US-Iran War: अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव का असर अब दुनिया के सबसे अहम समुद्री रास्तों में शामिल होर्मुज जलडमरूमध्य पर भी दिखाई देने लगा है। ईरान ने यहां एक नया ‘एक्सक्लूजन जोन’ बनाने की तैयारी शुरू कर दी है। तेहरान ने चेतावनी दी है कि इस क्षेत्र में दाखिल होकर होर्मुज से गुजरने की कोशिश करने वाले कमर्शियल जहाजों की पहचान होने पर उन्हें प्रतिबंधित सूची में डाला जा सकता है।
Iran-US Conflict: अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते टकराव ने वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ा दी है। इसी बीच ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर बड़ा कदम उठाने के संकेत दिए हैं। तेहरान अब रणनीतिक समुद्री मार्ग के आसपास एक नया ‘एक्सक्लूजन जोन’ यानी वर्जित क्षेत्र तैयार करने की योजना बना रहा है।
ईरानी सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के नवनियुक्त प्रमुख मोहेसन रेजाई ने रविवार, 6 सितंबर को सरकारी टेलीविजन से बातचीत में इस योजना की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि प्रस्तावित क्षेत्र से जुड़ी विस्तृत जानकारी आने वाले दिनों या हफ्तों में सार्वजनिक की जा सकती है।
कहां बनाया जाएगा नया एक्सक्लूजन जोन?
मोहेसन रेजाई के मुताबिक, प्रस्तावित एक्सक्लूजन जोन अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी की लाइन से शुरू होकर होर्मुज जलडमरूमध्य की दिशा में और फिर फारस की खाड़ी की ओर विस्तारित किया जाएगा।
ईरान की चेतावनी सीधे तौर पर कमर्शियल शिपिंग कंपनियों के लिए अहम है। रेजाई ने कहा कि यदि कोई व्यावसायिक जहाज इस क्षेत्र में दाखिल होता है और होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने की कोशिश करता हुआ पहचाना जाता है, तो उसे ईरान की प्रतिबंधित सूची में शामिल किया जा सकता है।
हालांकि, अभी तक इस प्रस्तावित क्षेत्र की सटीक भौगोलिक सीमा स्पष्ट नहीं की गई है। यही वजह है कि अंतरराष्ट्रीय शिपिंग कंपनियों के लिए आने वाले दिनों में स्थिति पर नजर रखना बेहद जरूरी होगा।
अमेरिका की नाकेबंदी के बीच बढ़ा तनाव
ईरान का यह ऐलान ऐसे समय सामने आया है जब वॉशिंगटन और तेहरान के बीच तनाव लगातार बढ़ रहा है। रिपोर्टों के मुताबिक, इससे एक दिन पहले अमेरिका ने तीन ईरानी तेल टैंकरों को निशाना बनाया था।
इससे पहले ईरान की ओर से अमेरिकी युद्धपोतों की दिशा में बैलिस्टिक मिसाइलें दागे जाने की खबरें भी सामने आई थीं। ऐसे में दोनों देशों के बीच सैन्य टकराव का असर समुद्री व्यापार पर भी पड़ने की आशंका बढ़ गई है।
अमेरिका की कथित नाकेबंदी का मकसद ईरान के तेल निर्यात को सीमित करना और उसकी अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ाना बताया जा रहा है। अमेरिकी सेना के अनुसार, 20 से ज्यादा युद्धपोत इस अभियान में शामिल हैं।
रविवार तक अमेरिकी सेना के मुताबिक, कार्रवाई के कारण करीब 92 कमर्शियल जहाजों के रूट में बदलाव किया गया, जबकि तीन जहाजों को निष्क्रिय किया गया।
होर्मुज को लेकर आमने-सामने ईरान और अमेरिका
होर्मुज जलडमरूमध्य पहले से ही अमेरिका और ईरान के बीच रणनीतिक तनाव का प्रमुख केंद्र रहा है। ईरान इस समुद्री मार्ग को अपने लिए एक महत्वपूर्ण रणनीतिक दबाव के साधन के तौर पर इस्तेमाल करता रहा है।
रविवार को ईरान ने दावा किया कि उसने होर्मुज जलडमरूमध्य में प्रवेश करने की कोशिश कर रहे एक मानवरहित अमेरिकी पोत को निशाना बनाया। हालांकि, अमेरिकी सेना ने ईरान के इस दावे को खारिज करते हुए इसे पूरी तरह गलत बताया।
इस तरह दोनों देशों के दावों और जवाबी दावों के बीच होर्मुज में समुद्री सुरक्षा को लेकर अनिश्चितता और बढ़ गई है।
करीब एक महीने की शांति के बाद फिर तेज हुआ संघर्ष
अमेरिका और ईरान के बीच हालिया टकराव करीब एक महीने की अपेक्षाकृत शांति के बाद पिछले सप्ताह फिर तेज हुआ है। इसके साथ ही होर्मुज जलडमरूमध्य और ईरान का दक्षिणी तटीय इलाका दोबारा संघर्ष के प्रमुख केंद्रों में आ गया है।
सप्ताह की शुरुआत में अमेरिकी हमलों में कम से कम पांच लोगों के मारे जाने की खबर सामने आई थी। इनमें एक हमला ऐसा भी था, जिसने उस इलाके पर दोबारा अंतरराष्ट्रीय ध्यान खींचा, जहां संघर्ष के शुरुआती दौर में एक स्कूल भी हमले की चपेट में आया था।
ट्रंप प्रशासन ईरान पर सैन्य दबाव के साथ-साथ आर्थिक दबाव भी बढ़ा रहा है। अमेरिका ने कुछ विदेशी वित्तीय संस्थानों के खिलाफ भी कार्रवाई की है, जिन पर ईरान से जुड़ी वित्तीय गतिविधियों को सुविधाजनक बनाने का आरोप लगाया गया है।
ईरान ने कहा- बातचीत के लिए चाहिए गारंटी
ईरान के सुरक्षा प्रमुख मोहेसन रेजाई ने अमेरिका के साथ पहले हुई बातचीत को लेकर भी अपनी स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने पाकिस्तान, कतर और ओमान जैसे मध्यस्थ देशों की भूमिका पर असंतोष जताया।
रेजाई के अनुसार, जून के मध्य में दोनों पक्षों के बीच बनी सहमति ज्यादा समय तक कायम नहीं रह सकी। इसके बाद अमेरिका और ईरान ने एक-दूसरे पर समझौते की शर्तों का उल्लंघन करने के आरोप लगाए।
अब ईरान का कहना है कि वह कूटनीति के रास्ते पर आगे बढ़ने के लिए ठोस गारंटी चाहता है। यानी भविष्य में किसी भी बातचीत या समझौते को लेकर तेहरान सुरक्षा और भरोसे से जुड़े आश्वासन की मांग कर रहा है।
दुनिया के लिए इतना महत्वपूर्ण क्यों है होर्मुज स्ट्रेट?
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा समुद्री मार्गों में से एक है। फारस की खाड़ी के आसपास के तेल उत्पादक देशों से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल और प्राकृतिक गैस इसी समुद्री रास्ते के जरिए अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचती है।
यही कारण है कि होर्मुज में किसी भी तरह की बड़ी रुकावट का असर केवल अमेरिका और ईरान तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि दुनिया के कई देशों के ऊर्जा बाजारों पर पड़ सकता है।
अमेरिकी ऊर्जा मंत्री क्रिस राइट के मुताबिक, रविवार को भी औसतन करीब 90 लाख बैरल तेल प्रतिदिन होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर गुजर रहा था। उन्होंने यह भी कहा कि क्षेत्र में मौजूद पाइपलाइनें ऊर्जा आपूर्ति को बनाए रखने में मदद कर रही हैं।
उनके मुताबिक, मौजूदा परिस्थितियों में तेल की आवाजाही संघर्ष शुरू होने से पहले के स्तर की करीब दो-तिहाई या उससे अधिक बनी हुई है।
वैश्विक तेल बाजार पर पड़ सकता है असर
ईरान की ओर से एक्सक्लूजन जोन बनाने की योजना और कमर्शियल जहाजों को प्रतिबंध की चेतावनी ने वैश्विक शिपिंग और ऊर्जा बाजारों की चिंता बढ़ा दी है।
अगर होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही और ज्यादा प्रभावित होती है, तो तेल और गैस की सप्लाई में बाधा आ सकती है। ऐसी स्थिति में अंतरराष्ट्रीय बाजारों में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और ऊर्जा लागत बढ़ने का दबाव बन सकता है।
भारत समेत तेल आयात पर निर्भर देशों के लिए भी यह स्थिति महत्वपूर्ण है। लंबे समय तक समुद्री मार्ग बाधित रहने पर कच्चे तेल की कीमत, शिपिंग लागत और अंततः पेट्रोल-डीजल समेत कई क्षेत्रों पर इसका अप्रत्यक्ष असर देखने को मिल सकता है।
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि ईरान प्रस्तावित एक्सक्लूजन जोन की सीमाएं कब और किस तरह तय करता है और अमेरिका इसका क्या जवाब देता है। आने वाले दिनों में होर्मुज जलडमरूमध्य की स्थिति वैश्विक ऊर्जा बाजार के लिए बेहद अहम रहने वाली है।


