भारतीय शेयर बाजार में 3 नवंबर को जोरदार तेजी देखने को मिली। सेंसेक्स और निफ्टी दोनों हरे निशान में बंद हुए। सेंसेक्स में 1.62% और निफ्टी में 1.58% की बढ़त दर्ज की गई। कच्चे तेल की कीमतों में नरमी, विदेशी निवेशकों (FII) की वापसी, रुपये में मजबूती और कंपनियों के शानदार तिमाही नतीजों ने बाजार को मजबूती दी।
Highlights
- सेंसेक्स 1,225 अंक उछलकर 76,917.85 पर बंद हुआ।
- निफ्टी 370 अंक की बढ़त के साथ 23,810.85 पर पहुंचा।
- एफएमसीजी सेक्टर में सबसे ज्यादा 2.5% की तेजी दर्ज की गई।
- विदेशी निवेशकों ने सोमवार को 3,114.68 करोड़ रुपये की शुद्ध खरीदारी की।
- कच्चे तेल की कीमतों में नरमी से निवेशकों का भरोसा बढ़ा।
बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली। भारतीय शेयर बाजार के लिए 3 नवंबर का कारोबारी सत्र शानदार रहा। पिछले कुछ समय से दबाव का सामना कर रहे घरेलू शेयर बाजार में मंगलवार को जोरदार खरीदारी देखने को मिली। कारोबार के दौरान निवेशकों ने बैंकिंग, एफएमसीजी, ऑटो और रियल्टी समेत कई प्रमुख सेक्टरों के शेयरों में दिलचस्पी दिखाई। इसके चलते सेंसेक्स और निफ्टी दोनों मजबूत बढ़त के साथ बंद हुए।
कारोबार समाप्त होने पर बीएसई सेंसेक्स 1,225.07 अंक यानी 1.62% की तेजी के साथ 76,917.85 अंक पर पहुंच गया। वहीं, एनएसई निफ्टी 370.05 अंक यानी 1.58% उछलकर 23,810.85 के स्तर पर बंद हुआ। इस तेजी के साथ निफ्टी एक बार फिर 23,800 के महत्वपूर्ण स्तर के ऊपर पहुंच गया।
बाजार में आई इस तेजी के पीछे घरेलू और अंतरराष्ट्रीय दोनों तरह के कारक रहे। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में नरमी, अमेरिका-ईरान तनाव कम होने की उम्मीद, विदेशी निवेशकों की खरीदारी और भारतीय रुपये में मजबूती ने बाजार की धारणा को बेहतर बनाया। इसके अलावा सितंबर तिमाही के नतीजों में कई कंपनियों के बेहतर प्रदर्शन ने भी निवेशकों को खरीदारी के लिए प्रोत्साहित किया।
किन शेयरों में सबसे ज्यादा तेजी और गिरावट?
मंगलवार के कारोबार में कई बड़े शेयरों में अच्छी खरीदारी देखने को मिली। निफ्टी में शामिल प्रमुख कंपनियों में बीएसई, टाटा कंज्यूमर, एशियन पेंट्स, भारती एयरटेल और एचडीएफसी बैंक के शेयर सबसे ज्यादा बढ़त दर्ज करने वाले शेयरों में शामिल रहे।
इन कंपनियों में खरीदारी से बाजार के प्रमुख सूचकांकों को ऊपर जाने में मदद मिली। खासतौर पर बैंकिंग और एफएमसीजी कंपनियों के शेयरों में निवेशकों की दिलचस्पी ने बाजार को मजबूती प्रदान की।
हालांकि, बाजार में हर तरफ तेजी नहीं रही। कुछ प्रमुख कंपनियों के शेयरों में बिकवाली का दबाव भी देखने को मिला। इन्फोसिस, भारतीय स्टेट बैंक (SBI), ओएनजीसी, पावर ग्रिड कॉर्पोरेशन और एनटीपीसी के शेयर गिरावट के साथ बंद हुए।
इससे साफ है कि बाजार में व्यापक स्तर पर खरीदारी जरूर हुई, लेकिन कुछ चुनिंदा शेयरों में निवेशकों ने मुनाफावसूली को प्राथमिकता दी।
अलग-अलग सेक्टरों का कैसा रहा प्रदर्शन?
मंगलवार को सेक्टोरल इंडेक्स में एफएमसीजी सेक्टर सबसे आगे रहा। निफ्टी एफएमसीजी इंडेक्स में 2.5% की शानदार तेजी दर्ज की गई। घरेलू खपत से जुड़ी कंपनियों के शेयरों में खरीदारी ने इस सेक्टर को बाजार का सबसे बेहतर प्रदर्शन करने वाला क्षेत्र बना दिया।
इसके बाद निफ्टी रियल्टी इंडेक्स में 2.20% की बढ़त दर्ज की गई। रियल एस्टेट कंपनियों के शेयरों में खरीदारी से इस सेक्टर को अच्छा समर्थन मिला।
निफ्टी प्राइवेट बैंक इंडेक्स 1.78% चढ़ा, जबकि निफ्टी ऑटो इंडेक्स में 1.24% की तेजी आई। इसके अलावा निफ्टी बैंक में 0.98% और निफ्टी मीडिया इंडेक्स में 0.50% की बढ़त दर्ज की गई।
दूसरी तरफ कुछ सेक्टरों में बिकवाली का दबाव बना रहा। निफ्टी पीएसयू बैंक इंडेक्स 0.92% गिरकर बंद हुआ। निफ्टी मेटल में 0.59% और निफ्टी एनर्जी इंडेक्स में 0.40% की गिरावट दर्ज की गई।
व्यापक बाजार की बात करें तो मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी तेजी रही, हालांकि इनका प्रदर्शन सेंसेक्स और निफ्टी के मुकाबले कमजोर रहा। निफ्टी मिडकैप इंडेक्स में 0.60% और निफ्टी स्मॉलकैप इंडेक्स में 0.30% की बढ़त दर्ज की गई।
शेयर बाजार में तेजी आने की 4 बड़ी वजहें
1. कच्चे तेल की कीमतों में नरमी से मिली राहत
भारतीय शेयर बाजार के लिए कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट एक बड़ा सकारात्मक संकेत रही। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चे तेल के आयात के जरिए पूरा करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें कम होने से देश के आयात बिल और महंगाई पर दबाव कम होने की उम्मीद रहती है।
पिछले कारोबारी सत्र में ब्रेंट क्रूड की कीमतों में लगभग 7% की गिरावट दर्ज की गई थी। इसके बाद मंगलवार को ब्रेंट क्रूड करीब 105 डॉलर प्रति बैरल के आसपास स्थिर रहा।
इसके अलावा अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच जारी तनाव कम होने की संभावनाओं ने भी निवेशकों को राहत दी। ईरान और कतर के मध्यस्थों के बीच बातचीत की खबरों से क्षेत्र में तनाव कम होने और युद्ध समाप्त होने की उम्मीदें बढ़ीं।
कच्चे तेल की कीमतों में नरमी से भारतीय अर्थव्यवस्था को राहत मिलने की संभावना रहती है। इससे कंपनियों की उत्पादन लागत, परिवहन खर्च और महंगाई पर सकारात्मक असर पड़ सकता है। यही वजह रही कि तेल की कीमतों में गिरावट को बाजार ने सकारात्मक रूप से लिया।
2. विदेशी निवेशकों ने फिर शुरू की खरीदारी
भारतीय शेयर बाजार में विदेशी संस्थागत निवेशकों की गतिविधियां बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाती हैं। पिछले कुछ समय से विदेशी निवेशकों की बिकवाली बाजार पर दबाव बना रही थी, लेकिन अब उनकी खरीदारी से निवेशकों का भरोसा बढ़ता दिखाई दिया।
सोमवार को विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) ने भारतीय शेयर बाजार में शुद्ध खरीदारी की। उन्होंने कुल 3,114.68 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे।
विदेशी निवेशकों की खरीदारी को घरेलू बाजार के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है। जब विदेशी निवेशक भारतीय शेयरों में पैसा लगाते हैं तो बाजार में लिक्विडिटी बढ़ती है और बड़े शेयरों में खरीदारी को समर्थन मिल सकता है।
हालांकि, विदेशी निवेशकों की खरीदारी का यह रुझान आगे भी जारी रहता है या नहीं, इस पर बाजार की नजर बनी रहेगी।
3. रुपये में मजबूती से बाजार का सेंटीमेंट बेहतर
डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये में मजबूती ने भी शेयर बाजार को सहारा दिया। कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट और घरेलू शेयर बाजार में विदेशी पूंजी के प्रवाह से रुपये को समर्थन मिला।
मंगलवार को अंतरबैंक विदेशी मुद्रा बाजार में रुपया 94.68 प्रति डॉलर पर खुला। कारोबार के दौरान यह मजबूत होकर 94.60 के स्तर तक पहुंच गया। बाद में यह 94.72 प्रति डॉलर पर कारोबार करता दिखाई दिया।
रुपये में पिछले बंद स्तर के मुकाबले 12 पैसे की मजबूती दर्ज की गई।
रुपये की मजबूती भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे आयात पर होने वाला खर्च कम करने में मदद मिल सकती है। विशेष रूप से कच्चे तेल और अन्य आयातित वस्तुओं पर निर्भर कंपनियों को इससे राहत मिल सकती है।
4. कंपनियों के बेहतर तिमाही नतीजों ने बढ़ाया भरोसा
सितंबर तिमाही के नतीजे भी बाजार में तेजी की एक बड़ी वजह रहे। कई कंपनियों ने अपने वित्तीय प्रदर्शन में सुधार दर्ज किया है। बेहतर मुनाफे और कारोबार की संभावनाओं से निवेशकों ने इन कंपनियों के शेयरों में खरीदारी की।
मैरिको के शेयरों में 4.5% की तेजी: एफएमसीजी कंपनी मैरिको ने सितंबर तिमाही में अनुमान से बेहतर मुनाफा दर्ज किया। कंपनी को कोपरा यानी सूखे नारियल की कम लागत और बेहतर मांग का फायदा मिला। इसके बाद कंपनी के शेयरों में लगभग 4.5% की तेजी देखने को मिली।
KRBL का मुनाफा 51% बढ़ा: चावल और खाद्य उत्पादों से जुड़ी कंपनी KRBL ने सितंबर तिमाही में सालाना आधार पर अपने मुनाफे में 51% की बढ़ोतरी दर्ज की। बेहतर वित्तीय नतीजों के बाद कंपनी के शेयरों में 9.4% की तेजी आई।
Trident के शेयर भी 9.4% उछले: टेक्सटाइल और पेपर सेक्टर की कंपनी ट्राइडेंट ने दूसरी तिमाही में मुनाफे में बढ़ोतरी की जानकारी दी। इसके बाद कंपनी के शेयरों में निवेशकों की खरीदारी बढ़ी और शेयर 9.4% की तेजी के साथ बंद हुए।
VRL Logistics में 13% की तेजी: लॉजिस्टिक्स सेक्टर की कंपनी वीआरएल लॉजिस्टिक्स का सितंबर तिमाही का मुनाफा सालाना आधार पर लगभग दोगुना हो गया। बेहतर नतीजों के बाद कंपनी के शेयरों में करीब 13% की शानदार तेजी दर्ज की गई।
आगे कैसी रह सकती है बाजार की चाल?
3 नवंबर को आई तेजी ने भारतीय शेयर बाजार के निवेशकों को राहत जरूर दी है। निफ्टी का 23,800 के ऊपर बंद होना और सेंसेक्स में 1.62% की बढ़त बाजार में खरीदारी की मजबूत दिलचस्पी को दर्शाती है।
हालांकि, बाजार की आगे की दिशा कई महत्वपूर्ण कारकों पर निर्भर करेगी। इनमें विदेशी निवेशकों की खरीदारी, कच्चे तेल की कीमतें, डॉलर के मुकाबले रुपये की चाल, वैश्विक भू-राजनीतिक परिस्थितियां और कंपनियों के आने वाले तिमाही नतीजे शामिल हैं।
अगर विदेशी निवेशकों की खरीदारी जारी रहती है और कच्चे तेल की कीमतों में नरमी बनी रहती है, तो घरेलू बाजार को आगे भी समर्थन मिल सकता है। वहीं, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तनाव बढ़ने या कच्चे तेल की कीमतों में दोबारा उछाल आने से बाजार पर दबाव बन सकता है।
निवेशकों के लिए जरूरी है कि वे केवल एक दिन की तेजी देखकर जल्दबाजी में निवेश का फैसला न लें। किसी भी शेयर में निवेश करने से पहले कंपनी के वित्तीय नतीजों, कारोबार की स्थिति और शेयर के मूल्यांकन का विश्लेषण करना चाहिए।
डिस्क्लेमर: इस लेख में शेयर बाजार से जुड़ी जानकारी केवल सामान्य सूचना के उद्देश्य से दी गई है। NewsJagran किसी भी शेयर को खरीदने या बेचने की सलाह नहीं देता है। शेयर बाजार में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेश करने से पहले अपने वित्तीय लक्ष्यों और जोखिम उठाने की क्षमता का आकलन करें तथा किसी प्रमाणित वित्तीय सलाहकार से परामर्श जरूर लें।


