SME IPO: भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) SME प्लेटफॉर्म पर कंपनियों की लिस्टिंग को आसान बनाने के लिए कई बड़े बदलावों पर विचार कर रहा है। प्रस्तावित बदलावों में SME IPO के लिए पोस्ट-इश्यू पेड-अप कैपिटल की सीमा बढ़ाना, निवेशकों के लिए न्यूनतम आवेदन राशि में बदलाव और मार्केट मेकिंग व अंडरराइटिंग के नियमों में राहत देना शामिल है। अगर ये प्रस्ताव लागू होते हैं, तो कई मध्यम आकार की कंपनियों के लिए SME IPO के जरिए पूंजी जुटाने का रास्ता आसान हो सकता है।
SME IPO के नियमों में मिल सकती है बड़ी राहत
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, SEBI SME फ्रेमवर्क की व्यापक समीक्षा कर रहा है। इसके तहत SME प्लेटफॉर्म पर लिस्ट होने वाली कंपनियों के लिए पोस्ट-इश्यू पेड-अप कैपिटल की अधिकतम सीमा ₹25 करोड़ से बढ़ाकर ₹100 करोड़ करने का प्रस्ताव विचाराधीन है।
इस बदलाव का दायरा काफी बड़ा हो सकता है। इससे करीब ₹5,000 करोड़ तक की मार्केट वैल्यू वाली कंपनियां SME IPO रूट का इस्तेमाल कर सकेंगी। मौजूदा व्यवस्था में SME प्लेटफॉर्म के लिए पात्र कंपनियों का आकार काफी सीमित है।
इसका फायदा उन कंपनियों को मिल सकता है जो छोटी कंपनियों की श्रेणी से बाहर निकल चुकी हैं, लेकिन मेनबोर्ड पर लिस्टिंग की लागत और अनुपालन संबंधी जरूरतों को पूरा करना अभी भी उनके लिए मुश्किल है।
₹2 लाख की न्यूनतम निवेश सीमा पर भी फैसला संभव
SEBI SME IPO में व्यक्तिगत निवेशकों के लिए लागू ₹2 लाख की न्यूनतम एप्लीकेशन लिमिट में भी बदलाव करने पर विचार कर रहा है।
कुछ समय पहले SME IPO में बढ़ती रिटेल भागीदारी और अत्यधिक सट्टेबाजी को देखते हुए न्यूनतम आवेदन राशि को ₹1 लाख से बढ़ाकर ₹2 लाख किया गया था। इसका उद्देश्य छोटे निवेशकों की अत्यधिक जोखिम वाली भागीदारी को सीमित करना था।
अब रेगुलेटर के सामने इस सीमा में ढील देने का विकल्प है। अगर न्यूनतम निवेश राशि कम होती है, तो अधिक रिटेल निवेशकों के लिए SME IPO में आवेदन करना संभव हो सकता है।
हालांकि, SME शेयरों में कीमतों में तेज उतार-चढ़ाव और कम लिक्विडिटी का जोखिम मेनबोर्ड कंपनियों की तुलना में अधिक हो सकता है। इसलिए निवेश सीमा घटने का मतलब यह नहीं है कि SME IPO कम जोखिम वाले हो जाएंगे।
ट्रेडिंग लॉट के नियम भी हो सकते हैं आसान
प्रस्तावित बदलावों में ट्रेडिंग लॉट से जुड़े नियमों की समीक्षा भी शामिल है। मौजूदा व्यवस्था में SME शेयरों में निवेश के लिए आवेदन का आकार आमतौर पर मेनबोर्ड IPO की तुलना में काफी बड़ा होता है।
SEBI इस व्यवस्था में बदलाव करके निवेशकों के लिए एंट्री बैरियर कम करने पर विचार कर सकता है। इससे SME कंपनियों के शेयरों में ज्यादा निवेशकों की भागीदारी का रास्ता खुल सकता है।
हालांकि, छोटे ट्रेडिंग लॉट से निवेशकों की संख्या बढ़ सकती है, लेकिन SME शेयरों में लिक्विडिटी और वोलैटिलिटी से जुड़े जोखिम बने रहेंगे।
मार्केट मेकर के नियमों में भी बदलाव की तैयारी
SME प्लेटफॉर्म की खास व्यवस्था में मार्केट मेकर की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। इसका उद्देश्य शेयरों में लिक्विडिटी बनाए रखने में मदद करना है।
वर्तमान नियमों के तहत SME कंपनी को लिस्टिंग के बाद कम से कम तीन साल तक एक निर्धारित मार्केट मेकर की व्यवस्था करनी होती है। SEBI इस अवधि और संबंधित आवश्यकताओं को आसान बनाने पर विचार कर रहा है।
अगर नियमों में राहत मिलती है, तो SME कंपनियों और उनसे जुड़े मध्यस्थों पर अनुपालन का बोझ कम हो सकता है।
अंडरराइटिंग की अनिवार्यता भी घट सकती है
SEBI SME IPO में पूरे इश्यू साइज की अनिवार्य अंडरराइटिंग के नियमों में भी बदलाव कर सकता है।
इसके साथ ही मर्चेंट बैंकर्स के लिए ‘स्किन-इन-द-गेम’ यानी खुद की वित्तीय प्रतिबद्धता से जुड़े प्रावधानों की भी समीक्षा की जा सकती है।
इन बदलावों का उद्देश्य SME IPO प्रक्रिया को ज्यादा व्यावहारिक बनाना और कंपनियों के लिए पूंजी बाजार तक पहुंच आसान करना है।
कंपनियों के लिए क्या बदलेगा?
प्रस्तावित सुधारों का सबसे बड़ा फायदा उन कंपनियों को मिल सकता है जो मौजूदा SME सीमा के मुकाबले बड़ी हो चुकी हैं, लेकिन मेनबोर्ड पर जाने के लिए जरूरी लागत और अनुपालन को वहन करना उनके लिए अभी कठिन है।
SME प्लेटफॉर्म ऐसी कंपनियों को अपेक्षाकृत कम लागत में पूंजी बाजार से पैसा जुटाने का विकल्प देता है। इसके बाद कारोबार बढ़ने पर कंपनी मेनबोर्ड में माइग्रेट करने की दिशा में आगे बढ़ सकती है।
इस तरह SEBI का उद्देश्य SME प्लेटफॉर्म को सिर्फ बहुत छोटी कंपनियों के लिए नहीं, बल्कि बढ़ती हुई मिड-साइज कंपनियों के लिए भी उपयोगी बनाना हो सकता है।
SME IPO बाजार में गतिविधि क्यों महत्वपूर्ण है?
SME IPO बाजार में पिछले कुछ वर्षों में निवेशकों की दिलचस्पी तेजी से बढ़ी है। इसी वजह से रेगुलेटर ने पहले निवेशकों की सुरक्षा और सट्टेबाजी पर नियंत्रण के लिए कई कड़े नियम लागू किए थे।
उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, 2025 में 267 SME कंपनियां लिस्ट हुई थीं, जबकि 2026 की पहली छमाही में करीब 80 SME कंपनियां लिस्ट हुईं।
अब इंडस्ट्री से मिले फीडबैक के आधार पर SEBI नियमों को फिर से संतुलित करने पर विचार कर रहा है, ताकि निवेशक सुरक्षा और कंपनियों के लिए आसान पूंजी जुटाने के बीच बेहतर संतुलन बनाया जा सके।
निवेशकों के लिए क्या मतलब?
अगर ₹2 लाख की न्यूनतम आवेदन सीमा में ढील मिलती है, तो SME IPO में छोटे निवेशकों की पहुंच बढ़ सकती है। वहीं, कंपनियों के लिए पेड-अप कैपिटल की सीमा बढ़ने से ज्यादा बड़ी कंपनियों को भी SME प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करने का मौका मिलेगा।
लेकिन निवेशकों को यह ध्यान रखना चाहिए कि SME शेयरों में कम लिक्विडिटी, तेज उतार-चढ़ाव और ऊंचे वैल्यूएशन जैसे जोखिम हो सकते हैं। इसलिए केवल कम न्यूनतम निवेश सीमा देखकर किसी SME IPO में पैसा लगाना उचित नहीं होगा।
फिलहाल ये बदलाव प्रस्तावित/विचाराधीन हैं। अंतिम नियम और उनकी लागू होने की तारीख SEBI के आधिकारिक निर्णय के बाद ही स्पष्ट होगी।
डिस्क्लेमर: यहां शेयर बाजार से जुड़ी जानकारी दी गई है, निवेश की सलाह नहीं। NewsJagran किसी शेयर या IPO में निवेश करने की सलाह नहीं देता। स्टॉक मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। किसी भी निवेश का फैसला लेने से पहले अपने वित्तीय लक्ष्य और जोखिम क्षमता को ध्यान में रखें तथा जरूरत पड़ने पर SEBI-रजिस्टर्ड इन्वेस्टमेंट एडवाइजर से सलाह लें।


