Sugar Stocks Crash: सरकार के ड्यूटी-फ्री रॉ शुगर इंपोर्ट के फैसले का असर शुक्रवार, 21 अगस्त को चीनी कंपनियों के शेयरों पर साफ दिखाई दिया। शुगर स्टॉक्स में शुरुआती कारोबार के दौरान तेज गिरावट देखने को मिली। बलरामपुर चीनी मिल्स, श्री रेणुका शुगर्स, बजाज हिंदुस्तान शुगर और बन्नारी अम्मन शुगर्स समेत कई कंपनियों के शेयर दबाव में रहे।
सरकार ने देश में चीनी की उपलब्धता बढ़ाने और आगामी त्योहारी सीजन के दौरान कीमतों को नियंत्रित रखने के लिए 10 लाख टन रॉ शुगर के ड्यूटी-फ्री इंपोर्ट की अनुमति दी है। खास बात यह है कि करीब एक दशक में यह पहली बार है जब सरकार ने रॉ शुगर के आयात पर इस तरह की छूट दी है।
ड्यूटी-फ्री शुगर इंपोर्ट से क्यों गिरे शुगर स्टॉक्स?
शुगर कंपनियों के शेयरों में गिरावट की सबसे बड़ी वजह घरेलू बाजार में चीनी की सप्लाई बढ़ने की उम्मीद है। सरकार के फैसले से देश में रॉ शुगर की उपलब्धता बढ़ेगी, जिसे रिफाइन करके घरेलू बाजार में चीनी की सप्लाई बढ़ाई जा सकती है।
पिछले कुछ समय में घरेलू स्तर पर चीनी की कीमतों में तेज बढ़ोतरी हुई है। ऐसे में सरकार की कोशिश है कि त्योहारी सीजन शुरू होने से पहले बाजार में पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध रहे। अक्टूबर से देश में त्योहारों का मौसम शुरू हो जाता है और इस दौरान चीनी की मांग आमतौर पर बढ़ती है।
बढ़ी हुई सप्लाई से चीनी की कीमतों पर दबाव आ सकता है। यही संभावना शुगर कंपनियों के निवेशकों के लिए चिंता का कारण बनी है, क्योंकि ऊंची चीनी कीमतों से कंपनियों को मिलने वाला फायदा कम हो सकता है।
बलरामपुर चीनी मिल्स का शेयर सबसे ज्यादा गिरा
शुक्रवार, 21 अगस्त को कारोबार के दौरान Balrampur Chini Mills के शेयरों में सबसे ज्यादा कमजोरी देखने को मिली। सुबह करीब 11 बजे कंपनी का शेयर लगभग 4.56 फीसदी गिरकर 732 रुपये के आसपास कारोबार कर रहा था।
इसके अलावा Shri Renuka Sugars के शेयर में करीब 4.13 फीसदी की गिरावट रही और यह लगभग 25 रुपये के स्तर पर कारोबार करता नजर आया।
Bajaj Hindusthan Sugar का शेयर भी करीब 3.26 फीसदी टूटकर 22 रुपये के आसपास पहुंच गया। वहीं Bannari Amman Sugars के शेयर में करीब 4.46 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई और यह लगभग 4,051 रुपये के स्तर पर कारोबार कर रहा था।
इससे साफ है कि ड्यूटी-फ्री इंपोर्ट के फैसले का असर केवल एक कंपनी तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पूरे शुगर सेक्टर में बिकवाली का दबाव देखने को मिला।
एक दशक बाद सरकार ने लिया बड़ा फैसला
रॉ शुगर के ड्यूटी-फ्री इंपोर्ट की अनुमति को शुगर इंडस्ट्री के लिए एक बड़ा नीतिगत बदलाव माना जा रहा है। सरकार ने करीब 10 लाख टन रॉ शुगर के आयात की अनुमति दी है।
इस फैसले का उद्देश्य घरेलू बाजार में चीनी की उपलब्धता बढ़ाना है। सरकार को आशंका है कि अगर सप्लाई पर्याप्त नहीं रही तो त्योहारी सीजन के दौरान चीनी की कीमतों में और तेजी आ सकती है।
रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले दो महीनों में चीनी की कीमतों में करीब 40 फीसदी तक उछाल आया है। घरेलू उत्पादन में कमी को इसकी प्रमुख वजहों में माना जा रहा है। ऐसे में आयात के जरिए सप्लाई बढ़ाने की कोशिश की जा रही है।
जमाखोरी रोकने के लिए भी सरकार ने उठाया कदम
चीनी की कीमतों को नियंत्रित करने के लिए सरकार ने सिर्फ आयात का फैसला नहीं लिया है। 20 अगस्त को चीनी की जमाखोरी पर अंकुश लगाने के उद्देश्य से डीलर्स के लिए नई स्टॉक लिमिट से जुड़ा आदेश भी जारी किया गया था।
सरकार की कोशिश है कि बाजार में पर्याप्त मात्रा में चीनी उपलब्ध रहे और कारोबारी बड़े पैमाने पर स्टॉक जमा करके कीमतों को प्रभावित न कर सकें।
ड्यूटी-फ्री आयात और स्टॉक लिमिट जैसे कदमों से घरेलू बाजार में चीनी की सप्लाई बढ़ाने और कीमतों को स्थिर रखने की कोशिश की जा रही है।
दो दिन पहले शुगर शेयरों में आई थी जबरदस्त तेजी
दिलचस्प बात यह है कि 21 अगस्त की गिरावट से ठीक पहले शुगर कंपनियों के शेयरों में जोरदार तेजी देखने को मिली थी। कम सप्लाई और चीनी की बढ़ती कीमतों के कारण निवेशकों को उम्मीद थी कि शुगर कंपनियों की कमाई और मार्जिन को फायदा मिल सकता है।
20 अगस्त को Balrampur Chini Mills का शेयर 18 फीसदी से ज्यादा चढ़ गया था। वहीं Dwarikesh Sugar Industries में करीब 14 फीसदी की तेजी आई थी। कई अन्य शुगर कंपनियों के शेयरों में भी लगभग 7 से 10 फीसदी तक की बढ़त दर्ज की गई थी।
हालांकि, सरकार के ड्यूटी-फ्री इंपोर्ट के फैसले के बाद निवेशकों की धारणा बदल गई और शुक्रवार को इस सेक्टर में तेज बिकवाली देखने को मिली।
आगे शुगर कंपनियों के लिए क्या मायने?
ड्यूटी-फ्री रॉ शुगर इंपोर्ट से शुगर कंपनियों पर निकट अवधि में दबाव बना रह सकता है। यदि आयात के कारण घरेलू बाजार में चीनी की उपलब्धता बढ़ती है और कीमतें नीचे आती हैं, तो कंपनियों को ऊंची कीमतों से मिलने वाला फायदा कम हो सकता है।
हालांकि, इसका दूसरा पहलू भी है। पर्याप्त कच्चे माल और स्थिर सप्लाई से चीनी उद्योग को उत्पादन और संचालन के स्तर पर मदद मिल सकती है। इसलिए लंबे समय में किसी कंपनी पर असर उसके उत्पादन, इन्वेंट्री, लागत, एथेनॉल कारोबार और चीनी की कीमतों पर निर्भर करेगा।
निवेशकों के लिए यह समझना जरूरी है कि केवल एक दिन की तेजी या गिरावट के आधार पर शुगर शेयरों को लेकर कोई निष्कर्ष नहीं निकाला जाना चाहिए। सरकारी नीतियां, घरेलू चीनी उत्पादन, वैश्विक कीमतें और आगामी त्योहारी सीजन की मांग इन कंपनियों के प्रदर्शन को प्रभावित करने वाले अहम कारक होंगे।
नोट: शेयर बाजार में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। किसी भी स्टॉक में निवेश करने से पहले कंपनी के फंडामेंटल और अपनी वित्तीय स्थिति का स्वतंत्र रूप से विश्लेषण करें।


