नई दिल्ली: डॉलर के मुकाबले रुपये में लगातार कमजोरी के बीच भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने बड़ा कदम उठाया है। रिपोर्ट के मुताबिक केंद्रीय बैंक ने पिछले शुक्रवार को विदेशी मुद्रा बाजार में करीब 7 अरब डॉलर बेचकर रुपये को संभालने की कोशिश की। यह पिछले कई महीनों में एक दिन में किया गया सबसे बड़ा मुद्रा बाजार हस्तक्षेप माना जा रहा है।
ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, आरबीआई ने रुपये को ऑल टाइम लो पर जाने से रोकने के लिए ऑनशोर और ऑफशोर दोनों विदेशी मुद्रा बाजारों में डॉलर की बिक्री की। हालांकि, इस मामले पर RBI की ओर से आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। कॉल और ईमेल के जरिए प्रतिक्रिया लेने की कोशिश का भी तत्काल कोई जवाब नहीं मिला।
रुपये पर क्यों बढ़ा दबाव?
हाल के दिनों में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल ने भारत जैसे तेल आयातक देशों की चिंता बढ़ा दी है। भारत अपनी जरूरत का अधिकांश कच्चा तेल आयात करता है, इसलिए तेल महंगा होने पर डॉलर की मांग बढ़ जाती है। इसका सीधा असर रुपये पर पड़ता है और उसकी कीमत कमजोर होती है।
इसी वजह से डॉलर के मुकाबले रुपया पिछले सप्ताह अपने रिकॉर्ड निचले स्तर के बेहद करीब पहुंच गया था। ऐसे में आरबीआई को बाजार में हस्तक्षेप करना पड़ा।
एक दिन में 7 अरब डॉलर की बिक्री
सूत्रों के अनुसार, RBI ने शुक्रवार को करीब 7 बिलियन डॉलर बाजार में बेचकर डॉलर की सप्लाई बढ़ाई। इससे डॉलर की कीमत पर दबाव आया और रुपये को कुछ राहत मिली।
बताया जा रहा है कि शुक्रवार के बाद भी अगले दो कारोबारी सत्रों में केंद्रीय बैंक ने डॉलर की बिक्री जारी रखी, जिससे रुपये में मजबूती देखने को मिली।
रिकॉर्ड लो के करीब पहुंच गया था रुपया
गुरुवार को डॉलर के मुकाबले रुपया 95.7437 के स्तर पर कारोबार कर रहा था।
भारतीय मुद्रा का अब तक का रिकॉर्ड निचला स्तर 96.96 प्रति डॉलर है, जिसे उसने 20 मई को इंट्राडे कारोबार के दौरान छुआ था। यदि आरबीआई समय रहते हस्तक्षेप नहीं करता, तो रुपया फिर से उस स्तर के करीब पहुंच सकता था।
विदेशी मुद्रा भंडार ने बढ़ाई RBI की ताकत
रुपये की रक्षा करने में इस बार आरबीआई की सबसे बड़ी ताकत देश का मजबूत विदेशी मुद्रा भंडार (Forex Reserves) रहा।
RBI ने हाल के महीनों में विदेशी पूंजी आकर्षित करने के लिए कई कदम उठाए, जिनका सकारात्मक असर देखने को मिला। इन उपायों के चलते विदेशी मुद्रा भंडार लगातार बढ़ रहा है।
RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने हाल ही में कहा कि पूंजी प्रवाह बढ़ाने के लिए उठाए गए कदमों को अच्छी प्रतिक्रिया मिली है और बैंकों ने अब तक करीब 32 अरब डॉलर जुटाए हैं।
लगातार तीसरे सप्ताह बढ़ा विदेशी मुद्रा भंडार
17 जुलाई तक भारत का विदेशी मुद्रा भंडार बढ़कर 676.2 अरब डॉलर पहुंच गया।
मुख्य बातें:
- तीन सप्ताह में विदेशी मुद्रा भंडार 9 अरब डॉलर से अधिक बढ़ा।
- लगातार तीसरे सप्ताह विदेशी मुद्रा भंडार में वृद्धि दर्ज की गई।
- मजबूत फॉरेक्स रिजर्व की वजह से RBI के पास बाजार में हस्तक्षेप करने की पर्याप्त क्षमता बनी हुई है।
दूसरे एशियाई देशों पर भी दबाव
सिर्फ भारत ही नहीं, बल्कि एशिया के अन्य तेल आयातक देशों की मुद्राओं पर भी दबाव बढ़ा है। कच्चे तेल की कीमतों में तेजी के कारण फिलीपींस के केंद्रीय बैंक को भी अपनी मुद्रा को कमजोर होने से बचाने के लिए विदेशी मुद्रा बाजार में हस्तक्षेप करना पड़ा।
इससे साफ है कि वैश्विक ऊर्जा बाजार में बढ़ती अस्थिरता का असर पूरे एशियाई क्षेत्र की करेंसी पर पड़ रहा है।
आम लोगों पर क्या होगा असर?
यदि रुपया लगातार कमजोर होता है, तो इसका असर सीधे आम लोगों और अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।
- पेट्रोल-डीजल और एलपीजी महंगे हो सकते हैं।
- इलेक्ट्रॉनिक्स और अन्य आयातित सामान की कीमतें बढ़ सकती हैं।
- विदेश में पढ़ाई और यात्रा का खर्च बढ़ सकता है।
- कंपनियों की आयात लागत बढ़ने से महंगाई पर दबाव आ सकता है।
हालांकि, आरबीआई के ताजा हस्तक्षेप से फिलहाल रुपये को सहारा मिला है और बाजार को यह संदेश गया है कि केंद्रीय बैंक जरूरत पड़ने पर मुद्रा की अत्यधिक कमजोरी को रोकने के लिए सक्रिय रहेगा।
आगे क्या रहेगी नजर?
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में रुपये की चाल कई वैश्विक कारकों पर निर्भर करेगी। इनमें कच्चे तेल की कीमतें, अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दर नीति, विदेशी निवेशकों की गतिविधियां और डॉलर इंडेक्स प्रमुख रहेंगे। यदि वैश्विक दबाव बना रहता है तो आरबीआई आगे भी समय-समय पर विदेशी मुद्रा बाजार में हस्तक्षेप कर सकता है।


