Share Market Crash: घरेलू शेयर बाजार में आज कारोबार की शुरुआत भारी दबाव के साथ हुई। शुरुआती मिनटों में ही बिकवाली इतनी तेज रही कि सेंसेक्स 600 अंक से अधिक लुढ़क गया, जबकि निफ्टी 24,250 के नीचे फिसल गया। बाजार में आई इस तेज गिरावट से बीएसई में सूचीबद्ध कंपनियों का कुल मार्केट कैपिटलाइजेशन करीब ₹1.5 लाख करोड़ घट गया, जिससे निवेशकों की संपत्ति में बड़ी कमी दर्ज की गई।
इस गिरावट के पीछे पश्चिम एशिया में बढ़ता भू-राजनीतिक तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में उछाल, बाजार में बढ़ती अनिश्चितता और सरकारी बैंक व ऑटो शेयरों में बिकवाली जैसे कई अहम कारण रहे।
पिछले कारोबारी सत्र से ही दिखने लगा था दबाव
एक कारोबारी दिन पहले भी बाजार कमजोरी के साथ बंद हुआ था। सेंसेक्स 104.35 अंक (0.13%) की गिरावट के साथ 78,180.72 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 31.65 अंक (0.13%) फिसलकर 24,398.70 पर आ गया था। दिन के अंतिम 35 मिनट में आई तेज बिकवाली ने बाजार की रिकवरी की उम्मीदों पर पानी फेर दिया था।
शुरुआती कारोबार में बाजार का हाल
सुबह करीब 9:30 बजे तक सेंसेक्स 544.47 अंक (0.70%) टूटकर 77,636.25 पर कारोबार कर रहा था। वहीं निफ्टी 165.40 अंक (0.68%) गिरकर 24,233.30 के स्तर पर पहुंच गया।
इंट्राडे के दौरान सेंसेक्स 77,555.52 तक फिसल गया, जबकि निफ्टी 24,207.20 के निचले स्तर तक पहुंचा। केवल लार्जकैप ही नहीं, बल्कि निफ्टी मिडकैप 100 और निफ्टी स्मॉलकैप 100 भी लाल निशान में कारोबार करते दिखे।
बाजार में गिरावट की 4 बड़ी वजह
1. अमेरिका-ईरान तनाव ने बढ़ाई चिंता
पश्चिम एशिया में हालात एक बार फिर तनावपूर्ण हो गए हैं। होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले वाणिज्यिक जहाजों पर कथित हमलों के जवाब में अमेरिका की ओर से ईरान पर नए हमलों की खबरों ने वैश्विक निवेशकों की चिंता बढ़ा दी। भू-राजनीतिक जोखिम बढ़ने का सीधा असर शेयर बाजारों पर देखने को मिला।
2. कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का असर अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार पर भी दिखा।
- WTI क्रूड करीब 2.1% बढ़कर 71.87 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गया।
- ब्रेंट क्रूड लगभग 1.9% चढ़कर 75.53 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार करता दिखा।
भारत जैसे तेल आयातक देश के लिए कच्चे तेल की महंगाई महंगाई और चालू खाते पर दबाव बढ़ा सकती है, जिससे शेयर बाजार की धारणा कमजोर होती है।
3. इंडिया VIX में बढ़ी हलचल
बाजार की अस्थिरता को मापने वाला India VIX भी निवेशकों की चिंता का संकेत दे रहा है। इसमें उतार-चढ़ाव बढ़ने से यह संकेत मिलता है कि आने वाले समय में बाजार में वोलैटिलिटी अधिक रह सकती है। ऐसी स्थिति में निवेशक जोखिम वाले एसेट्स से दूरी बनाना पसंद करते हैं।
4. सरकारी बैंक और ऑटो शेयरों में बिकवाली
आज की गिरावट में सबसे ज्यादा दबाव सरकारी बैंक (PSU Banks) और ऑटो सेक्टर से आया। इन दोनों सेक्टरों के सूचकांकों में 1% से अधिक की गिरावट दर्ज की गई, जिससे प्रमुख इंडेक्स पर भी नकारात्मक असर पड़ा।
निवेशकों के लिए क्या संकेत?
विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों को लेकर अनिश्चितता बनी रहती है, तब तक भारतीय शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। ऐसे माहौल में निवेशकों को जल्दबाजी में फैसले लेने के बजाय अपने निवेश लक्ष्यों और जोखिम क्षमता के अनुसार रणनीति बनानी चाहिए।
डिस्क्लेमर: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से तैयार किया गया है। शेयर बाजार में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। किसी भी निवेश निर्णय से पहले अपने वित्तीय सलाहकार या प्रमाणित निवेश विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य लें।


