भारतीय हैंडलूम, हस्तशिल्प और वस्त्र उत्पादों की घरेलू मांग को बढ़ाना है। यह अभियान 6 से 9 महीने तक चलेगा और विशेष रूप से शहरी युवाओं और जनरेशन Z को लक्षित करेगा, ताकि भारतीय वस्त्रों को फैशनेबल और सांस्कृतिक धरोहर के प्रतीक के रूप में प्रस्तुत किया जा सके।
अभियान के उद्देश्य

1. घरेलू मांग में वृद्धि:
स्वदेशी अभियान का मुख्य लक्ष्य भारतीय वस्त्रों की घरेलू मांग को बढ़ाना और नागरिकों में भारतीय उत्पादों के प्रति गर्व की भावना जगाना है।
2. हैंडलूम और हस्तशिल्प को बढ़ावा:
इस पहल के माध्यम से छोटे कारीगर, हस्तशिल्प और हैंडलूम उद्योग के उत्पादों की पहचान और मांग में वृद्धि होगी।
3. संस्थागत खरीद को प्रोत्साहन:
सरकारी मंत्रालयों, सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रमों और शैक्षिक संस्थानों को भारतीय वस्त्रों की खरीद के लिए प्रेरित किया जाएगा।
4. PLI योजना और पीएम मितरा पार्क्स का समर्थन:
प्रधानमंत्री के मितरा पार्क्स और उत्पादन-लिंक्ड प्रोत्साहन (PLI) योजनाओं के माध्यम से वस्त्र उद्योग को आर्थिक और तकनीकी सहायता मिलेगी।
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रणनीतियाँ और प्रचार

- सामाजिक मीडिया अभियान और राज्य सरकारों के साथ साझेदारी:
सोशल मीडिया और राज्य सरकारों के माध्यम से लोगों में जागरूकता फैलाना। - स्लोगन और मार्केटिंग:
“स्वदेशी कपड़ा, देश की शान—यही है भारत की पहचान” जैसे स्लोगनों के माध्यम से अभियान का प्रचार। - ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म का उपयोग:
ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर भारतीय वस्त्रों की बिक्री को बढ़ावा दिया जाएगा।
आर्थिक और बाज़ार प्रभाव

- 2024 में भारतीय वस्त्र और परिधान बाजार का मूल्य $179 बिलियन था और यह औसतन 7% वार्षिक वृद्धि दर से बढ़ रहा है।
- घरेलू खपत का योगदान 58% है, जो 8.19% की वार्षिक वृद्धि दर से बढ़ रहा है।
- नॉन-हाउसहोल्ड खपत का योगदान 21% है, जो 6.79% की वृद्धि दर से बढ़ रहा है।
- स्वदेशी अभियान के माध्यम से, घरेलू वस्त्रों की मांग में 9-10% वार्षिक वृद्धि होने की संभावना है, जिससे 2030 तक यह $250 बिलियन तक पहुँच सकती है।
भारत और रोजगार के अवसर

स्वदेशी अभियान से न केवल वस्त्र उद्योग को बल मिलेगा बल्कि इससे रोजगार सृजन, आर्थिक विकास और सांस्कृतिक संरक्षण में भी मदद मिलेगी। यह पहल कारीगरों, छोटे व्यवसायों और स्टार्टअप्स के लिए नए अवसर खोलेगी।
निष्कर्ष

‘स्वदेशी अभियान‘ भारतीय वस्त्र उद्योग के लिए एक क्रांतिकारी कदम है। यह उद्योग की पहचान को मजबूत करेगा, घरेलू मांग बढ़ाएगा और भारत को वस्त्र उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति दिलाएगा।
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