Satya Niketan Building Collapse: दिल्ली के सत्य निकेतन में बहुमंजिला इमारत अचानक भरभराकर गिर गई। हादसे में छह लोगों की मौत हो गई, जबकि 11 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला गया। MCD की शुरुआती जांच में कथित अनधिकृत निर्माण, अतिरिक्त मंजिलों और इमारत की संरचनात्मक सुरक्षा को लेकर कई सवाल सामने आए हैं।
Satya Niketan Building Collapse: दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में एक बहुमंजिला इमारत के गिरने से बड़ा हादसा हो गया। हादसे में छह लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि 11 लोगों को रेस्क्यू कर सुरक्षित बाहर निकाला गया। घटना के बाद दिल्ली नगर निगम (MCD) और पुलिस की जांच में इमारत के निर्माण, उसकी मौजूदा हालत और सुरक्षा इंतजामों को लेकर कई गंभीर सवाल उठे हैं।
MCD के मुताबिक, हादसे वाली इमारत सत्य निकेतन की P-14 थी। यह एक रीसेटलमेंट कॉलोनी में करीब 55 वर्ग गज के क्षेत्र में बनी हुई थी। शुरुआती जानकारी के अनुसार, इमारत का निर्माण करीब 1990 के दशक में हुआ था और इसमें बेसमेंट, ग्राउंड फ्लोर के साथ ऊपर कई मंजिलें बनी थीं।
न्यूज एजेंसी PTI के अनुसार, MCD के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि करीब 30 साल पुरानी इस इमारत में ग्राउंड फ्लोर के अलावा चार मंजिलें थीं यानी यह G+4 संरचना थी। वहीं, रीसेटलमेंट कॉलोनी में नियमों के तहत केवल ग्राउंड फ्लोर के साथ एक अतिरिक्त मंजिल यानी G+1 तक निर्माण की अनुमति थी।
इमारत में चलता था छात्रों का हॉस्टल और PG
गिरी हुई इमारत का इस्तेमाल लड़कों के हॉस्टल और छात्रों के लिए पेइंग-गेस्ट (PG) आवास के तौर पर किया जा रहा था। ऐसे में हादसे के बाद सबसे बड़ा सवाल वहां रहने वाले छात्रों की सुरक्षा को लेकर खड़ा हुआ है।
जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि इमारत में अतिरिक्त मंजिलें कब और कैसे बनाई गईं और क्या इनके लिए संबंधित विभाग से जरूरी अनुमति ली गई थी।
इमारत के गिरने की घटना ने कथित अनधिकृत निर्माण और लंबे समय से चली आ रही संरचनात्मक समस्याओं पर भी सवाल खड़े किए हैं।
गिरने से पहले इमारत में दिखाई दी थीं दरारें
रिपोर्टों के मुताबिक, इमारत गिरने से पहले उसमें दरारें दिखाई देने लगी थीं। इसके बाद यह सवाल उठ रहा है कि क्या इन दरारों को गंभीर चेतावनी के तौर पर लिया गया था और क्या समय रहते इमारत को खाली कराया जा सकता था।
जानकारी के अनुसार, इमारत के बेसमेंट और ग्राउंड फ्लोर वाले हिस्से में मरम्मत का काम भी चल रहा था। अब अधिकारी यह जांच कर रहे हैं कि मरम्मत के लिए जरूरी अनुमति ली गई थी या नहीं और क्या इस काम से पहले इमारत की संरचनात्मक मजबूती की जांच की गई थी।
छात्रों के रहने वाली इस इमारत में पर्याप्त आपातकालीन निकास यानी इमरजेंसी एग्जिट की व्यवस्था थी या नहीं, यह भी जांच का अहम हिस्सा है।
MCD के पास बुकिंग या सीलिंग का रिकॉर्ड नहीं
दिल्ली नगर निगम ने बताया कि इस संपत्ति की बुकिंग या सीलिंग से संबंधित कोई रिकॉर्ड उसके पास नहीं है। इसके अलावा, अधिकारियों के मुताबिक, संपत्ति पर किए जा रहे निर्माण या अन्य काम को लेकर पहले कोई शिकायत भी दर्ज नहीं हुई थी।
अब हादसे के बाद सवाल यह है कि अगर इमारत में नियमों के विपरीत निर्माण हुआ था, तो इसकी जानकारी संबंधित विभागों तक क्यों नहीं पहुंची और समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं की गई।
बगल की इमारत को भी बताया गया खतरनाक
हादसे के बाद सिर्फ गिरी हुई इमारत ही नहीं, बल्कि उसके ठीक बगल में मौजूद एक पांच मंजिला इमारत की सुरक्षा को लेकर भी चिंता बढ़ गई है।
बताया जा रहा है कि यह इमारत दुकान नंबर 13 और 14 को मिलाकर बनाई गई थी। एहतियात के तौर पर इसे खाली करा लिया गया है। MCD की ओर से इसे लेकर सुरक्षा संबंधी नोटिस भी जारी किया गया है।
नगर निगम के नोटिस के मुताबिक, सत्य निकेतन में स्थित यह इमारत जर्जर और खतरनाक स्थिति में थी। इससे वहां रहने वाले लोगों, इमारत का इस्तेमाल करने वालों, राहगीरों और आसपास की संपत्तियों के लिए खतरा पैदा हो सकता था।
इसी आधार पर दिल्ली नगर निगम अधिनियम के तहत संबंधित संपत्ति को नोटिस जारी कर निर्धारित अवधि में गिराने का आदेश दिया गया है।
अधिकारियों के अनुसार, बगल वाली इमारत पुराने निर्माण तरीके से बनी है। इसमें पर्याप्त सपोर्ट पिलर नहीं होने और ईंट की दीवारों के सहारे ढांचे के खड़े होने को लेकर भी चिंता जताई गई है। इमारत को स्थिर रखने के लिए फिलहाल सपोर्ट सिस्टम लगाने का काम किया जा रहा है।
मलबा हटाने से पड़ोसी इमारत की सुरक्षा पर भी खतरा
गिरी हुई इमारत का मलबा हटाना भी प्रशासन के लिए चुनौती बना हुआ है। अधिकारियों को आशंका है कि मलबा हटाने के दौरान आसपास की जमीन या आधार पर असर पड़ सकता है, जिससे बगल वाली इमारत की स्थिरता प्रभावित हो सकती है।
इसी वजह से राहत और बचाव अभियान के साथ-साथ आसपास की इमारतों की सुरक्षा का भी ध्यान रखा जा रहा है। एहतियात के तौर पर आसपास रहने वाले लोगों को भी वहां से हटाया गया है।
अब जांच में यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि इमारत की संरचनात्मक स्थिति के बारे में किसे जानकारी थी, क्या किसी स्तर पर शिकायत या चेतावनी मिली थी और अगर मिली थी तो उस पर क्या कार्रवाई की गई।
इलाके में पहले भी हो चुके हैं ऐसे हादसे
स्थानीय लोगों का दावा है कि पिछले करीब 15 वर्षों में रीसेटलमेंट कॉलोनी में इस तरह की यह चौथी घटना है। वर्ष 2022 में हुई एक अन्य घटना में दो लोगों की मौत हुई थी।
बार-बार सामने आ रही ऐसी घटनाओं ने सत्य निकेतन और आसपास के इलाकों में पुराने और कमजोर भवनों की स्थिति को लेकर चिंता बढ़ा दी है। साथ ही, अवैध या नियमों के विपरीत किए जा रहे निर्माण पर निगरानी और कार्रवाई की व्यवस्था पर भी सवाल उठ रहे हैं।
हादसे के बाद MCD ने चार मंजिल से ज्यादा वाली अवैध इमारतों को तत्काल सील करने के निर्देश दिए हैं। ऐसे निर्माण को मंजूरी देने या नियमों की अनदेखी करने वाले अधिकारियों के खिलाफ भी सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।
दिल्ली के मेयर प्रवेश वाही ने कहा है कि जांच में जो भी अधिकारी या कर्मचारी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। इसमें नौकरी से हटाने जैसी कार्रवाई भी शामिल हो सकती है।
दोपहर करीब 1:30 बजे हुआ हादसा
पुलिस के मुताबिक, सत्य निकेतन में यह हादसा दोपहर करीब 1:30 बजे हुआ। इमारत गिरने के बाद इलाके में अफरा-तफरी मच गई और तत्काल राहत एवं बचाव अभियान शुरू किया गया।
रातभर चले रेस्क्यू ऑपरेशन में मलबे के अंदर फंसे लोगों को बाहर निकालने की कोशिश की गई। IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, मलबे में कई लोगों के दबे होने की आशंका थी और इनमें ज्यादातर छात्र बताए जा रहे थे।
रेस्क्यू अभियान के दौरान एक और व्यक्ति को मलबे से बाहर निकाला गया, लेकिन उसकी जान नहीं बचाई जा सकी। हादसे में मृतकों की संख्या बढ़कर छह हो गई, जबकि 11 लोगों को सुरक्षित बचा लिया गया।
पुलिस ने इस मामले में साउथ कैंपस पुलिस स्टेशन में कथित मालिक हरिराम और अन्य लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की है।
CM रेखा गुप्ता ने दिए मजिस्ट्रियल जांच के आदेश
दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने हादसे को गंभीरता से लेते हुए मजिस्ट्रियल जांच के आदेश दिए हैं। अधिकारियों को हादसे की वजह और इससे जुड़े सभी पहलुओं की जांच करने के निर्देश दिए गए हैं।
जांच में मुख्य रूप से इमारत की संरचनात्मक स्थिति, कथित अवैध निर्माण, चल रहे मरम्मत कार्य, छात्रों के लिए सुरक्षा व्यवस्था और संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही पर फोकस किया जाएगा।
यह भी पता लगाया जाएगा कि क्या इमारत में पहले से मौजूद दरारों या अन्य खतरनाक संकेतों की जानकारी किसी को थी और अगर थी तो उसके बावजूद समय रहते जरूरी कदम क्यों नहीं उठाए गए।
MCD मुख्यालय के बाहर ABVP का प्रदर्शन
हादसे के बाद अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) के सदस्यों ने MCD मुख्यालय के बाहर प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने छात्रों की सुरक्षा का मुद्दा उठाते हुए PG और छात्र आवासों में सुरक्षा नियमों के पालन को लेकर सवाल खड़े किए।
फिलहाल इस पूरे मामले में प्रशासनिक और पुलिस जांच जारी है। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि इमारत गिरने की वास्तविक वजह क्या थी और कथित अनधिकृत निर्माण या सुरक्षा संबंधी लापरवाही की इसमें कितनी भूमिका रही।


