Sugar Price Hike: चीनी की कीमतों में तेज उछाल के बाद केंद्र सरकार ने स्टॉक की निगरानी और जांच-पड़ताल बढ़ा दी है। स्टॉक लिमिट लगाने के बाद अब चीनी मिलों में मौजूद स्टॉक की फिजिकल जांच की जा रही है। साथ ही बड़े औद्योगिक खरीदारों से चीनी की खरीद और खपत का डेटा भी मांगा गया है।
नई दिल्ली: चीनी की बढ़ती कीमतों ने सरकार की चिंता बढ़ा दी है। कीमतों को नियंत्रित रखने और बाजार में चीनी की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए केंद्र सरकार ने अब स्टॉक की फिजिकल जांच शुरू कर दी है। खाद्य मंत्रालय बड़े औद्योगिक खरीदारों से चीनी की खरीद और खपत का डेटा जुटा रहा है। अधिकारियों की टीमें अलग-अलग राज्यों में चीनी मिलों के गोदामों में जाकर स्टॉक का भौतिक सत्यापन भी कर रही हैं।
इस कार्रवाई का मकसद यह पता लगाना है कि मिलों और कारोबारियों की ओर से घोषित स्टॉक और वास्तव में मौजूद चीनी के स्टॉक में कोई अंतर तो नहीं है।
बड़े खरीदारों पर सरकार की नजर
भारत में चीनी की कुल खपत का करीब 65 फीसदी हिस्सा बड़े औद्योगिक खरीदारों द्वारा इस्तेमाल किया जाता है। इनमें सॉफ्ट ड्रिंक और आइसक्रीम बनाने वाली कंपनियां, मिठाई विक्रेता और फूड प्रोसेसिंग कंपनियां शामिल हैं।
सरकार ने चीनी मिलों से उन बड़े खरीदारों की जानकारी मांगी है, जिन्हें वित्त वर्ष 2025-26 में सीधे या एजेंट के माध्यम से सालाना 500 टन या उससे अधिक चीनी बेची गई थी।
इस जानकारी के जरिए सरकार यह समझना चाहती है कि चीनी की सप्लाई वास्तव में कहां जा रही है और खरीदी गई चीनी की वास्तविक खपत कितनी है।
मिलों के गोदामों में मिला घोषित स्टॉक से अलग माल
उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय ने चीनी मिलों को पत्र भेजकर बड़े खरीदारों को की गई बिक्री से जुड़ा डेटा साझा करने को कहा है।
ET की रिपोर्ट के मुताबिक, मंत्रालय के पत्र में फिजिकल स्टॉक जांच के दौरान सामने आई कुछ विसंगतियों का भी जिक्र किया गया है। जांच के दौरान कुछ मामलों में ऐसे बड़े खरीदारों के नाम पर बेची गई चीनी मिलों के गोदामों में ही रखी मिली, जबकि यह स्टॉक मिलों की ओर से P-2 फॉर्म में दी गई जानकारी में दिखाई नहीं दे रहा था।
यही वजह है कि सरकार अब बिक्री और वास्तविक स्टॉक के आंकड़ों का मिलान कर रही है।
क्या है सरकार की ‘सर्जिकल स्ट्राइक’?
चीनी की कीमतों में रिकॉर्ड तेजी के बाद केंद्र सरकार ने पहले चीनी डीलरों पर स्टॉक लिमिट लागू की। इसके बाद सरकार ने मिलों के पास मौजूद चीनी के स्टॉक की फिजिकल जांच का फैसला किया।
यह जांच 1 अगस्त से 14 अगस्त के बीच की गई। अधिकारियों ने मिलों में मौजूद वास्तविक स्टॉक को रिकॉर्ड किए गए आंकड़ों से मिलाने की कोशिश की।
इंडस्ट्री से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, बड़े खरीदारों से डेटा मांगने वाला पत्र इसी फिजिकल जांच के दौरान सामने आई जानकारियों के आधार पर भेजा गया है।
सरकार क्यों बढ़ा रही है निगरानी?
चीनी की कीमतों में तेजी का सीधा असर खाद्य महंगाई और आम उपभोक्ताओं पर पड़ सकता है। ऐसे में सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि बाजार में पर्याप्त चीनी उपलब्ध रहे और किसी स्तर पर स्टॉक की गलत रिपोर्टिंग या जमाखोरी जैसी स्थिति न बने।
बड़े खरीदारों की खरीद का डेटा हासिल करने से सरकार को चीनी की सप्लाई चेन पर ज्यादा स्पष्ट तस्वीर मिल सकती है। वहीं, मिलों में फिजिकल वेरिफिकेशन से रिकॉर्ड और वास्तविक स्टॉक के बीच संभावित अंतर की पहचान करने में मदद मिलेगी।
आगे और सख्त हो सकती है कार्रवाई
सरकार की मौजूदा कार्रवाई से साफ है कि चीनी की कीमतों पर उसकी नजर बनी हुई है। पहले स्टॉक लिमिट और अब मिलों में फिजिकल जांच के बाद बड़े खरीदारों के डेटा की पड़ताल की जा रही है।
अगर जांच में घोषित स्टॉक और वास्तविक स्टॉक के बीच बड़े स्तर पर अंतर मिलता है, तो सरकार आगे और कड़े कदम उठा सकती है। फिलहाल मंत्रालय का फोकस चीनी के स्टॉक, बिक्री और खपत के आंकड़ों को आपस में मिलाकर बाजार की वास्तविक स्थिति समझने पर है।
डिस्क्लेमर: यह खबर उपलब्ध रिपोर्टों और सरकारी कार्रवाई से जुड़ी जानकारी पर आधारित है। चीनी की कीमतें और सरकारी नीतियां समय के साथ बदल सकती हैं।


