भारत का पेपर और पेपरबोर्ड उद्योग तेजी से बढ़ रहा है और इस सेक्टर में ITC का Paperboards & Specialty Papers Division (ITC-PSPD) एक बड़ा नाम है। भद्राचलम की एक यूनिट से शुरू हुआ यह कारोबार आज पेपर, पेपरबोर्ड और स्पेशलिटी पेपर के क्षेत्र में देश के सबसे बड़े एकीकृत कारोबारों में शामिल है।
Highlights
- ITC-PSPD भारत के सबसे बड़े इंटीग्रेटेड पेपरबोर्ड और पेपर कारोबारों में शामिल है
- कारोबार की शुरुआत 1979 में भद्राचलम पेपरबोर्ड्स से हुई थी
- ITC के पास देशभर में पेपर और पेपरबोर्ड की कई मैन्युफैक्चरिंग यूनिट हैं
- कंपनी पैकेजिंग, फूड, फार्मा, स्टेशनरी और प्रिंटिंग जैसे क्षेत्रों के लिए उत्पाद बनाती है
- Century Pulp & Paper के अधिग्रहण से ITC के पेपर कारोबार का पैमाना और बढ़ने वाला है
नई दिल्ली। भारत में कागज का इस्तेमाल सिर्फ किताबों और कॉपियों तक सीमित नहीं है। फूड पैकेजिंग, फार्मा, ई-कॉमर्स, FMCG, प्रिंटिंग और स्टेशनरी जैसे कई सेक्टर पेपर और पेपरबोर्ड पर निर्भर हैं। इस वजह से देश में पेपर इंडस्ट्री का बाजार लगातार बढ़ रहा है।
इस क्षेत्र में ITC Paperboards & Specialty Papers Division (ITC-PSPD) की खास पहचान है। ITC के मुताबिक उसका पेपरबोर्ड और पेपर कारोबार भारत के सबसे बड़े इंटीग्रेटेड पेपरबोर्ड एवं पेपर कारोबारों में शामिल है। कंपनी का यह कारोबार अब सालाना 10 लाख टन से अधिक पेपर और पेपरबोर्ड का उत्पादन करता है।
1979 में एक प्लांट से हुई थी शुरुआत
ITC ने पेपरबोर्ड कारोबार में साल 1979 में कदम रखा था। इसके लिए ITC Bhadrachalam Paperboards Limited को प्रमोट किया गया था और भद्राचलम में उत्पादन शुरू हुआ।
बाद में Bhadrachalam Paperboards का ITC में विलय हुआ। मार्च 2002 में यह ITC की डिवीजन बनी और उसी साल नवंबर में Tribeni Tissues Division के साथ मिलकर Paperboards & Specialty Papers Division का गठन हुआ।
यानी जिस कारोबार की शुरुआत करीब पांच दशक पहले एक प्रमुख प्लांट से हुई थी, वह आज कई मैन्युफैक्चरिंग यूनिट और विस्तृत प्रोडक्ट पोर्टफोलियो वाला बड़ा बिजनेस बन चुका है।
ITC-PSPD क्या-क्या बनाती है?
ITC-PSPD सिर्फ सामान्य कागज बनाने वाली कंपनी नहीं है। इसका फोकस खास तौर पर पेपरबोर्ड, स्पेशलिटी पेपर और पैकेजिंग से जुड़े उत्पादों पर है।
इसके उत्पादों का इस्तेमाल कई क्षेत्रों में होता है, जैसे:
- फूड और बेवरेज पैकेजिंग
- फार्मास्युटिकल पैकेजिंग
- FMCG पैकेजिंग
- स्टेशनरी और नोटबुक
- प्रिंटिंग और ग्राफिक्स
- डेकोर पेपर
- इंडस्ट्रियल और स्पेशलिटी पेपर
- सॉलिड बोर्ड और बैरियर-कोटेड बोर्ड
ITC के अनुसार उसका PSPD कारोबार पैकेजिंग, ग्राफिक, कम्युनिकेशन, राइटिंग, प्रिंटिंग और स्पेशलिटी पेपर की जरूरतों को पूरा करता है।
देश में कहां-कहां हैं इसके प्लांट?
ITC-PSPD का मैन्युफैक्चरिंग नेटवर्क कई राज्यों में फैला है। कंपनी की प्रमुख यूनिट इस प्रकार हैं:
1. भद्राचलम यूनिट
भद्राचलम ITC के पेपर कारोबार की सबसे महत्वपूर्ण यूनिट है। ITC के कॉरपोरेट ब्रोशर के मुताबिक यहां करीब 7.50 लाख TPA वर्जिन पेपर और पेपरबोर्ड की क्षमता है। कंपनी इसे भारत की सबसे बड़ी इंटीग्रेटेड पल्प एवं पेपरबोर्ड मैन्युफैक्चरिंग यूनिट बताती है।
2. त्रिबेनी यूनिट
पश्चिम बंगाल की त्रिबेनी यूनिट में करीब 65,000 TPA स्पेशलिटी पेपर बनाया जाता है। यहां पैकेजिंग, पतली प्रिंटिंग, डेकोर और इंसुलेशन जैसे इस्तेमाल के लिए अलग-अलग प्रकार के स्पेशलिटी पेपर तैयार किए जाते हैं।
3. कोवई यूनिट
तमिलनाडु की कोवई यूनिट का फोकस मुख्य रूप से रीसाइकल्ड बोर्ड पर है। ITC के मुताबिक इसकी क्षमता करीब 1.15 लाख TPA है।
4. बोलाराम यूनिट
तेलंगाना की बोलाराम यूनिट में फूड और बेवरेज सेक्टर के लिए बैरियर-कोटेड बोर्ड के साथ-साथ पैकेजिंग और इनडोर ब्रांडिंग के लिए सॉलिड बोर्ड बनाए जाते हैं।
कौन है इसका मालिक?
यहां एक जरूरी बात समझना जरूरी है। ITC-PSPD की कोई अलग कंपनी या एकल मालिक नहीं है। यह ITC Limited का एक बिजनेस डिवीजन है।
ITC Limited एक लिस्टेड पब्लिक कंपनी है, इसलिए इसे किसी एक व्यक्ति की निजी कंपनी कहना सही नहीं होगा। इसके शेयर बड़ी संख्या में संस्थागत और व्यक्तिगत निवेशकों के पास हैं।
यानी अगर सवाल है कि इस पेपर कारोबार का मालिक कौन है, तो सीधा जवाब है—ITC Limited। ITC के कई दूसरे कारोबार भी हैं, जिनमें FMCG, पैकेजिंग, एग्री और IT शामिल हैं। 31 मार्च 2026 तक ITC का कुल ग्रॉस रेवेन्यू ₹80,867 करोड़ और EBITDA ₹25,208 करोड़ था।
16,000 करोड़ की वैल्यूएशन का क्या मतलब है?
ITC-PSPD के लिए करीब ₹16,000 करोड़ की वैल्यू का आंकड़ा इस्तेमाल किया जाता रहा है, लेकिन इसे ITC की आधिकारिक अलग-अलग सूचीबद्ध कंपनी की मार्केट कैप समझना सही नहीं होगा। PSPD, ITC Limited के अंदर एक बिजनेस डिवीजन है।
इसलिए इस आंकड़े को SOTP यानी Sum-of-the-Parts के आधार पर कारोबार के अनुमानित मूल्य/एंटरप्राइज वैल्यू के तौर पर देखना चाहिए, न कि किसी अलग शेयर बाजार में लिस्टेड कंपनी की मार्केट कैप के रूप में।
Century Pulp & Paper से और बढ़ेगा कारोबार
ITC ने मार्च 2025 में Aditya Birla Real Estate Limited के Century Pulp & Paper कारोबार को खरीदने के लिए ₹3,498 करोड़ के सौदे की घोषणा की थी। Century Pulp & Paper की स्थापित क्षमता करीब 4.8 लाख मीट्रिक टन सालाना बताई गई थी।
इस अधिग्रहण से ITC के पेपर कारोबार को एक नया बड़ा मैन्युफैक्चरिंग बेस मिलने की उम्मीद है। ITC ने कहा है कि इससे उसके पेपरबोर्ड और पेपर कारोबार की क्षमता में 50% से अधिक की वृद्धि हो सकती है और कुल क्षमता करीब 15 लाख मीट्रिक टन तक पहुंच सकती है।
हालांकि, 17 दिसंबर 2025 को ITC ने बताया था कि इस अधिग्रहण को Competition Commission of India से मंजूरी मिल गई है; कंपनी के दस्तावेजों में अन्य जरूरी वैधानिक मंजूरियों और शर्तों का भी उल्लेख था।
टेक्नोलॉजी और पर्यावरण पर भी फोकस
पेपर उद्योग में कच्चे माल, ऊर्जा और पर्यावरण से जुड़ी चुनौतियां काफी महत्वपूर्ण हैं। ITC ने अपने पेपर कारोबार में इंटीग्रेटेड फाइबर चेन, इन-हाउस पल्प मैन्युफैक्चरिंग और रिन्यूएबल एनर्जी पर जोर दिया है।
ITC की 2026 की सस्टेनेबिलिटी रिपोर्ट के अनुसार, FY2025-26 में PSPD की कुल ऊर्जा खपत में 51% हिस्सा रिन्यूएबल एनर्जी का था।
कंपनी का दावा है कि उसका फाइबर मॉडल किसानों द्वारा संचालित प्लांटेशन और सस्टेनेबल सोर्सिंग से भी जुड़ा हुआ है। यही मॉडल उसके पेपर कारोबार को सिर्फ उत्पादन क्षमता के स्तर पर नहीं, बल्कि कच्चे माल की उपलब्धता के स्तर पर भी प्रतिस्पर्धी बनाने में मदद करता है।
एक प्लांट से शुरू होकर देश के बड़े पेपर कारोबार तक
ITC-PSPD की कहानी इस बात का उदाहरण है कि किस तरह 1979 में शुरू किया गया एक औद्योगिक कारोबार कई दशकों में तकनीक, क्षमता विस्तार और अधिग्रहण के जरिए बड़े बिजनेस में बदल सकता है।
भद्राचलम से शुरू हुआ यह सफर आज पेपरबोर्ड, स्पेशलिटी पेपर, रीसाइकल्ड बोर्ड और पैकेजिंग सॉल्यूशंस तक पहुंच चुका है। Century Pulp & Paper के प्रस्तावित अधिग्रहण से इसका आकार और बढ़ने की संभावना है।
इसलिए “भारत की सबसे बड़ी कागज बनाने वाली कंपनी” कहने के बजाय इसे अधिक सटीक तौर पर भारत के सबसे बड़े इंटीग्रेटेड पेपरबोर्ड और पेपर कारोबारों में से एक—ITC-PSPD कहना बेहतर है। खास बात यह है कि यह कोई अलग लिस्टेड कंपनी नहीं, बल्कि ITC Limited का हिस्सा है।


