पश्चिम एशिया में जारी तनाव ने एक बार फिर वैश्विक तेल बाजार को हिला दिया है। अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता पर सहमति नहीं बनने के बाद सोमवार को कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल देखने को मिला। बाजार खुलते ही ब्रेंट क्रूड और अमेरिकी WTI क्रूड दोनों में मजबूत तेजी दर्ज की गई।
विशेषज्ञों का कहना है कि होर्मुज स्ट्रेट में जारी संकट और तेल टैंकरों की सीमित आवाजाही ने global crude oil supply को गंभीर रूप से प्रभावित किया है। हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि पिछले दो महीनों में करीब 1 अरब बैरल कच्चा तेल सप्लाई चेन से बाहर हो चुका है। यही वजह है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में energy security को लेकर चिंता तेजी से बढ़ रही है।
क्यों बढ़ गई कच्चे तेल की कीमत?
कच्चे तेल में तेजी की सबसे बड़ी वजह अमेरिका और ईरान के बीच शांति प्रस्ताव का विफल होना माना जा रहा है।
जानकारी के मुताबिक अमेरिका ने एक peace proposal तैयार किया था ईरान ने उस पर जवाब दिया लेकिन अमेरिका ने उस response को स्वीकार करने से इनकार कर दिया इसके बाद बाजार में यह आशंका बढ़ गई कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष जल्द खत्म नहीं होगा।
विशेषज्ञों के अनुसार, जैसे ही यह खबर सामने आई, crude oil traders ने बड़ी मात्रा में खरीदारी शुरू कर दी। इसी वजह से सोमवार को बाजार खुलते ही oil prices में अचानक उछाल देखने को मिला।
होर्मुज स्ट्रेट क्यों बना दुनिया की सबसे बड़ी चिंता?
होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे अहम समुद्री व्यापारिक मार्गों में से एक है। दुनिया का लगभग 20 फीसदी कच्चा तेल इसी रास्ते से गुजरता है। यही कारण है कि इस समुद्री मार्ग में किसी भी तरह की रुकावट का सीधा असर global energy market पर दिखाई देता है। वर्तमान हालात में:
- कई तेल टैंकरों की आवाजाही प्रभावित हो चुकी है
- shipping insurance cost तेजी से बढ़ गई है
- और oil transportation risk काफी ज्यादा हो गया है
Kpler shipping data के मुताबिक, पिछले एक सप्ताह में केवल दो बड़े तेल टैंकर होर्मुज स्ट्रेट से निकल पाए। रिपोर्ट्स के अनुसार, इन जहाजों ने ईरानी हमलों से बचने के लिए अपने tracking systems तक बंद कर दिए थे।
कितनी बढ़ी कच्चे तेल की कीमत?
आज के कारोबार में Brent Crude करीब 105 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया जबकि अमेरिकी WTI Crude लगभग 100 डॉलर प्रति बैरल के करीब ट्रेड करता दिखा ब्रेंट क्रूड में लगभग 4 डॉलर प्रति बैरल की तेजी दर्ज की गई, जबकि WTI Crude में 4.5 फीसदी से ज्यादा की बढ़त देखी गई।
विशेषज्ञों का कहना है कि अगर पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ता है, तो crude oil prices में आगे भी तेजी बनी रह सकती है।
“1 अरब बैरल तेल युद्ध की भेंट चढ़ गया”
सऊदी अरामको के CEO अमीन नासिर ने बड़ा बयान देते हुए कहा कि पिछले दो महीनों में करीब 1 अरब बैरल कच्चा तेल ईरान युद्ध की वजह से प्रभावित हुआ है।
उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर होर्मुज स्ट्रेट खुल भी जाता है तब भी global energy market को सामान्य होने में काफी समय लग सकता है विशेषज्ञों का कहना है कि लगातार inventory depletion और supply disruption आने वाले समय में fuel prices पर बड़ा दबाव बना सकते हैं।
अब बाजार की नजर ट्रंप की चीन यात्रा पर
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप जल्द चीन यात्रा पर जाने वाले हैं, जहां उनकी मुलाकात राष्ट्रपति शी जिनपिंग से हो सकती है।
विशेषज्ञों के मुताबिक चीन का ईरान पर मजबूत प्रभाव माना जाता है और अमेरिका चाहता है कि चीन शांति बहाली में अहम भूमिका निभाए Market analysts का कहना है कि फिलहाल oil market पूरी तरह geopolitical developments पर नजर बनाए हुए है।
भारत पर कितना असर पड़ेगा?
भारत अपनी जरूरत का अधिकांश crude oil विदेशों से आयात करता है। ऐसे में global oil prices बढ़ने का सीधा असर भारतीय economy पर पड़ सकता है।
विशेषज्ञों के मुताबिक:
- crude oil महंगा होने से import bill बढ़ेगा
- रुपये पर दबाव बढ़ सकता है
- inflation तेज हो सकती है
- और transportation cost भी बढ़ सकती है
हालांकि फिलहाल देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है।
पेट्रोल-डीजल के दाम क्यों नहीं बढ़ाए जा रहे?
सरकार और oil marketing companies फिलहाल retail fuel prices को स्थिर बनाए रखने की कोशिश कर रही हैं।
जानकारी के मुताबिक Indian Oil, BPCL और HPCL जैसी कंपनियों को हर महीने करीब ₹30,000 करोड़ तक की under-recovery झेलनी पड़ रही है।
सरकार का कहना है कि कई देशों में fuel prices काफी बढ़ चुकी हैं लेकिन भारत में आम उपभोक्ताओं को राहत देने की कोशिश की जा रही है विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार inflation को नियंत्रण में रखने के लिए फिलहाल fuel prices को स्थिर रखने की रणनीति अपना रही है।
क्या आने वाले दिनों में पेट्रोल-डीजल महंगे हो सकते हैं?
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर crude oil लंबे समय तक 100 डॉलर से ऊपर बना रहा, होर्मुज स्ट्रेट में संकट जारी रहा और global supply normal नहीं हुई तो भारत में fuel price hike का दबाव तेजी से बढ़ सकता है।
हालांकि सरकार फिलहाल consumer protection और inflation management को प्राथमिकता देती दिखाई दे रही है।
भारत के लिए कितना बड़ा खतरा है यह संकट?
भारत दुनिया के सबसे बड़े crude oil importers में शामिल है। ऐसे में पश्चिम एशिया में लंबे समय तक युद्ध जारी रहने से:
- current account deficit
- fiscal pressure
- inflation
- और fuel subsidy burden
बढ़ सकता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यही वजह है कि भारत:
- ethanol blending
- renewable energy
- electric mobility
- और alternative fuels
पर तेजी से फोकस बढ़ा रहा है ताकि आयातित तेल पर निर्भरता कम की जा सके।
FAQ
आज कच्चे तेल की कीमत कितनी पहुंच गई?
ब्रेंट क्रूड करीब 105 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया।
होर्मुज स्ट्रेट क्यों अहम है?
दुनिया का लगभग 20 फीसदी crude oil इसी समुद्री रास्ते से गुजरता है।
क्या भारत में पेट्रोल-डीजल महंगे होंगे?
फिलहाल कीमतें स्थिर हैं, लेकिन global crude prices बढ़ने से दबाव बढ़ सकता है।
तेल कंपनियों को कितना नुकसान हो रहा है?
रिपोर्ट्स के मुताबिक oil marketing companies को हर महीने करीब ₹30,000 करोड़ का नुकसान हो रहा है।
ईरान युद्ध से कितना तेल प्रभावित हुआ?
करीब 1 अरब बैरल crude oil supply प्रभावित होने की बात कही गई है।
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