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शेयर बाज़ार

Stock Market Closing: शेयर बाजार में लगातार 5वें दिन तेजी, निफ्टी 23,960 के पार; मीडिया और मेटल सेक्टर ने मचाया धमाल

Namam Sharma
Last updated: 2026/11/04 at 4:00 अपराह्न
Namam Sharma - Senior Editor – Newsjagran
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9 Min Read
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भारतीय शेयर बाजार में 4 नवंबर 2026 को लगातार पांचवें कारोबारी सत्र में तेजी जारी रही। मंगलवार को घरेलू शेयर बाजार के प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स और निफ्टी बढ़त के साथ बंद हुए। कारोबार के दौरान निवेशकों की खरीदारी से निफ्टी 23,960 के स्तर के पार पहुंच गया, जबकि सेंसेक्स भी 77,300 के ऊपर बंद होने में कामयाब रहा। हालांकि, ऊंचे स्तरों पर मुनाफावसूली और कमजोर वैश्विक संकेतों के कारण बाजार की शुरुआती तेजी कुछ कम हो गई।

Contents
Highlights: शेयर बाजार की 5 बड़ी बातेंकिन शेयरों में सबसे ज्यादा तेजी और गिरावट रही?Media और Metal सेक्टर में सबसे ज्यादा तेजीMidcap और Smallcap शेयरों में भी खरीदारीलगातार पांच दिन की तेजी के बाद क्यों हुई मुनाफावसूली?कमजोर वैश्विक संकेतों ने बढ़ाई चिंताअमेरिकी मध्यावधि चुनावों पर भी निवेशकों की नजरआगे बाजार की दिशा किन बातों पर निर्भर करेगी?

कारोबार के अंत में बीएसई सेंसेक्स 383.55 अंक यानी 0.50 प्रतिशत की बढ़त के साथ 77,301.40 पर बंद हुआ। वहीं, एनएसई निफ्टी 149.75 अंक यानी 0.63 प्रतिशत चढ़कर 23,960.60 के स्तर पर पहुंच गया। इस तेजी के साथ दोनों प्रमुख सूचकांकों ने लगातार पांचवें दिन बढ़त दर्ज की।

Highlights: शेयर बाजार की 5 बड़ी बातें

  1. सेंसेक्स 383.55 अंक बढ़कर 77,301.40 पर बंद हुआ।
  2. निफ्टी में 149.75 अंकों की तेजी आई और यह 23,960.60 पर पहुंचा।
  3. मीडिया सेक्टर में सबसे ज्यादा 5 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई।
  4. मेटल और रियल्टी इंडेक्स 2-2 प्रतिशत चढ़े।
  5. आईटी इंडेक्स में करीब 2 प्रतिशत की गिरावट देखने को मिली।

बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली। भारतीय शेयर बाजार में मंगलवार को खरीदारी का माहौल बना रहा। बाजार के प्रमुख सूचकांकों में लगातार पांचवें कारोबारी दिन तेजी देखने को मिली। निवेशकों ने खासतौर पर मीडिया, मेटल और रियल्टी कंपनियों के शेयरों में दिलचस्पी दिखाई। इसके अलावा मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी अच्छी खरीदारी दर्ज की गई।

हालांकि, आईटी शेयरों में कमजोरी और अंतरराष्ट्रीय बाजारों से मिले नकारात्मक संकेतों ने बाजार की तेजी को सीमित किया। पिछले चार कारोबारी सत्रों में बाजार में करीब 5 प्रतिशत की बढ़त के बाद कुछ निवेशकों ने मुनाफावसूली भी की।

किन शेयरों में सबसे ज्यादा तेजी और गिरावट रही?

निफ्टी 50 के शेयरों में भारत इलेक्ट्रॉनिक्स, टाइटन कंपनी, अदाणी एंटरप्राइजेज, जियो फाइनेंशियल सर्विसेज और मैक्स हेल्थकेयर में सबसे ज्यादा मजबूती देखने को मिली। इन कंपनियों के शेयरों में खरीदारी के कारण बाजार को ऊपर जाने में मदद मिली।

दूसरी तरफ, आईटी सेक्टर की प्रमुख कंपनियों टीसीएस, इंफोसिस और एचसीएल टेक्नोलॉजीज के शेयरों में गिरावट दर्ज की गई। इसके अलावा कोल इंडिया और एटरनल के शेयर भी कमजोरी के साथ बंद हुए।

इस तरह बाजार में तेजी के बावजूद सभी सेक्टर और शेयरों में एक जैसी खरीदारी देखने को नहीं मिली। खासतौर पर आईटी कंपनियों पर वैश्विक टेक्नोलॉजी शेयरों में कमजोरी का असर दिखाई दिया।

Media और Metal सेक्टर में सबसे ज्यादा तेजी

सेक्टर के हिसाब से देखें तो मंगलवार को मीडिया इंडेक्स सबसे बेहतर प्रदर्शन करने वाला सेक्टर रहा। इसमें करीब 5 प्रतिशत की जोरदार बढ़त दर्ज की गई। इसके अलावा मेटल और रियल्टी इंडेक्स में लगभग 2-2 प्रतिशत की तेजी देखने को मिली।

कंज्यूमर ड्यूरेबल्स, एनर्जी और एफएमसीजी इंडेक्स भी करीब 1-1 प्रतिशत की बढ़त के साथ बंद हुए। इन सेक्टरों में खरीदारी ने बाजार की मजबूती को समर्थन दिया।

हालांकि, आईटी इंडेक्स में करीब 2 प्रतिशत की गिरावट आई। वैश्विक टेक्नोलॉजी शेयरों में कमजोरी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़े निवेश पर उठ रहे सवालों का असर इस सेक्टर पर देखने को मिला।

Midcap और Smallcap शेयरों में भी खरीदारी

मंगलवार के कारोबार में केवल बड़ी कंपनियों के शेयरों में ही नहीं, बल्कि मिडकैप और स्मॉलकैप कंपनियों में भी निवेशकों ने खरीदारी की।

निफ्टी मिडकैप इंडेक्स करीब 1.2 प्रतिशत की बढ़त के साथ बंद हुआ, जबकि निफ्टी स्मॉलकैप इंडेक्स में लगभग 1.8 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई। इससे संकेत मिलता है कि बाजार में तेजी का दायरा बड़े शेयरों के साथ छोटी और मध्यम आकार की कंपनियों तक भी फैला रहा।

मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में आई खरीदारी को घरेलू बाजार के लिए सकारात्मक संकेत माना जा सकता है। हालांकि, इन शेयरों में उतार-चढ़ाव का जोखिम भी अपेक्षाकृत अधिक रहता है।

लगातार पांच दिन की तेजी के बाद क्यों हुई मुनाफावसूली?

बाजार में लगातार पांच कारोबारी सत्रों से तेजी जारी है। पिछले चार सत्रों में सेंसेक्स और निफ्टी में लगभग 5 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई थी। पिछले कारोबारी सत्र में दोनों सूचकांक करीब दो महीने के उच्चतम स्तर पर भी पहुंचे थे।

ऐसे में मंगलवार को निवेशकों ने ऊंचे स्तरों पर कुछ शेयरों में मुनाफावसूली की। जब किसी शेयर या इंडेक्स में लगातार तेजी आती है, तो कई निवेशक अपने मुनाफे को सुरक्षित करने के लिए बिकवाली करते हैं। इसका असर बाजार की आगे की तेजी पर पड़ सकता है।

कमजोर वैश्विक संकेतों ने बढ़ाई चिंता

भारतीय बाजार पर अंतरराष्ट्रीय शेयर बाजारों की कमजोरी का भी असर देखने को मिला। एशियाई बाजारों में गिरावट दर्ज की गई। खासतौर पर टेक्नोलॉजी कंपनियों के शेयरों में बिकवाली ने निवेशकों की चिंता बढ़ाई।

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI पर कंपनियों की ओर से किए जा रहे भारी निवेश को लेकर बाजार में सवाल उठ रहे हैं। निवेशक यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि AI से जुड़ी कंपनियों का मौजूदा निवेश भविष्य में कितना मुनाफा दे पाएगा।

इसी चिंता के कारण वैश्विक टेक्नोलॉजी शेयरों में दबाव देखने को मिला, जिसका असर एशियाई बाजारों पर भी पड़ा। भारतीय बाजार में आईटी शेयरों की गिरावट को भी इसी व्यापक वैश्विक माहौल से जोड़कर देखा जा रहा है।

अमेरिकी मध्यावधि चुनावों पर भी निवेशकों की नजर

अमेरिका में मध्यावधि चुनावों को लेकर भी वैश्विक निवेशकों की नजर बनी हुई है। चुनावों से जुड़े राजनीतिक समीकरण और संभावित नीतिगत बदलाव बाजार की धारणा को प्रभावित कर सकते हैं।

अमेरिकी राजनीति में डेमोक्रेटिक पार्टी की संभावित मजबूती को लेकर कुछ निवेशकों के बीच टेक्नोलॉजी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस कंपनियों पर नियामकीय सख्ती बढ़ने की आशंका है। यदि AI कंपनियों पर रेगुलेटरी जांच और नियमों का दबाव बढ़ता है, तो इसका असर इन कंपनियों के कारोबार और भविष्य की योजनाओं पर पड़ सकता है।

इसके अलावा AI कंपनियों के बड़े निवेश से मिलने वाले संभावित रिटर्न को लेकर पहले से ही बाजार में अनिश्चितता बनी हुई है। ऐसे में अमेरिकी चुनावों से जुड़ी खबरें वैश्विक टेक्नोलॉजी शेयरों और निवेशकों की धारणा को प्रभावित कर सकती हैं।

आगे बाजार की दिशा किन बातों पर निर्भर करेगी?

आने वाले कारोबारी सत्रों में निवेशकों की नजर वैश्विक बाजारों के रुख, अमेरिकी राजनीतिक घटनाक्रम, आईटी कंपनियों के प्रदर्शन और घरेलू स्तर पर शेयरों में खरीदारी की स्थिति पर रहेगी।

लगातार पांच दिनों की तेजी के बाद बाजार में मुनाफावसूली देखने को मिल सकती है। वहीं, मीडिया, मेटल, रियल्टी और मिडकैप शेयरों में खरीदारी जारी रहती है तो बाजार को समर्थन मिल सकता है।

कुल मिलाकर 4 नवंबर को भारतीय शेयर बाजार ने लगातार पांचवें दिन बढ़त दर्ज कर अपनी मजबूती दिखाई। हालांकि, वैश्विक अनिश्चितता और ऊंचे स्तरों पर मुनाफावसूली के कारण आगे भी बाजार में उतार-चढ़ाव बने रहने की संभावना है।

डिस्क्लेमर: इस लेख में शेयर बाजार से जुड़ी जानकारी दी गई है। यह निवेश की सलाह नहीं है। शेयर बाजार में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। किसी भी शेयर में निवेश करने से पहले अपने वित्तीय लक्ष्यों और जोखिम क्षमता का आकलन करें तथा प्रमाणित निवेश सलाहकार से परामर्श जरूर लें।

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By Namam Sharma Senior Editor – Newsjagran
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नमम शर्मा, Newsjagran के सीनियर एडिटर हैं। बिज़नेस न्यूज़, कमोडिटी बाज़ार, सोना-चांदी भाव, पेट्रोल-डीजल रेट और फाइनेंस में 9 साल का अनुभव। हिंदी डिजिटल पत्रकारिता के जानकार।
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## FCI के अतिरिक्त चावल से एथनॉल बनाने की सीमा तय केंद्र सरकार ने 3 नवंबर को जारी नई टेंडर शर्तों में FCI के अतिरिक्त चावल से एथनॉल उत्पादन को सीमित कर दिया है। नए नियमों के मुताबिक, पहले तीन तिमाहियों के दौरान इस चावल से अधिकतम 324 करोड़ लीटर एथनॉल का उत्पादन किया जा सकेगा। इसका मतलब है कि प्रत्येक तिमाही में इस स्रोत से अधिकतम 108 करोड़ लीटर एथनॉल की खरीद की जाएगी। अगर एथनॉल उत्पादकों की ओर से निर्धारित सीमा से ज्यादा मात्रा की पेशकश की जाती है, तो सभी कंपनियों की पेशकश को समान अनुपात में कम किया जाएगा। सरकार ने इथेनॉल ब्लेंडेड पेट्रोल (EBP) कार्यक्रम के लिए 72 लाख टन अतिरिक्त चावल आवंटित किया है। इस चावल का इस्तेमाल 30 जून 2027 तक किया जा सकेगा। नई शर्तों में एक और महत्वपूर्ण प्रावधान किया गया है। किसी भी एथनॉल उत्पादक की एक तिमाही की कुल पेशकश में FCI के अतिरिक्त चावल से तैयार एथनॉल की हिस्सेदारी 30 प्रतिशत से अधिक नहीं हो सकती। इसका उद्देश्य एथनॉल उत्पादन में एक ही खाद्यान्न स्रोत पर अत्यधिक निर्भरता को सीमित करना और खाद्यान्न के दूसरे इस्तेमाल के लिए उपलब्धता बनाए रखना माना जा रहा है। ## खराब खाद्यान्न से एथनॉल उत्पादन पर भी सख्ती सरकार ने सिर्फ चावल ही नहीं, बल्कि खराब खाद्यान्न (Damaged Foodgrains) से एथनॉल उत्पादन पर भी सीमा तय की है। नई टेंडर शर्तों के अनुसार, खराब खाद्यान्न से पूरे सप्लाई वर्ष में अधिकतम 160 करोड़ लीटर एथनॉल तैयार किया जा सकेगा। इसके लिए प्रत्येक तिमाही में 40 करोड़ लीटर की सीमा निर्धारित की गई है। इस तरह FCI के अतिरिक्त चावल और खराब खाद्यान्न को मिलाकर पहले तीन तिमाहियों तथा संबंधित निर्धारित अवधि में कुल 484 करोड़ लीटर एथनॉल की सीमा तय की गई है। यह तेल विपणन कंपनियों (OMCs) की ओर से जारी 1,100 करोड़ लीटर के कुल टेंडर का करीब 44 प्रतिशत है। कृषि बाजार विशेषज्ञों और एक लिस्टेड कंपनी के स्वतंत्र निदेशक जीके सूद के मुताबिक, खराब खाद्यान्न का इस्तेमाल सिर्फ एथनॉल बनाने में नहीं होता, बल्कि इसका उपयोग खाद्य जरूरतों और पशु आहार के लिए भी किया जाता है। ऐसे में इस पर सीमा लगना खाद्यान्न की उपलब्धता को लेकर बढ़ती चिंता का संकेत हो सकता है। ## गन्ने से एथनॉल बनाने पर रोक क्यों लगाई गई? सरकार के नए फैसले का सबसे बड़ा असर चीनी उद्योग पर पड़ सकता है। नवंबर 2026 से अक्टूबर 2027 के एथनॉल सप्लाई वर्ष के लिए गन्ने से मिलने वाले कई कच्चे माल के इस्तेमाल पर रोक लगाई गई है। इसके तहत एथनॉल बनाने के लिए निम्नलिखित स्रोतों से खरीद की पेशकश नहीं मांगी गई है: - गन्ने का रस (Sugarcane Juice) - चीनी (Sugar) - शुगर सिरप (Sugar Syrup) - बी-हेवी शीरा (B-Heavy Molasses) इससे पहले 16 अक्टूबर को तेल कंपनियों की ओर से जारी टेंडर में भी इन स्रोतों से एथनॉल की खरीद शून्य रखने का निर्देश दिया गया था। हालांकि, सरकार ने सी-हेवी शीरे (C-Heavy Molasses) से एथनॉल बनाने पर पूरी तरह रोक नहीं लगाई है। चीनी निकालने के बाद बचने वाले इस शीरे से एथनॉल का उत्पादन जारी रह सकेगा। उद्योग से जुड़े अनुमानों के मुताबिक, सी-हेवी शीरे से तैयार होने वाले एथनॉल में से तेल कंपनियों को करीब 50 करोड़ लीटर ही उपलब्ध हो पाएगा। इसकी वजह यह है कि सी-हेवी शीरे से बनने वाला एथनॉल अपेक्षाकृत सस्ता होता है और शराब सहित दूसरे उद्योगों में भी इसकी मांग रहती है। इस फैसले से चीनी मिलों को एथनॉल उत्पादन के लिए अपने कच्चे माल और उत्पादन की रणनीति में बदलाव करना पड़ सकता है। ## मक्का की मांग में 22 प्रतिशत बढ़ोतरी का अनुमान चावल और गन्ने से एथनॉल उत्पादन पर सीमाएं लगने के बाद मक्का की भूमिका और महत्वपूर्ण हो गई है। एथनॉल उद्योग को अपनी जरूरतें पूरी करने के लिए अब मक्का पर अधिक निर्भर रहना पड़ सकता है। उद्योग के अनुमानों के मुताबिक, 2026-27 में एथनॉल उत्पादन के लिए करीब 1.6 करोड़ टन मक्का की जरूरत पड़ सकती है। इसके मुकाबले मौजूदा सप्लाई वर्ष में यह मांग करीब 1.3 करोड़ टन रहने का अनुमान है। | विवरण | अनुमानित मांग | |---|---:| | मौजूदा सप्लाई वर्ष | 1.3 करोड़ टन | | 2026-27 का अनुमान | 1.6 करोड़ टन | | संभावित बढ़ोतरी | करीब 22% | एक टन मक्का से लगभग 380 लीटर एथनॉल तैयार किया जा सकता है। इस हिसाब से 1.6 करोड़ टन मक्का से करीब 608 करोड़ लीटर एथनॉल का उत्पादन संभव है। हालांकि, मक्का की पूरी उपलब्धता सिर्फ एथनॉल उद्योग के लिए नहीं है। इसका इस्तेमाल पोल्ट्री और डेयरी फीड, स्टार्च उत्पादन तथा अन्य औद्योगिक जरूरतों में भी किया जाता है। इसलिए एथनॉल कंपनियों की बढ़ती खरीद से इन उद्योगों के बीच कच्चे माल को लेकर प्रतिस्पर्धा बढ़ सकती है। ## मक्का की कीमतों में तेजी, किसानों को मिल सकता है फायदा एथनॉल उत्पादन में मक्का की बढ़ती जरूरत का असर इसकी कीमतों पर भी दिखाई देने लगा है। प्रमुख कृषि मंडियों में मक्का का भाव 30 से 31 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंचने की जानकारी सामने आई है। वहीं, मक्का का न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) 24.10 रुपये प्रति किलोग्राम है। अगर एथनॉल कंपनियों की ओर से मक्का की खरीद लगातार बढ़ती है, तो इसकी कीमतों में और तेजी आने की संभावना है। इससे मक्का उत्पादक किसानों को बेहतर बाजार भाव मिलने का अवसर मिल सकता है। हालांकि, इसका दूसरा पहलू भी है। मक्का की कीमतें बढ़ने से पोल्ट्री और पशु आहार महंगा हो सकता है। इसका असर चिकन, अंडे और डेयरी उत्पादों की उत्पादन लागत पर पड़ सकता है। यदि कंपनियां बढ़ी हुई लागत का बोझ ग्राहकों तक पहुंचाती हैं, तो खाद्य उत्पादों की कीमतों में भी दबाव देखने को मिल सकता है। उद्योग के अनुमानों के मुताबिक, एथनॉल, पशु आहार, स्टार्च और अन्य औद्योगिक इस्तेमाल को मिलाकर मक्का की कुल मांग 2026 में 4.9 से 5 करोड़ टन के मुकाबले 2027 में बढ़कर करीब 5.57 करोड़ टन तक पहुंच सकती है। ## अल नीनो से मक्का उत्पादन पर भी मंडरा रहा खतरा मक्का की बढ़ती मांग के बीच इसके उत्पादन को लेकर भी चिंता जताई जा रही है। मौसम की प्रतिकूल परिस्थितियां इस कृषि उपज की उपलब्धता को प्रभावित कर सकती हैं। उद्योग से जुड़े लोगों के अनुमानों के मुताबिक, अल नीनो की आशंका और मिट्टी में नमी की कमी के कारण मक्का की पैदावार प्रभावित हो सकती है। कुछ अनुमानों में इस साल मक्का की उपलब्धता में करीब 15 प्रतिशत तक गिरावट की आशंका जताई गई है। अगर एक तरफ उत्पादन घटता है और दूसरी तरफ एथनॉल, पोल्ट्री, डेयरी तथा स्टार्च उद्योगों की मांग बढ़ती है, तो बाजार में मक्का की आपूर्ति पर दबाव बढ़ सकता है। ऐसी स्थिति में मक्का की कीमतों में तेजी किसानों के लिए अच्छी खबर हो सकती है, लेकिन पशु आहार और खाद्य प्रसंस्करण उद्योगों के लिए यह चुनौती बन सकती है। ## क्या एथनॉल खरीद के लिए अतिरिक्त टेंडर जारी करेंगी तेल कंपनियां? सरकार के 20 प्रतिशत एथनॉल मिश्रण (E20) के लक्ष्य को पूरे सप्लाई वर्ष में बनाए रखने के लिए तेल कंपनियों को पर्याप्त मात्रा में एथनॉल की जरूरत होगी। फिलहाल तेल कंपनियों की ओर से करीब 1,100 करोड़ लीटर एथनॉल की खरीद के लिए टेंडर जारी किया गया है। हालांकि, उद्योग से जुड़े लोगों का मानना है कि मौजूदा टेंडर पूरे साल की जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त नहीं हो सकता। ऐसे में तेल कंपनियां करीब 100 करोड़ लीटर का अतिरिक्त टेंडर जारी कर सकती हैं। अगर ऐसा होता है, तो कुल एथनॉल खरीद की जरूरत बढ़कर करीब 1,200 करोड़ लीटर हो सकती है। इससे एथनॉल उत्पादकों को अतिरिक्त कच्चे माल की जरूरत पड़ेगी। चावल और गन्ने से मिलने वाले कई स्रोतों पर सीमाओं के कारण मक्का की मांग और बढ़ सकती है। ## सरकार के नए फैसले का किसानों और आम लोगों पर क्या होगा असर? सरकार की नई नीति का असर कृषि बाजार से लेकर आम उपभोक्ताओं तक देखने को मिल सकता है। इसका प्रभाव अलग-अलग क्षेत्रों में अलग हो सकता है। **मक्का किसानों के लिए:** एथनॉल कंपनियों की ओर से मांग बढ़ने से मक्का की कीमतों को समर्थन मिल सकता है। इससे किसानों को बेहतर दाम मिलने की संभावना है। **चीनी उद्योग के लिए:** गन्ने के रस, चीनी और बी-हेवी शीरे से एथनॉल बनाने पर रोक के कारण चीनी मिलों को अपने उत्पादन और बिक्री की रणनीति में बदलाव करना पड़ सकता है। **पोल्ट्री और डेयरी उद्योग के लिए:** मक्का महंगा होने से पशु आहार और पोल्ट्री फीड की लागत बढ़ सकती है। इससे अंडे, चिकन और दूध उत्पादन की लागत पर असर पड़ने की आशंका है। **आम उपभोक्ताओं के लिए:** यदि मक्का की बढ़ती कीमतों का बोझ खाद्य और डेयरी उद्योगों तक पहुंचता है, तो कुछ उत्पाद महंगे हो सकते हैं। हालांकि, इसका वास्तविक असर बाजार की आपूर्ति, उत्पादन और कंपनियों की लागत पर निर्भर करेगा। कुल मिलाकर, सरकार की नई एथनॉल नीति का मकसद पेट्रोल में एथनॉल ब्लेंडिंग के लक्ष्य को खाद्यान्न की उपलब्धता और कच्चे माल के संतुलन के साथ आगे बढ़ाना है। लेकिन आने वाले सप्लाई वर्ष में मक्का की मांग, कृषि उत्पादन और तेल कंपनियों की अतिरिक्त खरीद यह तय करेगी कि इस बदलाव का सबसे ज्यादा असर किसानों, उद्योगों और आम उपभोक्ताओं में से किस पर पड़ता है। **Source: मीडिया रिपोर्ट और कृषि उद्योग से जुड़े अनुमानों पर आधारित।** **डिस्क्लेमर:** इस लेख में दी गई कीमतें और उत्पादन संबंधी आंकड़े उद्योग के अनुमानों पर आधारित हैं। वास्तविक मांग, उत्पादन और बाजार भाव में बदलाव संभव है। एथनॉल प्रोडक्शन पर सरकार की नई पाबंदी! चावल से भी तैयार फ्यूल पर दिखी सख्ती, अब क्या है नया प्लान?
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