नई दिल्ली: दुनिया के सबसे चर्चित कारोबारी Elon Musk की कंपनी SpaceX के शेयरों में जोरदार गिरावट देखने को मिली है। शेयर बाजार में शानदार शुरुआत के बाद निवेशकों की उम्मीदों को झटका लगा है। पिछले दो कारोबारी सत्रों में कंपनी के शेयर करीब 18 फीसदी टूट गए, जिससे कंपनी के मार्केट कैप से लगभग 50,000 करोड़ डॉलर (करीब 47 लाख करोड़ रुपये) साफ हो गए।
शेयर की इस तेज गिरावट ने निवेशकों और बाजार विशेषज्ञों के बीच नई बहस छेड़ दी है कि क्या कंपनी का मूल्यांकन उसकी वास्तविक क्षमता से कहीं ज्यादा हो गया था।
दो दिन में भारी गिरावट
स्पेसएक्स का शेयर 16 जून को अपने रिकॉर्ड स्तर 225.64 डॉलर तक पहुंच गया था। उस समय कंपनी का बाजार पूंजीकरण करीब 2.94 ट्रिलियन डॉलर था। इसके बाद बिकवाली का दबाव बढ़ा और 18 जून तक शेयर फिसलकर 185 डॉलर के आसपास बंद हुआ।
17 जून को शेयर में लगभग 5% की गिरावट आई थी, जबकि 18 जून को इसमें करीब 3.5% की कमजोरी दर्ज की गई। इंट्राडे कारोबार के दौरान यह शेयर 6 फीसदी से ज्यादा तक टूट गया था।
मार्केट कैप से उड़ गए 47 लाख करोड़ रुपये
शेयर में आई इस गिरावट का असर सीधे कंपनी की वैल्यूएशन पर पड़ा। दो दिनों के भीतर स्पेसएक्स का मार्केट कैप 2.94 ट्रिलियन डॉलर से घटकर 2.44 ट्रिलियन डॉलर रह गया।
यानी निवेशकों की संपत्ति में करीब 0.50 ट्रिलियन डॉलर यानी 50,000 करोड़ डॉलर की कमी आ गई। भारतीय मुद्रा में यह आंकड़ा लगभग 47 लाख करोड़ रुपये बैठता है।
आखिर क्यों शुरू हुई बिकवाली?
विशेषज्ञों का मानना है कि शुरुआती तेजी के बाद निवेशकों ने कंपनी के ऊंचे मूल्यांकन का दोबारा आकलन करना शुरू कर दिया।
स्पेसएक्स के शेयर ने लिस्टिंग के बाद पहले ही सप्ताह में जबरदस्त उछाल दर्ज किया था और कंपनी की वैल्यूएशन 2 ट्रिलियन डॉलर के पार पहुंच गई थी। लेकिन जैसे-जैसे निवेशकों ने कंपनी के भविष्य और कमाई की संभावनाओं को परखा, मुनाफावसूली शुरू हो गई।
विशेष रूप से कंपनी द्वारा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और नई तकनीकी परियोजनाओं पर बढ़ते खर्च ने कुछ निवेशकों को सतर्क कर दिया है। बाजार को चिंता है कि भारी निवेश का असर निकट भविष्य में मुनाफे पर पड़ सकता है।
सबसे बड़े IPO के बाद मुनाफावसूली
IPO विश्लेषक कैट लियू का कहना है कि इतिहास के सबसे बड़े आईपीओ में से एक होने के कारण शुरुआती तेजी के बाद मुनाफावसूली होना असामान्य नहीं है।
उनके अनुसार, बड़े आईपीओ में अक्सर शुरुआती उत्साह के बाद निवेशक अपने लाभ को सुरक्षित करने के लिए शेयर बेचते हैं, जिससे कीमतों पर दबाव बनता है।
रिटेल निवेशकों का उत्साह भी हुआ कम
बाजार के आंकड़े बताते हैं कि छोटे निवेशकों की खरीदारी भी अब धीमी पड़ रही है।
रिसर्च फर्म Vanda Research के अनुसार, पिछले तीन सत्रों में रिटेल निवेशकों ने नेट आधार पर 300 मिलियन डॉलर से ज्यादा के स्पेसएक्स शेयर खरीदे थे। हालांकि बाद में यह आंकड़ा घटकर सिर्फ 9.1 मिलियन डॉलर रह गया।
यह संकेत देता है कि शुरुआती उत्साह अब कमजोर पड़ रहा है और निवेशक नई कीमतों पर सतर्क रुख अपना रहे हैं।
आगे क्या रहेगा नजरिया?
विशेषज्ञों का मानना है कि स्पेसएक्स जैसे हाई-वैल्यूएशन स्टॉक्स में आने वाले दिनों में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। कंपनी का सार्वजनिक फ्लोट सीमित है और निवेशकों की उम्मीदें काफी ऊंची हैं। ऐसे में छोटी-सी खबर भी शेयर में बड़ा मूवमेंट ला सकती है।
यदि कंपनी भविष्य में मजबूत वित्तीय प्रदर्शन और विकास की गति बनाए रखती है, तो निवेशकों का भरोसा लौट सकता है। लेकिन फिलहाल बाजार स्पेसएक्स की वैल्यूएशन और उसके भविष्य के खर्चों को लेकर सतर्क नजर आ रहा है।
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