भारत अब मोबाइल फोन की असेंबलिंग तक सीमित नहीं रहना चाहता, बल्कि सेमीकंडक्टर चिप, इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट और जरूरी कच्चे माल के निर्माण में भी अपनी मजबूत पहचान बनाना चाहता है। इसी लक्ष्य को आगे बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार ने सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में नई पहल की है। केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने शुक्रवार को Semicon 2.0 वेब एप्लिकेशन पोर्टल लॉन्च किया।
इस पहल का उद्देश्य भारत में सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम को मजबूत करना, घरेलू कंपनियों को नए अवसर देना और इलेक्ट्रॉनिक्स की सप्लाई चेन में देश की भागीदारी बढ़ाना है। खास बात यह है कि सरकार की Electronics Components Manufacturing Scheme (ECMS) के तहत मंजूरी पाने वाली लगभग 50 फीसदी यूनिट्स छोटी और मझोली कंपनियों यानी SME और MSME क्षेत्र से जुड़ी हैं। इससे संकेत मिलता है कि इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग में छोटे उद्योगों की भूमिका भी बढ़ रही है।
Semicon 2.0 क्या है और इसके तहत क्या होगा?
#WATCH | Delhi | Union Minister Ashwini Vaishnaw says, "Today, another highly significant decision for the nation has been set in motion. For the semiconductor industry, a foundational industry, the portal for pillars 2, 3, and 4 of ‘Semicon 2.0’ has now gone live… In designing this portal, special care was taken to ensure that it accepts only those applications that are complete in every respect. The objective is to ensure that only truly serious players participate. There is no room for frivolous applicants, a point that has been clearly communicated to the industry…"He adds, "For all the programs, whether it is the mobile phone manufacturing scheme, electronics component manufacturing scheme, or semiconductors, everywhere we will follow this principle that only the serious players, people who want to contribute to the country’s growth, people who want to build that base for the country’s future, technologically savvy people, who understand technology, who are deep in that sector, only they should come forth. Those who come, they should be here for the long term and should be ready to have this journey for many years."
— ANI (@ANI) November 6, 2026
Semicon 2.0 भारत सरकार का ऐसा कार्यक्रम है, जिसका उद्देश्य देश में सेमीकंडक्टर उद्योग की पूरी सप्लाई चेन तैयार करना है। इसके तहत केवल चिप बनाने वाली फैक्ट्रियों पर ध्यान नहीं दिया जा रहा, बल्कि चिप डिजाइन, मशीनों, जरूरी कच्चे माल, रिसर्च और कुशल कर्मचारियों को तैयार करने पर भी जोर दिया जा रहा है।
सरकार ने 15 जुलाई 2026 को Semicon 2.0 को मंजूरी दी थी। इसके लिए कुल ₹1,27,500 करोड़ का प्रावधान किया गया है। यह कार्यक्रम पहले चरण यानी Semicon 1.0 के तहत तैयार किए गए सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम को आगे बढ़ाने का काम करेगा।
इस कार्यक्रम को छह प्रमुख स्तंभों में बांटा गया है।
- चिप डिजाइन: भारतीय स्टार्टअप और कंपनियों को सेमीकंडक्टर चिप, IP और सिस्टम-ऑन-चिप (SoC) डिजाइन करने में मदद देना।
- मशीन और मटेरियल: सेमीकंडक्टर बनाने में इस्तेमाल होने वाली मशीनों, गैसों और जरूरी सामग्री का घरेलू उत्पादन बढ़ाना।
- नई फैब यूनिट्स: सिलिकॉन वेफर, कंपाउंड सेमीकंडक्टर और डिस्प्ले फैब्रिकेशन यूनिट्स स्थापित करना।
- ATMP और OSAT: चिप की असेंबली, टेस्टिंग और पैकेजिंग से जुड़ी सुविधाओं को मजबूत करना।
- रिसर्च एवं डेवलपमेंट: नई तकनीक विकसित करने और सेमीकंडक्टर रिसर्च को बढ़ावा देना।
- टैलेंट डेवलपमेंट: इस सेक्टर के लिए प्रशिक्षित इंजीनियर और तकनीकी विशेषज्ञ तैयार करना।
इन छह स्तंभों के जरिए सरकार चिप डिजाइन से लेकर उसके निर्माण, पैकेजिंग और परीक्षण तक की क्षमताएं भारत में विकसित करना चाहती है।
Semicon 2.0 पोर्टल से कंपनियों को क्या फायदा होगा?
नए वेब एप्लिकेशन पोर्टल के लॉन्च होने से सेमीकंडक्टर सेक्टर में निवेश करने वाली कंपनियों के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू करने का रास्ता खुल गया है। अश्विनी वैष्णव ने बताया कि अब कार्यक्रम के दूसरे, तीसरे और चौथे पिलर के तहत आवेदन स्वीकार किए जाएंगे।
इसका मतलब है कि सेमीकंडक्टर मशीन और मटेरियल बनाने वाली कंपनियां, नई चिप फैब्रिकेशन यूनिट स्थापित करने वाले निवेशक और चिप पैकेजिंग एवं टेस्टिंग से जुड़ी कंपनियां इस कार्यक्रम के तहत आवेदन कर सकेंगी।
सरकार का जोर इस बात पर भी है कि पोर्टल पर अधूरे और गैर-गंभीर आवेदन स्वीकार न किए जाएं। इससे परियोजनाओं के चयन और उनकी प्रगति पर ध्यान केंद्रित करने में मदद मिल सकती है। खासतौर पर ऐसी कंपनियों को अवसर मिलेगा, जिनके पास निवेश, तकनीकी क्षमता और परियोजना को पूरा करने की स्पष्ट योजना है।
मोबाइल असेंबलिंग से चिप के पार्ट्स बनाने तक पहुंचा भारत
भारत में मोबाइल फोन मैन्युफैक्चरिंग की शुरुआत मुख्य रूप से असेंबलिंग से हुई थी। उस समय विदेशों से तैयार कंपोनेंट भारत लाए जाते थे और उन्हें जोड़कर मोबाइल फोन तैयार किए जाते थे। हालांकि, सरकार की कोशिश धीरे-धीरे इस व्यवस्था को बदलने की रही है।
अश्विनी वैष्णव ने अपने संबोधन में मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग के शुरुआती दौर का जिक्र करते हुए बताया कि उस समय भारत की क्षमता को लेकर सवाल उठाए जाते थे। कई लोग इसे केवल असेंबलिंग या स्क्रूड्राइवर टेक्नोलॉजी तक सीमित मानते थे।
लेकिन अब भारत की रणनीति तैयार प्रोडक्ट से आगे बढ़कर मॉड्यूल, कंपोनेंट और कच्चे माल के घरेलू उत्पादन तक पहुंचने की है। इसका अर्थ है कि मोबाइल फोन बनाने वाली कंपनियों को धीरे-धीरे जरूरी इलेक्ट्रॉनिक पार्ट्स के लिए भी घरेलू सप्लायर मिलने लगेंगे।
इस बदलाव का एक बड़ा फायदा यह हो सकता है कि भारत में केवल मोबाइल फोन बनाने वाली फैक्ट्रियां ही नहीं बढ़ेंगी, बल्कि उनके लिए जरूरी कंपोनेंट बनाने वाली सहायक इंडस्ट्री भी विकसित होगी। इससे देश में इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग का एक बड़ा नेटवर्क तैयार किया जा सकता है।
बैटरी सेल से PCB तक भारत में बनने लगे जरूरी कंपोनेंट
सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर में आत्मनिर्भर बनने के लिए जरूरी है कि देश में इस्तेमाल होने वाले प्रमुख कंपोनेंट का उत्पादन भी बढ़े। अश्विनी वैष्णव ने इस दिशा में बैटरी सेल, कॉपर फॉइल और कॉपर-क्लैड लैमिनेट जैसे उत्पादों का उल्लेख किया।
इनका इलेक्ट्रॉनिक्स इंडस्ट्री में महत्वपूर्ण इस्तेमाल होता है।
बैटरी सेल: मोबाइल फोन, लैपटॉप, इलेक्ट्रिक वाहन और दूसरे इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों में ऊर्जा स्टोर करने के लिए बैटरी सेल का इस्तेमाल किया जाता है। देश में इनका उत्पादन बढ़ने से बैटरी सप्लाई चेन को मजबूती मिल सकती है।
कॉपर फॉइल: यह इलेक्ट्रॉनिक सर्किट और बैटरी से जुड़े कई महत्वपूर्ण निर्माण कार्यों में इस्तेमाल होता है। इसकी गुणवत्ता और उपलब्धता इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग के लिए जरूरी है।
कॉपर-क्लैड लैमिनेट: यह प्रिंटेड सर्किट बोर्ड यानी PCB बनाने में इस्तेमाल होने वाला महत्वपूर्ण मटेरियल है। इसके ऊपर कॉपर की परत होती है, जिस पर इलेक्ट्रॉनिक सर्किट तैयार किए जाते हैं।
PCB यानी प्रिंटेड सर्किट बोर्ड: मोबाइल फोन, कंप्यूटर, टीवी, ऑटोमोबाइल इलेक्ट्रॉनिक्स और कई आधुनिक मशीनों में PCB का इस्तेमाल होता है। यह अलग-अलग इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट को जोड़ने और उनके बीच इलेक्ट्रिकल कनेक्शन बनाने का काम करता है।
इन उत्पादों का घरेलू उत्पादन बढ़ने से भारत की इलेक्ट्रॉनिक्स सप्लाई चेन में स्थानीय कंपनियों की भागीदारी बढ़ सकती है। हालांकि, किसी उत्पाद का देश में निर्माण शुरू होना और उसकी पूरी घरेलू मांग को पूरा करना अलग-अलग बातें हैं। इसके लिए उत्पादन क्षमता, गुणवत्ता और प्रतिस्पर्धी कीमतों में भी सुधार जरूरी होगा।
चीन पर निर्भरता कैसे कम कर सकता है Semicon 2.0?
दुनियाभर में इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर की सप्लाई चेन में चीन की बड़ी भूमिका रही है। मोबाइल फोन, लैपटॉप, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और अन्य तकनीकी उत्पादों के निर्माण में कई तरह के कंपोनेंट और कच्चे माल की जरूरत होती है। भारत में इनकी घरेलू उपलब्धता बढ़ने से आयात पर निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है।
Semicon 2.0 के तहत मशीनों, मटेरियल, चिप फैब्रिकेशन और पैकेजिंग सुविधाओं को बढ़ावा दिया जा रहा है। इससे भारत को दूसरे देशों से आने वाले जरूरी इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट के विकल्प तैयार करने का अवसर मिलेगा।
हालांकि, चीन पर निर्भरता तुरंत खत्म होना संभव नहीं है। सेमीकंडक्टर निर्माण एक जटिल प्रक्रिया है, जिसके लिए आधुनिक मशीनें, विशेष केमिकल, उच्च गुणवत्ता वाले कच्चे माल और प्रशिक्षित कर्मचारियों की जरूरत होती है। भारत को इन सभी क्षेत्रों में अपनी क्षमता विकसित करनी होगी।
इसलिए Semicon 2.0 को केवल एक सरकारी योजना के तौर पर नहीं, बल्कि भारत की लंबी अवधि की इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग रणनीति के हिस्से के रूप में देखा जा रहा है।
MSME कंपनियों के लिए खुलेंगे रोजगार और कारोबार के नए अवसर
इस पूरी पहल में सबसे महत्वपूर्ण बात छोटी और मझोली कंपनियों की बढ़ती भागीदारी है। ECMS के तहत मंजूर की गई आधी यूनिट्स SME और MSME श्रेणी की हैं। इसका मतलब है कि इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग का विस्तार केवल बड़ी कंपनियों तक सीमित नहीं है।
सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री में बड़ी फैक्ट्रियों के अलावा कई तरह के सहायक उद्योगों की भी जरूरत होती है। इनमें इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट, मशीन पार्ट्स, केमिकल, पैकेजिंग मटेरियल और दूसरे औद्योगिक उत्पाद बनाने वाली कंपनियां शामिल हैं।
ऐसे में छोटे उद्योगों के लिए बड़ी कंपनियों की सप्लाई चेन से जुड़ने के अवसर बन सकते हैं। इससे नए कारोबार, निवेश और रोजगार के अवसर पैदा होने की संभावना है।
इसके अलावा इंजीनियरिंग, इलेक्ट्रॉनिक्स, मटेरियल साइंस और मशीन ऑपरेशन जैसे क्षेत्रों में प्रशिक्षित युवाओं की मांग भी बढ़ सकती है।
भारत की इलेक्ट्रॉनिक्स इंडस्ट्री के लिए क्यों अहम है यह पहल?
भारत दुनिया के बड़े इलेक्ट्रॉनिक्स बाजारों में शामिल है। स्मार्टफोन, कंप्यूटर, इलेक्ट्रिक वाहन, टेलीकॉम उपकरण और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़े उत्पादों की मांग लगातार बढ़ रही है। इन सभी क्षेत्रों में सेमीकंडक्टर चिप की अहम भूमिका होती है।
अगर भारत इन उत्पादों के निर्माण के लिए जरूरी चिप और कंपोनेंट का घरेलू उत्पादन बढ़ा पाता है, तो इससे देश की मैन्युफैक्चरिंग क्षमता मजबूत हो सकती है।
सरकार ने Semicon 2.0 के तहत डिजाइन, मशीनों, मटेरियल, फैब्रिकेशन, पैकेजिंग, रिसर्च और टैलेंट डेवलपमेंट पर ध्यान दिया है। इसका उद्देश्य केवल कुछ चिप फैक्ट्रियां स्थापित करना नहीं, बल्कि देश में एक संपूर्ण सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम विकसित करना है।
इस तरह मोबाइल फोन की असेंबलिंग से शुरू हुआ भारत का सफर अब इलेक्ट्रॉनिक्स के जरूरी कंपोनेंट और सेमीकंडक्टर निर्माण तक पहुंचने की कोशिश कर रहा है। Semicon 2.0 पोर्टल के जरिए नए आवेदन शुरू होने से इस दिशा में निवेश और औद्योगिक भागीदारी बढ़ सकती है। आने वाले वर्षों में इसकी सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि मंजूर परियोजनाएं कितनी तेजी से उत्पादन शुरू करती हैं और भारत वैश्विक सप्लाई चेन में अपनी कितनी मजबूत जगह बना पाता है।
Source: The Economic Times, ANI और इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (PIB) की रिपोर्ट पर आधारित।

